
AIIMS में 12वीं पास युवाओं के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर की शानदार नौकरी
ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड ने 12वीं पास युवाओं के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर के 23 पदों पर भर्ती निकाली है. चयनित उम्मीदवारों की तैनाती एम्स कैपटिम्स, मैदानगढ़ी, नई दिल्ली में होगी. आवेदन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2026 है.
जरूरी योग्यता और पद विवरण
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत डेटा एंट्री ऑपरेटर के कुल 23 पदों पर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे गए हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो इस भर्ती के लिए वे युवा आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा की परीक्षा पास की हो. इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान होना और अंग्रेजी टाइपिंग में 35 शब्द प्रति मिनट की गति होना अनिवार्य किया गया है.
वेतन और चयन प्रक्रिया
चयनित होने वाले उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा. इस पद के लिए चुने गए युवाओं को प्रति माह 26,208 रुपये का मासिक वेतन मिलेगा. चयनित उम्मीदवारों की आधिकारिक तैनाती एम्स सीएपीएफआईएमएस (AIIMS CAPFIMS), मैदानगढ़ी, नई दिल्ली में की जाएगी. यह उन उम्मीदवारों के लिए एक सुनहरा मौका है जो दिल्ली में सरकारी सेक्टर के अंतर्गत काम करने की इच्छा रखते हैं.
आवेदन करने की अंतिम तिथि
इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें. इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है. तय की गई अंतिम तिथि के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा, इसलिए समय रहते प्रक्रिया पूरी करें.

UP PSC ने विभिन्न पदों पर निकाली बंपर भर्तियां
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने असिस्टेंट आर्किटेक्ट प्लानर, स्पोर्ट्स ऑफिसर और प्रोग्रामर ग्रेड-2 के 25 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। योग्य उम्मीदवार 04 नवंबर 2026 से 04 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं。
भर्ती का विवरण और कुल पद
इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 25 रिक्त पदों को भरा जाएगा。 आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, इसमें असिस्टेंट आर्किटेक्ट प्लानर, स्पोर्ट्स ऑफिसर और प्रोग्रामर ग्रेड-2 जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं。 इन पदों पर चयन होने से उम्मीदवारों को अपने संबंधित क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा。
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया
इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 04 नवंबर 2026 से शुरू हो चुकी है。 योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से 04 दिसंबर 2026 तक अपना ऑनलाइन आवेदन सफलताಪૂર્વक जमा कर सकते हैं。 निर्धारित अंतिम तिथि के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा, इसलिए समय रहते अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें。
आयु सीमा और पात्रता मापदंड
आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा का निर्धारण किया गया है。 01 जुलाई 2026 के आधार पर उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए。 आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी。 सभी अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन करने से पहले आधिकारिक विज्ञापन में दी गई शैक्षणिक योग्यता और अन्य शर्तों को अच्छी तरह जांच लें。

डीआरडीओ का बड़ा धमाका: ओडिशा तट से 'प्रलय' मिसाइल का सफल परीक्षण
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से स्वदेशी 'प्रलय' क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल ने लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कृत्रिम लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट कर अपनी क्षमता साबित की।
आरसीआई और स्वदेशी उद्योग का साझा प्रयास
'प्रलय' मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारात (RCI) ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं और भारतीय औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से विकसित किया है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसी प्रमुख रक्षा कंपनियां इसके उत्पादन और सिस्टम एकीकरण में शामिल हैं। यह मिसाइल दुश्मन के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस साइट्स, लॉजिस्टिक्स हब और एयरबेस को तबाह करने में पूरी तरह सक्षम है।
क्वासी-बैलिस्टिक तकनीक और घातक मारक क्षमता
ठोस प्रणोदक (Solid-propellant) रॉकेट मोटर से संचालित होने के कारण इस मिसाइल को लंबे समय तक तुरंत लॉन्च करने की स्थिति में रखा जा सकता है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, जो एक निश्चित और अनुमानित पथ का पालन करती हैं, क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइलें अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ती हैं और उड़ान के दौरान अपनी दिशा और गति बदल सकती हैं। यह खूबी दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों (Air Defence Systems) के लिए इसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन बना देती है।
प्रमुख विशेषताएं और क्षमताएं
स्ट्राइक रेंज और स्पीड: इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक है और यह मैक 6.1 (Mach 6.1) की घातक गति प्राप्त कर सकती है।
पेलोड और मोबाइल लॉन्च: यह 500 से 1,000 किलोग्राम तक के विभिन्न प्रकार के वॉरहेड (Warheads) ले जाने में सक्षम है और इसे मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है।
सटीक निशाना: उन्नत नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम से लैस यह मिसाइल 10 मीटर से कम के 'सर्कुलर एरर प्रोबेबल' (CEP) के साथ लक्ष्य पर सटीक वार करती है।
सामरिक बल और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती
चांदीपुर से हुआ यह सफल परीक्षण भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एक एकीकृत रॉकेट फोर्स (Integrated Rocket Force) के निर्माण और सामरिक अग्रिम मोर्चों को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर है। स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में 'प्रलय' का सफल प्रदर्शन भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता को रेखांकित करता है।

