
रास्ते पर बैरिकेड लगा दिया, कहीं यमुना में नेवी न तैनात कर दें: अभिजीत दीपके
सीजेपी के अभिजीत दीपके ने नेताओं की हिरासत पर सरकार पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वे फ्लाइट और सड़क से हिरासत में लिए जा चुके हैं, अब बस नाव से गिरफ्तार होना बाकी है। दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि रास्ते पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं, पता नहीं यमुना में कहीं नेवी न तैनात कर दें।
सरकार की कार्रवाई पर तीखा कटाक्ष
अभिजीत दीपके ने सरकार के रवैये पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे और उनके साथी नेताओं को फ्लाइट और सड़क के रास्ते से पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है। अब केवल नाव के जरिए गिरफ्तार होना ही बाकी रह गया है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की ओर से की गई भारी घेराबंदी को लेकर तंज कसा।
'यमुना में नेवी तैनात न कर दें'
दीपके ने आगे कहा कि सड़कों पर जिस तरह से बैरिकेड्स लगाकर आवाजाही को रोका गया है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि कहीं सरकार यमुना नदी में नेवी (नौसेना) की तैनाती न कर दे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक विरोध प्रदर्शन (प्रोटेस्ट) को लेकर प्रशासन के भीतर इतना ज्यादा डर बना हुआ है, जिसके लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है।

दलेर मेहंदी के साथ हुए बर्ताव पर छलके मीका सिंह के आंसू
गायक मीका सिंह ने खुलासा किया है कि जब उन्होंने दलेर मेहंदी को फोन किया, तो वे बच्चे की तरह रोने लगे थे। उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा दलेर मेहंदी पर शराब पीकर परफॉर्म करने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उनके साथ हुए इस व्यवहार से मीका सिंह को काफी दुख हुआ।
मीका सिंह का दर्दनाक खुलासा
मीका सिंह ने एक बातचीत में बताया कि जब किसी ने दलेर मेहंदी से बेहद खराब तरीके से बात की, तो उन्हें इस बात का बहुत बुरा लगा। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जब मीका ने अपने पाजी (दलेर मेहंदी) को फोन मिलाया, तो फोन उठाते ही वे कुछ कह नहीं पाए और दलेर मेहंदी एक छोटे बच्चे की तरह फफक-फफक कर रोने लगे।
शराब पीकर परफॉर्म करने का आरोप
पूरे विवाद की शुरुआत उत्तराखंड से जुड़ी एक घटना से हुई थी। उत्तराखंड सरकार के मंत्री सुबोध उनियाल की तरफ से दलेर मेहंदी पर यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मंच पर शराब पीकर परफॉर्म किया था। इसी आरोप और उसके बाद हुए अपमानजनक बर्ताव ने दलेर मेहंदी को अंदर से तोड़ कर रख दिया, जिसे लेकर उनके भाई मीका सिंह ने खुलकर अपना गुस्सा और दुख जाहिर किया है।

भारत 2028 तक लॉन्च करेगा अपना मोबाइल फोन
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि भारत 23 अक्टूबर 2028 तक अपना खुद का मोबाइल फोन ब्रांड लॉन्च करेगा। एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में उन्होंने बताया कि ये फोन पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित होंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य इसे दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला डिवाइस बनाना है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
इस खास पहल के तहत लॉन्च होने वाले सभी मोबाइल फोन भारत में ही पूरी तरह से डिजाइन और निर्मित किए जाएंगे। एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 के दौरान मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि इस स्वदेशी ब्रांड का लक्ष्य इन डिवाइसेज को दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पाद के रूप में स्थापित करना है।
बौद्धिक संपदा अधिकार भारत के पास
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इन फोन्स से जुड़े सभी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (बौद्धिक संपदा अधिकार) पूरी तरह से भारत के पास ही रहेंगे। इससे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान मिलेगी और वैश्विक मोबाइल बाजार में भारत का दबदबा और अधिक बढ़ेगा।

अमेरिका में पकड़ा गया भारत का वांटेड गैंगस्टर हिमांशु भाऊ
भारत के सबसे वांछित गैंगस्टरों में से एक हिमांशु भाऊ को अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। हत्या, वसूली और अपहरण जैसे गंभीर मामलों में आरोपी हिमांशु दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में सक्रिय रहा है। वह लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का कट्टर दुश्मन माना जाता है।
आपराधिक गतिविधियों का दायरा
हिमांशु भाऊ का नाम कई सनसनीखेज वारदातों से जुड़ा हुआ है। उस पर हत्या, जबरन वसूली और अपहरण जैसे कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप दर्ज हैं। उसका आपराधिक नेटवर्क मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब के इलाकों में फैला हुआ था, जहां उसके नाम से अपराधी आतंक फैलाते रहे हैं।
लॉरेंस बिश्नोई से पुरानी दुश्मनी
अपराध जगत में हिमांशु भाऊ की पहचान लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गिरोह के कट्टर दुश्मन के रूप में है। इन दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की जंग और पुरानी रंजिश जगजाहिर रही है। एफबीआई द्वारा हिमांशु की गिरफ्तारी के बाद अब दोनों गैंग्स के समीकरणों पर भी असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत लाने की कवायद
अमेरिकी एजेंसी द्वारा पकड़े जाने के बाद अब भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियां हरकत में आ गई हैं। एजेंसियां कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए हिमांशु भाऊ को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की कोशिश में जुटी हुई हैं, ताकि देश में उस पर दर्ज मुकदमों की कड़ी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।

यूपी चुनाव 2027: कांग्रेस ने अखिलेश यादव से मांगीं 200 सीटें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर इंडिया गठबंधन में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के समक्ष लगभग 200 सीटों की मांग रखी है। हालांकि, पिछले दो चुनावों में कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई थी, जिसके चलते सीट बंटवारे पर पेंच फंस सकता है।
गठबंधन में सीटों का समीकरण
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए लगभग 200 संभावित सीटों की एक विस्तृत सूची तैयार की है। पार्टी ने इस सूची को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है और सपा नेतृत्व से बातचीत का सिलसिला शुरू किया है। कांग्रेस का रुख है कि सीटों की केवल संख्या ही नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर एक सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलना बेहद जरूरी है। पार्टी राज्य में अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करने के इरादे से इस बार बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है।
पिछले चुनावों का रिकॉर्ड
कांग्रेस की इस 200 सीटों की मांग के बीच उसके पुराने प्रदर्शन पर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है और वह 'डबल डिजिट' (दहाई का आंकड़ा) भी पार नहीं कर सकी है। साल 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके 105 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से उसे केवल 7 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। इसके बाद 2022 के चुनाव में पार्टी अकेले मैदान में उतरी और स्थिति और खराब हो गई, जहां वह महज 2 सीटों पर सिमट कर रह गई।
सियासी रास्ते और चुनौतियां
पिछला चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड कमजोर होने के बावजूद कांग्रेस का इतनी बड़ी संख्या में सीटें मांगना समाजवादी पार्टी के लिए सोच-विचार का विषय बना हुआ है। सपा राज्य में मुख्य विपक्षी दल है और वह सीटों के आवंटन में अपने मजबूत जनाधार का हवाला दे सकती है। ऐसे में दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच आने वाले दिनों में टेबल पर होने वाली बातचीत काफी महत्वपूर्ण साबित होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव कांग्रेस की इस भारी-भरकम मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और गठबंधन का अंतिम स्वरूप क्या रहता है।
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