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'भारत छोड़ो' नोटिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे अभिनेता इमरान खान

'भारत छोड़ो' नोटिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे अभिनेता इमरान खान

Delight News
📅 17 Oct2026

बॉलीवुड एक्टर इमरान खान ने फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) द्वारा जारी 'भारत छोड़ो' नोटिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विदेशी अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में उन्हें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश मिला है। प्रदर्शन में शामिल होने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे इमरान खान
बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने अपने खिलाफ जारी 'भारत छोड़ो' (Leave India) नोटिस को चुनौती देने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की शरण ली है। फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) द्वारा जारी किए गए इस नोटिस के खिलाफ उन्होंने याचिका दायर कर राहत की गुहार लगाई है।
28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का आदेश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इमरान खान पर विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के नियमों का उल्लंघन करने का कथित आरोप लगाया गया है। इसी के तहत जारी नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का सख्त निर्देश दिया गया है। इस अचानक आए कानूनी आदेश के बाद अभिनेता ने तुरंत अदालत का रुख किया है।
पुलिस हिरासत और विवाद की वजह
गौरतलब है कि ओसीआई (OCI) कार्डधारक अभिनेता इमरान खान को मुख्य चुनाव आयुक्त (ECI) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। एक विदेशी नागरिक/ओसीआई कार्डधारक के रूप में राजनीतिक गतिविधियों या विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया और यह नोटिस थमा दिया।
कानूनी लड़ाई पर टिकी निगाहें
नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद अब देखना होगा कि अदालत इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाती है। देश छोड़ने के लिए दी गई समय सीमा काफी करीब है, जिससे अदालत में इस मामले पर जल्द सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
पंजाब में बवाल के बीच सीएम मान का पेरिस दौरा, बीजेपी हमलावर

पंजाब में बवाल के बीच सीएम मान का पेरिस दौरा, बीजेपी हमलावर

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📅 17 Oct2026

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में उपजे भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनीति गरमा गई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राज्य में संकट के बावजूद मुख्यमंत्री भगवंत मान पत्नी के साथ जन्मदिन मनाने पेरिस चले गए हैं। हालांकि, मान ने इस पर अपनी सफाई दी है।

बीजेपी का तीखा हमला
पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पूरे राज्य में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन जारी हैं और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। इस संवेदनशील स्थिति के बीच भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है।
बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पंजाब में हालात बेकाबू हो रहे हैं और राज्य जल रहा है, ऐसे समय में मुख्यमंत्री भगवंत मान अपनी पत्नी के साथ जन्मदिन मनाने के लिए पेरिस रवाना हो गए हैं। बीजेपी ने इस यात्रा के समय और मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए इसे राज्य की जनता के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सफाई
बीजेपी द्वारा लगाए जा रहे इन आरोपों और तंज का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि उनकी पेरिस यात्रा कोई निजी वेकेशन या जन्मदिन का जश्न नहीं है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पंजाब की सरकारी और सहकारी संस्था SIAL-पेरिस कार्यक्रम में हिस्सा ले रही है, जो कि एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन है। राज्य के आर्थिक और व्यावसायिक हितों का प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से यह यात्रा की जा रही है।
गरमाई पंजाब की सियासत
एक तरफ जहां राज्य में अपराध और हत्या को लेकर आम जनता के बीच गुस्सा पनप रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के विदेश दौरे को लेकर शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा रहा है। विपक्ष लगातार सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे आधिकारिक दौरा बताकर अपना बचाव कर रहा है।
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना: 18,000 से अधिक गांव बने 'आदर्श ग्राम'

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना: 18,000 से अधिक गांव बने 'आदर्श ग्राम'

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📅 17 Oct2026

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की प्रमुख योजना 'प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना' (PM-AJAY) के तहत अब तक 18,093 गांवों को 'आदर्श ग्राम' घोषित किया जा चुका है। अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस सौ फीसदी केंद्रीय प्रायोजित योजना को डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना' (PM-AJAY) ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश भर में अनुसूचित जाति बहुल 18,093 गांवों को 'आदर्श ग्राम' के रूप में घोषित किया जा चुका है, जिससे इन क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं और विकास कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है।
योजना का परिचय और पृष्ठभूमि
वित्तीय वर्ष 2021-22 में शुरू की गई PM-AJAY एक व्यापक केंद्रीय योजना है, जिसे तीन पुरानी योजनाओं— प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (PMAGY), अनुसूचित जाति उप योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (SCA to SCSP), और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (BJRCY)—का विलय करके तैयार किया गया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित यह योजना गरीबी को कम करने, कौशल विकास के जरिए आजीविका के अवसर बढ़ाने और एससी-बहुसंख्यक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है।
प्रमुख घटक और कार्यप्रणाली
इस योजना के तहत मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाता है:
आदर्श ग्राम विकास: एससी-बहुसंख्यक गांवों को मॉडल गांवों के रूप में विकसित करना, ताकि वहां बुनियादी सुविधाओं की कोई कमी न रहे।
सहायता अनुदान (Grants-in-Aid): राज्य और जिला स्तर पर आजीविका परियोजनाओं, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता देना। इस घटक के तहत वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच राज्यों को लगभग 1,730 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिससे ढाई लाख से अधिक लाभार्थियों को सीधा लाभ मिला है।
छात्रावासों का निर्माण: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले एससी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में मदद के लिए छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत करना। सितंबर 2026 तक देश भर में 785 छात्र छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है।
डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता
योजना के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने PM-AJAY पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं। इससे कागजी कार्रवाई को खत्म करके वास्तविक समय (real-time) पर डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा-संचालित निर्णय लेने में मदद मिल रही है। यह योजना शत-प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है, जो समावेशी विकास और सशक्त भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार: वर्ष 2024 और 2025 के लिए 106 युवा कलाकार सम्मानित

