
स्टालिन का केंद्र पर हमला: आंदोलन दबाने से और मजबूत होगा
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने सीजीपी के अभिजीत दीपके और छात्र नेता नेहा बोरा की हिरासत को गैरकानूनी और अमानवीय बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल दोनों की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश इसे और मजबूत करेगी।
गैरकानूनी और अमानवीय करार
एमके स्टालिन ने नेताओं को हिरासत में लिए जाने के कदम को गैरकानूनी और अमानवीय बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि दोनों नेताओं को बिना किसी देरी के तुरंत रिहा किया जाए। उनका मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक सख्ती लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।
आंदोलन कुचलने पर दिया बयान
सरकार की रणनीति पर सीधा हमला बोलते हुए स्टालिन ने कहा कि जन आंदोलन को कुचलने की कोई भी कोशिश उसे खत्म नहीं कर सकती, बल्कि यह उसे और ज्यादा मजबूत बनाएगी। आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को इस प्रदर्शन के दौरान लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।

CJI पर आपत्तिजनक पोस्ट: केरल कांग्रेस अध्यक्ष को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव मीनेश दुबे ने केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें 7 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है और ऐसा न करने पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह कार्रवाई केरल कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल से सीजेआई सूर्यकांत के इस्तीफे को लेकर किए गए पोस्ट के कारण की गई है।
सात दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश
भेजे गए इस कानूनी नोटिस में केरल कांग्रेस अध्यक्ष से सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण और जवाब देने की माँग की गई है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि तय समय सीमा के अंदर उचित जवाब नहीं दिया जाता है, तो उनके खिलाफ अदालत की आपराधिक अवमानना की सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी।
क्या था पूरा मामला
यह पूरा विवाद केरल कांग्रेस के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से किए गए एक पोस्ट की वजह से शुरू हुआ है। जानकारी के अनुसार, केरल कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से सीजेआई सूर्यकांत के इस्तीफे से जुड़ा हुआ एक विवादित पोस्ट शेयर किया गया था। इसी पोस्ट को लेकर न्यायिक हलकों और वकीलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जिसके बाद अब कानूनी कार्रवाई का यह कदम उठाया गया है।

CJP का तिरंगा मार्च: दीपके और नेहा बोरा समेत 150 हिरासत में
दिल्ली में CJP के 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके और AISA प्रमुख नेहा बोरा समेत 150 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस की सख्ती के बावजूद कई लोगों ने तिरंगे के साथ मार्च निकाला और जमकर प्रदर्शन किया।
150 लोग लिए गए हिरासत में
पुलिस कार्रवाई के तहत CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके और AISA प्रमुख नेहा बोरा समेत लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शन को शुरू होने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
भारी सुरक्षा के बीच निकाला मार्च
हिरासत और पुलिस की सख्ती के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर मार्च निकाला और अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। इस स्थिति को देखते हुए दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक केंद्र कनॉट प्लेस में सुरक्षा के कड़े और कड़े इंतजाम किए गए थे।

रिहाई के बाद नेहा बोरा का हमला: लीगल-इलीगल की सीमा पार
दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत से रिहा किए जाने के बाद AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार लीगल और इलीगल की सीमाओं को काफी पहले पार कर चुकी है और लोगों को बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिया जा रहा है।
सरकार पर साधा तीखा निशाना
नेहा बोरा ने अपने बयान में कहा कि इलीगल और लीगल की सीमाओं को हिंदुस्तान की सरकार काफी पहले ही पार कर चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन के दौरान लंबे समय से यह देखने को मिल रहा है कि प्रशासनिक तंत्र का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
बिना वजह हिरासत का लगाया आरोप
नेहा बोरा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों और आम लोगों को बिना किसी ठोस वजह के जबरन हिरासत में लिया जा रहा है और फिर कुछ समय बाद छोड़ दिया जा रहा है। उनके इस तीखे बयान के बाद से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

दीपके गिरफ्तार, नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने छोड़ा
दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में ली गईं आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा को करीब 12 घंटे बाद शनिवार सुबह छोड़ दिया गया है। उन्हें दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा-65 के तहत छोड़ा गया है। वहीं, मार्च से पहले हिरासत में लिए गए सीजीपी फाउंडर अभिजीत दीपके को प्रिवेंटिव अरेस्ट किया गया है।
नेहा बोरा को मिली रिहाई
दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले पुलिस द्वारा हिरासत में ली गईं आईसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। उन्हें लगभग 12 घंटे तक हिरासत में रखे जाने के बाद दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा-65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर छोड़ा गया है।
अभिजीत दीपके प्रिवेंटिव अरेस्ट
दूसरी तरफ, इसी मार्च के सिलसिले में हिरासत में लिए गए सीजीपी फाउंडर अभिजीत दीपके पर कड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने उन्हें प्रिवेंटिव अरेस्ट (एहतियातन गिरफ्तारी) के तहत हिरासत में लिया है। इस पूरी कार्रवाई के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर फिर से गर्म हो गया है।
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