
दर्दनाक मलाल: IIT बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामले में मां की रुलाई
IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र की हॉस्टल में खुदकुशी के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक छात्र की मां ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका बेटा संस्थान में प्रताड़ना और जातिगत टिप्पणियों से परेशान था। परिजनों को अब मलाल है कि वे समय रहते उसे घर वापस नहीं लाए।
खबर का निचोड़
IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र की हॉस्टल में खुदकुशी के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक छात्र की मां ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका बेटा संस्थान में प्रताड़ना और जातिगत टिप्पणियों से परेशान था। परिजनों को अब मलाल है कि वे समय रहते उसे घर वापस नहीं लाए।
शिक्षा के प्रीमियम संस्थान में बिखरे उम्मीदों के सपने
देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार IIT बॉम्बे के हॉस्टल से आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 20 वर्षीय होनहार छात्र की असमय मौत ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों के अंदरूनी माहौल पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस उम्र में नए सपनों की उड़ान भरी जाती है, उस उम्र में एक छात्र का इस तरह दुनिया से चले जाना बेहद दुखद और चिंताजनक है।
प्रताड़ना और जातिगत टिप्पणियों का गंभीर आरोप
मृतक छात्र की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बेहद भावुक होकर संस्थान के माहौल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मां के अनुसार, उनके बेटे ने खुद इस बात का जिक्र किया था कि वह हॉस्टल में मानसिक प्रताड़ना और जातिगत टिप्पणियों का सामना कर रहा था। वह परिसर में अलग-थलग महसूस कर रहा था और लगातार बढ़ रहे दबाव से टूट रहा था। इस खुलासे के बाद परिसर में छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है।
एक मां का कभी न मिटने वाला दर्द और मलाल
बेटे की मौत के बाद मां के जुबां से निकले शब्द हर किसी का कलेजा चीर देने वाले हैं। उन्होंने रुंधे गले से कहा, "हम उसे लगातार समझाते रहे कि यह दौर गुजर जाएगा और उसका भविष्य बहुत अच्छा होने वाला है। शायद यह हमारी ही गलती थी। अगर उस दिन हम उसकी बात मानकर उसे अपने साथ घर ले आते, तो आज हमारा बेटा जिंदा होता।" यह मलाल अब जीवन भर इस परिवार का पीछा नहीं छोड़ेगा।
सवालों के घेरे में संस्थान का ढांचा
यह घटना केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि देश के शीर्ष संस्थानों में छात्रों को मिलने वाले मानसिक सहयोग और सामाजिक समानता के दावों की पोल खोलती है। क्या काउंसलिंग और हेल्प डेस्क केवल कागजों तक सीमित हैं? जब कोई छात्र बार-बार मानसिक दबाव और भेदभाव की शिकायत करता है, तो व्यवस्था उसे समय रहते राहत क्यों नहीं दे पाती? पुलिस फिलहाल मामले की गहन जांच में जुटी है और हॉस्टल के सहपाठियों से पूछताछ की जा रही है।

सावधान! बिना पर्ची के दर्द निवारक और एंटीबायोटिक्स लेना पड़ सकता है भारी
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स के सेवन को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाएं लेने से किडनी खराब होने और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। CDSCO ने मेडिकल स्टोर्स को शेड्यूल H और H1 दवाएं बिना पर्ची न बेचने की हिदायत दी है।
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केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स के सेवन को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाएं लेने से किडनी खराब होने और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। CDSCO ने मेडिकल स्टोर्स को शेड्यूल H और H1 दवाएं बिना पर्ची न बेचने की हिदायत दी है।
पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स पर सरकार का बड़ा कदम
मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर के पर्चे की दवाइयां खरीदना अब आपकी सेहत के साथ-साथ जेब पर भी भारी पड़ सकता है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश भर में बिना चिकित्सीय परामर्श के पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स दवाओं की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर एक कड़ा सर्कुलर जारी किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि खुद से दवा लेने यानी 'सेल्फ-मेडिकेशन' की आदत जानलेवा साबित हो रही है।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेने से किडनी और सेहत को खतरा
अक्सर देखा जाता है कि हल्का सा सिरदर्द, बदन दर्द या बुखार होते ही लोग बिना किसी डॉक्टर की राय लिए मेडिकल स्टोर से पेनकिलर या एंटीबायोटिक्स खरीदकर खा लेते हैं। CDSCO की एडवाइजरी में इस प्रवृत्ति पर गहरा चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक या बिना जरूरत के दर्द निवारक गोलियां खाने से किडनी की कार्यप्रणाली पर बेहद बुरा असर पड़ता है और कई मामलों में किडनी फेलियर तक की नौबत आ जाती है।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस: एक धीमा जहर
