
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी: 'विस्तार' योजना से चमकेगी देश की सांख्यिकी व्यवस्था
भारत सरकार ने आधिकारिक आंकड़ों को आधुनिक और भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए 'विस्तार' (VISTAR) योजना को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलकरण के जरिए देश की सांख्यिकीय वास्तुकला को पूरी तरह बदलना है।
व्यापक सांख्यिकीय संचालन और इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 16वें वित्त आयोग चक्र के दौरान कुल 59 सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि पहले केवल 43 प्रमुख सर्वेक्षण ही किए जाते थे। इस घटक का मुख्य जोर सांख्यिकीय प्रक्रियाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण और नियमित कार्यप्रवाह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व मशीन लर्निंग (ML) को शामिल करना है। इसके तहत 'हेडलाइन इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन' और 'इंडेक्स ऑफ अनइनकॉर्पोरेटेड सेक्टर एंटरप्राइजेज' जैसे नए मेट्रिक्स भी जारी किए जाएंगे।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सांख्यिकीय समर्थन
योजना के दूसरे घटक के तहत केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी सांख्यिकीय क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जिला स्तर और अन्य छोटे क्षेत्रों पर उच्च गुणवत्ता वाला डेटा तैयार करने की क्षमता विकसित करना है। MoSPI प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षणों जैसे PLFS, HCES, ASUSE और जिला स्तरीय GDP व IIP संकलन में राज्यों को तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर सटीक नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
आर्थिक जनगणना और जमीनी स्तर पर डेटा संग्रह
'विस्तार' योजना के तीसरे महत्वपूर्ण घटक के रूप में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से आठवीं 'आर्थिक जनगणना' (Economic Census) का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक के सभी गैर-कृषि प्रतिष्ठानों और कामगारों का विस्तृत व सूक्ष्म डेटा प्राप्त करना है, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

अंतरिक्ष में दो दशक गुजारने वाला नासा का स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी धरती पर लौटा
नासा का प्रसिद्ध नील गेहेरेल्स स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप लगभग 22 वर्षों के ऐतिहासिक कार्यकाल के बाद 4 नवंबर 2026 को धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर गया. इंडोनेशिया के ऊपर इसका अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो गया, जिससे अंतरिक्ष अनुसंधान के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया.
अंतरिक्ष अन्वेषण में बेजोड़ योगदान
मूल रूप से दो साल के मिशन के रूप में डिजाइन किया गया स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी उम्मीद से कहीं अधिक समय तक सक्रिय रहा. अपने तीन अत्याधुनिक उपकरणों—बर्स्ट अलर्ट टेलीस्कोप (BAT), एक्स-रे टेलीस्कोप (XRT), और यूवी/ऑप्टिकल टेलीस्कोप (UVOT)—की मदद से इस वेधशाला ने गामा-रे विस्फोटों के रहस्यों को गहराई से टटोला. अपने पूरे कार्यकाल के दौरान इसने सैकड़ों सुपरनोवा विस्फोटों, ब्लैक होल्स और अंतरिक्षीय पिंडों का अध्ययन किया, जिससे लगभग 7,000 शोध पत्र प्रकाशित हुए जो खगोल विज्ञान की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हुए हैं।
एक असफल बचाव अभियान और अंतिम विदाई
स्विफ्ट को सुरक्षित रखने के लिए नासा ने निजी अंतरिक्ष कंपनी 'कैटलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज' के साथ मिलकर एक अनूठा रोबोटिक बचाव मिशन भी शुरू किया था. जुलाई 2026 में 'लिंक' (LINK) नामक अंतरिक्ष यान को इसे सुरक्षित कक्षा में धकेलने के लिए भेजा गया था, लेकिन तकनीकी खराबी और अनियंत्रित स्पिन के कारण वह अभियान असफल हो गया. अंततः अक्टूबर के अंत में वैज्ञानिकों ने इस उपग्रह को पूरी तरह से बंद (Kill-switch) कर दिया. अमेरिकी अंतरिक्ष बल और नासा इसकी निगरानी कर रहे थे, जिसके तहत इसके अधिकांश घनत्व वाले हिस्से वायुमंडल के घर्षण में नष्ट हो गए और संभावित अवशेष समुद्र में समा गए.

