
NTA AISSEE 2027: सैनिक स्कूलों में प्रवेश के लिए अधिसूचना जारी
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने ऑल इंडिया सैनिक स्कूल्स एंट्रेंस एग्जाम (AISSEE) 2027 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 3 नवंबर 2026 से शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 2 दिसंबर 2026 है। यह परीक्षा देश भर के सैनिक स्कूलों में कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश के लिए आयोजित की जा रही है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने देश के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूलों में दाखिले की राह देख रहे युवाओं के लिए अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा (AISSEE) 2027 का विस्तृत नोटिफिकेशन आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। इस महत्वपूर्ण परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 3 नवंबर 2026 से प्रारंभ हो चुकी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 2 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, परीक्षा शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि भी 2 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा से चूक जाता है, तो वह 3 दिसंबर से 6 दिसंबर 2026 के बीच विलंब शुल्क के साथ आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकता है। आवेदन पत्रों में सुधार के लिए करेक्शन विंडो 7 से 9 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी। घोषित शेड्यूल के मुताबिक, यह प्रवेश परीक्षा 31 जनवरी 2027 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा शहर की जानकारी 11 जनवरी 2027 को उपलब्ध होगी और प्रवेश पत्र 25 जनवरी 2027 को डाउनलोड किए जा सकेंगे।
आयु सीमा और पात्रता के मानदंड
सैनिक स्कूलों में कक्षा 6 और कक्षा 9 के लिए प्रवेश के वास्ते आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता के कड़े मानक तय किए गए हैं। कक्षा 6 में प्रवेश के लिए छात्र की न्यूनतम आयु 10 वर्ष और अधिकतम आयु 12 वर्ष होनी चाहिए। इसके लिए छात्र का जन्म 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2017 के बीच होना अनिवार्य है तथा उसे पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए। वहीं, कक्षा 9 में प्रवेश पाने वाले छात्रों की न्यूनतम आयु 13 वर्ष और अधिकतम आयु 15 वर्ष तय की गई है। इस श्रेणी के लिए छात्र का जन्म 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2014 के बीच होना चाहिए और उसका आठवीं कक्षा पास होना आवश्यक है। आयु की गणना 31 मार्च 2027 के आधार पर की जाएगी।
आवेदन शुल्क और प्रक्रिया
इस परीक्षा के लिए आवेदन शुल्क श्रेणी के आधार पर निर्धारित किया गया है। जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 850 रुपये है। वहीं, एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 700 रुपये शुल्क देना होगा। तय समय के बाद लेट फीस के रूप में 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देय होगा। शुल्क का भुगतान केवल डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई माध्यमों के जरिए ही किया जा सकता है।

डीएसएसएसबी भर्ती 2026: 1260 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी
दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) ने विभिन्न विभागों में जूनियर इंजीनियर, मल्टी-टास्किंग स्टाफ और अन्य पदों पर बंपर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस अभियान के तहत कुल 1260 रिक्त पदों को भरा जाएगा। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 12 नवंबर 2026 से 11 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
रिक्तियों का विवरण और कुल पद
इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1260 पदों को भरा जाना है। बोर्ड द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल), मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS), एमटीएस - आया (महिला) और एमटीएस (जनरल ड्यूटी) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। विभिन्न विभागों में इन पदों के लिए युवाओं के पास अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन करने का सुनहरा अवसर उपलब्ध है।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया
आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को निर्धारित तिथियों का विशेष ध्यान रखना होगा। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 12 नवंबर 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवार 11 दिसंबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना आवेदन सफलतापूर्वक जमा कर सकते हैं। तय की गई अंतिम तिथि के बाद किसी भी परिस्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए समय रहते प्रक्रिया पूरी कर लें।
आयु सीमा और पात्रता मानदंड
आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा तय की गई है। इस भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 27 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 01 जून 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी।
आवेदन से पहले जरूरी निर्देश
सभी उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन फॉर्म भरने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा नोटिफिकेशन ध्यानपूर्वक पढ़ लें। शैक्षणिक योग्यता, आवेदन शुल्क और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी के बाद ही अपना फॉर्म सबमिट करें ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके।

