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कैटरीना कैफ के बचाव में उतरीं खुशबू सुंदर, ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

कैटरीना कैफ के बचाव में उतरीं खुशबू सुंदर, ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

Delight News
📅 20 Sep2026

बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ के लुक और उम्र को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही ट्रोलिंग के खिलाफ अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर खुलकर सामने आई हैं। खुशबू ने ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब देते हुए महिलाओं के प्रति समाज की संकुचित मानसिकता पर सवाल उठाए और कैटरीना का मजबूती से समर्थन किया।

कैटरीना कैफ के बचाव में उतरीं खुशबू सुंदर, ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब
खबर का निचोड़
बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ के लुक और उम्र को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही ट्रोलिंग के खिलाफ अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर खुलकर सामने आई हैं। खुशबू ने ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब देते हुए महिलाओं के प्रति समाज की संकुचित मानसिकता पर सवाल उठाए और कैटरीना का मजबूती से समर्थन किया।
खूबसूरती और उम्र पर घटिया सोच
ग्लैमर इंडस्ट्री में महिलाओं को अक्सर उनकी उम्र और लुक्स को लेकर बेवजह की आलोचना का सामना करना पड़ता है। हाल ही में जब कैटरीना कैफ एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आईं, तो सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके चेहरे और ढलती उम्र को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां करना शुरू कर दिया। खूबसूरती के तय मानकों के नाम पर किसी अभिनेत्री को इस तरह निशाना बनाना बेहद शर्मनाक है। जब यह मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने लगा, तो दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और वरिष्ठ राजनेता खुशबू सुंदर कैटरीना के समर्थन में आगे आईं।
खुशबू सुंदर का तीखा हमला
खुशबू सुंदर ने ट्रोलर्स की क्लास लगाते हुए स्पष्ट कहा कि महिलाओं को हर उम्र में ग्रेसफुली रहने का पूरा अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों समाज हमेशा महिलाओं से एक खास उम्र के बाद भी युवाओं जैसा दिखने की उम्मीद करता है? खुशबू ने कहा कि कैटरीना कैफ ने इंडस्ट्री में अपनी कड़ी मेहनत, काबिलियत और बेहतरीन अभिनय के दम पर एक खास मुकाम हासिल किया है। ऐसे में केवल उनके लुक्स के आधार पर उन्हें जज करना या ट्रोल करना लोगों की बीमार मानसिकता को दर्शाता है।
महिलाओं के सम्मान की जंग
यह पहला मौका नहीं है जब खुशबू सुंदर ने किसी सार्वजनिक मुद्दे या महिला सम्मान के विषय पर अपनी आवाज मुखर की हो। वे अक्सर बिना किसी झिझक के सामाजिक और फिल्म उद्योग से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखती रही हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में उम्र को लेकर फैली रूढ़िवादी सोच पर बहस छिड़ दी है। खुशबू के इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है और लोग उनकी निडरता का समर्थन कर रहे हैं।
फैंस का मिला भारी समर्थन
कैटरीना कैफ के फैंस भी खुशबू सुंदर के इस रुख से बेहद खुश हैं और उनके समर्थन में उतर आए हैं। फैंस का मानना है कि कलाकारों के काम और उनके योगदान की सराहना की जानी चाहिए, न कि उनके निजी लुक और उम्र पर अनगल बातें बनाई जानी चाहिए। खुशबू सुंदर के इस करारे जवाब ने न केवल ट्रोलर्स का मुंह बंद किया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि सिनेमा जगत की महिलाएं अब किसी भी तरह की अनावश्यक आलोचना को चुपचाप सहन करने के मूड में नहीं हैं।
चीनी मिलों और थोक उपभोक्ताओं के लिए राहत: एडवांस ऑथराइजेशन योजना में बड़े बदलाव

