
भारत ने लॉन्च किए स्वदेशी AI मॉडल Eka-1, Dhir 2B और 5B
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के इंडिया-एआई मिशन के तहत देश के घरेलू फाउंडेशनल एआई मॉडल्स Eka-1, Dhir 2B और Dhir 5B को लॉन्च किया गया है। ये स्वदेशी मॉडल बैंकिंग, रक्षा, नागरिक सेवाओं और बहुभाषी ऑन-डिवाइस ऑटोमेशन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे।
Eka-1: 22 भारतीय भाषाओं में सक्षम
सोकेट लैब्स (Soket Labs Technology and Research) द्वारा विकसित 'Eka-1' एक शक्तिशाली ओपन और स्पार्स हाइब्रिड लैंग्वेज मॉडल है। 26.3 बिलियन पैरामीटर्स और 7.5 ट्रिलियन टोकन्स पर प्रशिक्षित यह मॉडल अंग्रेजी के साथ-साथ संविधान की सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है। यह विशेष रूप से गणित, कोडिंग, तार्किक सोच, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।
Dhir 2B और 5B: ऑफलाइन और ऑन-डिवाइस ऑटोमेशन
ज़ेंटेक एआईटेक (ZenteiQ AiTech Innovations) द्वारा विकसित 'Dhir 2B' और 'Dhir 5B' ओपन-सोर्स कॉम्पैक्ट मॉडल्स हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये कम कनेक्टिविटी या बिना इंटरनेट वाले इलाकों में भी मोबाइल और कंप्यूटर पर लोकल रूप से चल सकते हैं। इसके कारण उपयोगकर्ताओं को क्लाउड नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा पूरी तरह बनी रहेगी।
विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक उपयोगिता
इन मॉडल्स का इस्तेमाल रक्षा, सरकारी प्रशासन, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्रों में बहुभाषी सहायकों (Multilingual Assistants) और दस्तावेज-आधारित ऑटोमेशन के लिए किया जाएगा। जीपीयू (GPU) और टीपीयू (TPU) प्रणालियों पर चलने में सक्षम ये मॉडल बेहद सुरक्षित ऑन-प्रेमिस वातावरण प्रदान करते हैं।
एआई-कोश से शोधकर्ताओं को मिलेगा बढ़ावा
सरकारी पहल के तहत इन स्वदेशी मॉडल्स को 'एआई-कोश' (AIKosh) जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से शोधकर्ताओं, छात्रों और इनोवेटर्स के लिए सुलभ कराया जाएगा। इससे देश में नई तकनीकों के प्रयोग को गति मिलेगी और डिजिटल इंडिया अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती हासिल होगी।

दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026: रक्षा मंत्री ने दिया 'तकनीकी संप्रभुता' का संदेश
नई दिल्ली में मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) द्वारा आयोजित तीसरे 'दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026' में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा सुधारों, आत्मनिर्भरता और रक्षा निर्यात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल उपकरणों को असेंबल करना आत्मनिर्भरता नहीं है, बल्कि तकनीक का विकास और संप्रभुता बेहद जरूरी है।
चार प्रमुख स्तंभों पर जोर
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल विदेशों से पुर्जे मंगवाकर भारत में असेंबल कर लेना वास्तविक आत्मनिर्भरता नहीं है। भारत को अपनी रक्षा तकनीकों का डिजाइन, विकास और अपग्रेडेशन खुद करने में सक्षम होना होगा। उन्होंने रक्षा सुधार, आत्मनिर्भरता, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और निर्यात को भारतीय रक्षा क्षेत्र के चार अनिवार्य स्तंभ बताया, जिनका एक साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।
आधुनिक युद्ध और तकनीकी आत्मनिर्भरता
बदलते दौर में युद्ध कला के स्वरूप पर चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अब युद्ध केवल थल, जल और नभ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष भी इसके मुख्य केंद्र बन चुके हैं। आज के समय में महंगे प्लेटफॉर्म्स को कम लागत वाले ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियां (Autonomous Systems) चुनौती दे सकती हैं। इसलिए रक्षा तैयारियों में प्रयोगशाला से तकनीक को जल्द से जल्द सैन्य बलों तक पहुंचाना अनिवार्य है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और निर्यात का लक्ष्य
भारत की आत्मनिर्भरता नीति का मतलब दुनिया से अलग-थलग होना नहीं है, बल्कि सह-विकास (Co-development) और सह-उत्पादन (Co-production) के जरिए मजबूत साझेदारी बनाना है। रक्षा उत्पादन और निर्यात के मोर्चे पर देश ने अभूतपूर्व प्रगति की है और वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन तथा 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
मनोहर पर्रिकर संस्थान का योगदान
11 नवंबर 1965 को स्थापित MP-IDSA रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर निष्पक्ष नीतिगत अनुसंधान करने वाला एक प्रमुख स्वायत्त निकाय है। रक्षा मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित यह संस्थान भारत की सामरिक और रक्षा प्राथमिकताओं को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ओखला बर्ड सेंचुरी में दिखा दुर्लभ 'सफेद सारस', उमड़े पक्षी प्रेमी
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर स्थित ओखला बर्ड सेंचुरी में हाल ही में एक दुर्लभ 'सफेद सारस' (White Stork) देखा गया है। इस खूबसूरत प्रवासी पक्षी की उपस्थिति ने पक्षी प्रेमियों, पर्यावरणविदों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों को आर्द्रभूमि (Wetland) की ओर आकर्षित किया है। यह घटना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है।
सफेद सारस की अनूठी विशेषताएं
सिकोनिडे (Ciconiidae) परिवार से ताल्लुक रखने वाला सफेद सारस एक बड़ा जलपक्षी है। यह मुख्य रूप से अपने आकर्षक पंखों, लंबी लाल चोंच और लंबे लाल पैरों के कारण आसानी से पहचाना जाता है। खड़े होने पर इसकी लंबाई लगभग 95 से 110 सेंटीमीटर और पंखों का फैलाव 183 से 217 सेंटीमीटर तक होता है। ये पक्षी उड़ते समय अपनी गर्दन सीधी फैलाकर और पैरों को पीछे खींचकर हवा में तैरते हुए ऊर्जा की बचत करते हैं।
लंबी दूरी के प्रवासी पक्षी
यूरोप, एशिया माइनर, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में पाए जाने वाले ये सारस सर्दियों के मौसम में प्रवास करते हैं। ठंड की शुरुआत होते ही ये अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय इलाकों, मध्य पूर्व और भारतीय उपमहाद्वीप की ओर रुख करते हैं। ये पक्षी आमतौर पर उथले जलाशयों, घास के मैदानों और कृषि क्षेत्रों में भोजन की तलाश करते हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में इन्हें 'लीस्ट कंसर्न' (कम चिंतनीय) श्रेणी में रखा गया है।
ओखला बर्ड सेंचुरी का महत्व
दिल्ली से उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के प्रवेश द्वार पर स्थित यह लगभग 4 वर्ग किलोमीटर का अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श पड़ाव है। बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा 'महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र' (IBA) के रूप में मान्यता प्राप्त यह सेंचुरी दुर्लभ जीवों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है।
सफेद सारस का ओखला जैसे संरक्षित क्षेत्र में पहुंचना यह साबित करता है कि शहरी फैलाव के बीच भी ये नमी वाले इलाके प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित शरणगाह बने हुए हैं।

