Delight News Logo
Latest सामान्य ख़बरें सरकारी नौकरी करेंट अफेयर्स परीक्षा ज्ञान
यूपी में सहायक अध्यापक के 12405 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

यूपी में सहायक अध्यापक के 12405 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

Delight News
📅 28 Oct2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने प्राथमिक शिक्षक (PRT) के 12405 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 16 सितंबर 2026 से शुरू हुई थी और आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई थी। योग्य उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा अवसर है।

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने आधिकारिक वेबसाइट पर प्राइमरी टीचर यानी सहायक अध्यापक के पदों पर बंपर भर्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के माध्यम से राज्य में कुल 12405 खाली पदों को भरा जाएगा, जिससे शिक्षण के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं को एक बड़ा मंच मिलेगा।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया
इस भर्ती अभियान के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 16 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी थी। उम्मीदवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 28 अक्टूबर 2026 किया गया था। जिन योग्य उम्मीदवारों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। विज्ञापन संख्या 05/2026 के अंतर्गत यह पूरी भर्ती प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
आयु सीमा और पात्रता के मानक
नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु सीमा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। आयोग के नियमों के मुताबिक, न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 01 जुलाई 2026 को आधार मानकर की जाएगी। इसके अलावा, आवेदकों के पास संबंधित क्षेत्र में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और डिप्लोमा होना अनिवार्य है, जिसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है।
चयन प्रक्रिया और आगे के कदम
इतनी बड़ी संख्या में पदों पर होने वाली इस भर्ती से राज्य के युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी चरणों और अंकों के विवरण के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करने की सलाह दी जाती है। यह मौका उन सभी योग्य अभ्यर्थियों के लिए बेहद अहम है जो उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अपनी सेवाएं देकर एक सुरक्षित और सम्मानित भविष्य बनाना चाहते हैं।
इंडोनेशिया में शुरू हुआ भारत-इंडोनेशिया का 'गरुड़ शक्ति' अभ्यास

इंडोनेशिया में शुरू हुआ भारत-इंडोनेशिया का 'गरुड़ शक्ति' अभ्यास

Delight News
📅 28 Oct2026

भारत और इंडोनेशिया के विशेष बलों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'गरुड़ शक्ति' का 11वां संस्करण इंडोनेशिया के बान्युवांगी (Banyuwangi) में शुरू हो गया है। भारतीय थलसेना की पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के जवान इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना है।

भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक संबंधों और सैन्य सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से द्विपक्षीय संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'गरुड़ शक्ति' (Garuda Shakti) का 11वां संस्करण इंडोनेशिया के बान्युवांगी में सफलतापूर्वक शुरू हो गया है। यह वार्षिक अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच रक्षा क्षेत्र में बढ़ते समन्वय का एक बड़ा प्रतीक है।
भारतीय टुकड़ी की भागीदारी और मुख्य उद्देश्य
इस संयुक्त अभ्यास में भारत की ओर से पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के पराक्रमी जवान हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के विशेष बलों के बीच आपसी समझ, रक्षा सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी (अंतर-संचालन क्षमता) को सुदृढ़ करना है। यह दोनों देशों को अपने रणनीतिक अनुभवों को साझा करने के लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान करता है।
जंगल युद्ध और विशेष ऑपरेशन्स पर ध्यान
गरुड़ शक्ति अभ्यास का प्राथमिक ध्यान मुख्य रूप से जंगल क्षेत्र के चुनौतीपूर्ण वातावरण में विशेष अभियानों के लिए रणनीति, तकनीकों और प्रक्रियाओं को निखारने पर है। अभ्यास के दौरान बाधा पार करना (ऑब्स्टेकल क्रॉसिंग), कॉम्बैट मार्क्समैनशिप (सटीक निशानेबाजी), पर्वतारोहण, एयर असॉल्ट ट्रेनिंग और कॉम्बैट-हार्डनिंग सेशन जैसी गहन गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही दोनों पक्ष अपने आधुनिक हथियारों, उपकरणों और परिचालन संबंधी सर्वोत्तम प्रथाओं का भी आदान-प्रदान कर रहे हैं।
सामरिक महत्व और समापन
इस संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण का समापन एक 'वैलिडेशन एक्सरसाइज' (सत्यापन अभ्यास) के साथ होगा, जिसमें यथार्थवादी सामरिक परिदृश्यों को सिम्युलेट करके दोनों टुकड़ियों के धीरज, समन्वय और युद्ध तत्परता का मूल्यांकन किया जाएगा। यह अभ्यास भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
नई दिल्ली में यूनेस्को डोपिंग रोधी सम्मेलन: खेल सत्यनिष्ठा पर जोर

नई दिल्ली में यूनेस्को डोपिंग रोधी सम्मेलन: खेल सत्यनिष्ठा पर जोर

Delight News
📅 28 Oct2026

नई दिल्ली में यूनेस्को के खेलों में डोपिंग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन के तहत सीओपी10 ब्यूरो और एंटी-डोपिंग फंड अप्रूवल कमेटी की बैठकों की अध्यक्षता केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री ने की। भारत इस वैश्विक समझौते का एक प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता है, जिसका उद्देश्य खेलों में डोपिंग को समाप्त करना है।