चीनी मिलों और थोक उपभोक्ताओं के लिए राहत: एडवांस ऑथराइजेशन योजना में बड़े बदलाव

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📅 20 Sep2026

सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा 15 दिनों से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। अतिरिक्त स्टॉक एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत आयातित चीनी से ही होना चाहिए। डीजीएफटी द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य निर्यातकों को बिना किसी शुल्क के कच्चे माल का आयात करने की सुविधा देना है।

चीनी मिलों और थोक उपभोक्ताओं के लिए राहत: एडवांस ऑथराइजेशन योजना में बड़े बदलाव
खबर का निचोड़:
सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा 15 दिनों से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। अतिरिक्त स्टॉक एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत आयातित चीनी से ही होना चाहिए। डीजीएफटी द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य निर्यातकों को बिना किसी शुल्क के कच्चे माल का आयात करने की सुविधा देना है।
अत्याधुनिक नियमों का नया दौर
देश के व्यापारिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने निर्यातकों और थोक उपभोक्ताओं के लिए नियमों में लचीलापन दिखाया है। अब तक स्टॉक सीमा को लेकर जो सख्त पाबंदियां थीं, उनमें राहत दी गई है। इस बदलाव से विशेष रूप से उन उद्योगों को बल मिलेगा जो बड़े पैमाने पर उत्पादन और वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
स्टॉक सीमा में हुआ बड़ा बदलाव
सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा 15 दिन की स्टॉकहोल्डिंग सीमा को बढ़ाकर सीधे 30 दिन कर दिया है। हालांकि, इसके साथ एक स्पष्ट शर्त जोड़ी गई है कि 15 दिनों से अधिक का स्टॉक केवल एडवांस ऑथराइजेशन योजना (एएएस) के तहत आयातित चीनी से ही पूरा किया जाएगा। यह कदम घरेलू बाजार में संतुलन बनाए रखने और आयातकों को बेहतर अवसर प्रदान करने की दिशा में उठाया गया है।
क्या है एडवांस ऑथराइजेशन योजना
यह योजना अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की साख और निर्यात को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम है। इसके अंतर्गत निर्यात उत्पादों में भौतिक रूप से उपयोग होने वाले इनपुट को बिना किसी शुल्क के आयात करने की अनुमति मिलती है। इसमें केवल कच्चा माल ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग सामग्री, ईंधन, तेल और कैटलिस्ट भी शामिल हैं जो उत्पादन प्रक्रिया में खपत होते हैं। इसका मुख्य संचालन विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा किया जाता है।
करों से मिलती है पूर्ण छूट
इस योजना के तहत आयातित इनपुट कई तरह के शुल्कों से मुक्त होते हैं। इसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, एजुकेशन सेस, एंटी-डंपिंग ड्यूटी और सेफगार्ड ड्यूटी के साथ-साथ इंटीग्रेटेड टैक्स और कंपनसेशन सेस भी शामिल हैं। हालांकि, इन सभी छूटों का लाभ उठाने के लिए कुछ निश्चित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है और इसके एवज में एक निर्यात दायित्व भी तय किया जाता है।
किसे मिलता है इसका सीधा लाभ
यह योजना मुख्य रूप से दो श्रेणियों के निर्यातकों के लिए वरदान साबित होती है। इसमें निर्माता निर्यातक (जो निर्यात के लिए खुद वस्तुओं का निर्माण करते हैं) और मर्चेंट निर्यातक (जो सहायक निर्माताओं से सामान प्राप्त कर निर्यात करते हैं) शामिल हैं। इस ऑथराइजेशन का दायरा काफी व्यापक है, जिसके तहत भौतिक निर्यात, इंटरमीडिएट सप्लाई, डीम्ड एक्सपोर्ट और विदेशी जाने वाले जहाजों व विमानों पर 'स्टोर' की आपूर्ति को कवर किया जाता है।
वैधता और समयसीमा
व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस ऑथराइजेशन की वैधता जारी होने की तिथि से 12 महीने तक तय की गई है। इस निश्चित समय सीमा के भीतर निर्यातकों को अपने सभी लक्ष्यों को पूरा करना होता है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिलती है।
समंदर का नया सिकंदर: भारतीय नौसेना की ताकत

