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सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान कौन हैं सफेद शर्ट में नजर आईं जन्नत बिश्नोई?

सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान कौन हैं सफेद शर्ट में नजर आईं जन्नत बिश्नोई?

Delight News
📅 13 Oct2026

सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ ट्रक पर खड़े होकर नारे लगाने वाली युवती का नाम जन्नत बिश्नोई है। वह डीयूएसयू की एग्जीक्यूटिव काउंसलर और एनएसयूआई की सदस्य हैं। राजस्थान की रहने वाली जन्नत श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में बीए सेकंड ईयर की छात्रा हैं।

सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान कौन हैं सफेद शर्ट में नजर आईं जन्नत बिश्नोई?
खबर का निचोड़
सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ ट्रक पर खड़े होकर नारे लगाने वाली युवती का नाम जन्नत बिश्नोई है। वह डीयूएसयू की एग्जीक्यूटिव काउंसलर और एनएसयूआई की सदस्य हैं। राजस्थान की रहने वाली जन्नत श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में बीए सेकंड ईयर की छात्रा हैं।
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सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान चर्चा में आई युवती
हाल ही में हुए सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक खास चेहरे ने सबका ध्यान खींचा। राहुल गांधी के साथ एक ट्रक पर चढ़कर नारे लगाने वाली सफेद शर्ट पहने एक युवती इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
जन्नत बिश्नोई के रूप में हुई पहचान
तस्वीरों और वीडियो में नजर आईं इस युवा चेहरे की पहचान जन्नत बिश्नोई के रूप में हुई है। वह वर्तमान में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) की एग्जीक्यूटिव काउंसलर होने के साथ-साथ एनएसयूआई (NSUI) की सक्रिय सदस्य भी हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सामाजिक सक्रियता
मूल रूप से राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली जन्नत बिश्नोई दिल्ली के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में बीए सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह कॉलेज और छात्र राजनीति के माध्यम से महिला सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं।
रामलीला मैदान: ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह जिसने हिलाई सरकारों की नींव

रामलीला मैदान: ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह जिसने हिलाई सरकारों की नींव

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📅 13 Oct2026

दिल्ली का रामलीला मैदान देश के दो सबसे बड़े ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह रहा है, जिसने केंद्र सरकारों की नींव हिला दी थी। वर्ष 1975 में जयप्रकाश नारायण और 2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन यहीं से शुरू हुआ था, जिसके बाद देश की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव आए थे।

रामलीला मैदान: ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह जिसने हिलाई सरकारों की नींव
खबर का निचोड़
दिल्ली का रामलीला मैदान देश के दो सबसे बड़े ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह रहा है, जिसने केंद्र सरकारों की नींव हिला दी थी। वर्ष 1975 में जयप्रकाश नारायण और 2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन यहीं से शुरू हुआ था, जिसके बाद देश की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव आए थे।
मुख्य आर्टिकल
दिल्ली का ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल रामलीला मैदान
दिल्ली के नए आधिकारिक प्रदर्शन स्थल रामलीला मैदान का भारतीय राजनीति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थान रहा है। यह वही मैदान है जिसने देश के दो सबसे बड़े जन आंदोलनों को दिशा दी और केंद्र में सत्तासीन सरकारों को बैकफुट पर धकेल दिया।
1975 का जेपी आंदोलन और आपातकाल
रामलीला मैदान का पहला बड़ा ऐतिहासिक मोड़ साल 1975 में आया, जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में विशाल जन आंदोलन हुआ। इस आंदोलन के देशव्यापी प्रभाव को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी। इसके परिणामस्वरूप 1977 के चुनावों में कांग्रेस सरकार को पहली बार करारी हार का सामना करना पड़ा था।
2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन
दूसरी बड़ी राजनीतिक क्रांति वर्ष 2011 में इसी मैदान से देखने को मिली, जब अन्ना हजारे के नेतृत्व में इंडिया अगेंस्ट करप्शन का ऐतिहासिक आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन ने पूरे देश के युवाओं और आम नागरिकों को एकजुट कर दिया था।
देश की राजनीति पर पड़ा दूरगामी असर
अन्ना हजारे के इस जन आंदोलन का राजनीतिक परिदृश्य पर इतना गहरा असर पड़ा कि 2014 के आम चुनावों में केंद्र की कांग्रेस सरकार गिर गई। रामलीला मैदान से उठे इन दोनों आंदोलनों ने साबित कर दिया कि यह स्थान भारतीय लोकतंत्र में जनक्रांति और राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है।
रामलीला मैदान: ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह जिसने हिलाई सरकारों की नींव

रामलीला मैदान: ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह जिसने हिलाई सरकारों की नींव

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📅 13 Oct2026

दिल्ली का रामलीला मैदान देश के दो सबसे बड़े ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह रहा है, जिसने केंद्र सरकारों की नींव हिला दी थी। वर्ष 1975 में जयप्रकाश नारायण और 2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन यहीं से शुरू हुआ था, जिसके बाद देश की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव आए थे।

