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सेवा-II जलविद्युत परियोजना: सुरक्षा और अवसंरचनात्मक विशेषताएं

सेवा-II जलविद्युत परियोजना: सुरक्षा और अवसंरचनात्मक विशेषताएं

Delight News
📅 04 Oct2026

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में स्थित सेवा-II जलविद्युत परियोजना अपनी सुरक्षा इकाई में हुई आंतरिक हिंसा के कारण चर्चा में रही है। यह 120 मेगावाट क्षमता की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है, जिसका संचालन नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) द्वारा किया जाता है।

शीर्षक (Title):
सेवा-II जलविद्युत परियोजना: सुरक्षा और अवसंरचनात्मक विशेषताएं
सारांश (Summary):
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में स्थित सेवा-II जलविद्युत परियोजना अपनी सुरक्षा इकाई में हुई आंतरिक हिंसा के कारण चर्चा में रही है। यह 120 मेगावाट क्षमता की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है, जिसका संचालन नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) द्वारा किया जाता है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
भौगोलिक स्थिति और अवस्थिति
सेवा-II जलविद्युत परियोजना केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। यह परियोजना रावी नदी की एक प्रमुख सहायक नदी 'सेवा नदी' पर विकसित की गई है। इस परियोजना का निर्माण हिमालयी क्षेत्र की जल विद्युत क्षमताओं का दोहन करने के लिए किया गया है।
तकनीकी और संरचनात्मक विशेषताएं
यह एक कंक्रीट ग्रेविटी-प्रकार का बांध है, जिसकी ऊंचाई 53 मीटर और लंबाई 114 मीटर है। इसमें 3.3 मीटर व्यास और 10.084 किलोमीटर लंबी घोड़े की नाल (घोड़दौड़) के आकार की हेडरेस सुरंग बनाई गई है। इसकी सतह पर बने पावरहाउस की स्थापित क्षमता 120 मेगावाट है, जिसमें 40-40 मेगावाट की तीन इकाइयां शामिल हैं।
परिचालन और वाणिज्यिक विवरण
इस परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुआ था और इसने वर्ष 2010 से अपने वाणिज्यिक परिचालन की शुरुआत की थी। इस संपूर्ण जलविद्युत परियोजना का रखरखाव और संचालन नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHPC) द्वारा किया जाता है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के अलावा उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों को बिजली लाभ प्रदान करती है।
अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 153वीं महासभा और भारतीय प्रतिनिधिमंडल

अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 153वीं महासभा और भारतीय प्रतिनिधिमंडल

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📅 04 Oct2026

राज्यसभा के उपसभापति के नेतृत्व में एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल तंजानिया के अरुषा में आयोजित होने वाली अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 153वीं महासभा में भाग लेने के लिए रवाना हुआ है। यह वैश्विक मंच दुनिया भर के संसदों को लोकतांत्रिक शासन, शांति और सतत विकास के लिए एकजुट करता है।

शीर्षक (Title):
अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 153वीं महासभा और भारतीय प्रतिनिधिमंडल
सारांश (Summary):
राज्यसभा के उपसभापति के नेतृत्व में एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल तंजानिया के अरुषा में आयोजित होने वाली अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 153वीं महासभा में भाग लेने के लिए रवाना हुआ है। यह वैश्विक मंच दुनिया भर के संसदों को लोकतांत्रिक शासन, शांति और सतत विकास के लिए एकजुट करता है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय और स्थापना
अंतर-संसदीय संघ (IPU) संसदों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1889 में पेरिस में प्रतिनिधि लोकतंत्र और विश्व शांति को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसका मुख्यालय 1921 से जिनेवा में स्थित है। यह राजनीतिक संवाद और संसदीय सहयोग के माध्यम से मानवाधिकारों, लैंगिक समानता, युवा अधिकारिता और जलवायु कार्रवाई के लिए कार्य करता है।
सदस्यता और प्रशासनिक संरचना
वर्तमान में इसमें 183 सदस्य संसदें और 15 सहयोगी सदस्य शामिल हैं। इसकी मुख्य शासी संस्थाओं में 'आईपीयू महासभा' (IPU Assembly) शामिल है, जो राजनीतिक मुद्दों पर विचार व्यक्त करती है। इसकी पूर्ण नीति-निर्माण संस्था 'शासी परिषद' (Governing Council) है, जो वार्षिक कार्यक्रम और बजट तय करती है। इसके अलावा कार्यकारी और स्थायी समितियाँ इसके सुचारू संचालन में सहायता करती हैं।
153वीं महासभा का आयोजन
IPU की 153वीं महासभा तंजानिया के अरुषा में आयोजित की जा रही है। इस सम्मेलन का मुख्य विषय समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के माध्यम से सुशासन को बढ़ाना और समुदायों को सशक्त बनाना है। इस बैठक के दौरान वैश्विक मंच पर नए आईपीयू अध्यक्ष का चुनाव भी संपन्न होना है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल इस वैश्विक सम्मेलन में आतंकवाद के मुकाबले, जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और सतत विकास जैसे समकालीन वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहा है। इसके सदस्य लोकतंत्र, मानवाधिकार और संसदीय कूटनीति से जुड़ी विभिन्न बैठकों और पैनल चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व: पेड़ों की गर्डलिंग और संरक्षण से जुड़े मुद्दे

