
क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को रेप केस में मिली जमानत, हुगली कोर्ट का फैसला
रेप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोपों में घिरे बंगाल और दिल्ली कैपिटल्स के युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को हुगली कोर्ट से जमानत मिल गई है। एक महीने से अधिक समय जेल में बिताने के बाद आई यह राहत इसलिए भी अहम है क्योंकि शिकायतकर्ता मेडिकल छात्रा ने खुद हलफनामा देकर जमानत पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
खबर का निचोड़
रेप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोपों में घिरे बंगाल और दिल्ली कैपिटल्स के युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को हुगली कोर्ट से जमानत मिल गई है। एक महीने से अधिक समय जेल में बिताने के बाद आई यह राहत इसलिए भी अहम है क्योंकि शिकायतकर्ता मेडिकल छात्रा ने खुद हलफनामा देकर जमानत पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
हुगली कोर्ट से क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को बड़ी राहत
भारतीय क्रिकेट जगत के उभरते सितारे और दिल्ली कैपिटल्स के खिलाड़ी अभिषेक पोरेल के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है। पिछले एक महीने से भी अधिक समय से जेल की सलाखों के पीछे दिन काट रहे इस युवा क्रिकेटर को हुगली कोर्ट ने जमानत दे दी है। अभिषेक पोरेल पर एक मेडिकल छात्रा ने दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग जैसे संगीन आरोप लगाए थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। इस फैसले के साथ ही कानूनी मोर्चे पर उनके लिए एक नई उम्मीद जगी है।
शिकायतकर्ता का रुख और अदालत का फैसला
अदालत में सुनवाई के दौरान इस मामले ने एक नया मोड़ लिया। पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलों के बीच सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता मेडिकल छात्रा ने खुद अदालत के सामने एक हलफनामा पेश किया। इस हलफनामे में छात्रा ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसे अभिषेक पोरेल की जमानत याचिका मंजूर किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। शिकायतकर्ता के इस बदले रुख और मामले के तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हुगली कोर्ट ने क्रिकेटर को जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।
शुरुआत से ही बेकसूर होने का दावा
मामला सामने आने के बाद से ही अभिषेक पोरेल और उनका कानूनी पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। पोरेल का कहना था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उन्होंने किसी भी तरह के अपराध को अंजाम नहीं दिया है। पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने जांच में सहयोग करने और अदालत के समक्ष अपनी सच्चाई रखने की बात कही थी। जमानत मिलने के बाद अब उनके कानूनी सलाहकारों की नजर मामले की आगे की कार्यवाही पर टिकी है।
क्रिकेट करियर पर पड़ा गहरा असर
बंगाल के इस प्रतिभावान विकेटकीपर-बल्लेबाज ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेलते हुए अपने प्रदर्शन से काफी प्रभावित किया था। मैदान पर उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा था। हालांकि, इस विवाद और अचानक हुई गिरफ्तारी ने उनके बेहतरीन ढर्रे पर चल रहे क्रिकेट करियर पर कुछ समय के लिए ब्रेक लगा दिया। खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद वे कितनी जल्दी दोबारा मैदान पर वापसी कर पाते हैं।

खान-पान से महरूम बस्तियों की बदलेगी तकदीर, जानिए क्या है पीएमकेकेएवाई
खदानों की धूल फांकने वाले इलाकों के विकास के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेएवाई) खनन प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर बदलने का काम कर रही है। जिला खनिज फाउण्डेशन (डीएमएफ) के जरिए मिलने वाले फंड से स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।
खबर का निचोड़:
खदानों की धूल फांकने वाले इलाकों के विकास के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेएवाई) खनन प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर बदलने का काम कर रही है। जिला खनिज फाउण्डेशन (डीएमएफ) के जरिए मिलने वाले फंड से स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।
