
रिहाई के बाद नेहा बोरा का हमला: लीगल-इलीगल की सीमा पार
दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत से रिहा किए जाने के बाद AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार लीगल और इलीगल की सीमाओं को काफी पहले पार कर चुकी है और लोगों को बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिया जा रहा है।
सरकार पर साधा तीखा निशाना
नेहा बोरा ने अपने बयान में कहा कि इलीगल और लीगल की सीमाओं को हिंदुस्तान की सरकार काफी पहले ही पार कर चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन के दौरान लंबे समय से यह देखने को मिल रहा है कि प्रशासनिक तंत्र का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
बिना वजह हिरासत का लगाया आरोप
नेहा बोरा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों और आम लोगों को बिना किसी ठोस वजह के जबरन हिरासत में लिया जा रहा है और फिर कुछ समय बाद छोड़ दिया जा रहा है। उनके इस तीखे बयान के बाद से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

दीपके गिरफ्तार, नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने छोड़ा
दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में ली गईं आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा को करीब 12 घंटे बाद शनिवार सुबह छोड़ दिया गया है। उन्हें दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा-65 के तहत छोड़ा गया है। वहीं, मार्च से पहले हिरासत में लिए गए सीजीपी फाउंडर अभिजीत दीपके को प्रिवेंटिव अरेस्ट किया गया है।
नेहा बोरा को मिली रिहाई
दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले पुलिस द्वारा हिरासत में ली गईं आईसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। उन्हें लगभग 12 घंटे तक हिरासत में रखे जाने के बाद दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा-65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर छोड़ा गया है।
अभिजीत दीपके प्रिवेंटिव अरेस्ट
दूसरी तरफ, इसी मार्च के सिलसिले में हिरासत में लिए गए सीजीपी फाउंडर अभिजीत दीपके पर कड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने उन्हें प्रिवेंटिव अरेस्ट (एहतियातन गिरफ्तारी) के तहत हिरासत में लिया है। इस पूरी कार्रवाई के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर फिर से गर्म हो गया है।

परिसीमन विधेयक पर खड़गे की PM मोदी को चौथी चिट्ठी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चौथी चिट्ठी लिखकर परिसीमन विधेयक संसद में लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है। उन्होंने मॉनसून सत्र के 64 दिन बाद भी सत्रावसान न होने पर सवाल उठाए हैं।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा है कि इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी दलों को साथ बिठाकर चर्चा की जानी चाहिए। बिना आम सहमति या व्यापक चर्चा के इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इस मामले में सरकार को चेतावनी भी दी है।
मॉनसून सत्र और सत्रावसान पर सवाल
अपनी इस चिट्ठी में खड़गे ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मॉनसून सत्र के स्थगित होने के 64 दिन बीत जाने के बाद भी सत्रावसान (Prorogation) न होने पर आपत्ति जताई है। राजनीतिक गलियारों में इस चौथी चिट्ठी के बाद परिसीमन विधेयक को लेकर बहस और तेज हो गई है।

नाना पाटेकर के आखिरी पल: बेटे मल्हार ने सुनाया भावुक किस्सा
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन को लेकर उनके बेटे मल्हार ने आखिरी पलों की पूरी कहानी साझा की है। मल्हार ने बताया कि गोवा में बिताए उन अंतिम पलों में क्या हुआ था और कैसे उनके भाई अमय के पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी।
गोवा में थे नाना पाटेकर
मल्हार के अनुसार, अपने निधन के समय नानाजी गोवा में मौजूद थे। उन्हें वहां पूरी तरह से सेटल और कम्फर्टेबल करने के बाद उनका दूसरा बेटा अमय वापस लौट गया था। नाना पाटेकर का स्वभाव हमेशा से ऐसा था कि वे कभी भी किसी को परेशान करना पसंद नहीं करते थे और खुद ही अपनी देखभाल करते थे।
उस रात क्या हुआ था
उस रात अचानक जब नाना पाटेकर को कुछ शारीरिक अस्वस्थता या दिक्कत महसूस हुई, तो उन्होंने तुरंत अमय को एक मैसेज भेजा। मैसेज भेजने के थोड़ी देर बाद ही उन्होंने अमय को सीधे कॉल भी किया, ताकि वह उनके पास पहुँच सके।
पहुंचने में हो गई देर
मैसेज और कॉल मिलने के तुरंत बाद अमय बिना कोई वक्त गंवाए उनके पास पहुंचा। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब तक अमय वहां पहुंचा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। इस दुखद घटना के बाद से ही फैंस और बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।

भारत के लिए बड़ी राहत: ट्रंप ने 100% टैरिफ का खतरा टाला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और 100% टैरिफ को अस्थायी रूप से टाल दिया है। इससे भारत और चीन को बड़ी राहत मिली है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की समयसीमा समाप्त हो रही थी, लेकिन ट्रंप ने इसे अमेरिकी राष्ट्रीय हित में आगे बढ़ा दिया है।
ट्रंप का बड़ा फैसला और राष्ट्रीय हित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस हालिया फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ की योजनाओं को अस्थायी रूप से स्थगित करने की घोषणा की है। राष्ट्रपति ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि छूट देने का यह फैसला पूरी तरह से अमेरिका के अपने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
भारत और चीन को मिला सीधे राहत का फायदा
रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा 100% तक का भारी टैरिफ लगाने की योजना बनाई जा रही थी। यदि यह टैरिफ लागू हो जाता, तो भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। इस फैसले के टलने की समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी, जिससे ठीक पहले अमेरिका ने यह ढील देकर दोनों देशों को एक बड़ी राहत दी है।
अस्थायी है छूट का यह फैसला
हालाँकि, इस राहत के साथ एक बात साफ है कि यह छूट केवल अस्थायी समय के लिए दी गई है। अमेरिकी प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि स्थितियों और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस रोक को कभी भी हटाया जा सकता है और टैरिफ को दोबारा लागू किया जा सकता है। फिलहाल भारत के पास अपने ऊर्जा आयात और आर्थिक नीतियों को संतुलित करने का एक अहम मौका मिल गया है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App