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व: पेड़ों की गर्डलिंग और संरक्षण से जुड़े मुद्दे

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📅 04 Oct2026

छत्तीसगढ़ स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के करका क्षेत्र में हालिया निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों (विशेषकर साल, बीजा और तेंदू) की गर्डलिंग का मामला सामने आया है। यह रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, उष्णकटिबंधीय शुष्क और नम पर्णपाती वनों तथा वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।

शीर्षक (Title):
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व: पेड़ों की गर्डलिंग और संरक्षण से जुड़े मुद्दे
सारांश (Summary):
छत्तीसगढ़ स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के करका क्षेत्र में हालिया निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों (विशेषकर साल, बीजा और तेंदू) की गर्डलिंग का मामला सामने आया है। यह रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, उष्णकटिबंधीय शुष्क और नम पर्णपाती वनों तथा वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
विस्थिति विश्लेषण (Detailed Analysis):
भौगोलिक स्थिति और स्थापना
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है। यह रिजर्व सीतानदी और उदंती वन्यजीव अभयारण्यों के क्षेत्रों को मिलाकर स्थापित किया गया था। भौगोलिक रूप से, यह रिजर्व मध्य भारत की पूर्वी उच्चभूमि (Eastern Highlands) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।
नदियाँ और स्थलाकृति
इस रिजर्व की जल निकासी प्रणाली में महानदी मुख्य नदी है, जबकि उदंती, सीतानदी, इंद्रावन और पैरी नदियाँ इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। इस संरक्षित क्षेत्र में लगभग 19 नामित पहाड़ियाँ हैं, जिनमें देव डोंगरी सबसे ऊँचा बिंदु है और अटांगा डोंगर सबसे प्रमुख पहाड़ी है।
वनस्पति और पादप जगत
यहाँ के वन मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय शुष्क और नम पर्णपाती (Tropical Dry and Moist Deciduous) प्रकार के हैं। वनों में मुख्य रूप से साल (शोरिया रोबस्टा) की प्रधानता है, जो घने पैच बनाते हैं। इसके अलावा सागवान (टीक), बांस, तेंदू, महुआ, बीजा और हर्रा जैसे पेड़ इस क्षेत्र की हरित विविधता में योगदान करते हैं।
जीव-जंतु और संरक्षण स्थिति
यह टाइगर रिजर्व जंगली भैंसा (Wild Buffalo), बाघ, भारतीय भेड़िया, तेंदुआ, सुस्त भालू (Sloth Bear), और माउस डियर जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। यह क्षेत्र मध्य भारतीय परिदृश्य में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संतुलन के लिए अत्यधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है।
पश्चिमी घाट में खोजी गई केंचुए की नई प्रजाति: ड्राविडा इनकमपैराबिलिस

पश्चिमी घाट में खोजी गई केंचुए की नई प्रजाति: ड्राविडा इनकमपैराबिलिस

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📅 04 Oct2026

शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट के सदाबहार और पर्णपाती जंगलों से केंचुए की एक नई प्रजाति 'ड्राविडा इनकमपैराबिलिस' (Drawida incomparabilis) की खोज की है। यह मोनिलीगैस्ट्रिडे परिवार से संबंधित है और एशियाई भूमिगत पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शीर्षक (Title):
पश्चिमी घाट में खोजी गई केंचुए की नई प्रजाति: ड्राविडा इनकमपैराबिलिस
सारांश (Summary):
शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट के सदाबहार और पर्णपाती जंगलों से केंचुए की एक नई प्रजाति 'ड्राविडा इनकमपैराबिलिस' (Drawida incomparabilis) की खोज की है। यह मोनिलीगैस्ट्रिडे परिवार से संबंधित है और एशियाई भूमिगत पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
खोज और भौगोलिक स्थिति
केंचुए की इस नई प्रजाति की खोज दक्षिणी राज्यों केरल और तमिलनाडु में फैली पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला के गहरे और घने जंगलों के भीतर की गई है। यह क्षेत्र अपनी समृद्ध और अद्वितीय जैव विविधता के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है।
शारीरिक विशेषताएं और वर्गीकरण
यह एक अपेक्षाकृत बड़ा केंचुआ है, जिसकी लंबाई 217 से 392 मिलीमीटर के बीच होती है। इसमें विशिष्ट ग्रंथि संबंधी प्रोस्टेट और इसके गिजार्ड (Gizzard) के लिए एक असामान्य रूप से पीछे की स्थिति पाई जाती है। यह प्रजाति 'मोनिलीगैस्ट्रिडे' (Moniligastridae) परिवार से ताल्लुक रखती है, जो स्थलीय मेगाड्रिल केंचुओं का एक विविध समूह है जिसमें पाँच वंशों में 194 वैध प्रजातियाँ शामिल हैं। इनमें 'ड्राविडा' (Drawida) वंश सबसे अधिक प्रजाति-समृद्ध है।
केंचुओं की सामान्य विशेषताएं और पारिस्थितिक महत्व
केंचुए मिट्टी के हानिरहित और अत्यधिक लाभदायक जीव हैं, जो दुनिया की लगभग उन सभी मिट्टियों में पाए जाते हैं जहाँ नमी और कार्बनिक पदार्थ पर्याप्त मात्रा में मौजूद हों। इनके शरीर में अंगूठी जैसे खंड होते हैं और ये फेफड़ों के बिना अपनी त्वचा के माध्यम से सांस लेते हैं। केंचुओं में आँखें नहीं होती हैं, इसके बजाय वे प्रकाश, स्पर्श, कंपन और रसायनों का पता लगाने के लिए अपनी त्वचा में विशेष रिसेप्टर कोशिकाओं का उपयोग करते हैं। इनके शरीर में पाँच 'हृदय' होते हैं और ये सड़े-गले पौधों व अन्य जीवों को खाकर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।
नेवी मरीन एक्सपेडिशनरी शिप इंटरडिक्शन सिस्टम (NMESIS) और रणनीतिक महत्व