समंदर का नया सिकंदर: भारतीय नौसेना की ताकत

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📅 20 Sep2026

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड भारतीय नौसेना के लिए छह नेक्स्ट-जेनरेशन मिसाइल जहाजों का निर्माण कर रहा है। करीब 9,805 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत पहले जहाज की कील रख दी गई है। ब्रह्मोस मिसाइल से लैस ये हाई-स्पीड युद्धपोत रणनीतिक चोक पॉइंट्स पर दुश्मन के छक्के छुड़ाने और समंदर में दबदबा कायम करने के लिए तैयार हो रहे हैं।

समंदर का नया सिकंदर: भारतीय नौसेना की ताकत
खबर का निचोड़
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड भारतीय नौसेना के लिए छह नेक्स्ट-जेनरेशन मिसाइल जहाजों का निर्माण कर रहा है। करीब 9,805 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत पहले जहाज की कील रख दी गई है। ब्रह्मोस मिसाइल से लैस ये हाई-स्पीड युद्धपोत रणनीतिक चोक पॉइंट्स पर दुश्मन के छक्के छुड़ाने और समंदर में दबदबा कायम करने के लिए तैयार हो रहे हैं।
समंदर में भारत की नई आक्रामक ताकत
भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मजबूती मिलने जा रही है। देश की सुरक्षा को धार देते हुए, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने छह नेक्स्ट-जेनरेशन मिसाइल जहाजों (NGMV) में से पहले पोत की कील रख दी है। यह मील का पत्थर न केवल शिपबिल्डर के लिए एक बड़ी छलांग है, बल्कि यह एडवांस्ड वेपन-इंटेंसिव प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का भी स्पष्ट प्रमाण है।
रणनीतिक चोक पॉइंट्स पर अचूक प्रहार
लगभग 9,805 करोड़ रुपये की इस विशाल लागत वाली परियोजना के तहत तैयार होने वाले ये अत्याधुनिक युद्धपोत मार्च 2027 से भारतीय बेड़े में शामिल होने शुरू हो जाएंगे। इन जहाजों की प्राथमिक भूमिका दुश्मन के युद्धपोतों, मर्चेंट जहाजों और जमीनी ठिकानों पर आक्रामक प्रहार करना है। इन्हें विशेष रूप से मैरीटाइम स्ट्राइक और एंटी-सरफेस वॉरफेयर ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री चोक पॉइंट्स पर नौसेना को शक्तिशाली 'सी-डैनियल' यानी समुद्री अवरोधक क्षमता प्रदान करेंगे।
रफ्तार, स्टील्थ और घातक हथियारों का संगम
इन जहाजों की तकनीकी खूबियां इन्हें दुनिया के चुनिंदा आधुनिक युद्धपोतों की कतार में खड़ा करती हैं। जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा निर्मित शक्तिशाली एलएम2500 मरीन गैस टरबाइन इनकी propulsion प्रणाली का दिल है, जो स्टील्थ (छिपे रहने की) जरूरतों को पूरा करते हुए जबरदस्त रफ्तार पैदा करती है। लगभग 80 कर्मियों के दल वाले ये पोत 33 समुद्री मील (61 किमी/घंटा) की अधिकतम गति हासिल करने में सक्षम हैं। रीफ्यूलिंग के जरिए अपनी क्षमता का विस्तार करते हुए ये लगातार 10 दिनों तक खुले समुद्र में तैनात रह सकते हैं।
ब्रह्मोस की ताकत और आधुनिक सुरक्षा कवच
इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी मारक क्षमता इसमें शामिल ब्रह्मोस सुपरसोमिस क्रूज़ मिसाइल है, जो लंबी दूरी के लक्ष्यों को पलक झपकते नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखती है। इसके अलावा, ये पोत अत्याधुनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों, एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एयर-सर्विलांस और फायर-कंट्रोल रडार से लैस होंगे। उन्नत इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और डैमेज-कंट्रोल मशीनरी के साथ, यह नया बेड़ा न केवल आक्रामक अभियानों को अंजाम देगा, बल्कि स्थानीय नौसैनिक रक्षा और अपतटीय विकास क्षेत्रों की सुरक्षा का भी एक मजबूत मोर्चा संभालेगा।
उत्तर सागर: यूरोप का नया ऊर्जा केंद्र और कार्बन कैप्चर का भविष्य