खेलों में सत्यनिष्ठा और स्वच्छता को बढ़ावा देने की दिशा में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में यूनेस्को (UNESCO) के 'इंटरनेशनल कन्वेंशन अगेंस्ट डोपिंग इन स्पोर्ट्स' के तहत सीओपी10 (COP10) ब्यूरो की तीसरी औपचारिक बैठक और 2026-27 के लिए फंड अप्रूवल कमेटी की चौथी बैठक का सफल आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री ने की।
कन्वेंशन की पृष्ठभूमि और मुख्य उद्देश्य
यूनेस्को के इस बहुपक्षीय समझौते को 19 अक्टूबर 2005 को यूनेस्को के 33वें सामान्य सम्मेलन के दौरान अपनाया गया था और यह 1 फरवरी 2007 को लागू हुआ था। वर्तमान में 192 देश इसके सदस्य हैं, जो इसे यूनेस्को की दूसरी सबसे अधिक अनुमोदित संधि बनाता है। भारत ने 7 नवंबर 2007 को इस संधि का अनुमोदन (Ratify) किया था। यह वैश्विक स्तर पर खेलों में डोपिंग को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एकमात्र कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय तंत्र है।
प्रमुख विशेषताएं और संचालन प्रणाली
इस कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डोपिंग रोधी कानूनों, दिशानिर्देशों और नियमों में तालमेल स्थापित करना है ताकि सभी एथलीटों को एक सुरक्षित और समान अवसर वाला माहौल प्रदान किया जा सके।
यह समझौता सरकारों को आधिकारिक तौर पर विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) और उसके कोड को मान्यता देने का अधिकार प्रदान करता है। इसके अलावा, सदस्य देशों में डोपिंग के प्रति जागरूकता फैलाने और क्षमता निर्माण के उद्देश्य से एक 'एंटी-डोपिंग फंड' की स्थापना की गई है। कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) इस कन्वेंशन की सर्वोच्च संस्था है जो द्विवार्षिक सत्रों में बैठक कर इसके कार्यान्वयन का निरीक्षण करती है।
मेघालय में मिली सीकाडा कीट की नई प्रजाति 'निओटर्पनोसिया मॉफलांगेंसिस'

मेघालय में मिली सीकाडा कीट की नई प्रजाति 'निओटर्पनोसिया मॉफलांगेंसिस'

Delight News
📅 28 Oct2026

उत्तर-पूर्वी भारत के मेघालय की मावफलांग पहाड़ियों के अर्ध-सदाबहार जंगलों से सीकाडा कीट की एक नई प्रजाति की खोज की गई है। वैज्ञानिकों ने इसका नाम 'निओटर्पनोसिया मॉफलांगेंसिस' रखा है। यह नई प्रजाति अपनी पारदर्शी पंखों के विशिष्ट निशानों, अनोखी बनावट और भोर के समय गाए जाने वाले गीतों के लिए जानी जाती है।

भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र अपनी अद्भुत और अनूठी जैव विविधता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हाल ही में शोधकर्ताओं ने मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में स्थित मावफलांग पहाड़ियों के अर्ध-सदाबहार जंगलों से सीकाडा (Cicada) कीट की एक बिल्कुल नई प्रजाति की खोज और विवरण दिया है। इस नई प्रजाति का नामकरण इसके खोज स्थल के आधार पर 'निओटर्पनोसिया मॉफलांगेंसिस' (Neoterpnosia mawphlangensis) किया गया है।
आवास और शारीरिक विशेषताएं
यह नई प्रजाति मावफलांग के 1,378 से 1,605 मीटर की ऊंचाई वाले उपोष्णकटिबंधीय चीड़ (पाइन) और अर्ध-सदाबहार जंगलों में पाई गई है। निओटर्पनोसिया मॉफलांगेंसिस के पारदर्शी पंखों पर विशेष निशान बने होते हैं और नर कीट के जननांगों की संरचना इसे इस जीनस की अन्य प्रजातियों से अलग बनाती है। यह कीट पेड़ों की छालों पर मौजूद काई (मॉस) के बीच खुद को बेहतरीन तरीके से छिपा (Camouflage) सकता है और यह रोशनी या प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होता है।
अनोखा व्यवहार और सामूहिक गायन
इस प्रजाति का व्यवहार बेहद दिलचस्प है। यह मुख्य रूप से भोर (सुबह के तड़के) के समय सक्रिय होती है और जंगलों की ऊंची शाखाओं व पत्तियों के बीच से आवाज निकालती है। आमतौर पर नर सीकाडा शाम को लगभग 6 बजे गाना शुरू करते हैं और अनुकूल मौसम में लगभग 30 मिनट तक कोरस (सामूहिक गान) बनाते हैं। धुंध और हल्की बारिश के दौरान इन्हें गाते हुए देखा गया है, हालांकि तेज बारिश शुरू होते ही ये शांत हो जाते हैं।
क्या होते हैं सीकाडा कीट और उनका जीवन चक्र
सीकाडा ध्वनि उत्पन्न करने वाले कीटों का एक बड़ा परिवार है, जिसमें दुनिया भर में 3,000 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं। ये अपने तेज, जटिल और विशिष्ट आवाज तंत्र के लिए जाने जाते हैं, जिसे नर सीकाडा अपने पेट पर स्थित 'टैम्बल' (Tymbals) नामक अंग से मादा को आकर्षित करने के लिए निकालते हैं।
इनका जीवन चक्र काफी अनोखा होता है। मादा सीकाडा पेड़ की टहनियों में अंडे देती है। अंडों से निकलने के बाद इनके बच्चे (निम्फ) जमीन में चले जाते हैं और सालों तक जड़ों का रस पीकर विकसित होते हैं। बाहर आने और वयस्क बनने के बाद इनका जीवनकाल केवल 4 से 6 सप्ताह का होता है। हालांकि, कुछ आवधिक (Periodical) सीकाडा प्रजातियों का निम्फ चरण 13 से 17 वर्षों का भी हो सकता है।
कित्तूर किले में बनेगा ₹40 करोड़ का कित्तूर चन्नम्मा फ्रीडम पार्क

