
BHIM-UPI और RuPay कार्ड पर बंद हो सकता है इंसेंटिव!
सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2,000 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम खत्म करने पर विचार कर रही है। नई योजना के तहत MDR से मिलने वाले राजस्व का 5% हिस्सा एक अलग फंड में जमा किया जा सकता है, जिसका उपयोग छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में होगा।
खबर का निचोड़
सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2,000 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम खत्म करने पर विचार कर रही है। नई योजना के तहत MDR से मिलने वाले राजस्व का 5% हिस्सा एक अलग फंड में जमा किया जा सकता है, जिसका उपयोग छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में होगा।
UPI और RuPay इंसेंटिव पर बड़ा फैसला
डिजिटल भुगतान को आम जनता तक पहुंचाने और छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ₹2,000 करोड़ की सरकारी इंसेंटिव योजना जल्द ही इतिहास बन सकती है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहन (Incentive) को समाप्त करने की तैयारी में है। इस कदम से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है नया 5% फंड फॉर्मूला?
प्रोत्साहन योजना को सीधे तौर पर बंद करने के बजाय सरकार एक वैकल्पिक मॉडल पर काम कर रही है। नई रणनीति के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के जरिए जनरेट होने वाली कुल रकम का 5 प्रतिशत हिस्सा एक विशेष फंड में ट्रांसफर किया जाएगा। इस अलग से बनाए गए फंड का इस्तेमाल केवल कम राशि वाले UPI लेनदेन को प्रोत्साहित करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
डिजिटल इकोसिस्टम और फिनटेक पर प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर फिनटेक कंपनियों, बैंकों और छोटे व्यापारियों पर देखने को मिल सकता है। अब तक सरकारी प्रोत्साहन के सहारे बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों को मर्चेंट से शुल्क न लेने के बावजूद वित्तीय राहत मिलती रही है। नए फ्रेमवर्क के लागू होने से भुगतान क्षेत्र में राजस्व मॉडल को फिर से पुनर्गठित करना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा।
छोटे लेनदेन का भविष्य और चुनौतियाँ
भारत में रोजाना करोड़ों की संख्या में कम मूल्य वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं। चाय की दुकान से लेकर राशन के सामान तक, UPI अब हर आम नागरिक की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इंसेंटिव स्ट्रक्चर में बदलाव के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बिना किसी प्रत्यक्ष सरकारी सहायता के किस तरह छोटे लेनदेन की निरंतरता और निर्बाध सेवाओं को बनाए रखते हैं।

युवराज सिंह ने थपथपाई अभिषेक शर्मा की पीठ, 30 गेंदों में ठोका शतक
भारतीय क्रिकेट के नए सितारे अभिषेक शर्मा ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में महज 30 गेंदों में तूफानी शतक जड़कर इतिहास रच दिया। वह टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के लिए सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इस ऐतिहासिक पारी पर उनके मेंटर युवराज सिंह ने भी गर्व जताया है।
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भारतीय क्रिकेट के नए सितारे अभिषेक शर्मा ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में महज 30 गेंदों में तूफानी शतक जड़कर इतिहास रच दिया। वह टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के लिए सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इस ऐतिहासिक पारी पर उनके मेंटर युवराज सिंह ने भी गर्व जताया है।
अभिषेक शर्मा का ऐतिहासिक तूफान और युवराज का संदेश
