
भारतीय क्रिकेट में बड़े बदलाव की आहट: चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर छोड़ सकते हैं पद
अजीत अगरकर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने बीसीसीआई (BCCI) को पत्र लिखकर 4 अक्टूबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिम्मेदारी आगे न संभालने की मंशा जताई है। बोर्ड ने फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
अजीत अगरकर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने बीसीसीआई (BCCI) को पत्र लिखकर 4 अक्टूबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिम्मेदारी आगे न संभालने की मंशा जताई है। बोर्ड ने फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
चयन समिति में फेरबदल की तैयारी
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के पद छोड़ने की खबरों ने क्रिकेट के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जानकारी सामने आ रही है कि अगरकर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि वह 4 अक्टूबर को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।
बताया जा रहा है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगरकर ने इस साल फरवरी में ही बीसीसीआई के अधिकारियों को सूचित कर दिया था कि बोर्ड को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद नए विकल्प की तलाश शुरू कर देनी चाहिए।
अगरकर का कार्यकाल और उपलब्धियां
अजीत अगरकर ने जुलाई 2023 में चेतन शर्मा की जगह भारतीय चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था। उनके इस कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति के कार्यकाल में ही भारत ने टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया, एशिया कप जीता और वनडे विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। इसके अलावा टीम इंडिया ने तीनों फॉर्मेट में अपनी बादशाहत कायम रखी और नए खिलाड़ियों को सही समय पर मौके देकर एक मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार की।
बीसीसीआई का रुख और भविष्य की रणनीति
हालांकि इस पूरे मामले पर बीसीसीआई की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बोर्ड ने न तो अगरकर के इस्तीफे या फैसले की पुष्टि की है और न ही नए चीफ सिलेक्टर के लिए आवेदन मांगने की कोई घोषणा की है।
यदि 4 अक्टूबर को अगरकर अपने पद से हटते हैं, तो बीसीसीआई को जल्द ही एक नया मुख्य चयनकर्ता चुनना होगा। आगामी महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं और आईसीसी टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए बोर्ड को एक ऐसे अनुभवी चेहरे की तलाश होगी जो भारतीय टीम की लय को बरकरार रख सके। अब सभी की निगाहें बीसीसीआई के अगले कदम पर टिकी हैं।

तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इसके तहत 28 सितंबर से हर नवजात को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। पहले चरण के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीद ली गई हैं।
खबर का निचोड़
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इसके तहत 28 सितंबर से हर नवजात को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। पहले चरण के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीद ली गई हैं।
योजना की बड़ी शुरुआत
तमिलनाडु सरकार ने समाज कल्याण की दिशा में एक अनोखा और बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 28 सितंबर से नवजात शिशुओं के लिए 1 ग्राम सोने की अंगूठी देने की योजना शुरू करने की घोषणा की है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य नवजात बच्चों के आगमन का जश्न मनाना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता के भरोसे को और मजबूत करना है।
सरकारी अस्पतालों के बच्चों को मिलेगा लाभ
इस जनकल्याणकारी योजना का सीधा फायदा उन सभी परिवारों को मिलेगा जिनके बच्चों का जन्म राज्य के सरकारी अस्पतालों में होगा। सरकार के इस कदम से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों में खुशी की लहर है। कई परिवारों के लिए बच्चे के जन्म के समय सोने का उपहार पाना एक सपना सच होने जैसा है। यह पहल सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देने में भी बेहद मददगार साबित होगी।
पहले चरण की तैयारी पूरी
योजना को जमीनी स्तर पर बिना किसी बाधा के लागू करने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। पहले चरण के वितरण के लिए सरकार ने 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीद ली हैं। 28 सितंबर को योजना के आधिकारिक शुभारंभ के साथ ही अस्पतालों में नवजात शिशुओं के परिजनों को ये अंगूठियां भेंट की जाने लगेंगी। पारदर्शी व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर पात्र नवजात तक यह उपहार बिना किसी देरी के पहुंचे।
जनता के बीच योजना की चर्चा
राज्य भर में इस फैसले का स्वागत हो रहा है। तमिलनाडु हमेशा से अपनी अनूठी सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए जाना जाता रहा है, और यह नई पहल उसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिखती है। नवजात बच्चों के स्वागत में सोने की अंगूठी देने का यह फैसला स्वास्थ्य विभाग की साख बढ़ाने के साथ-साथ आम जनता को सरकारी सुविधाओं से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।

दिशा सालियान केस: उद्धव ठाकरे पर वकील का सनसनीखेज दावा
दिशा सालियान मौत मामले में सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उद्धव ठाकरे इस मामले के मुख्य आरोपी हैं। उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे का बचाव करने के लिए मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की बहाली कराई थी।
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दिशा सालियान मौत मामले में सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उद्धव ठाकरे इस मामले के मुख्य आरोपी हैं। उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे का बचाव करने के लिए मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की बहाली कराई थी।
मुख्य आरोपी उद्धव ठाकरे: वकील का बड़ा दावा
दिशा सालियान केस में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। दिशा के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर सीधे हमले बोलते हुए उन्हें इस पूरे मामले का 'मुख्य आरोपी' करार दिया है। इस सनसनीखेज दावे ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। ओझा का कहना है कि इस केस के तार सीधे तौर पर ठाकरे परिवार से जुड़े हुए हैं।
आदित्य ठाकरे को बचाने के लिए सचिन वाझे की बहाली?
