
पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत 'मांगरोल': भारतीय नौसेना की नई ताकत *
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित तीसरी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) 'मांगरोल' को मुंबई के नवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है। यह तटीय और उथले पानी में छुपे खतरों से निपटने में सक्षम है।
सारांश
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित तीसरी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) 'मांगरोल' को मुंबई के नवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है। यह तटीय और उथले पानी में छुपे खतरों से निपटने में सक्षम है।
पोत का परिचय और नामकरण
'मांगरोल' कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि द्वारा निर्मित माहे-श्रेणी का तीसरा स्वदेशी युद्धक पोत है। इसका नामकरण गुजरात के जूनागढ़ जिले के ऐतिहासिक तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह 'मांगरोल' के नाम पर किया गया है। यह पोत अप्रैल 2004 में सेवामुक्त किए गए माइनस्वीपर 'आईएनएस मांगरोल' की विरासत को आगे बढ़ाता है। इस पोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों का उपयोग किया गया है, जो 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की सफलता को दर्शाता है।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ एवं हथियार प्रणाली
यह पोत आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है, जो इसे सामरिक रूप से बेहद मजबूत बनाते हैं। इसमें 'अभय'Hull-Mounted Sonar, हल्की टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और 'मारीच' एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल हैं। जलजेट प्रोपल्शन (Waterjet propulsion) से जुड़े तीन डीजल इंजन इसे उथले पानी में उच्च गति और बेहतर युद्धाभ्यास (maneuverability) की क्षमता प्रदान करते हैं।
रणनीतिक भूमिका और संचालन क्षेत्र
इस पोत का मुख्य कार्य तटीय और उथले क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना है। पनडुब्बी रोधी अभियानों के अतिरिक्त, यह पानी के नीचे की निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (LIMO) और बारूदी सुरंग युद्ध (mine warfare) से जुड़े कार्यों को अंजाम दे सकता है। यह पोत समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त अभियान चलाने में सक्षम है।
राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्व
'मांगरोल' का भारतीय नौसेना में शामिल होना बंदरगाहों, तटीय इलाकों और समुद्री पहुंच मार्गों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करता है। तटीय क्षेत्रों में बड़े युद्धपोतों की परिचालन सीमाओं को देखते हुए, यह उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए नौसेना की प्रभावशीलता को व्यापक स्तर पर बढ़ाता है।

पौंग बांध सुरक्षा: प्रतिबंधित क्षेत्र में नौकाओं की घुसपैठ *
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पौंग बांध (महाराणा प्रताप सागर) के प्रतिबंधित और आरक्षित क्षेत्रों में मछली पकड़ने वाली नौकाओं की आवाजाही और जाल बिछाए जाने की घटनाओं ने गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
सारांश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पौंग बांध (महाराणा प्रताप सागर) के प्रतिबंधित और आरक्षित क्षेत्रों में मछली पकड़ने वाली नौकाओं की आवाजाही और जाल बिछाए जाने की घटनाओं ने गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
पौंग बांध की भौगोलिक स्थिति एवं निर्माण
पौंग बांध, जिसे ब्यास बांध के नाम से भी जाना जाता है, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शिवालिक पहाड़ियों के आर्द्रभूमि क्षेत्र में ब्यास नदी पर निर्मित एक मिट्टी से भरा हुआ (earth-fill) तटबंध बांध है। इस बांध का निर्माण कार्य 1961 में शुरू हुआ और 1974 में पूरा हुआ था। उस समय इसे देश में अपने प्रकार का सबसे ऊंचा बांध माना गया था। इसकी ऊंचाई लगभग 133 मीटर और आधार पर चौड़ाई 610 मीटर है। इस बांध के निर्माण से 'महाराणा प्रताप सागर' नामक एक कृत्रिम झील का निर्माण हुआ है।
उद्देश्य और जल प्रबंधन
इस बांध का मुख्य उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन और कृषि के लिए सिंचाई की सुविधा प्रदान करना है। बांध के स्पिलवे को दक्षिण दिशा में बने छह रेडियल गेटों द्वारा नियंत्रित किया जाता है और इसके आधार पर एक पावर हाउस स्थित है। यह झील बारहमासी ब्यास नदी का विस्तार है जो रोहतांग दर्रे से निकलती है, जिसके कारण इसमें पूरे वर्ष पर्याप्त जल स्तर बना रहता है। धौलाधार पर्वत श्रृंखलाएं इस झील को चारों ओर से घेरे हुए हैं।
पारिस्थितिक महत्व और रामसर स्थल
विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैली यह झील अपनी समृद्ध जलपक्षी विविधता के कारण वर्ष 1983 में एक पक्षी अभयारण्य घोषित की गई थी। समय के साथ यह प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख आश्रय स्थल के रूप में उभरी, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2002 में इसे 'रामसर आर्द्रभूमि स्थल' (Ramsar Wetland Site) के रूप में नामित किया गया। यहाँ बार-हेडेड गूज, रेड-नेक ग्रीब, कॉमन टील और ब्लैक स्टॉर्क जैसी कई पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त, यह क्षेत्र वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए एक महत्वपूर्ण मछली प्रजनन केंद्र भी है।
सुरक्षा उल्लंघन और प्रशासनिक कार्रवाई
हाल ही में बांध के दाहिने बैरियर और रिजर्व जोन जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत नौकाओं की आवाजाही और जाल बिछाए जाने की खबरों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी के बाद मत्स्य विभाग और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, लाइसेंस रद्द करने तथा जाल व नावें जब्त करने के निर्देश जारी किए हैं।

माली गणराज्य: भौगोलिक विशेषताएँ और वैश्विक कपास दिवस *
भारत और माली के स्थायी मिशनों द्वारा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त रूप से 'विश्व कपास दिवस' का आयोजन किया गया। पश्चिम अफ्रीका में स्थित माली एक भू-आवेष्ठित देश है, जिसका एक बड़ा भूभाग मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत आता है।
सारांश
भारत और माली के स्थायी मिशनों द्वारा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त रूप से 'विश्व कपास दिवस' का आयोजन किया गया। पश्चिम अफ्रीका में स्थित माली एक भू-आवेष्ठित देश है, जिसका एक बड़ा भूभाग मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत आता है।
माली की भौगोलिक स्थिति एवं सीमाएँ
माली पश्चिम अफ्रीका में स्थित एक भू-आवेष्ठित (Landlocked) देश है जिसकी राजधानी बमाको है। यह चारों तरफ से अन्य अफ्रीकी देशों से घिरा हुआ है। इसके उत्तर में अल्जीरिया, पूर्व में नाइजर और बुर्किना फासो, दक्षिण में कोट डी आइवर और गिनी, तथा पश्चिम में सेनेगल और मॉरिटानिया देश स्थित हैं। यह क्षेत्र भू-राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
स्थलाकृति और जलवायु परिवर्तन
माली की स्थलाकृति और जलवायु में उत्तर से दक्षिण की ओर स्पष्ट भिन्नता पाई जाती है। देश का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा मरुस्थल या अर्द्ध-मरुस्थल से आच्छादित है, जिसमें सहारा मरुस्थल का एक बड़ा हिस्सा शामिल है। यहाँ की जलवायु उत्तर में मरुस्थलीय और दक्षिण में उष्णकटिबंधीय सवाना प्रकार की है। देश का परिदृश्य उत्तर में सहारा मरुस्थल से होते हुए साहेल क्षेत्र से गुजरते हुए दक्षिण में सूडानी सवाना क्षेत्र तक विस्तृत है।
नदी प्रणाली और प्राकृतिक संसाधन
नाइजर नदी माली के आंतरिक भाग से बहने वाली मुख्य जलधारा है, जो इस क्षेत्र की कृषि और बस्तियों के लिए जीवन रेखा का काम करती है। देश का सर्वोच्च बिंदु 'होम्बोरी टोंडो' (Hombori Tondo) है, जिसकी ऊंचाई 1,155 मीटर है। इसके अतिरिक्त, खनिज संसाधनों के मामले में यह देश अत्यंत समृद्ध है, जहाँ सोना, यूरेनियम, हीरे, तांबा, लौह अयस्क, जस्ता, मैंगनीज और बॉक्साइट जैसे बहुमूल्य खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
वैश्विक कपास दिवस और द्विपक्षीय संबंध
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विश्व कपास दिवस के अवसर पर भारत और माली ने कपास आधारित आजीविका, मूल्य संवर्धन और सतत विकास पर जोर दिया। वैश्विक स्तर पर कपास उत्पादक देशों के लिए माली की स्थिति महत्वपूर्ण है, और संयुक्त मंचों पर इस प्रकार के आयोजन विकासशील देशों के मध्य कृषि कूटनीति और आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ करते हैं।

सिपाहीजाला वन्यजीव अभयारण्य: रॉयल बंगाल टाइगर का आगमन *
त्रिपुरा स्थित सिपाहीजाला वन्यजीव अभयारण्य के चिड़ियाघर में हाल ही में तीन नए रॉयल बंगाल टाइगर शावकों का जन्म हुआ है। इन नए शावकों के आगमन से इस चिड़ियाघर में बाघों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है। यह विकास क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों की सफलता को रेखांकित करता है।
सारांश
त्रिपुरा स्थित सिपाहीजाला वन्यजीव अभयारण्य के चिड़ियाघर में हाल ही में तीन नए रॉयल बंगाल टाइगर शावकों का जन्म हुआ है। इन नए शावकों के आगमन से इस चिड़ियाघर में बाघों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है। यह विकास क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों की सफलता को रेखांकित करता है।
अभयारण्य की भौगोलिक स्थिति एवं विशेषताएँ
सिपाहीजाला वन्यजीव अभयारण्य भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में स्थित एक प्रमुख संरक्षित क्षेत्र है। इस अभयारण्य के भीतर दो प्राकृतिक झीलें - 'अवसारिका' (Abasarika) और 'अमृत सागर' स्थित हैं, जो स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श जल स्रोत और आवास प्रदान करती हैं। वर्ष 2007 में इस अभयारण्य के कोर क्षेत्र के भीतर 'क्लाउडेड लेपर्ड नेशनल पार्क' (Clouded Leopard National Park) की स्थापना की गई थी।