मालाबार 2026 नौसेना अभ्यास में भाग लेने जापान पहुंचा INS सह्याद्री
बहुपक्षीय नौसैन्य अभ्यास 'मालाबार 2026' में हिस्सा लेने के लिए भारतीय नौसेना का स्वदेशी युद्धपोत 'आईएनएस सह्याद्री' जापान के योकोसुका नेवल बेस पहुंच गया है। भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के बीच यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आपसी तालमेल को मजबूत करेगा।
क्या है मालाबार अभ्यास और भागीदार देश
मालाबार 2026 एक प्रमुख बहुपक्षीय नौसैन्य अभ्यास है, जिसमें चार मुख्य देश—भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया भाग ले रहे हैं। इस अभ्यास का प्राथमिक उद्देश्य भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय, अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को मजबूत करना और समुद्री विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना है। यह आयोजन 'मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक' के साझा दृष्टिकोण को सशक्त बनाता है।
अभ्यास का इतिहास और विस्तार
मालाबार अभ्यास की शुरुआत वर्ष 1992 में भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास के रूप में हुई थी। वर्ष 2007 में बंगाल की खाड़ी में पहली बार इसका विस्तृत आयोजन किया गया। इसके बाद वर्ष 2015 में जापान को इसमें स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया, जिससे यह त्रिपक्षीय रूप में बदल गया। वर्ष 2020 में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के शामिल होने से यह चार देशों (क्वाड समूह) का एक शक्तिशाली नौसैन्य अभ्यास बन गया। यह अभ्यास प्रतिवर्ष बारी-बारी से हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में आयोजित किया जाता है।
अभ्यास के दो प्रमुख चरण
मालाबार 2026 का आयोजन दो मुख्य चरणों में किया जा रहा है। पहला 'हार्बर फेज' (Harbour Phase) है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के नौसैनिक अधिकारियों के बीच पेशेवर बातचीत, रणनीतिक सत्र और समन्वित योजनाएं शामिल हैं। इसके बाद 'सी फेज' (Sea Phase) आयोजित किया जाएगा, जिसमें आईएनएस सह्याद्री और अन्य तीनों देशों की नौसैनिक इकाइयां समुद्र में जटिल युद्ध अभियानों और लाइव-फायर ड्रिल्स को एक साथ अंजाम देंगी।
रणनीतिक महत्व और महासागर विजन
आईएनएस सह्याद्री की इस भागीदारी से भारत की समुद्री साझेदारी को और अधिक मजबूती मिलेगी। यह तैनाती भारत सरकार के विजन 'महासागर' (MAHASAGAR - Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के पूरी तरह अनुकूल है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के 'गैया' मिशन ने खोजा दुर्लभ डबल स्टार क्लस्टर
भारतीय खगोलविदों के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के 'गैया' मिशन के डेटा का उपयोग करके स्टार क्लस्टर 'UBC 63' को एक डबल क्लस्टर सिस्टम के रूप में फिर से परिभाषित किया है। अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में यह एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
गैया मिशन और इसका उद्देश्य
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा साल 2013 में लॉन्च किए गए 'गैया' मिशन का मूल नाम 'ग्लोबल एयरोमेट्रिक इंटरफेरोमीटर फॉर एस्ट्रोफिज़िक्स' है। इसे मुख्य रूप से हमारी आकाशगंगा (Milky Way) का सबसे सटीक और विस्तृत 3D नक्शा तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर 'लैग्रेंज पॉइंट 2' (L2) पर स्थापित किया गया है।
वैज्ञानिक उपकरण और तकनीक
गैया अंतरिक्ष यान में दोहरी दूरबीनें (Twin Telescopes) और लगभग 1 बिलियन पिक्सेल वाला एक शक्तिशाली डिजिटल कैमरा लगा है, जो अंतरिक्ष में भेजा गया अब तक का सबसे बड़ा कैमरा है। इसमें तीन मुख्य उपकरण शामिल हैं: खगोलीय पिंडों की सटीक स्थिति मापने वाला एस्टरोमीटर, तारों की चमक व तापमान मापने वाला फोटोमीटर, और उनकी रासायनिक संरचना व गति की पहचान करने वाला स्पेक्ट्रोमीटर।
क्या है UBC 63?
UBC 63 पृथ्वी से लगभग 4,892 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक कम घनी आबादी वाला और गुरुत्वाकर्षण से शिथिल रूप से बंधा हुआ 'गैलेक्टिक ओपन क्लस्टर' है। पहले इसे एक एकल तारा समूह (Single star cluster) माना जाता था, लेकिन गैया मिशन के आधुनिक डेटा और भारतीय खगोलविदों के विश्लेषण से अब यह खुलासा हुआ है कि यह वास्तव में दो अलग-अलग और विशिष्ट तारा समूहों से मिलकर बना एक डबल क्लस्टर सिस्टम है।

परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश: AERB का सुरक्षा से समझौता न करने का भरोसा
परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (AERB) के अध्यक्ष ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी भागीदारी के बावजूद सुरक्षा और विनियामक मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 1983 में स्थापित AERB भारत में परमाणु सुरक्षा की शीर्ष नियामक संस्था है।
AERB का गठन और विनियामक अधिकार
परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (AERB) भारत में परमाणु और विकिरण सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली शीर्ष संस्था है। इसका गठन 15 नवंबर 1983 को परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया गया था। AERB के अधिकार परमाणु ऊर्जा अधिनियम और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत बनाए गए नियमों से प्राप्त होते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु ऊर्जा के उपयोग से जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण को कोई खतरा न हो।
संगठन और प्रशासनिक संरचना
AERB का मुख्यालय मुंबई में स्थित है। बोर्ड में कुल छह सदस्य होते हैं, जिनमें अध्यक्ष सहित दो पूर्णकालिक सदस्य शामिल हैं। परिषद परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) को अपनी रिपोर्ट सौंपती है, जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है। क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी के लिए कोलकाता, चेन्नई और नई दिल्ली में क्षेत्रीय विनियामक केंद्र (RRCs) कार्यरत हैं, जबकि कलपक्कम में सुरक्षा अनुसंधान संस्थान (SRI) स्थित है।
प्रमुख कार्य और जिम्मेदारियां
AERB परमाणु और विकिरण सुविधाओं के लिए सुरक्षा नीतियां, कोड और मानक तैयार करता है। यह संयंत्रों की स्थापना से लेकर उनके चालू होने और विघटन (Decommissioning) तक के सभी चरणों के लिए लाइसेंस और स्वीकृतियां प्रदान करता है। इसके अलावा, संस्था विकिरण जोखिम की सीमा तय करने, आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा करने और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को निर्धारित करने का कार्य भी करती है।
निजी क्षेत्र का प्रवेश और सख्त निगरानी
परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी के नए प्रस्तावों के बावजूद, AERB विनियामक समीक्षाओं, नियमित सुरक्षा निरीक्षणों और सख्त प्रवर्तन प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षा मानकों को लागू करना जारी रखेगा। बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि निजी ऑपरेटरों द्वारा स्थापित और संचालित सभी इकाइयां स्थापित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा मानदंडों का पूरी तरह से पालन करें।
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