भारतीय टी20 क्रिकेट में एक नया अध्याय जुड़ गया है। युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से क्रिकेट फैंस को मंत्रमुग्ध कर दिया है। अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए तीसरे टी20 मैच में अभिषेक ने विरोधी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए महज 30 गेंदों पर शतक ठोक दिया। उनकी इस आतिशी पारी ने स्टेडियम में मौजूद हर दर्शक को झूमने पर मजबूर कर दिया। शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें मैच के बाद 'प्लेयर ऑफ द मैच' के खिताब से नवाजा गया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद मैदान के बाहर से भी बधाइयों का तांता लग गया। अभिषेक शर्मा को निखारने में अहम भूमिका निभाने वाले भारत के दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह का रिएक्शन सबसे ज्यादा चर्चा में है। युवराज ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा, "तुम पर गर्व है, विनम्र रहो।" यह संदेश साफ तौर पर दिखाता है कि युवराज अपने शिष्य की इस बड़ी कामयाबी से कितने खुश हैं, साथ ही वे उन्हें जमीन पर जुड़े रहने की सलाह भी दे रहे हैं।
रिकॉर्ड तोड़ पारी और मेंटरशिप का कमाल
अभिषेक शर्मा की यह पारी सिर्फ एक शतक भर नहीं है, बल्कि यह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में किसी भी भारतीय द्वारा जमाया गया सबसे तेज शतक है। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने मैदान के चारों ओर चौके और छक्कों की बरसात कर दी। अफगानिस्तान के गेंदबाज उनके सामने बेबस नजर आए और किसी के पास भी इस युवा बल्लेबाज को रोकने का कोई तोड़ नहीं था।
अभिषेक के इस आक्रामक अंदाज के पीछे युवराज सिंह का बड़ा मार्गदर्शन माना जाता है। युवराज ने कई मौकों पर अभिषेक के साथ नेट्स में समय बिताया है और उनकी बल्लेबाजी की तकनीक तथा मानसिक मजबूती पर काम किया है। यही वजह है कि जब अभिषेक ने अपना शतक पूरा किया, तो पूरे देश के साथ-साथ उनके गुरु युवराज सिंह का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया।
इस मुकाबले में मिली धमाकेदार जीत के बाद अभिषेक शर्मा का यह फॉर्म भारतीय टीम के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है। एक युवा खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वह बड़े मंच पर बिना किसी दबाव के निर्भीक क्रिकेट खेलने का माद्दा रखते हैं।

ग्लोबल जंग के बीच पैट्रियट मिसाइल सिस्टम का उत्पादन तेज
पैट्रियट मिसाइल सिस्टम के उत्पादन को युद्ध की वर्तमान जरूरतों के मद्देनजर तेजी से बढ़ाया जा रहा है। जनरल मोटर्स द्वारा लॉकहीड मार्टिन को महत्वपूर्ण घटकों की आपूर्ति के बाद, इस एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत और कूटनीतिक अहमियत दोनों में भारी इजाफा हुआ है।
पैट्रियट मिसाइल सिस्टम के उत्पादन को युद्ध की वर्तमान जरूरतों के मद्देनजर तेजी से बढ़ाया जा रहा है। जनरल मोटर्स द्वारा लॉकहीड मार्टिन को महत्वपूर्ण घटकों की आपूर्ति के बाद, इस एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत और कूटनीतिक अहमियत दोनों में भारी इजाफा हुआ है।
वैश्विक संघर्षों के बीच पैट्रियट का बढ़ता दायरा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्षों के बीच रक्षा उत्पादन में तेजी लाने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। इसी क्रम में अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन को जनरल मोटर्स से पैट्रियट इंटरसेप्टर्स के लिए बेहद अहम कंपोनेंट्स की एक नई खेप मिली है। इस कदम से साफ है कि दुनिया भर में मिसाइल रक्षा प्रणालियों की मांग में अभूतपूर्व उछाल आया है और अमेरिका अपने रक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने में जुट गया है।
क्या है पैट्रियट मिसाइल सिस्टम?
