
दलेर मेहंदी विवाद: मीका सिंह ने बीजेपी मंत्री को किया फोन
गायक दलेर मेहंदी को मंच पर नशे में होने का आरोप लगाकर डांटने वाले उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को मीका सिंह ने फोन किया है। इससे पहले मीका ने अपने भाई का बचाव किया था। वहीं कॉमेडियन कपिल शर्मा और रैपर बादशाह ने भी इस सार्वजनिक अपमान पर अपनी नाराजगी जताई है।
मीका सिंह ने किया मंत्री को फोन
इस पूरे मामले के बाद दलेर मेहंदी के भाई और मशहूर गायक मीका सिंह ने मोर्चा संभाला है। मीका सिंह ने मंगलवार को सीधे उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से फोन पर बात की। इससे पहले भी मीका सिंह सोशल मीडिया और बयानों के जरिए अपने भाई के समर्थन में खुलकर सामने आए थे और उनका बचाव किया था।
कपिल शर्मा और बादशाह ने जताई नाराजगी
दलेर मेहंदी के साथ हुए इस व्यवहार से इंडस्ट्री के अन्य कलाकार भी बेहद आहत हैं। मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा और लोकप्रिय रैपर बादशाह ने इस सार्वजनिक अपमान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। दोनों ही हस्तियों ने एक वरिष्ठ कलाकार के साथ इस तरह के बर्ताव पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
घटना को लेकर बढ़ा विवाद
मंच पर हुई इस नोकझोंक और डांट-फटकार का वीडियो सामने आने के बाद से ही मामला गरमाया हुआ है। एक तरफ जहां मंत्री के रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कला जगत के दिग्गज अपने साथी कलाकार के सम्मान की रक्षा के लिए एक जुट नजर आ रहे हैं।

'बड़े फैसले सौरव-आशुतोष लेते': दीपके ने बयान पर दी सफाई
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को लेकर दिए अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वे तानाशाह मानसिकता वाले नहीं हैं और सौरव-आशुतोष उनसे बेहतर इंसान और लीडर हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिवाली तक पार्टी कोई प्रदर्शन नहीं करेगी।
बयान पर अभिजीत दीपके का स्पष्टीकरण
अपने दिए गए बयान पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि पार्टी में तानाशाही मानसिकता का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, "हम तानाशाह मानसिकता वाले नहीं हैं। सौरव और आशुतोष मुझसे कहीं बेहतर लीडर और इंसान हैं। मेरे बयान का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि मैं उन्हें किसी मुसीबत में आगे धकेल रहा हूं। मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे साथ इतने बेहतरीन और सक्षम लोग खड़े हैं।"
बेहतर नेतृत्व और टीम भावना
अभिजीत दीपके ने यह स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मकसद पार्टी के अंदर सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और साथी संयोजकों की भूमिका को महत्व देना था। उन्होंने अपनी टीम के सदस्यों की सराहना करते हुए बताया कि वे एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं और आपस में गहरा विश्वास रखते हैं।
दिवाली तक कोई प्रदर्शन नहीं
संगठन की आगामी गतिविधियों और योजनाओं को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। अभिजीत दीपके के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी ने फैसला किया है कि वह आने वाली दिवाली तक किसी भी प्रकार का प्रदर्शन या आंदोलन आयोजित नहीं करेगी।