उत्तर सागर: यूरोप का नया ऊर्जा केंद्र और कार्बन कैप्चर का भविष्य

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📅 20 Sep2026

उत्सर्जन घटाने की अनूठी पहल के बीच उत्तर सागर एक बार फिर दुनिया के नक्शे पर चमक उठा है। डेनमार्क ने पुराने तेल प्लेटफॉर्म के नीचे समुद्र तल में कार्बन डाइऑक्साइड स्टोर करने के एक क्रांतिकारी सीसीएस (CCS) प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।

उत्तर सागर: यूरोप का नया ऊर्जा केंद्र और कार्बन कैप्चर का भविष्य
उत्सर्जन घटाने की अनूठी पहल के बीच उत्तर सागर एक बार फिर दुनिया के नक्शे पर चमक उठा है। डेनमार्क ने पुराने तेल प्लेटफॉर्म के नीचे समुद्र तल में कार्बन डाइऑक्साइड स्टोर करने के एक क्रांतिकारी सीसीएस (CCS) प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।
अटलांटिक महासागर की यह उत्तरपूर्वी उथली बांह यानी उत्तर सागर अपनी रणनीतिक स्थिति और असीम प्राकृतिक संपदा के कारण हमेशा से यूरोपीय अर्थव्यवस्था की धुरी रहा है। ब्रिटिश द्वीप समूह और उत्तर-पश्चिमी यूरोप के बीच स्थित इस समंदर की सीमाएं यूनाइटेड किंगडम, नॉर्वे, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम और फ्रांस जैसे देशों से मिलती हैं। इंग्लिश चैनल के रास्ते अटलांटिक महासागर और कट्टेगाट व स्केगेरैक जलडमरूमध्य के जरिए बाल्टिक सागर से इसकी जुड़ाव इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महामार्ग बनाती है। टेम्स, राइन, एल्बे और ह्यूंबर जैसी दुनिया की प्रमुख नदियां इसमें गिरकर इसके पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध करती हैं।
आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्ता
उत्तर सागर केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी यूरोप का पावरहाउस है। इसके तलहटी में प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम के विशाल भंडार छिपे हैं, जिन्होंने यूरोपीय देशों की ऊर्जा सुरक्षा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। इसके अलावा, यह क्षेत्र दुनिया के सबसे समृद्ध और उत्पादक मत्स्य पालन क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां से लाखों टन मछलियां पकड़ी जाती हैं। यूरोप के भीतर आपसी व्यापार हो या यूरोप और मध्य पूर्व के बीच का समुद्री मार्ग, उत्तर सागर हमेशा से नौवहन और शिपिंग का सबसे व्यस्त और सुरक्षित गलियारा रहा है।
पर्यावरण और हरित तकनीक की नई इबारत
कभी जीवाश्म ईंधन और तेल के बेताबी दोहन के लिए पहचाने जाने वाले इस समंदर में अब हवा का रुख बदल रहा है। हाल ही में डेनमार्क द्वारा शुरू किया गया कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS) प्रोजेक्ट इस बात का प्रमाण है कि उत्तर सागर अब प्रदूषण के खिलाफ जंग का सबसे बड़ा मैदान बन गया है। समुद्र की सतह के नीचे पुराने तेल प्लेटफॉर्मों का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड को हमेशा के लिए दफनाने की यह तकनीक ग्लोबल वार्मिंग से निपटने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। प्रकृति की गोद में छिपे संसाधनों का दोहन करने से लेकर अब उन्हें संवारने तक, उत्तर सागर आधुनिक दुनिया की बदलती प्राथमिकताओं की सबसे सटीक कहानी कह रहा है।
उत्तराखंड के हिमालयी मोनॉल पर मंडराता नया खतरा: बदल रही है राज्य पक्षी की भाषा

