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कबाड़ से कुबेर: सरकार ने पुरानी फाइलें और कबाड़ बेचकर कमाए ₹5,100 करोड़

कबाड़ से कुबेर: सरकार ने पुरानी फाइलें और कबाड़ बेचकर कमाए ₹5,100 करोड़

Delight News
📅 17 Sep2026

सरकार ने कबाड़ बेचकर पिछले 5 साल में कमाए ₹5,100 करोड़

केंद्र सरकार ने बताया है कि पिछले 5 वर्षों में कबाड़ बेचकर ₹5,102 करोड़ कमाए गए हैं। इस दौरान लगभग 1,000 लाख वर्ग फीट ऑफिस स्पेस खाली कराए गए और 24 लाख से ज़्यादा जगहों पर सफाई अभियान चलाए गए। साथ ही रिकॉर्ड मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए 5 वर्षों में लगभग 2 करोड़ फाइलों को हटाया गया।

कबाड़ से कुबेर: सरकार ने पुरानी फाइलें और कबाड़ बेचकर कमाए ₹5,100 करोड़
खबर का निचोड़
केंद्र सरकार ने कबाड़ प्रबंधन और सफाई अभियानों के जरिए पिछले 5 सालों में ₹5,102 करोड़ की रिकॉर्ड कमाई की है। इस महा-अभियान के दौरान 2 करोड़ अनावश्यक फाइलों को हटाकर लगभग 1,000 लाख वर्ग फीट दफ्तरी जगह खाली कराई गई और 24 लाख से अधिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया।
सरकारी दफ्तरों से निकला खजाना
सरकारी महकमों में सालों से धूल फांक रही पुरानी फाइलों और कबाड़ को लेकर अक्सर लोग चुटकियां लेते थे, लेकिन केंद्र सरकार ने इसी कबाड़ को कमाई का बड़ा जरिया बना दिया है। पिछले 5 वर्षों के दौरान चलाए गए विशेष अभियानों के तहत बेकार पड़े सामान, पुराने वाहनों और अनुपयोगी उपकरणों की नीलामी करके ₹5,102 करोड़ की भारी-भरकम राशि जुटाई गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अगर सही प्रबंधन और इच्छाशक्ति हो, तो बेकार समझी जाने वाली चीजें भी देश के खजाने में बड़ा योगदान दे सकती हैं।
खाली हुई 1,000 लाख वर्ग फीट जगह
कबाड़ हटाने का यह फैसला केवल आर्थिक कमाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सरकारी कार्यालयों का नक्शा ही बदल दिया। बेकार पड़ी फाइलों, टूटे फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक कचरे को हटाने से लगभग 1,000 लाख वर्ग फीट ऑफिस स्पेस खाली हुआ है। इतनी बड़ी जगह का दोबारा उपयोग अब कामकाज के बेहतर संचालन, नए विभागों की स्थापना और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था सुधारने के लिए किया जा रहा है। जो जगह कभी कबाड़खाना बनी हुई थी, वहां अब साफ-सुथरा और आधुनिक कार्य माहौल तैयार हो चुका है।
2 करोड़ फाइलों का निपटारा और डिजिटल क्रांति
अक्सर सरकारी फाइलों के जाल में काम अटकने की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन रिकॉर्ड मैनेजमेंट में सुधार लाते हुए प्रशासन ने पिछले 5 सालों में लगभग 2 करोड़ पुरानी और अनावश्यक फाइलों को हमेशा के लिए हटा दिया है। फाइलों के इस व्यवस्थित छंटनी अभियान से न केवल कागजी बोझ कम हुआ है, बल्कि डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को भी नई रफ्तार मिली है। महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया गया है, जिससे फाइलों की खोज और प्रशासनिक फैसलों में लगने वाला समय काफी घट गया है।
24 लाख जगहों पर चला स्वच्छता का चाबुक
देशव्यापी स्तर पर चलाए गए इस विशेष स्वच्छता अभियान का दायरा बहुत व्यापक रहा। देश भर के केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और उनसे जुड़े लगभग 24 लाख से अधिक स्थानों पर व्यापक सफाई की गई। इस पहल ने न केवल दफ्तरों की कार्यशैली में अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है, बल्कि सरकारी विभागों के प्रति जनता के दृष्टिकोण को भी बदला है। स्वच्छता और बेहतर प्रबंधन का यह मॉडल अब भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की नई पहचान बनता जा रहा है।
EMI नहीं भरी तो रिकवरी एजेंट नहीं छीन पाएंगे गाड़ी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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📅 17 Sep2026

बैंक या फाइनेंस कंपनियां लोन डिफॉल्ट होने पर जबरन वाहन नहीं छीन सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के एक मामले में चोलमंडलम फाइनेंस को रिकवरी के नाम पर गुंडागर्दी करने के लिए फटकार लगाई और पीड़ित को ₹10 लाख का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि रिकवरी कानून के दायरे में होगी, दादागिरी से नहीं।