फब्तियां कस रहे लोगों पर जमकर बरसीं अक्षरा सिंह
अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान फब्तियां कस रहे लोगों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि थेंथरई मत करो और लड़कियों को इस तरह ज़लील करने पर शर्म आनी चाहिए। साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी (जेन जी) की तारीफ करते हुए कहा कि वे महिलाओं के सम्मान और मान-मर्यादा को अच्छी तरह पहचानते हैं।
थेंथरई मत करो और शर्म करो
मंच से जनता को संबोधित करते हुए अक्षरा सिंह ने खुले तौर पर ऐसे असामाजिक तत्वों को लताड़ लगाई जो माहौल खराब कर रहे थे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि थेंथरई मत करो, यह कोई अच्छी बात नहीं है। उन्होंने जनता से सवाल किया कि अगर ऐसी हरकतें उनके अपने घर की किसी लड़की के साथ हों तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा? उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लड़कियों को इस तरह ज़लील करते हुए किसी को भी शर्म क्यों नहीं आती।
जेन जी और महिलाओं का सम्मान
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेत्री ने आज की युवा पीढ़ी की सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर का जेन जी (Gen Z) वर्ग लड़कियों का सच्चा सम्मान करना जानता है। वे लोग हमारे घरों की औरतों और बेटियों की मान-मर्यादा को भली-भांति पहचानते हैं। उन्होंने लोगों को सीख देते हुए कहा कि ऐसे नए जमाने के समझदार युवाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सार्वजनिक मंचों पर गरिमा का सवाल
कार्यक्रम के दौरान अक्षरा सिंह के इस कड़े तेवर ने स्पष्ट कर दिया कि वे महिलाओं के खिलाफ होने वाली ऐसी हरकतों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करती हैं। उनका यह कड़ा संदेश सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं की सुरक्षा, उनके आत्मसम्मान और सामाजिक मर्यादा को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सौरव-आशुतोष की रिहाई के लिए हाईकोर्ट पहुंची CJP
कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को एक मिनट भी जेल में नहीं रहना चाहिए और राजनीतिक कारणों से उनकी स्वतंत्रता नहीं छीनी जानी चाहिए। रत्ना ने जोर दिया कि न्याय मिलने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने अदालत के समक्ष यह स्पष्ट पक्ष रखा है कि सौरव दास और आशुतोष रांका को एक मिनट भी और जेल की सलाखों के पीछे नहीं बिताना चाहिए। पार्टी का मानना है कि दोनों नेताओं को अनुचित तरीके से हिरासत में रखा गया है, जिसके चलते न्याय की गुहार लगाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना आवश्यक हो गया था।
राजनीतिक कारणों से स्वतंत्रता छीनने का आरोप
रत्ना सिंह ने इस पूरी कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए तीखा आरोप लगाया है कि राजनीतिक कारणों के चलते इन नेताओं की स्वतंत्रता को छीना जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक कार्यकर्ता को वैचारिक या राजनीतिक द्वेष के कारण इस तरह से कैद रखना और उसके मौलिक अधिकारों का हनन करना लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है।
न्याय मिलने में देरी न हो
CJP की कानूनी टीम का मुख्य जोर इस बात पर है कि न्याय व्यवस्था के तहत मामलों का निस्तारण त्वरित गति से होना चाहिए। रत्ना सिंह ने अपने बयान में विशेष रूप से यह बात दोहराई है कि न्याय मिलने में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई और इस कानूनी कदम के परिणामों पर टिकी हुई हैं।

आरएसएस से लड़ने में मुझे बहुत खुशी मिलती है: राहुल गांधी
विजयादशमी के पावन अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोलते हुए उसे एक 'असंवैधानिक संगठन' करार दिया है。 उन्होंने कहा कि आरएसएस एक पुरुषवादी सोच वाला संगठन है जो महिलाओं को पुरुषों की संपत्ति मानता है, और इसके खिलाफ लड़ने में उन्हें बेहद खुशी मिलती है。
पुरुषवादी विचारधारा पर कड़ा प्रहार
राहुल गांधी ने आरएसएस की वैचारिक पृष्ठभूमि और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक पुरुषवादी संगठन है。 उनके अनुसार, इस संगठन की मूल सोच और मानसिकता यह मानती है कि महिलाएं और बेटियां किसी स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि पुरुषों की निजी संपत्ति होती हैं。 इसी दमनकारी, सामंती और पिछड़ी सोच के विरोध में वे हमेशा मुखर होकर खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे。
शिव-शक्ति में अटूट आस्था
अपनी वैचारिक स्थिति और प्रेरणा के स्रोतों को स्पष्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ 'शिव-शक्ति' के स्वरूप और उनके सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं。 नारी शक्ति, न्याय और समानता के सम्मान की इसी पावन भावना के चलते उन्हें आरएसएस और उसकी रूढ़िवादी विचारधारा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई लड़ने में एक अलग ही प्रकार की आंतरिक खुशी और संतोष मिलता है。
वैचारिक लड़ाई में बढ़ता समर्थन
इस तीखे वैचारिक और राजनीतिक हमले के दौरान राहुल गांधी ने एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात भी साझा की है。 उन्होंने दावा किया कि इस वैचारिक संघर्ष की सबसे खूबसूरत बात यह है कि तथाकथित रूप से आरएसएस के प्रभाव क्षेत्र से जुड़ी या उनकी अपनी कहलाने वाली कई महिलाएं और बेटियां भी आज वैचारिक रूप से उनके साथ खड़ी हैं。 यह इस बात का प्रमाण है कि समाज अब इस पुरानी और दमनकारी सोच को बदलने के लिए तैयार हो चुका है。
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