इस चेतावनी का सबसे बड़ा पहलू एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का बढ़ता खतरा है। जब कोई व्यक्ति बिना जरूरत या गलत खुराक में एंटीबायोटिक्स लेता है, तो शरीर के बैक्टीरिया उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि भविष्य में जब इंसान सच में किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आता है, तो सामान्य एंटीबायोटिक्स काम करना बंद कर देती हैं। यह स्थिति किसी भी मरीज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
केमिस्ट और रिटेलर्स के लिए सख्त निर्देश
CDSCO ने सिर्फ आम जनता को ही सतर्क नहीं किया है, बल्कि दवा विक्रेताओं पर भी नकेल कसी है। सर्कुलर के तहत देश भर के सभी फार्मासिस्ट्स, रिटेलर्स और केमिस्ट्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे शेड्यूल H और शेड्यूल H1 के तहत आने वाली दवाओं को बिना किसी अधिकृत डॉक्टर के वैलिड प्रिस्क्रिप्शन के बिल्कुल न बेचें।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
सरकार ने मेडिकल स्टोर्स को इन नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। यदि कोई केमिस्ट बिना पर्ची के शेड्यूल H या H1 की दवाएं बेचता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब मेडिकल स्टोर्स की औचक जांच भी करेंगी।

NHM में स्टाफ नर्स के 4,724 पदों पर भर्ती, तुरंत करें आवेदन
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने स्टाफ नर्स के 4,724 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। B.Sc नर्सिंग और GNM डिप्लोमा पास उम्मीदवार 50 वर्ष की उम्र तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को ₹21,000 प्रति माह वेतन मिलेगा। ऑफलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितंबर 2026 है।
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नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने स्टाफ नर्स के 4,724 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। B.Sc नर्सिंग और GNM डिप्लोमा पास उम्मीदवार 50 वर्ष की उम्र तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को ₹21,000 प्रति माह वेतन मिलेगा। ऑफलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितंबर 2026 है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने स्टाफ नर्स के 4,724 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से मेडिकल क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने के इच्छुक उम्मीदवारों को सीधा मौका मिल रहा है।
अनिवार्य योग्यता और शैक्षणिक मापदंड
इस भर्ती में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से B.Sc नर्सिंग की डिग्री या जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM) में डिप्लोमा होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों का संबंधित राज्य नर्सिंग काउंसिल में पंजीकृत होना भी आवश्यक है, ताकि वे इस पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर सकें।
आयु सीमा और मिलने वाला वेतन
आवेदकों के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। चयन प्रक्रिया में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को प्रति माह ₹21,000 का निश्चित वेतन दिया जाएगा।
ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया और अंतिम तिथि
इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन जमा करना होगा। योग्य अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन पत्र डाउनलोड कर, उसे सही तरीके से भरना होगा। भरे हुए फॉर्म के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करके निर्धारित पते पर भेजना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 25 सितंबर 2026 तय की गई है।
समय सीमा का रखें विशेष ध्यान
आवेदन की अंतिम तिथि बेहद नजदीक है और इसमें केवल 3 दिन का समय शेष रह गया है। अंतिम समय में डाक या कोरियर में होने वाली देरी से बचने के लिए उम्मीदवारों को बिना किसी विलंब के तुरंत अपना फॉर्म भेजना होगा। 25 सितंबर के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

IIT बॉम्बे छात्र सुसाइड: पिता बोले- 'सहन करने की सलाह मेरी भूल थी
IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद उनके पिता रविंद्र वाकोडे का दर्द छलक पड़ा है। बेटे की परेशानी पर उसे 'थोड़ा सहन करने' की सलाह देने वाले पिता अब खुद को कसूरवार मान रहे हैं। उन्होंने मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की गिरफ्तारी की मांग की है।
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IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद उनके पिता रविंद्र वाकोडे का दर्द छलक पड़ा है। बेटे की परेशानी पर उसे 'थोड़ा सहन करने' की सलाह देने वाले पिता अब खुद को कसूरवार मान रहे हैं। उन्होंने मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की गिरफ्तारी की मांग की है।
IIT बॉम्बे में फिर टूटा एक सपना
देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार IIT बॉम्बे एक बार फिर एक होनहार छात्र की असमय मौत से दहल उठा है। छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना के बाद साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे का बयान सामने आया है, जो मानसिक तनाव से जूझ रहे युवाओं और उनके परिवारों की कड़वी सच्चाई को बयां करता है। साहिल ने कदम उठाने से पहले अपने पिता से अपनी परेशानी साझा की थी, लेकिन तब किसी को अंदाजा नहीं था कि बात इस हद तक बिगड़ जाएगी।