वकील नीलेश ओझा ने आरोप लगाया है कि उद्धव ठाकरे ने अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे के कथित गलत कामों और नाम को इस केस से बाहर रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाए। इसी कड़ी में तत्कालीन मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को दोबारा सेवा में बहाल किया गया था। ओझा के अनुसार, वाझे की बहाली का मुख्य मकसद जांच की दिशा को मोड़ना और अहम सबूतों के साथ छेड़छाड़ करना था।
जांच एजेंसी और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
ओझा ने इस बात पर भी जोर दिया कि घटना के बाद से ही पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव बनाया गया था। मामले को एक साधारण हादसे का रूप देने की कोशिश की गई, जबकि इसके पीछे गहरी साजिश छिपी थी। उनका कहना है कि वाझे जैसे अधिकारियों का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक संरक्षण देने और मामले की असली सच्चाई को दबाने के लिए किया गया।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ा सियासी पारा
इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल जहां इस मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग को दोहरा रहे हैं, वहीं ठाकरे गुट इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और छवि खराब करने की साजिश बता रहा है। सतीश सालियान के वकील द्वारा किए गए इस दावे ने एक बार फिर दिशा सालियान मौत प्रकरण को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

ChatGPT में चैट डिलीट, आर्काइव और एक्सपोर्ट कैसे करें: जानें आसान तरीका
ChatGPT यूज़र्स अपनी चैट हिस्ट्री को आसानी से प्रबंधित कर सकते हैं। तीन डॉट्स पर क्लिक करके चैट को डिलीट या आर्काइव किया जा सकता है। डिलीट की गई चैट 30 दिनों में हमेशा के लिए हट जाती है, जबकि आर्काइव और एक्सपोर्ट विकल्प डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
खबर का निचोड़: ChatGPT यूज़र्स अपनी चैट हिस्ट्री को आसानी से प्रबंधित कर सकते हैं। तीन डॉट्स पर क्लिक करके चैट को डिलीट या आर्काइव किया जा सकता है। डिलीट की गई चैट 30 दिनों में हमेशा के लिए हट जाती है, जबकि आर्काइव और एक्सपोर्ट विकल्प डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
ChatGPT डेटा मैनेजमेंट: अपनी चैट पर रखें पूरा कंट्रोल
ChatGPT का इस्तेमाल करते समय कई बार डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर सवाल उठते हैं। यूज़र्स अक्सर यह जानना चाहते हैं कि वे अपनी पुरानी बातचीत को कैसे सुरक्षित रखें या गैर-ज़रूरी चैट को कैसे हटाएं। OpenAI ने यूज़र्स को चैट मैनेज करने के लिए आसान और असरदार टूल दिए हैं। इनकी मदद से चैट को डिलीट, आर्काइव और एक्सपोर्ट करना बेहद सरल हो जाता है।
चैट डिलीट करने का तरीका और 30 दिनों का नियम
किसी भी गैर-ज़रूरी चैट को हटाने के लिए यूज़र्स को चैट हिस्ट्री में संबंधित चैट के पास दिख रहे तीन डॉट्स पर क्लिक करना होता है। यहां डिलीट का विकल्प चुनते ही चैट आपकी मुख्य लिस्ट से हट जाती है। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि डिलीट की गई चैट तुरंत पूरी तरह से गायब नहीं होती। OpenAI के सुरक्षा नियमों के तहत, यह डेटा सिस्टम से 30 दिनों के भीतर स्थायी रूप से हटा दिया जाता है। एक बार स्थायी रूप से डिलीट होने के बाद इसे दोबारा रिकवर करना संभव नहीं होता।
आर्काइव फीचर: ज़रूरी बातचीत को रखें सुरक्षित
यदि कोई चैट भविष्य में काम आ सकती है लेकिन उसे मुख्य स्क्रीन पर नहीं रखना चाहते, तो आर्काइव फीचर सबसे बेहतरीन विकल्प है। चैट के तीन डॉट्स वाले मेन्यू से ही 'आर्काइव' का चुनाव किया जा सकता है। यह चैट आपकी मुख्य स्क्रीन से छिप जाती है लेकिन डिलीट नहीं होती। सेटिंग्स के अंतर्गत 'डेटा कंट्रोल्स' (Data Controls) में जाकर आर्काइव की गई चैट को कभी भी देखा या वापस अन-आर्काइव किया जा सकता है।
