
तेज प्रताप के घर बड़ी चोरी: ₹20 लाख कैश और 4 आईफोन गायब
बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के पटना स्थित सरकारी आवास में एक बड़ी चोरी की वारदात सामने आई है। अलमारी में रखे करीब ₹20 लाख कैश के साथ 4 आईफोन 17 प्रो मैक्स, मैकबुक, आईपैड और सोने के जेवरात गायब हैं। इस हाई-प्रोफाइल चोरी का आरोप तेज प्रताप के निजी सहायक (PA) मोतीलाल राय पर लगा है।
खबर का निचोड़ (Summary)
बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के पटना स्थित सरकारी आवास में एक बड़ी चोरी की वारदात सामने आई है। अलमारी में रखे करीब ₹20 लाख कैश के साथ 4 आईफोन 17 प्रो मैक्स, मैकबुक, आईपैड और सोने के जेवरात गायब हैं। इस हाई-प्रोफाइल चोरी का आरोप तेज प्रताप के निजी सहायक (PA) मोतीलाल राय पर लगा है।
हाई-प्रोफाइल बंगले में बड़ी सेंधमारी
बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में से एक और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के पटना स्थित सरकारी आवास से सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए लाखों की चोरी को अंजाम दिया गया है। राजधानी के पॉश इलाके में स्थित इस हाई-प्रोफाइल बंगले में हुई इस घटना ने प्रशासनिक महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में खलबली मचा दी है। चोरों ने किसी बाहरी दीवार को नहीं फांदा, बल्कि सीधे उस अलमारी तक पहुंच बनाई जहां कीमती सामान और नकदी रखी हुई थी।
₹20 लाख कैश, आईफोन और सोने पर हाथ साफ
चोरी गए सामानों की लिस्ट काफी लंबी और चौंकाने वाली है। मिली जानकारी के मुताबिक, तेज प्रताप यादव के आवास से करीब ₹20,000,000 (20 लाख रुपये) की भारी-भरकम नकदी गायब है। इसके अलावा चोरों ने आधुनिक गैजेट्स और कीमती गहनों पर भी हाथ साफ किया है। गायब होने वाले सामानों में 4 आईफोन 17 प्रो मैक्स, 1 मैकबुक और 1 आईपैड जैसे महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। गहनों की बात करें तो अलमारी में रखी 2 तोला सोने की चेन और 1 सोने की अंगूठी भी गायब है।
डेटा चोरी होने का भी खतरा
इस पूरी वारदात में जो सबसे ज्यादा चिंताजनक बात है, वो है 2 हार्ड डिस्क का गायब होना। डिजिटल दौर में हार्ड डिस्क के भीतर बेहद संवेदनशील और निजी जानकारियां हो सकती हैं। एक पूर्व मंत्री और रसूखदार राजनीतिक परिवार के सदस्य के घर से हार्ड डिस्क का चोरी होना महकमे के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस डेटा का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है, यही वजह है कि जांच एजेंसियां इस बिंदु को बेहद गंभीरता से देख रही हैं।
अपनों पर ही लगा दगाबाजी का आरोप
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब शक की सुई किसी बाहरी अपराधी पर नहीं, बल्कि घर के ही एक बेहद करीबी शख्स पर जाकर टिकी। तेज प्रताप यादव के निजी सहायक (PA) मोतीलाल राय पर इस पूरी चोरी को अंजाम देने का सीधा आरोप लगा है। मोतीलाल राय काफी समय से तेज प्रताप के साथ जुड़े हुए थे और उन्हें घर की हर छोटी-बड़ी व्यवस्था की जानकारी थी। पुलिस अब इस मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है और आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बेहद करीबी बनकर ही घर में दाखिल होता है।

NEET परीक्षा में 'मुन्ना भाई' स्टाइल: असली छात्रों की जगह परीक्षा देते 9 सॉल्वर गिरफ्तार
बिहार के लखीसराय में NEET-UG री-एग्ज़ाम के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जहां असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे 9 फर्जी कैंडिडेट (सॉल्वर) रंगे हाथों पकड़े गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस रैकेट से जुड़े 5 मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मियों सहित कुल 24 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
बिहार के लखीसराय में NEET-UG री-एग्ज़ाम के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जहां असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे 9 फर्जी कैंडिडेट (सॉल्वर) रंगे हाथों पकड़े गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस रैकेट से जुड़े 5 मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मियों सहित कुल 24 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
परीक्षा केंद्र पर 'मुन्ना भाई' पार्ट-3: ऐसे हुआ पर्दाफाश