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार: वर्ष 2024 और 2025 के लिए 106 युवा कलाकार सम्मानित

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📅 17 Oct2026

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री नई दिल्ली में वर्ष 2024 और 2025 के लिए 106 प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को प्रतिष्ठित 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार' प्रदान करेंगे। संगीत नाटक अकादमी द्वारा 2006 में स्थापित यह पुरस्कार 40 वर्ष तक की आयु के कलाकारों को उनकी कलात्मक उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है।

कला और संस्कृति के क्षेत्र में युवाओं के योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर वर्ष 2024 और 2025 के लिए देश भर के 106 युवा कलाकारों को प्रतिष्ठित 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार' से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले युवा कलाकारों के लिए एक बड़ा सम्मान है।
पुरस्कार के बारे में मुख्य बातें
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की शुरुआत संगीत नाटक अकादमी द्वारा वर्ष 2006 में की गई थी। यह 40 वर्ष तक की आयु के युवा कलाकारों को उनकी असाधारण प्रतिभा के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार किसी भी व्यक्ति को मरणोपरांत (posthumously) नहीं दिया जाता है और एक बार इस सम्मान को प्राप्त करने वाला व्यक्ति दोबारा किसी अन्य श्रेणी के लिए पात्र नहीं होता है। पुरस्कार स्वरूप विजेता को 25,000 रुपये की नकद राशि, एक ताम्रपत्र और एक अंगवस्त्र प्रदान किया जाता है।
किन क्षेत्रों में दिया जाता है यह पुरस्कार?
यह युवा पुरस्कार मुख्य रूप से पांच अलग-अलग कलात्मक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है:
संगीत (Music)
नृत्य (Dance)
नाटक (Theatre)
अन्य पारंपरिक, लोक, आदिवासी संगीत, नृत्य और कठपुतली कला (Folk/Tribal/Puppetry)
प्रदर्शन कला में योगदान या छात्रवृत्ति (Contribution/Scholarship in Performing Arts)
महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की विरासत
यह पुरस्कार महान भारतीय शास्त्रीय संगीतकार और शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की याद में दिया जाता है। उनका जन्म 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में संगीतकारों के एक पारंपरिक परिवार में हुआ था। भारतीय संगीत में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' (2001) से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें पद्म श्री (1961), पद्म भूषण (1968) और पद्म विभूषण (1980) से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके नाम पर दिया जाने वाला यह युवा पुरस्कार देश की युवा प्रतिभाओं को नई ऊंचाइयां छूने के लिए प्रेरित करता है।
तमिलनाडु से बुल्गारिया तक पहुंची जैविक पाम गुड़ पाउडर की पहली खेप

तमिलनाडु से बुल्गारिया तक पहुंची जैविक पाम गुड़ पाउडर की पहली खेप

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📅 17 Oct2026

तमिलनाडु के इरोड जिले से ताड़ के फूलों के रस से बने जैविक 'पाम' (Palmyra) गुड़ पाउडर की 1.755 टन की खेप बुल्गारिया के वार्ना शहर को निर्यात की गई है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले इस ताड़ के पेड़ का भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है।

भारत के पारंपरिक जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान मिल रही है। हाल ही में तमिलनाडु के इरोड जिले से ताड़ के पेड़ों के फूलों के रस (ब्लॉसम नेक्टर) से तैयार 1.755 टन जैविक 'पाम' (Palmyra) गुड़ पाउडर का एक consignment बुल्गारिया के वार्ना शहर को निर्यात किया गया है। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को दर्शाती है।
ताड़ के पेड़ की अनूठी विशेषताएं और भौगोलिक अनुकूलन
ताड़ के पेड़ (Palmyra Palm) को आमतौर पर शुगर पाम, टॉडी पाम या फैन पाम के नाम से जाना जाता है। हालांकि यह मूल रूप से उष्णकटिबंधीय अफ्रीका का पौधा है, लेकिन भारत में इसकी व्यापक स्तर पर खेती और प्राकृतिक रूप से वृद्धि हुई है। भारत के मैदानी इलाकों में इन्हें अक्सर हवा के झोंकों को रोकने के लिए 'विंडब्रेक' के रूप में लगाया जाता है।
यह पेड़ रेतीली, लाल, काली मिट्टी और नदी की जलोढ़ मिट्टी सहित विभिन्न प्रकार की मिट्टी में आसानी से पनप सकता है। 750 मिलीमीटर से कम वार्षिक वर्षा वाले अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए भी यह बेहद उपयुक्त है। यह समुद्र तल से लेकर 800 मीटर की ऊंचाई तक उग सकता है और मुख्य रूप से बीजों के माध्यम से ही इसका प्रसार होता है।
स्वास्थ्यवर्धक लाभ और पारंपरिक महत्व
इस पेड़ का मुख्य उत्पाद इसके पुष्पक्रम के सिरप से मिलने वाला मीठा रस है, जिससे ताड़ी और गुड़ बनाया जाता है। पाम गुड़ (गुड़) गन्ने की सामान्य चीनी की तुलना में कहीं अधिक पौष्टिक होता है। पारंपरिक रूप से भारत का 'नाडर' समुदाय इस पेड़ से अपनी आजीविका चलाता है। इस पेड़ की लकड़ी, फल, रस, तने और पत्तियों का उपयोग विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, फर्नीचर, निर्माण सामग्री और हस्तशिल्प के निर्माण में किया जाता है।

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