पैट्रियट (Phased Array Tracking Radar for Intercept on Target) अमेरिकी सेना का सबसे आधुनिक और अत्याधुनिक मोबाइल सरफेस-टू-एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। मूल रूप से रेसियन टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित यह डिफेंस सिस्टम विमानों, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने की अचूक क्षमता रखता है। पहली बार इसका मुकाबला 1991 के खाड़ी युद्ध में देखने को मिला था, जहां इसने सऊदी अरब, कुवैत और इजराइल की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद 2003 में इराक पर अमेरिकी आक्रमण के दौरान भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था। वर्तमान में अमेरिका, जर्मनी, पोलैंड, यूक्रेन, जापान और सऊदी अरब समेत कुल 19 देश इस घातक रक्षा प्रणाली का संचालन कर रहे हैं।
तकनीकी ताकत और मारक क्षमता
एक पैट्रियट बैटरी में फेस्ड एरे रडार, एंगेजमेंट कंट्रोल स्टेशन, कंप्यूटर, बिजली जनरेटर और आठ तक लॉन्चर शामिल होते हैं, जिनमें हर एक पर चार मिसाइलें तैनात रहती हैं। हालांकि एक बैटरी में लगभग 90 सैनिक होते हैं, लेकिन युद्ध के मैदान में इसे संचालित करने के लिए कंट्रोल स्टेशन पर केवल तीन सैनिकों की आवश्यकता होती है। इसका रडार 150 किलोमीटर से अधिक के दायरे में एक साथ 100 तक लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है।
इसकी मिसाइलें इस्तेमाल होने वाले इंटरसेप्टर के आधार पर अलग-अलग क्षमताएं दिखाती हैं। जहां PAC-2 इंटरसेप्टर ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड का इस्तेमाल करता है, वहीं आधुनिक PAC-3 मिसाइलें अधिक घातक 'हिट-टू-किल' तकनीक पर काम करती हैं। यह सिस्टम 24 किलोमीटर से अधिक की ऊंचाई तक के लक्ष्यों को भेदने में पूरी तरह सक्षम है।

मंत्री पद से थोड़ी मानूंगी': मैथिली ठाकुर का बड़ा बयान
लोक गायिका से राजनेता बनीं मैथिली ठाकुर ने अपने भावी राजनीतिक इरादों को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में जब उनसे मंत्री बनने की इच्छा पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह बहुत महत्वाकांक्षी हैं और सिर्फ मंत्री पद से संतुष्ट नहीं होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगी।
लोक गायिका से राजनेता बनीं मैथिली ठाकुर ने अपने भावी राजनीतिक इरादों को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में जब उनसे मंत्री बनने की इच्छा पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह बहुत महत्वाकांक्षी हैं और सिर्फ मंत्री पद से संतुष्ट नहीं होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगी।
लोक गायकी से विधानसभा तक का सफर
26 वर्षीय मैथिली ठाकुर अपनी सुरीली आवाज और पारंपरिक लोकगीतों के जरिए देश-विदेश के करोड़ों दिलों पर राज करती रही हैं। संगीत की दुनिया में सफलता के झंडे गाड़ने के बाद उन्होंने राजनीति की राह चुनी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर विधायक बनीं। बेहद कम उम्र में राजनीति की मुख्यधारा में शामिल होकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह केवल मंच पर सुर सजाने तक सीमित नहीं रहने वाली हैं, बल्कि जनसेवा और नीति-निर्माण के क्षेत्र में भी एक लंबी पारी खेलने के इरादे से आई हैं।
'सिर्फ मंत्री पद से थोड़ी मानूंगी'
हाल ही में 'आजतक' के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकार ने मैथिली से सीधे तौर पर पूछा कि "क्या आपकी मंत्री बनने की इच्छा है?", तो उन्होंने बेहद सहज लेकिन तीखे अंदाज में उत्तर दिया। मैथिली ने कहा, "मेरे मन में तो विधायक बनने की इच्छा भी नहीं थी। पार्टी मुझे जो भी काम या जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा और मेहनत से पूरा करूंगी।" इसके बाद अपनी बात में थोड़ा ट्विस्ट लाते हुए उन्होंने हंसते हुए मुस्कुराते अंदाज में कहा, "एंबिशियस तो मैं बहुत हूं, सिर्फ मंत्री पद से थोड़ी मानूंगी।" उनका यह बयान अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन चुका है।
महत्वाकांक्षा और पार्टी अनुशासन का संतुलन