खदानों के साये में विकास की नई किरण
भारत के खनिज समृद्ध इलाके बरसों से विकास की दौड़ में पिछड़े रहे हैं। जिस जमीन से देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलती है, वहां रहने वाले लोग अक्सर बुनियादी सुविधाओं के मोहताज नजर आते हैं। इसी विडंबना को दूर करने के लिए साल 2015 में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना यानी पीएमकेकेएवाई की शुरुआत की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों और वहां के बाशिंदों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।
जिला खनिज फाउण्डेशन फंड का सटीक इस्तेमाल
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका वित्तीय मॉडल है। इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं बनता, बल्कि जिला खनिज फाउण्डेशन (डीएमएफ) के पास जमा होने वाले फंड का ही इस्तेमाल किया जाता है। खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत सभी राज्यों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने डीएमएफ नियमों में इस योजना को शामिल करें। इससे खनन प्रभावित जिलों में पैसों की कमी आड़े नहीं आती।
प्राथमिकता के आधार पर खर्च होती है पाई-पाई
योजना के तहत फंड के इस्तेमाल को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त नियम बनाए गए हैं। कुल राशि का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा 'उच्च प्राथमिकता' वाले क्षेत्रों पर खर्च किया जाता है। इसमें शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण उपाय, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और महिला एवं बाल कल्याण जैसे बेहद जरूरी काम शामिल हैं।
बुनियादी ढांचे और पर्यावरण पर विशेष फोकस
बचा हुआ 40 प्रतिशत तक का फंड 'अन्य प्राथमिकता' वाले क्षेत्रों के लिए तय किया गया है। इसमें भौतिक बुनियादी ढांचे का विकास, सिंचाई, ऊर्जा, वाटरशेड विकास और पर्यावरण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने वाले अन्य कार्य किए जाते हैं। इसका मकसद खनन के दौरान और उसके बाद पर्यावरण, स्वास्थ्य और लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम से कम करना है।
दीर्घकालिक और स्थायी आजीविका का संकल्प
इस योजना का दायरा सिर्फ तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य दूरगामी है। यह केंद्र और राज्यों की अन्य चल रही योजनाओं के साथ मिलकर काम करती है ताकि खनन क्षेत्रों के लोगों को लंबे समय तक टिकने वाली और स्थायी आजीविका मिल सके। खदानों के आसपास की आबोहवा और जिंदगी को संवारने की दिशा में यह एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।

लेंसकार्ट में ₹2,047 करोड़ के शेयर बेचेगा प्लैटिनम जैस्मीन
पीयूष बंसल की अगुवाई वाली लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में प्लैटिनम जैस्मीन A 2018 ट्रस्ट अपनी 1.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। यह बड़ा ब्लॉक डील सौदा लगभग ₹2,047.4 करोड़ का होगा। इसके लिए ₹682.45 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जबकि बाजार में शेयर ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है।
संक्षेप (Summary):
पीयूष बंसल की अगुवाई वाली लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में प्लैटिनम जैस्मीन A 2018 ट्रस्ट अपनी 1.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। यह बड़ा ब्लॉक डील सौदा लगभग ₹2,047.4 करोड़ का होगा। इसके लिए ₹682.45 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जबकि बाजार में शेयर ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है।
लेंसकार्ट में बड़ा ब्लॉक डील सौदा
भारतीय आईवेयर रिटेल सेक्टर की दिग्गज कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में एक बड़ा वित्तीय बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशक संस्था प्लैटिनम जैस्मीन A 2018 ट्रस्ट कंपनी में अपनी 1.7% हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेचने की योजना बना रही है। इस बड़े सौदे का कुल वैल्यूएशन लगभग ₹2,047.4 करोड़ आंका गया है। दलाल स्ट्रीट पर इस खबर के आते ही निवेशकों और विश्लेषकों की निगाहें लेंसकार्ट के शेयरों पर टिक गई हैं।