डेटा एक्सपोर्ट: एक क्लिक में डाउनलोड करें पूरी चैट हिस्ट्री
यदि पूरे ChatGPT डेटा का बैकअप अपने डिवाइस में सुरक्षित रखना हो, तो एक्सपोर्ट फीचर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए सेटिंग्स में जाकर 'डेटा कंट्रोल्स' सेक्शन पर जाना होता है। वहां 'एक्सपोर्ट डेटा' पर क्लिक करने पर एक कन्फर्मेशन ईमेल प्राप्त होता है। ईमेल में दिए गए लिंक से पूरी चैट हिस्ट्री और डेटा को फाइल के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है। यह तरीका उन यूज़र्स के लिए बेहद उपयोगी है जो अपने महत्वपूर्ण नोट्स या डेटा का ऑफलाइन रिकॉर्ड रखना चाहते हैं।

BHIM-UPI और RuPay कार्ड पर बंद हो सकता है इंसेंटिव!
सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2,000 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम खत्म करने पर विचार कर रही है। नई योजना के तहत MDR से मिलने वाले राजस्व का 5% हिस्सा एक अलग फंड में जमा किया जा सकता है, जिसका उपयोग छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में होगा।
खबर का निचोड़
सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2,000 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम खत्म करने पर विचार कर रही है। नई योजना के तहत MDR से मिलने वाले राजस्व का 5% हिस्सा एक अलग फंड में जमा किया जा सकता है, जिसका उपयोग छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में होगा।
UPI और RuPay इंसेंटिव पर बड़ा फैसला
डिजिटल भुगतान को आम जनता तक पहुंचाने और छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ₹2,000 करोड़ की सरकारी इंसेंटिव योजना जल्द ही इतिहास बन सकती है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहन (Incentive) को समाप्त करने की तैयारी में है। इस कदम से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है नया 5% फंड फॉर्मूला?
प्रोत्साहन योजना को सीधे तौर पर बंद करने के बजाय सरकार एक वैकल्पिक मॉडल पर काम कर रही है। नई रणनीति के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के जरिए जनरेट होने वाली कुल रकम का 5 प्रतिशत हिस्सा एक विशेष फंड में ट्रांसफर किया जाएगा। इस अलग से बनाए गए फंड का इस्तेमाल केवल कम राशि वाले UPI लेनदेन को प्रोत्साहित करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
डिजिटल इकोसिस्टम और फिनटेक पर प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर फिनटेक कंपनियों, बैंकों और छोटे व्यापारियों पर देखने को मिल सकता है। अब तक सरकारी प्रोत्साहन के सहारे बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों को मर्चेंट से शुल्क न लेने के बावजूद वित्तीय राहत मिलती रही है। नए फ्रेमवर्क के लागू होने से भुगतान क्षेत्र में राजस्व मॉडल को फिर से पुनर्गठित करना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा।
छोटे लेनदेन का भविष्य और चुनौतियाँ
भारत में रोजाना करोड़ों की संख्या में कम मूल्य वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं। चाय की दुकान से लेकर राशन के सामान तक, UPI अब हर आम नागरिक की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इंसेंटिव स्ट्रक्चर में बदलाव के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बिना किसी प्रत्यक्ष सरकारी सहायता के किस तरह छोटे लेनदेन की निरंतरता और निर्बाध सेवाओं को बनाए रखते हैं।
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