मैथिली ठाकुर का यह बयान उनके आत्मविश्वासी व्यक्तित्व और भविष्य की बड़ी सोच को दर्शाता है। एक तरफ जहां उन्होंने खुद को पार्टी का एक अनुशासित कार्यकर्ता बताया जो शीर्ष नेतृत्व के हर आदेश का पालन करने के लिए तैयार है, वहीं दूसरी तरफ अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं को भी बिना किसी झिझक के सामने रखा। राजनीति में नए चेहरों का इस तरह मुखर होकर बोलना यह संकेत देता है कि युवा नेता अब लकीर के फकीर बनने के बजाय अपने लक्ष्यों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं।
राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई चर्चा
मैथिली के इस बयान के बाद सियासी हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे उनके मजाकिया और बेबाक अंदाज से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मैथिली ने इशारों-इशारों में यह साफ कर दिया है कि वह राजनीति में किसी छोटे पद या सीमित भूमिका से संतुष्ट होने वाली नहीं हैं। युवा वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी में भी उनके भविष्य के कद को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

मुंबई की शान 'बिजली' के जाने से सूना हुआ संजय गांधी नेशनल पार्क, अब बचे हैं इतने बाघ
संजय गांधी नेशनल पार्क की शान और पर्यटकों की मुख्य आकर्षण रहीं 18 साल की बाघिन 'बिजली' का उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते निधन हो गया है। इस दुखद घटना के साथ ही पार्क में बाघों की कुल संख्या घटकर 11 रह गई है, जिसने वन्यजीव प्रेमियों को मायूस कर दिया है।
संजय गांधी नेशनल पार्क की शान और पर्यटकों की मुख्य आकर्षण रहीं 18 साल की बाघिन 'बिजली' का उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते निधन हो गया है। इस दुखद घटना के साथ ही पार्क में बाघों की कुल संख्या घटकर 11 रह गई है, जिसने वन्यजीव प्रेमियों को मायूस कर दिया है।
मुंबई की धड़कन: संजय गांधी नेशनल पार्क का परिचय
उत्तरी मुंबई के बोरिवली में स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) दुनिया के उन चुनिंदा राष्ट्रीय उद्यानों में शामिल है जो किसी शहर की सीमा के भीतर स्थित हैं। लगभग 103 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह पार्क मुंबई शहर के भौगोलिक क्षेत्र का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा बनाता है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो शुरुआती दौर में इसे 'कृष्णगिरी नेशनल पार्क' के नाम से जाना जाता था। समय के साथ साल 1974 में इसका नाम बदलकर 'बोरिवली नेशनल पार्क' और फिर 1981 में वर्तमान नाम 'संजय गांधी नेशनल पार्क' कर दिया गया।
ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक खजाने
इस राष्ट्रीय उद्यान के केंद्र में स्थित कान्हेरी गुफाएं प्राचीन इतिहास और संस्कृति का अनूठा संगम हैं। ईसा पूर्व 9वीं से पहली शताब्दी के बीच बौद्ध भिक्षुओं द्वारा विशाल बेसाल्ट चट्टानों को तराशकर बनाई गई ये गुफाएं बौद्ध वास्तुकला, विहारों, स्तूपों और प्रार्थना हॉलों का बेहतरीन नमूना पेश करती हैं। गुफाओं के रास्ते में तीन विशाल नक्काशीदार मूर्तियों वाला एक भव्य जैन मंदिर भी मौजूद है। इसके अलावा, यह पार्क तुलसी और विहार जैसी दो खूबसूरत झीलों, एक भव्य डियर पार्क, रोमांचक लायन सफारी और महात्मा गांधी की समाधि के लिए भी देश-दुनिया में प्रसिद्ध है।
समृद्ध वनस्पति और जीव-जंतुओं का बसेरा
यह पार्क जैव विविधता का एक बेहद समृद्ध केंद्र है। यहाँ कदंब, सागवान, करण करंज, शीशम, पलाश (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट), लाल सेमल और कई अन्य प्रजातियों के पेड़-पौधे पाए जाते हैं। यहाँ की सबसे खास विशेषता 'कार्वी' या 'कार्व्य' का पौधा है, जो हर सात साल में एक बार खिलकर पूरे जंगल को जादुई रंग में रंग देता है।
जीव-जंतुओं की दुनिया की बात करें तो यहाँ तेंदुए, सांभर, चीतल, बार्किंग डियर, रस्टी-स्पॉटेड कैट, लकड़बग्घा, सिवेट, भारतीय क्रेस्टेड साही, इंडियन फ्लाइंग फॉक्स, लंगूर और बॉनेट मकाक जैसे कई वन्यजीव स्वतंत्र रूप से निवास करते हैं। इसके अलावा, यह पार्क 251 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों और तितलियों की विशाल विविधता का भी मुख्य आशियाना है।
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