बिहार का लखीसराय जिला रविवार को उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब NEET-UG की दोबारा आयोजित हो रही परीक्षा के दौरान सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने हाई-टेक मुन्ना भाइयों को दबोच लिया। यह पूरा घटनाक्रम किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा नजर आता है। परीक्षा केंद्रों पर जब परीक्षार्थियों के बायोमेट्रिक मिलान की प्रक्रिया शुरू हुई, तो तकनीक और मुस्तैद अधिकारियों ने इन जालसाजों की चालाकी को पकड़ लिया।
जैसे ही फिंगरप्रिंट और चेहरे का डेटा असली आवेदक से मेल नहीं खाया, केंद्र पर हड़कंप मच गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर यह साफ हो गया कि कमरे में बैठे छात्र वो नहीं हैं, जिन्होंने फॉर्म भरा था, बल्कि वे किसी और के भविष्य का सौदा करने आए भाड़े के 'सॉल्वर' थे।
मेडिकल स्टूडेंट से लेकर बायोमेट्रिक कर्मी तक: बड़ा नेक्सस बेनकाब
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने अब तक कुल 24 शातिरों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। जांच में जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला है। पकड़े गए आरोपियों में 5 ऐसे छात्र शामिल हैं जो खुद विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। चंद रुपयों के लालच और मोटे कमीशन के चक्कर में इन मेधावी छात्रों ने दूसरों की जगह परीक्षा देने का जोखिम उठाया।
इतना ही नहीं, परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए जिस बायोमेट्रिक कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी, उसके कर्मचारी भी इस काली कमाई के खेल में शामिल पाए गए। इन कर्मियों की मिलीभगत से ही फर्जी छात्रों को सिस्टम में एंट्री दिलाने की नाकाम कोशिश की जा रही थी।
जांच का दायरा बढ़ा: खंगाले जा रहे हैं तार
लखीसराय पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कुंडली खंगालने में जुट गई है। शुरुआती तफ्तीश से संकेत मिले हैं कि यह केवल एक जिले तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि प्रति कैंडिडेट कितने लाख रुपये की डील हुई थी और इस रैकेट का मुख्य सरगना कौन है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और कॉल डिटेल्स को स्कैन किया जा रहा है ताकि इस सिंडिकेट के बाकी चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके। इस बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और उस पर मंडराते खतरों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

लखनऊ अग्निकांड: 10 साल पहले ही तय थी बर्बादी की इबारत!
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस अवैध इमारत में यह हादसा हुआ, उसे साल 2016 में ही ध्वस्त करने का सरकारी आदेश जारी हो चुका था। महज दो महीने के भीतर इस आदेश को रहस्यमयी ढंग से निरस्त कर दिया गया, जिसने आज इस बड़े हादसे की नींव रख दी।
खबर का निचोड़
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस अवैध इमारत में यह हादसा हुआ, उसे साल 2016 में ही ध्वस्त करने का सरकारी आदेश जारी हो चुका था। महज दो महीने के भीतर इस आदेश को रहस्यमयी ढंग से निरस्त कर दिया गया, जिसने आज इस बड़े हादसे की नींव रख दी।
मौत की इमारत: जहां नियमों को ताक पर रखकर लिखी गई बर्बादी
लखनऊ की यह बहुमंजिला इमारत आज चीख-पुकार और मातम का मरघट बन चुकी है। लेकिन इस तबाही की शुरुआत आज नहीं, बल्कि पूरे एक दशक पहले हुई थी। जब इस सरकारी फाइल पर धूल जम रही थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि भ्रष्टाचार और अनदेखी की यह इमारत एक दिन 15 लोगों की चिता बन जाएगी। आग की लपटों ने न सिर्फ मासूमों की जान ली, बल्कि सिस्टम के उस खोखलेपन को भी बेनकाब कर दिया जो चंद रुपयों और रसूख के आगे घुटने टेक देता है।
कागजों पर घर, जमीन पर 'मौत का कुआं'
इस पूरी त्रासदी की सबसे डरावनी कड़ाई इसकी बनावट और इसके इस्तेमाल से जुड़ी है। इस बहुमंजिला इमारत का नक्शा पास कराते समय इसे एक 'रिहायशी इमारत' (Residential Building) के तौर पर दिखाया गया था। नियम कहते हैं कि रिहायशी इलाकों और इमारतों के सुरक्षा मानक पूरी तरह अलग होते हैं। लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इस इमारत के भीतर एक कमर्शियल कोचिंग सेंटर का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा था। तंग गलियां, वेंटिलेशन की कमी और सैकड़ों बच्चों की मौजूदगी ने इस जगह को एक टाइम बम में तब्दील कर दिया था, जो आखिरकार ब्लास्ट हो गया।