फ्लोर प्राइस और मार्केट का गणित
इस मेगा ब्लॉक डील के लिए प्रति शेयर फ्लोर प्राइस ₹682.45 तय किया गया है। दूसरी ओर, वर्तमान में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का शेयर ₹706.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। तय फ्लोर प्राइस मौजूदा बाजार मूल्य से मामूली डिस्काउंट पर है, जो बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए दांव लगाने का एक आकर्षक अवसर प्रस्तुत करता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह के बड़े वॉल्यूम ट्रेड से शेयर में अल्पकालिक हलचल देखने को मिल सकती है।
90 दिनों का लॉक-अप पीरियड
सौदे की शर्तों को ध्यान में रखते हुए इस ट्रांजैक्शन में एक महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी गई है। ब्लॉक डील के माध्यम से बेचे जाने वाले इन शेयरों पर 90 दिनों का सख्त लॉक-अप पीरियड लागू रहेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस सौदे के तहत शेयर खरीदने वाले निवेशक अगले तीन महीनों तक इन्हें खुले बाजार में नहीं बेच सकेंगे। यह व्यवस्था बाजार में अचानक बड़े बिकवाली के दबाव को रोकने और शेयर की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से की जाती है।
पीयूष बंसल के नेतृत्व में लेंसकार्ट का दबदबा
पीयूष बंसल द्वारा स्थापित लेंसकार्ट ने देश-विदेश में आईवेयर मार्केट की परिभाषा पूरी तरह बदल दी है। ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन मॉडल, आक्रामक विस्तार रणनीति और उन्नत तकनीक के बल पर कंपनी ने आईवेयर सेक्टर में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्लैटिनम जैस्मीन जैसे बड़े निवेशक द्वारा आंशिक हिस्सेदारी बेचने को निजी इक्विटी फंडों की स्वाभाविक प्रॉफिट-बुकिंग प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी का मजबूत बिजनेस मॉडल और रिटेल नेटवर्क इसे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत स्थिति प्रदान करता है।

चार दशकों का इंतजार खत्म: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की होगी वापसी
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल का सुदूर और रहस्यमयी इंद्रावती टाइगर रिजर्व चार दशकों के लंबे अंतराल के बाद पर्यटकों के लिए फिर से खुलने जा रहा है। 1 नवंबर से शुरू हो रही इस वन्यजीव पर्यटन व्यवस्था से इस अछूते जंगल के द्वार सैलानियों के लिए हमेशा के लिए खुल जाएंगे।
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल का सुदूर और रहस्यमयी इंद्रावती टाइगर रिजर्व चार दशकों के लंबे अंतराल के बाद पर्यटकों के लिए फिर से खुलने जा रहा है। 1 नवंबर से शुरू हो रही इस वन्यजीव पर्यटन व्यवस्था से इस अछूते जंगल के द्वार सैलानियों के लिए हमेशा के लिए खुल जाएंगे।
बस्तर के जंगलों में गूंजेगी पर्यटकों की चहलकदमी
छत्तीसगढ़ के बीहड़ और सबसे कम खोजे गए जंगलों में शुमार इंद्रावती टाइगर रिजर्व आखिरकार गुलजार होने को तैयार है। आगामी 1 नवंबर से इस रिजर्व को पर्यटकों के लिए अधिकृत तौर पर खोल दिया जाएगा। करीब चालीस साल बाद यह पहला मौका होगा जब इस इलाके में व्यवस्थित वन्यजीव पर्यटन की शुरुआत होगी, जिससे प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों को एक नया और रोमांचक ठिकाना मिल सकेगा।
भौगोलिक स्थिति और अंतरराज्यीय सीमा
छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित यह टाइगर रिजर्व बेहद सामरिक और प्राकृतिक महत्व रखता है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व, भैरमगढ़ और पामेड वन्यजीव अभयारण्यों के साथ मिलकर संपूर्ण इंद्रावती लैंडस्केप का निर्माण करता है। इस रिजर्व की उत्तर और पश्चिमी सीमा पर बहने वाली इंद्रावती नदी इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती है। यही नदी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच अंतरराज्यीय सीमा का काम भी करती है। इसके अलावा, इसकी भौगोलिक कनेक्टिविटी तेलंगाना के कवल, महाराष्ट्र के ताडोबा और मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से जुड़ी हुई है।
समृद्ध वन संपदा और दुर्लभ जीव-जंतु