कोरिया युद्धपोत संग आईएनएस सह्याद्रि का संयुक्त अभ्यास संपन्न
भारतीय नौसेना के बहु-उद्देश्यीय स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि ने दक्षिण कोरिया के बुसान तट पर भारत-गणराज्य कोरिया नौसेना द्विपक्षीय अभ्यास में सफलतापूर्वक भाग लिया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और रणनीतिक तालमेल (Interoperability) को मजबूत करना था।
द्विपक्षीय अभ्यास के प्रमुख चरण
इस अभ्यास को दो मुख्य चरणों—हार्बर फेज और सी (समुद्री) फेज—में विभाजित किया गया था।
हार्बर फेज: इसके दौरान दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों और कर्मियों ने पेशेवर चर्चाएं, क्रॉस-डेक विजिट, परिचालन ब्रीफिंग और विषय-विशेषज्ञों के विचार साझा किए।
सी फेज: इस चरण में आईएनएस सह्याद्रि और दक्षिण कोरियाई नौसेना के युद्धपोत 'ROKS मुनमू द ग्रेट' ने मिलकर समन्वित नेविगेशन, हेलीकॉप्टर संचालन और जटिल समुद्री युद्धाभ्यास का सफल प्रदर्शन किया।
प्रोजेक्ट 17 और शिवालिक श्रेणी
आईएनएस सह्याद्रि भारत की 'प्रोजेक्ट 17' (Project 17) के तहत निर्मित शिवालिक श्रेणी (Shivalik Class) का तीसरा और अंतिम मल्टी-रोल गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट है। मुंबई स्थित मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित इस युद्धपोत को 21 जुलाई 2012 को नौसेना में शामिल किया गया था। यह वर्तमान में विशाखापट्टनम में स्थित भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) का एक अभिन्न हिस्सा है। इसके वर्ग के अन्य दो पोत आईएनएस शिवालिक और आईएनएस सतपुड़ा हैं।
आईएनएस सह्याद्रि की प्रमुख विशेषताएं
आकार और गति: 468 फीट लंबा और 55 फीट चौड़ा यह पोत 6,800 टन विस्थापन क्षमता रखता है। दो गैस टर्बाइन और दो डीजल इंजनों की शक्ति से यह 30 समुद्री मील (55 किमी/घंटा से अधिक) की गति हासिल कर सकता है।
घातक हथियार प्रणाली: यह सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस (BrahMos) एंटी-शिप मिसाइल, बराक-1 (Barak-1), श्टिल-1 (Shtil-1) मिसाइलों और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर से लैस है।
सुरक्षा व टोही क्षमताएं: इसमें दुश्मनों की पनडुब्बियों और मिसाइलों को नष्ट करने के लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और टॉरपीडो लगे हैं। साथ ही यह ध्रुव (Dhruv), सी किंग (Sea King) या कामोव (Kamov) जैसे दो हेलीकॉप्टरों को ले जाने में सक्षम है।
यह सफल अभ्यास दर्शाता है कि भारतीय नौसेना वैश्विक स्तर पर अपनी समुद्री क्षमताओं का निरंतर प्रदर्शन कर रही है और अपने मित्र राष्ट्रों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।

नाहरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य: सीमा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को सौंपा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के नाहरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की संशोधित सीमाओं और नक्शे को दी गई चुनौती पर सीधे विचार करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक सीमांकन विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक राजस्थान हाईकोर्ट ही इस मामले और नक्शे की वैधता पर अंतिम फैसला करेगा।
अरावली श्रृंखला में बसा ऐतिहासिक अभ्यारण्य
राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित यह अभ्यारण्य अरावली पर्वतमाला के बीच लगभग 52.40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका नाम 18वीं शताब्दी में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित ऐतिहासिक नाहरगढ़ किले के नाम पर रखा गया है। पारिस्थितिक दृष्टि से यह क्षेत्र रणथंभौर टाइगर रिजर्व जैसे अन्य वन क्षेत्रों से भी जुड़ा हुआ है।
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क
इस अभ्यारण्य के भीतर 720 हेक्टेयर में फैला नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित है। यह पार्क वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन पर केंद्रित है, जहां रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई शेर और स्लोथ बियर जैसे प्रमुख वन्यजीवों को सुरक्षित आवास प्रदान किया गया है।
जैव विविधता से समृद्ध प्राकृतिक आवास
नाहरगढ़ अभ्यारण्य का भू-भाग पहाड़ियों, घाटियों और मौसमी धाराओं से समृद्ध है। यहां मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन और उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन पाए जाते हैं, जिनमें धोक, बबूल, खेजड़ी और बेर के पेड़ प्रमुख हैं। वन्यजीवों में रॉयल बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ, चिंकारा, भारतीय भेड़िया, कैरकल और स्लोथ बियर शामिल हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है, जहां मोर, उल्लू, बाज, सारस क्रेन और गोडावण (Great Indian Bustard) जैसे पक्षी तथा अजगर और मॉनिटर लिजार्ड जैसे सरीसृप भी पाए जाते हैं।
सीमा विवाद और हाईकोर्ट की भूमिका
यह पूरा मामला अभ्यारण्य की मूल अधिसूचना और बाद में जारी किए गए संशोधित नक्शे के बीच अंतर को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उचित विभागीय प्रक्रियाओं का पालन किए बिना कुछ क्षेत्रों को नक्शे से बाहर किया गया था। अब राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले से ही यह तय होगा कि नाहरगढ़ अभ्यारण्य का नया सीमांकन वैध है या नहीं।
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