वनस्पति और पारिस्थितिकी तंत्र
अभयारण्य का अधिकांश क्षेत्र आर्द्र पर्णपाती वनों (Moist Deciduous Forests) से आच्छादित है। इस अभयारण्य में पौधों की लगभग 456 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें मुख्य रूप से साल (Sal), चामल, गर्जन और कनक जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, द्वितीयक प्रजातियों के रूप में पिछला, कुरचा, आंवला, बहेड़ा, हरगजा, बांस और विभिन्न प्रकार की घासों का समृद्ध आवरण मौजूद है, जो स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखता है।
जैव विविधता और प्राणिजात (Fauna)
सिपाहीजाला अभयारण्य प्राइमेट्स (Primates) की विभिन्न प्रजातियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ रीसस मैकाक, पिगटेल्ड मैकाक, कैप्ड लंगूर, चश्माधारी लंगूर (Spectacled Monkey) और स्लो लोरिस जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त, यह तेंदुए, क्लाउडेड लेपर्ड, जंगली मुर्गी, सिवेट, भौंकने वाले हिरण (Barking Deer) और जंगली सुअर का भी प्राकृतिक आवास है। यहाँ केकड़ा खाने वाले नेवले (Crab-eating Mongoose) का भी पुनरुद्धार देखा गया है।
पक्षी जीवन और संरक्षण महत्व
यह अभयारण्य पक्षी प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ विभिन्न प्रकार के पंख वाले स्टॉर्क, व्हिसलिंग टील (Whistling Teal) और सफेद इबिस (White Ibis) जैसी एवियन प्रजातियाँ पाई जाती हैं। सिपाहीजाला ज़ूोलॉजिकल पार्क में पूर्वोत्तर भारत के वन्यजीवों के पूर्व-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation) और अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026: मुख्य निष्कर्ष *
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNCTAD) द्वारा जारी 'व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026' के अनुसार, वर्ष 2020-25 के दौरान वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत रही, जो चीन की हिस्सेदारी से दोगुनी से अधिक है। रिपोर्ट में भारत को 7.3 प्रतिशत की विकास दर के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया गया है।
सारांश
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNCTAD) द्वारा जारी 'व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026' के अनुसार, वर्ष 2020-25 के दौरान वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत रही, जो चीन की हिस्सेदारी से दोगुनी से अधिक है। रिपोर्ट में भारत को 7.3 प्रतिशत की विकास दर के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया गया है।
रिपोर्ट की पृष्ठभूमि एवं परिचय
'व्यापार और विकास रिपोर्ट' संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNCTAD) द्वारा वर्ष 1981 से प्रतिवर्ष जारी की जाने वाली एक प्रमुख रिपोर्ट है। यह वार्षिक प्रकाशन वैश्विक आर्थिक रुझानों, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति, वित्तीय संरचना और विकासशील देशों के सामने मौजूद चुनौतियों का व्यापक विश्लेषण प्रदान करता है।
वैश्विक आर्थिक रुझान एवं व्यापार परिदृश्य
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक विकास दर वर्ष 2026 में घटकर 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बावजूद, वर्ष 2026 में वैश्विक व्यापार में 4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है। वैश्विक विकास में एशिया की हिस्सेदारी सर्वाधिक 59 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024 के बाद से चीन और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
रणनीतिक क्षेत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
वर्ष 2020 से 2025 की अवधि में कुल वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में रणनीतिक क्षेत्रों की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई है। इन रणनीतिक क्षेत्रों में एआई (AI) अवसंरचना और संबंधित प्रौद्योगिकियों ने 12.4 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा योगदान आकर्षित किया है। इसके बाद सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन (8.1 प्रतिशत) और ऊर्जा संक्रमण प्रौद्योगिकियों (7.8 प्रतिशत) का स्थान रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरण वर्तमान में मर्चेंडाइज व्यापार के प्रमुख चालक के रूप में उभर रहे हैं।
भारत केंद्रित मुख्य निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020-25 के दौरान वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत रही, जबकि मलेशिया (4 प्रतिशत), इंडोनेशिया (3.8 प्रतिशत) और चीन (2.8 प्रतिशत) क्रमशः इसके बाद रहे। भारत मजबूत घरेलू मांग, बढ़ती विनिर्माण क्षमता और सार्वजनिक अवसंरचना कार्यक्रमों के बल पर 2026 में 7.3 प्रतिशत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। औद्योगिक नीतियों के कार्यान्वयन में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल रहा है।
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