2016 का वह आदेश और सिस्टम का यू-टर्न
मामला सिर्फ एक अवैध कोचिंग चलने भर का नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे प्रशासनिक मिलीभगत का जीता-जागता सबूत है। साल 2016 में इस इमारत के अवैध निर्माण को लेकर बाकायदा जांच हुई थी और इसे पूरी तरह ध्वस्त (Demolish) करने का कड़ा सरकारी आदेश भी जारी किया गया था। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह भारतीय प्रशासनिक लूपहोल की बानगी है। महज दो महीने के भीतर ऐसा क्या बदला कि मौत की इस इमारत को ढहाने का आदेश ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और उसे निरस्त कर दिया गया? यह सवाल आज 15 परिवारों के उजड़े हुए चराग पूछ रहे हैं।
अनदेखी की कीमत: 15 जिंदगियां खाक
जब यह आग भड़की, तो बच्चों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। रिहायशी नक्शे पर बनी इस व्यावसायिक इमारत में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सिर्फ कागजों तक सीमित थीं। अगर 10 साल पहले प्रशासन अपने ही दिए गए ध्वस्तीकरण के आदेश पर अड़ा रहता और इस अवैध निर्माण को मलबे में तब्दील कर देता, तो आज लखनऊ की सड़कों पर एम्बुलेंस के सायरन नहीं गूंज रहे होते और न ही अपनों को खोने का यह अंतहीन दर्द होता। सरकारी फाइलों का वह एक निरस्त आदेश, आज 15 परिवारों के लिए जिंदगी का अंत साबित हुआ है।

एनकाउंटर से पहले भरत तिवारी की आखिरी इच्छा, वीडियो वायरल
भोजपुर पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपराधी भरत तिवारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में भरत तिवारी मौत से पहले अपनी आखिरी इच्छा जाहिर करते हुए अपने शरीर को मेडिकल छात्रों और इंडियन आर्मी के शोध के लिए दान करने की बात कह रहा है।
भोजपुर पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपराधी भरत तिवारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में भरत तिवारी मौत से पहले अपनी आखिरी इच्छा जाहिर करते हुए अपने शरीर को मेडिकल छात्रों और इंडियन आर्मी के शोध के लिए दान करने की बात कह रहा है।
मौत से पहले की वो आखिरी ख्वाहिश
बिहार के भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान ढेर हुए भरत तिवारी की मौत के बाद एक नया मोड़ सामने आया है। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर भरत तिवारी का एक पुराना वीडियो जबरदस्त तरीके से शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में वो बातें कही गई हैं, जिसने इस पूरे मामले को एक नई चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। एनकाउंटर के बाद इस तरह के वीडियो का सामने आना इलाके में कौतूहल का विषय बन गया है।
'इंडियन आर्मी को मिले पहली प्राथमिकता'
वायरल हो रहे इस वीडियो में भरत तिवारी बेहद गंभीर मुद्रा में अपनी आखिरी वसीयत या इच्छा बयां करता नजर आ रहा है। वह कैमरे के सामने साफ तौर पर कह रहा है कि उसके जाने के बाद उसके शरीर का इस्तेमाल समाज और देश के काम आना चाहिए। वीडियो में भरत तिवारी ने कहा, "मेरी इच्छा है कि मेरे बलिदान के बाद मेरे शरीर को मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए दान कर दिया जाए।"
हैरान करने वाली बात यह है कि उसने इस दान के लिए प्राथमिकताओं को भी तय किया था। वीडियो के अनुसार, भरत तिवारी ने आगे कहा कि इस देहदान में पहली प्राथमिकता इंडियन आर्मी को दी जानी चाहिए, ताकि उनके मेडिकल विंग को शोध में मदद मिल सके। इसके बाद उसने दूसरी प्राथमिकता के तौर पर स्थानीय प्रशासन और आम मेडिकल कॉलेजों का नाम लिया।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस वीडियो के वायरल होने के बाद इंटरनेट पर यूजर्स के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां भरत तिवारी पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और वह पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया, वहीं दूसरी तरफ वीडियो में दिख रही उसकी इस राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा वाली सोच ने लोगों को हैरान कर दिया है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले किसी शख्स की ऐसी भी सोच हो सकती है।
प्रशासन के सामने नई चुनौती