उत्तराखंड के हिमालयी मोनॉल पर मंडराता नया खतरा: बदल रही है राज्य पक्षी की भाषा

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📅 20 Sep2026

उत्तराखंड के शांत जंगलों में गूंजने वाली हिमालयी मोनॉल की सुरीली आवाजें अब बदल रही हैं। हालिया शोध के मुताबिक, इंसानी दखल और ट्रैफिक के शोर ने इस खूबसूरत पक्षी को अपनी कॉलिंग फ्रिक्वेंसी बदलने पर मजबूर कर दिया है, जो इसके अस्तित्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

उत्तराखंड के हिमालयी मोनॉल पर मंडराता नया खतरा: बदल रही है राज्य पक्षी की भाषा
उत्तराखंड के शांत जंगलों में गूंजने वाली हिमालयी मोनॉल की सुरीली आवाजें अब बदल रही हैं। हालिया शोध के मुताबिक, इंसानी दखल और ट्रैफिक के शोर ने इस खूबसूरत पक्षी को अपनी कॉलिंग फ्रिक्वेंसी बदलने पर मजबूर कर दिया है, जो इसके अस्तित्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
पर्यटकों का शोर और बदलती पक्षी बोली
उत्तराखंड में हुए एक नए अध्ययन ने पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही, पर्यटकों की भीड़ और धार्मिक यात्राओं के शोर के बीच रहने वाले हिमालयी मोनॉल अब पहले से कहीं अधिक ऊंची और अलग आवृत्तियों (High-frequency calls) में आवाजें निकाल रहे हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि मानवीय हस्तक्षेप वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को कितनी गहराई से प्रभावित कर रहा है।
रंगों का अजूबा और पर्वतीय पहचान
'इम्पेयन मोनॉल' या 'डांफे' के नाम से मशहूर यह पक्षी फीजैनिडे परिवार का एक बड़ा और बेहद भव्य जीव है। यह उत्तराखंड का राज्य पक्षी भी है। इसमें अत्यधिक यौन द्विरूपता (Sexual Dimorphism) पाई जाती है। नर मोनॉल सिर से पांव तक इंद्रधनुषी रंगों और एक लंबे, हरे मेटैलिक मुकुट से सजे होते हैं, जबकि मादा मोनॉल हल्के नीले रंग के आई-पैच, सफेद गले और भूरे शरीर के साथ अलग पहचान रखती हैं।
बर्फीली वादियों में जीवन और आदतें
यह प्रजाति मुख्य रूप से शंकुधारी और ओक के ऊपरी समशीतोष्ण वनों के साथ खुले घास के मैदानों में निवास करती है। आम तौर पर यह 2,500 से 4,000 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है और महान हिमालयी राष्ट्रीय पार्क (GHNP) तथा तीर्थन घाटी में इन्हें आसानी से देखा जा सकता है। इनकी उपस्थिति जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम तक फैली हुई है। यह जमीन पर रहने वाला पक्षी है जो अपनी मजबूत चोंच से पत्तों की परतों और मिट्टी को खोदकर जड़ें, कंद, बीज और कीड़े-मकोड़े ढूंढता है। सर्दियों में यह 2,000 मीटर तक नीचे उतर आते हैं, हालांकि बर्फबारी के बीच भी भोजन तलाशने की इनकी क्षमता अद्भुत है।
संरक्षण और भविष्य की चुनौतियां
प्राकृतिक आवासों के सिकुड़ने, अवैध शिकार और बेलगाम पर्यटन के कारण यह पक्षी लगातार दबाव में है। हालांकि आईयूसीएन रेड लिस्ट में इसे 'Least Concern' यानी कम खतरे की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इसे 'अनुसूची I' (Schedule I) का सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है, जो इसके संरक्षण की अत्यधिक आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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