नेवी मरीन एक्सपेडिशनरी शिप इंटरडिक्शन सिस्टम (NMESIS) और रणनीतिक महत्व

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📅 04 Oct2026

अमेरिकी सेना द्वारा ताइवान के निकट जापान के योनागुनी द्वीप पर एनमेसिस (NMESIS) एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर तैनात किया जा रहा है। यह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स के लिए विकसित एक उन्नत ग्राउंड-बेस्ड एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में समुद्री युद्धक क्षमता को मजबूत करती है।

शीर्षक (Title):
नेवी मरीन एक्सपेडिशनरी शिप इंटरडिक्शन सिस्टम (NMESIS) और रणनीतिक महत्व
सारांश (Summary):
अमेरिकी सेना द्वारा ताइवान के निकट जापान के योनागुनी द्वीप पर एनमेसिस (NMESIS) एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर तैनात किया जा रहा है। यह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स के लिए विकसित एक उन्नत ग्राउंड-बेस्ड एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में समुद्री युद्धक क्षमता को मजबूत करती है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय और उत्पत्ति
नेवी मरीन एक्सपेडिशनरी शिप इंटरडिक्शन सिस्टम (NMESIS) संयुक्त राष्ट्र अमेरिका द्वारा विकसित एक भू-आधारित एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली है। इसे अमेरिकी मरीन कॉर्प्स (USMC) के लिए भूमि से समुद्र पर हमला करने की क्षमताओं का समर्थन करने हेतु डिजाइन किया गया है। वर्ष 2021 में सेवा में शामिल यह प्रणाली दूरदराज और वितरित परिचालन वातावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
तकनीकी संरचना और निर्माण
यह प्रणाली ओशकोश ज्वाइंट लाइट टैक्टिकल व्हीकल (JLTV) के मानव रहित संस्करण के चेसिस पर आधारित है, जिस पर नेवल स्ट्राइक मिसाइल (NSM) माउंट की जाती है। ग्राउंड व्हीकल प्लेटफॉर्म 'ROGUE फायर्स' को ओशकोश डिफेंस द्वारा आपूर्ति किया जाता है, जबकि एनएसएम (NSM) का निर्माण रेथियन और नॉर्वेजियन कंपनी कॉोंग्सबर्ग डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। यह प्रणाली पूरी तरह से स्वायत्त नहीं है, क्योंकि इसके फायर कंट्रोल सिस्टम का संचालन एक मरीन द्वारा किया जाता है।
ROGUE फायर्स की विशेषताएं
यह वाहन उन्नत स्वायत्त वाहन प्रौद्योगिकियों, ऑफ-रोड गतिशीलता और उच्च पेलोड ले जाने की क्षमता से लैस है। इसमें चालक केबिन नहीं होता है और इसे टेलीऑपरेटर या लीडर-फॉलोवर मोड के माध्यम से रिमोट से संचालित किया जाता है। इसकी रेंज इलाके और परिचालन स्थितियों के आधार पर 480 से 640 किलोमीटर के बीच होती है।
नेवल स्ट्राइक मिसाइल (NSM) की विशेषताएं
एनएसएम एक बहु-मिशन क्रूज मिसाइल है जो अत्यधिक सुरक्षित समुद्री और जमीनी लक्ष्यों को बेअसर कर सकती है। इसकी फायरिंग रेंज लगभग 185 किमी है और यह 0.9 मैक की सबसोनिक गति से उड़ान भरती है। इसका मल्टी-मोड गाइडेंस सिस्टम और कम रडार क्रॉस-सेक्शन इसे दुश्मन के रडार से बचने में अत्यधिक प्रभावी बनाता है।

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