इस वीडियो के सामने आने के बाद अब स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सामने भी एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है। एनकाउंटर की कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंपा जाता है। ऐसे में भरत तिवारी की इस वायरल इच्छा पर कानूनन क्या कदम उठाए जा सकते हैं, यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा। फिलहाल, यह वीडियो भोजपुर और आसपास के जिलों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

ट्रंप से विवाद के बीच समर्थकों ने मेलोनी पर लुटाया प्यार, गालों पर किया 'किस'
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ जारी तनातनी के बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का उनके देश में जोरदार स्वागत हुआ है। समर्थकों ने मेलोनी को गले लगाया और उनके गालों पर किस करके अपना समर्थन जताया। यह वाकया ट्रंप के उस दावे के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि G7 समिट में मेलोनी ने उनके साथ फोटो के लिए 'भीख' मांगी थी।
खबर का निचोड़:
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ जारी तनातनी के बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का उनके देश में जोरदार स्वागत हुआ है। समर्थकों ने मेलोनी को गले लगाया और उनके गालों पर किस करके अपना समर्थन जताया। यह वाकया ट्रंप के उस दावे के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि G7 समिट में मेलोनी ने उनके साथ फोटो के लिए 'भीख' मांगी थी।
मेलोनी के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानों के तीर चलना आम बात है, लेकिन जब बात देश के स्वाभिमान पर आती है, तो जनता अपने नेता के पीछे चट्टान की तरह खड़ी हो जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा इटली में देखने को मिला, जहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का उनके समर्थकों ने भावुक और गर्मजोशी से भरा स्वागत किया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस वीडियो में मेलोनी के चाहने वाले उन्हें घेरकर खड़े हैं, उन्हें गले लगा रहे हैं और उनके गालों पर किस करके हौसला बढ़ा रहे हैं। समर्थकों का यह अंदाज साफ तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को एक कड़ा संदेश है।
ट्रंप के 'भीख' वाले दावे से भड़का विवाद
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक विवादित बयान से हुई। ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि G7 समिट के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए बेताब थीं। ट्रंप के शब्दों में कहें तो, मेलोनी ने उनके साथ फोटो के लिए एक तरह से 'भीख' मांगी थी। ट्रंप का यह बयान सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैल गई और इसे इटली की प्रधानमंत्री के अपमान के तौर पर देखा जाने लगा। इटली की जनता और मेलोनी के समर्थकों को ट्रंप का यह अहंकार भरा रवैया रास नहीं आया।
वायरल वीडियो में दिखा समर्थकों का जोश
ट्रंप के इस तीखे और अपमानजनक दावे के बाद उम्मीद की जा रही थी कि मेलोनी बैकफुट पर आ सकती हैं, लेकिन जमीन पर इसका बिल्कुल उलटा असर देखने को मिला। मेलोनी जब अपने देश में जनता के बीच पहुंचीं, तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मेलोनी मुस्कुराते हुए लोगों से मिल रही हैं। इसी दौरान समर्थक बेहद भावुक हो जाते हैं और प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना उन्हें गले लगा लेते हैं। कई महिला और पुरुष समर्थकों ने मेलोनी के गालों पर चूमकर यह जताया कि पूरी जनता इस विवाद में उनके साथ खड़ी है। मेलोनी के चेहरे का आत्मविश्वास बता रहा था कि उन्हें इन विवादों से कोई फर्क नहीं पड़ता।
कूटनीतिक गलियारों में गरमाया माहौल
इस घटना ने न केवल सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी हैं, बल्कि कूटनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। ट्रंप और मेलोनी दोनों ही अपने-अपने देशों के कद्दावर दक्षिणपंथी नेता माने जाते हैं, लेकिन इस ताजा विवाद ने दोनों के रिश्तों में कड़वाहट ला दी है। मेलोनी के समर्थकों का यह कदम दिखाता है कि वे ट्रंप के एकतरफा दावों को खारिज करते हैं और अपनी प्रधानमंत्री के वैश्विक कद को कम नहीं होने देना चाहते। फिलहाल यह वायरल वीडियो इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
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