नीति आयोग ने लॉन्च किया 'इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्कोरबोर्ड'
नीति आयोग के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिवीजन ने देश के विज्ञान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को ट्रैक करने के लिए एक इंटरैक्टिव डेटा प्लेटफॉर्म 'इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्कोरबोर्ड' लॉन्च किया है। इसके जरिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी प्रदर्शन क्षमता, शोध आउटपुट और नीतियों की तुलना कर सकते हैं।
डेटा का एकीकृत महामंच
यह स्कोरबोर्ड देश भर के शोध संस्थानों, प्रकाशनों, पेटेंट आवेदन, स्टार्टअप्स और अनुसंधान निधि (R&D Funding) से जुड़ी जानकारियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। इसमें केंद्रीय, राज्य स्तरीय और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ आरएंडडी लैब्स, डीप-टेक स्टार्टअप्स और अटल टिंकरिंग लैब्स तक का संपूर्ण डेटा शामिल किया गया है। इसके माध्यम से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी ताकत, कमियों और विकास की संभावनाओं का सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे।
11 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर फोकस
नीति आयोग का यह मंच राष्ट्रीय महत्व के 11 प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों पर केंद्रित है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और आधुनिक कृषि जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इन क्षेत्रों में शोध के उत्पादन और राज्यवार प्रगति की तुलना आसानी से की जा सकती है।
बेंचमार्किंग और राज्यों की तुलना
इस प्लेटफॉर्म की सबसे खास बात इसकी बेंचमार्किंग प्रणाली है। इसके जरिए यूजर किसी भी दो राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के बीच अनुसंधान आउटपुट, शोध क्षेत्रों और विभिन्न सेक्टर्स के प्रदर्शन का सीधा तुलनात्मक अध्ययन कर सकते हैं। पेटेंट के मोर्चे पर यह पेटेंट आवेदनों की संख्या, पेटेंट क्षमता और राज्यों के बीच आपसी सहयोग की जानकारी भी विस्तार से प्रदान करता है।
नीतियों और नवाचारों का साझाकरण
यह स्कोरबोर्ड केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न राज्यों की साइंस एंड टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और इनोवेशन नीतियों का दस्तावेजीकरण भी करता है। इसके माध्यम से राज्य एक-दूसरे की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों (Best Practices) का अध्ययन कर उन्हें अपने यहां लागू कर सकते हैं। नीति निर्माताओं के लिए यह उपकरण साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और राज्य स्तर पर शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में बेहद मददगार साबित होगा।

अगली पैदाइश तक सीएम बनने की उम्मीद नहीं: ओपी राजभर
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के यूपी विधानसभा चुनाव-2027 नहीं लड़ने के दावे पर ओपी राजभर ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि चुनाव से भागने वाला नेता कैसा होता है और तंज कसा कि वह जीवन में केवल एक बार सीएम बन पाए हैं, अब अगली पैदाइश तक कोई उम्मीद नहीं है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अक्सर चलते रहते हैं, और इस बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार किया है। यह जुबानी हमला अखिलेश यादव के यूपी विधानसभा चुनाव-2027 नहीं लड़ने की चर्चाओं को लेकर सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
चुनाव से भागने को लेकर दी चुनौती
ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता चुनाव लड़ने से भागे, उसे नेता नहीं कहा जा सकता। उन्होंने खुले तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि मैदान में आइए और दो-दो हाथ हो जाए। राजभर के इस आक्रामक तेवर से दोनों दलों के बीच का राजनीतिक तनाव और अधिक गहराता नजर आ रहा है।
सीएम बनने को लेकर कसा करारा तंज
अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव ले-देकर अपने पूरे राजनीतिक सफर में केवल एक ही बार मुख्यमंत्री बन पाए हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि अब उनकी अगली पैदाइश तक दोबारा मुख्यमंत्री बनने की कोई उम्मीद नहीं बची है। इस तरह के बयानों से राज्य का सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।
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