रामलीला मैदान: ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह जिसने हिलाई सरकारों की नींव
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दिल्ली का रामलीला मैदान देश के दो सबसे बड़े ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह रहा है, जिसने केंद्र सरकारों की नींव हिला दी थी। वर्ष 1975 में जयप्रकाश नारायण और 2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन यहीं से शुरू हुआ था, जिसके बाद देश की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव आए थे।
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दिल्ली का ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल रामलीला मैदान
दिल्ली के नए आधिकारिक प्रदर्शन स्थल रामलीला मैदान का भारतीय राजनीति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थान रहा है। यह वही मैदान है जिसने देश के दो सबसे बड़े जन आंदोलनों को दिशा दी और केंद्र में सत्तासीन सरकारों को बैकफुट पर धकेल दिया।
1975 का जेपी आंदोलन और आपातकाल
रामलीला मैदान का पहला बड़ा ऐतिहासिक मोड़ साल 1975 में आया, जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में विशाल जन आंदोलन हुआ। इस आंदोलन के देशव्यापी प्रभाव को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी। इसके परिणामस्वरूप 1977 के चुनावों में कांग्रेस सरकार को पहली बार करारी हार का सामना करना पड़ा था।
2011 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन
दूसरी बड़ी राजनीतिक क्रांति वर्ष 2011 में इसी मैदान से देखने को मिली, जब अन्ना हजारे के नेतृत्व में इंडिया अगेंस्ट करप्शन का ऐतिहासिक आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन ने पूरे देश के युवाओं और आम नागरिकों को एकजुट कर दिया था।
देश की राजनीति पर पड़ा दूरगामी असर
अन्ना हजारे के इस जन आंदोलन का राजनीतिक परिदृश्य पर इतना गहरा असर पड़ा कि 2014 के आम चुनावों में केंद्र की कांग्रेस सरकार गिर गई। रामलीला मैदान से उठे इन दोनों आंदोलनों ने साबित कर दिया कि यह स्थान भारतीय लोकतंत्र में जनक्रांति और राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है।
कॉन्ग्रेस के मार्च पर कॉकरोच पार्टी की प्रतिक्रिया: आशुतोष रांका का बयान

कॉन्ग्रेस के मार्च पर कॉकरोच पार्टी की प्रतिक्रिया: आशुतोष रांका का बयान

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📅 13 Oct2026

​कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया, जिसमें सीजेपी का कोई सदस्य शामिल नहीं था। इस पर सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि समर्थन देने के लिए एक मंच पर होना जरूरी नहीं है और जो भी ज्ञानेश के इस्तीफे की मांग कर रहा है, सीजेपी उनके साथ है।

कॉन्ग्रेस के मार्च पर कॉकरोच पार्टी की प्रतिक्रिया: आशुतोष रांका का बयान
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कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया, जिसमें सीजेपी का कोई सदस्य शामिल नहीं था। इस पर सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि समर्थन देने के लिए एक मंच पर होना जरूरी नहीं है और जो भी ज्ञानेश के इस्तीफे की मांग कर रहा है, सीजेपी उनके साथ है।
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सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और विपक्ष का प्रदर्शन
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के खिलाफ विपक्ष लगातार मुखर नजर आ रहा है। इसी कड़ी में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक एक मार्च निकाला। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करना और अपनी मांगों को मजबूती से रखना था।
सीजेपी की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
इस मार्च के दौरान राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि इसमें सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) का कोई भी सदस्य नजर क्यों नहीं आया। विपक्ष के इस बड़े शक्ति प्रदर्शन में एक प्रमुख दल की दूरी ने कई तरह के राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया था, जिसके बाद इस पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी हो गया था।
आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया पार्टी का रुख
इन तमाम चर्चाओं और सवालों के बीच सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सामने आकर पार्टी की स्थिति को पूरी तरह साफ किया। उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर अपना समर्थन देने के लिए यह कतई जरूरी नहीं है कि सभी दल एक ही मंच पर या एक साथ मार्च में मौजूद रहें।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर खुला समर्थन
आशुतोष रांका ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि वैचारिक या रणनीतिक दूरियां भले हों, लेकिन उद्देश्यों में समानता हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दल या नेता ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, सीजेपी सैद्धांतिक रूप से पूरी तरह उनके साथ खड़ी है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में विपक्षी एकता और रणनीति को लेकर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है।
राहुल गांधी और विपक्ष की याचिका में खामियों पर संजय राउत की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी और विपक्ष की याचिका में खामियों पर संजय राउत की प्रतिक्रिया

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📅 13 Oct2026

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में 14 गलतियां पाई गई हैं। इस पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि गलतियां हो सकती हैं और इन्हें ठीक कर लिया जाएगा। उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं।

राहुल गांधी और विपक्ष की याचिका में खामियों पर संजय राउत की प्रतिक्रिया
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राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में 14 गलतियां पाई गई हैं। इस पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि गलतियां हो सकती हैं और इन्हें ठीक कर लिया जाएगा। उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर विवाद
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की तरफ से चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में कई कमियों और 14 प्रकार की गलतियों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों के इस कदम को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस छिड़ गई है।
संजय राउत का बयान और गलतियों पर सफाई
याचिका में सामने आई इन कमियों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि काम के दौरान इंसानों से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मुद्दा खत्म हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन कमियों को जल्द ही सुधार लिया जाएगा और याचिका में जरूरी संशोधन कर लिए जाएंगे।
चुनाव आयोग और ज्ञानेश् कुमार पर गंभीर आरोप
संजय राउत ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने सीधे तौर पर ज्ञानेश्व कुमार का इस्तीफा मांगा और कहा कि चुनाव आयोग के भीतर चल रहे कथित घोटालों को रोकना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग दोहराई है।

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