पूर्वोत्तर भारत में मिली नई वनस्पति प्रजाति: 'डिसपोरम कामख्यासिंसे'
पूर्वोत्तर भारत की जैव विविधता में एक नया कीर्तिमान जुड़ गया है। शोधकर्ताओं ने असम और मेघालय के जंगलों में 'डिसपोरम कामख्यासिंसे' नामक एक नई फूलदार पौधे की प्रजाति की खोज की है। लगभग छह फीट तक लंबा होने वाला यह पौधा अपने सितारे जैसे सफेद फूलों के लिए जाना जाता है।
प्राकृतिक आवास और भौगोलिक फैलाव
इस नई प्रजाति को मुख्यतः तीन स्थानों पर दर्ज किया गया है—असम के कामरूप जिले में स्थित गर्भंगा आरक्षित वन, डिमा हसाओ का लाइसॉन्ग क्षेत्र और मेघालय का बारापानी इलाका। यह बहुवर्षीय शाकीय पौधा (Perennial herb) 200 से 1,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अर्ध-सदाबहार जंगलों में पाया जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मुख्य रूप से बांस के जंगलों के नीचे चट्टानी ढलानों पर अन्य पौधों के साथ विकसित होता है।
कामरूप और खासी पहाड़ियों का संगम: नामकरण
इस पौधे का वैज्ञानिक नाम 'डिसपोरम कामख्यासिंसे' असम के प्राचीन नाम 'कामरूप' और मेघालय की प्रसिद्ध 'खासी पहाड़ियों' के भौगोलिक संदर्भों को जोड़कर रखा गया है। यह नाम उन क्षेत्रों का सम्मान करता है जहां से इस प्रजाति के पहले नमूने एकत्र किए गए थे। कोलचिकेसी (Colchicaceae) परिवार से ताल्लुक रखने वाला यह पौधा अपनी अनूठी संरचनात्मक विशेषताओं के कारण इस वंश के अन्य पौधों से काफी अलग पहचान बनाता है।
अनोखी बनावट और शारीरिक विशेषताएं
तुलनात्मक रूप से यह प्रजाति अपने निकटतम संबंधी 'डिसपोरम कैल्केराटम' की तुलना में काफी विशाल है। जहां आम तौर पर इस वंश के पौधे 100 सेमी तक बढ़ते हैं, वहीं डिसपोरम कामख्यासिंसे की लंबाई लगभग 180 सेमी (6 फीट) तक पहुंच सकती है। इसकी पत्तियां गहरी हरी, चमकदार और सात प्रमुख समानांतर शिराओं वाली होती हैं। जून से जुलाई के बीच इसमें सितारे के आकार के खूबसूरत सफेद फूल खिलते हैं, जिसके बाद जुलाई से अगस्त के दौरान इसमें फल आने की प्रक्रिया होती है।

छत्तीसगढ़ के गोमर्डा अभ्यारण्य में 5 दशक बाद लौटेगा काला हिरण
छत्तीसगढ़ सरकार ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गोमर्डा वन्यजीव अभ्यारण्य में काले हिरणों (ब्लैकबक) को पुनर्वसित करने का फैसला लिया है। लगभग पाँच दशकों के लंबे इंतजार के बाद यह खूबसूरत प्रजाति एक बार फिर Raigarh और सारंगढ़ के जंगलों की शान बढ़ाती नजर आएगी।
गोमर्डा अभ्यारण्य का समृद्ध प्राकृतिक आधार
वर्ष 1975 में स्थापित और गोमर्डा गांव के नाम पर नामित यह अभ्यारण्य लगभग 278 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां की जमीन पथरीली और चट्टानी होने के कारण खेती के अनुकूल नहीं है, लेकिन यही प्राकृतिक बनावट वन्य जीवों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षित पनाहगाह तैयार करती है। अभ्यारण्य के कोर क्षेत्र से होकर बहने वाली लात और मनाई नदियां भीषण गर्मी के दिनों में भी वन्यजीवों के लिए पानी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करती हैं। यहां के उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती जंगलों में साल, बीजा, तेंदू और बांस की प्रचुरता पाई जाती है।
घास के मैदानों का सम्राट: कृष्णमृग
वैज्ञानिक रूप से 'एंटीलोप सर्विकुप्रा' (Antilope cervicapra) के नाम से पहचाना जाने वाला काला हिरण मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप की मूल प्रजाति है। दुनिया की लगभग 90 प्रतिशत ब्लैकबक आबादी भारत के खुले घास के मैदानों, झाड़ियों और शुष्क क्षेत्रों में निवास करती है। नर काले हिरण अपने गहरे रंग के कोट और पेचदार, घुमावदार सींगों की वजह से बेहद आकर्षक दिखते हैं, जबकि मादाएं और शावक हल्के भूरे रंग के होते हैं। अपनी असाधारण दृष्टि और तीव्र रफ्तार के बल पर यह प्राणी किसी भी शिकारी को चकमा देने में माहिर माना जाता है।
पारिस्थितिक संतुलन और संरक्षण की ओर कदम
बाघ, तेंदुए, गौर, स्लॉथ बियर और दुर्लभ पक्षियों की विविधता से समृद्ध गोमर्डा में काले हिरणों के आगमन से खाद्य श्रृंखला और मजबूत होगी। पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश के इस राज्य पशु को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में 'कम चिंताजनक' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। 5 से 50 के समूह में रहने वाले इन सामाजिक प्राणियों का पुनर्वास गोमर्डा के खुले घास के मैदानों को एक बार फिर उनके ऐतिहासिक प्राकृतिक स्वरूप में वापस लाएगा।

33 साल बाद जंतर-मंतर से हटी बैरिकेडिंग, रास्ता खुला
दिल्ली पुलिस ने 33 साल तक आंदोलनों का केंद्र रहे जंतर-मंतर से बैरिकेडिंग हटाकर सड़क को आम जनता और वाहनों के लिए खोल दिया है। जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है, साथ ही वहां तैनात पैरामिलिट्री, QRT और एंटी-राइट व्हीकल को भी हटाया जा रहा है।
सुरक्षा बलों की तैनाती हटाई गई
इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले के तहत जंतर-मंतर से सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पैरामिलिट्री फोर्स, क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और एंटी-राइट व्हीकल की तैनाती को भी हटाया जा रहा है। पिछले तीन दशकों से अधिक समय से यह इलाका लगातार प्रदर्शनों और धरनास्थलों के कारण घिरा रहता था, जिससे यातायात प्रभावित होता था।
धरना स्थल की सूची से बाहर
जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा यह कदम उठाया गया है। इस रास्ते के खुलने से अब रोजाना आवाजाही करने वाले आम नागरिकों और वाहन चालकों को भारी राहत मिलेगी तथा क्षेत्र का यातायात सुगम हो सकेगा।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App