कित्तूर किले में बनेगा ₹40 करोड़ का कित्तूर चन्नम्मा फ्रीडम पार्क

Delight News
📅 28 Oct2026

कर्नाटका सरकार ने बेलगावी जिले के ऐतिहासिक कित्तूर किले में ₹40 करोड़ की लागत से 'किट्तूर चन्नम्मा फ्रीडम पार्क' बनाने का फैसला किया है। 1857 के संग्राम से 33 साल पहले अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व करने वाली वीरांगना रानी चन्नम्मा का यह किला एक प्रमुख ऐतिहासिक और स्थापत्य स्थल है।

कर्नाटका सरकार ने राज्य के समृद्ध स्वतंत्रता संग्राम इतिहास को संजोने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में घोषणा की है कि बेलगावी जिले में स्थित ऐतिहासिक कित्तूर किले के परिसर में ₹40 करोड़ की लागत से 'किट्तूर चन्नम्मा फ्रीडम पार्क' (Kittur Channamma Freedom Park) का निर्माण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य भावी पीढ़ियों को भारत के शुरुआती स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और वीरता से परिचित कराना है।
कित्तूर किले का स्वर्णिम इतिहास
किट्तूर किले का निर्माण 1660 से 1691 ईस्वी के दौरान कित्तूर राजवंश के पांचवें शासक अल्लाप्पा गौड़ा सरदेसाई ने करवाया था। यह किला 1824 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए सशस्त्र विद्रोह के लिए जाना जाता है। 1857 की क्रांति से लगभग 33 वर्ष पहले, कित्तूर की रानी चन्नम्मा ने ब्रिटिश हुकूमत के अन्यायपूर्ण शासन और हड़प नीति के खिलाफ पहला बिगुल फूंका था। यद्यपि अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबा दिया था, लेकिन रानी चन्नम्मा का यह संघर्ष भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अमिट छाप छोड़ गया।
अद्वितीय वास्तुकला और विशेषताएं
किट्तूर किला अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला और संरचनात्मक इंजीनियरिंग के लिए प्रसिद्ध है। काले बेसाल्ट पत्थरों से निर्मित यह किला पेशवा-इस्लामिक वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। किले के भीतर एक तीन मंजिला भव्य महल, गुप्त पानी के कुएं (वॉटर सिस्टर्न), ध्रुव तारे को देखने के लिए बनाया गया एक विशेष कमरा और शाही सभाओं के लिए एक बड़ा महल हॉल मौजूद है।
विरासत और वर्तमान स्थिति
किले के अवशेषों में पुराना महल, वॉचटॉवर, प्राचीन मंदिर और जल प्रणाली आज भी सुव्यवस्थित स्थिति में मौजूद हैं। किले के अंदर स्थित एक संग्रहालय में रानी कित्तूर चन्नम्मा के युग के हथियार, मूर्तियां और ऐतिहासिक अवशेष रखे गए हैं। नए फ्रीडम पार्क के निर्माण से इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक पटल पर और अधिक पहचान मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

Delight News

निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण

Delight News एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और जनता तक बिल्कुल सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय हिंदी खबरें पहुंचाना है। हम बिना किसी पक्षपात के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, खेल, शिक्षा, सरकारी नौकरी और करंट अफेयर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ताजा खबरें आप तक सबसे पहले पहुंचाते हैं।
📬 हमसे संपर्क करें
delightnews.in@gmail.com Official YouTube Channel Official Instagram Profile

📍 अपनी लोकेशन Set करें



Privacy Policy & Terms

Delight News परिवार से जुड़ें

📱 और भी बेहतर अनुभव के लिए!

ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।

📥 Download Android App