यह रिजर्व अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए देश भर में जाना जाता है। यहाँ की वनस्पति मुख्य रूप से दक्षिणी नम मिश्रित पर्णपाती और शुष्क पर्णपाती वनों में बंटी हुई है। जंगलों की इस छांव में सागौन, आचार, कर्रा, कुल्लू, शीशम, सेमल, हलदु, अर्जुन, बेल और जामुन जैसे बहुमूल्य पेड़-पौधे पाए जाते हैं।
जीव-जंतुओं की बात करें तो यह संरक्षित क्षेत्र छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु और अत्यंत दुर्लभ 'वाइल्ड बफेलो' (जंगली भैंसे) की अंतिम बची हुई आबादी का घर है। इसके अलावा, इस सघन जंगल में बाघ, तेंदुए, नीलगाय, ब्लैक बक, सांभर, गौर, चीतल और सुस्त भालू (स्लोथ बियर) जैसे वन्यजीव खुलेआम विचरण करते हैं। चार दशकों के बाद सैलानियों के लिए इसके दरवाजे खुलने से इस क्षेत्र में पर्यटन को एक अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है।

आसमान को छूने की तैयारी: जिबूती ने थामी नासा की डोर, बना अंतरिक्ष क्लब का नया साथी
जिबूती ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'आर्टेमिस अकॉर्ड्स' पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही वह इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 72वां देश और आठवां अफ्रीकी राष्ट्र बन गया है। यह वाशिंगटन स्थित नासा मुख्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में संपन्न हुआ, जो इस छोटे से अफ्रीकी देश के लिए वैश्विक मंच पर एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
जिबूती ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'आर्टेमिस अकॉर्ड्स' पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही वह इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 72वां देश और आठवां अफ्रीकी राष्ट्र बन गया है। यह वाशिंगटन स्थित नासा मुख्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में संपन्न हुआ, जो इस छोटे से अफ्रीकी देश के लिए वैश्विक मंच पर एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
अंतरिक्ष की दौड़ में जिबूती की ऐतिहासिक छलांग
पूर्वी अफ्रीका के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश जिबूती ने अब अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान की ओर अपने कदम मजबूती से बढ़ा दिए हैं। नासा मुख्यालय में हुए इस समझौते ने जिबूती को वैश्विक अंतरिक्ष मानचित्र पर एक नई पहचान दिला दी है। दुनिया भर की महाशक्तियों के साथ अंतरिक्ष सहयोग के इस समझौते पर हस्ताक्षर करना यह दर्शाता है कि छोटे देश भी भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
जिबूती: रणनीतिक भूगोल और अनूठा भू-भाग
हॉर्न ऑफ अफ्रीका में स्थित जिबूती अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यह देश लाल सागर, अदन की खाड़ी और पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट सिस्टम के त्रिसंगम पर बसा है। उत्तर में इरिट्रिया, दक्षिण में सोमालिया तथा दक्षिण और पश्चिम में इथियोपिया से घिरे इस देश की पूर्वी सीमाएं लाल सागर और अदन की खाड़ी से मिलती हैं। इसकी राजधानी 'जिबूती' ही है, जो इस पूरे क्षेत्र का प्रमुख सामरिक केंद्र है।
कठोर जलवायु और प्राकृतिक खनिजों का भंडार
जिबूती की जलवायु मुख्य रूप से शुष्क और उष्णकटिबंधीय है, जहाँ साल भर उच्च तापमान और वाष्पीकरण की स्थिति बनी रहती है। देश का सबसे ऊंचा बिंदु माउंट मौसा अली है, जो लगभग 2,028 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ का Danakil Depression अपने बंजर और कठोर परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध है। इस देश में कोई बड़ी बारहमासी नदी नहीं है, लेकिन वर्षा ऋतु के दौरान मौसमी जलधाराएं या वाडी सक्रिय हो जाते हैं। इसके बावजूद, प्राकृतिक संसाधनों के मामले में यह क्षेत्र काफी समृद्ध है।
प्रचुर प्राकृतिक संपदा और भविष्य की संभावनाएं
जिबूती की भूमि कई महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों से भरी हुई है। यहाँ नमक, पेट्रोलियम, सोना, क्ले, संगमरमर, प्युमिक, जिप्सम और डायाटोमाइट जैसे मूल्यवान संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। अंतरिक्ष कूटनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत करने के बाद, यह देश अब इन संसाधनों और अपनी सामरिक स्थिति के दम पर वैश्विक पटल पर एक नई इबारत लिखने की ओर अग्रसर है।
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