'सहन कर लो' कहने का पछतावा
साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने बेहद भावुक होकर बताया कि उनका बेटा पढ़ाई और संस्थान के माहौल को लेकर काफी परेशान चल रहा था। जब साहिल ने उनसे अपनी मानसिक स्थिति का जिक्र किया, तो एक आम पिता की तरह उन्होंने भी उसे ढांढस बंधाने की कोशिश की। रविंद्र वाकोडे ने कहा, "उसने मुझसे कहा था कि वह बहुत परेशान है। मैंने उसे समझाया कि थोड़ा सहन कर लो, इसके बाद पूरी ज़िंदगी अच्छी रहेगी।" आज वही शब्द पिता के दिल को छलनी कर रहे हैं। भारी मन से उन्होंने माना कि बेटे को सहन करने की सलाह देना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित हुई।
प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर अड़े पिता
इस त्रासदी के बाद परिवार का गुस्सा और दुख चरम पर है। साहिल के पिता ने इस पूरे मामले के लिए संस्थान के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से प्रोफेसर की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। रविंद्र वाकोडे का आरोप है कि प्रोफेसर के व्यवहार और दबाव के कारण ही उनके बेटे को यह खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। परिवार का साफ कहना है कि जब तक आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे।
संस्थानों में बढ़ते मानसिक तनाव पर सवाल
यह घटना एक बार फिर देश के प्रीमियम उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते अकादमिक दबाव और मानसिक तनाव को रेखांकित करती है। साहिल की मौत ने IIT जैसे संस्थानों के आंतरिक माहौल, काउंसलिंग सिस्टम और फैकल्टी के रवैये पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस की जांच जारी है और सहपाठियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक से पूछताछ की जा रही है।

₹273 करोड़ का TGREDCO ऑर्डर मिलते ही ओसवाल पंप्स के शेयर 8% उछले
ओसवाल पंप्स के शेयरों में बुधवार को 8% तक की शानदार तेजी दर्ज की गई। यह उछाल तेलंगाना रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TGREDCO) से ₹273.19 करोड़ का बड़ा सोलर प्रोजेक्ट मिलने के बाद आया है। इसके तहत कंपनी तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल करेगी।
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ओसवाल पंप्स के शेयरों में बुधवार को 8% तक की शानदार तेजी दर्ज की गई। यह उछाल तेलंगाना रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TGREDCO) से ₹273.19 करोड़ का बड़ा सोलर प्रोजेक्ट मिलने के बाद आया है। इसके तहत कंपनी तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल करेगी।
शेयर बाजार में ओसवाल पंप्स का धमाकेदार प्रदर्शन
रिन्यूएबल एनर्जी और सोलर पंप सेक्टर की जानी-मानी कंपनी ओसवाल पंप्स के शेयरों ने बुधवार को शेयर बाजार में ज़बरदस्त प्रदर्शन किया। कारोबार के शुरुआती सत्र में ही कंपनी के शेयर करीब 8% तक उछल गए। बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी को मिले एक नए और बेहद अहम प्रोजेक्ट की वजह से निवेशकों के बीच यह भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इस तेजी ने कंपनी के मार्केट सेंटीमेंट को अचानक से काफी मजबूत कर दिया है।
TGREDCO से मिला ₹273 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट
ओसवाल पंप्स की इस सफलता के पीछे सबसे मुख्य वजह तेलंगाना रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (TGREDCO) से मिला एक बड़ा वर्क ऑर्डर है। TGREDCO की ओर से कंपनी को कुल ₹273.19 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट सौंपा गया है। यह ऑर्डर मिलने की खबर सार्वजनिक होते ही निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में जोरदार खरीदारी शुरू कर दी, जिससे शेयर की कीमतों में अचानक तेज़ उछाल दर्ज किया गया।
सरकारी स्कूलों में लगेंगे रूफटॉप सोलर पावर प्लांट
इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताओं की बात करें तो इसके तहत तेलंगाना राज्य भर के सरकारी स्कूलों की छतों पर रूफटॉप सोलर पावर प्लांट इंस्टॉल किए जाएंगे। यह पहल राज्य में क्लीन और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है। ओसवाल पंप्स इन सभी शिक्षण संस्थानों में सोलर पैनल लगाने, उन्हें चालू करने और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम पूरा करेगी। इस कदम से न केवल स्कूलों को सस्ती और बिना रुकावट के बिजली मिलेगी, बल्कि राज्य का कार्बन फुटप्रिंट भी काफी कम होगा।
सोलर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ता दबदबा
इस बड़े प्रोजेक्ट के साथ ही ओसवाल पंप्स ने सोलर पावर और रिन्यूएबल एनर्जी सेगमेंट में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत कर लिया है। हाल के दिनों में भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर दिया जा रहा विशेष ज़ोर ऐसी कंपनियों के लिए नए रास्ते खोल रहा है। ओसवाल पंप्स को मिले इस ₹273 करोड़ के ऑर्डर से यह साफ जाहिर होता है कि कंपनी राज्य-स्तरीय बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता रखती है। बाज़ार के विश्लेषक इस ऑर्डर को कंपनी के रेवेन्यू और भविष्य की ग्रोथ के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मोड़ मान रहे हैं।
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