EMI नहीं भरी तो रिकवरी एजेंट नहीं छीन पाएंगे गाड़ी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
खबर का निचोड़
बैंक या फाइनेंस कंपनियां लोन डिफॉल्ट होने पर जबरन वाहन नहीं छीन सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के एक मामले में चोलमंडलम फाइनेंस को रिकवरी के नाम पर गुंडागर्दी करने के लिए फटकार लगाई और पीड़ित को ₹10 लाख का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि रिकवरी कानून के दायरे में होगी, दादागिरी से नहीं।
बैंक और रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट का चाबुक
अगर आपने कार या बाइक लोन पर ली है और किसी कारणवश किस्त रुक गई है, तो बैंक के रिकवरी एजेंट आपके घर के बाहर आकर गुंडागर्दी नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और कड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि लोन चुकाने में चूक होने पर बैंक को गाड़ी वापस लेने का अधिकार जरूर है, लेकिन इसके लिए कानून को ताक पर रखकर जबरदस्ती या दादागिरी नहीं की जा सकती।
यूपी का मामला: 10 लाख रुपये का लगा भारी जुर्माना
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश का है, जहां चोलमंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंटों ने लोन डिफॉल्ट होने पर पीड़ित की गाड़ी को जबरन जब्त कर लिया था। पीड़ित ने फाइनेंस कंपनी की इस दबंगई के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई और कंपनी को पीड़ित को ₹10 लाख का भारी मुआवजा देने का सख्त आदेश सुनाया।
कानून का दायरा: वसूली के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि लोन की किश्त न मिलने पर वित्तीय संस्थाओं को अपनी बकाया राशि वसूलने की कानूनी अनुमति है, लेकिन इसके नाम पर किसी नागरिक की गरिमा और उसके अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। रिकवरी के नाम पर बल प्रयोग, धमकी देना या जबरन सड़क से वाहन उठा लेना सरासर गैर-कानूनी है। बैंकों और एनबीएफसी (NBFC) को रिकवरी की प्रक्रिया केवल कानूनी नोटिस और उचित अदालती प्रक्रियाओं के माध्यम से ही पूरी करनी होगी।
आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत
अक्सर देखने में आता है कि लोन डिफॉल्ट होते ही प्राइवेट रिकवरी एजेंट ग्राहकों को डराने-धमकाने लगते हैं और बिना किसी पूर्व सूचना के वाहन खींचकर ले जाते हैं। शीर्ष अदालत के इस फैसले से देश के करोड़ों वाहन लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है। अब कोई भी फाइनेंस कंपनी या बैंक मनमाने तरीके से रिकवरी एजेंटों के जरिए जबरदस्ती गाड़ी नहीं छीन पाएगा। अगर कोई संस्था ऐसा करती है, तो उसे कानूनी कार्रवाई और भारी मुआवजे का सामना करना पड़ेगा।
भारत और न्यू जीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों में ऐतिहासिक नया अध्याय

भारत और न्यू जीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों में ऐतिहासिक नया अध्याय

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📅 17 Sep2026

न्यू जीलैंड की संसद ने भारत के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण कानून पारित किया है। इस रणनीतिक कदम से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, निर्यात के नए अवसर और द्विपक्षीय व्यापार को अभूतपूर्व गति मिलने की पूरी उम्मीद है।

भारत और न्यू जीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों में ऐतिहासिक नया अध्याय
न्यू जीलैंड की संसद ने भारत के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण कानून पारित किया है। इस रणनीतिक कदम से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, निर्यात के नए अवसर और द्विपक्षीय व्यापार को अभूतपूर्व गति मिलने की पूरी उम्मीद है।
भारत-न्यू जीलैंड व्यापार समझौता: नए युग की शुरुआत
दक्षिण प्रशांत महासागर की गोद में बसा खूबसूरत द्वीपीय देश न्यू जीलैंड इन दिनों वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। हाल ही में न्यू जीलैंड की संसद ने भारत के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते को अमली जामा पहनाने के लिए आवश्यक कानून को मंजूरी दे दी है। यह कदम दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रहा है, जिससे व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और आपसी संबंधों को एक नई मजबूती मिलेगी।
भौगोलिक स्थिति और भू-भाग का अनूठा स्वरूप
ओशिनिया क्षेत्र का यह प्रमुख हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह देश मुख्य रूप से दो बड़े भू-भागों—उत्तर द्वीप और दक्षिण द्वीप में बंटा हुआ है, जिनके बीच कुक जलडमरूमध्य (Cook Strait) स्थित है। इसकी राजधानी वेलिंगटन है। यह क्षेत्र पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा होने के कारण अपनी अनूठी भौगोलिक और प्राकृतिक बनावट के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, जहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां दर्ज की जाती हैं।
प्रकृति की गोद में बसी असीम खूबियां और संपदा
न्यू जीलैंड की जलवायु उत्तर में गर्म उपोष्णकटिबंधीय से लेकर दक्षिण में ठंडे शीतोष्ण कटिबंध तक बेहद विविधतापूर्ण है। यहां का भूगोल प्राकृतिक चमत्कारों से भरा हुआ है। 12,316 फीट की ऊंचाई वाला माउंट कुक इस देश की सबसे ऊंची चोटी है, जबकि माउंट रुआपेहू एक सक्रिय ज्वालामुखी के रूप में जाना जाता है। देश का सबसे बड़ा तस्मान ग्लेशियर और सबसे बड़ी प्राकृतिक झील 'झील ताउपो' इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक संसाधनों के मामले में भी यह देश काफी समृद्ध है, जहां स्वर्ण, रजत, आयरन सैंड, फॉस्फेट और चूना पत्थर जैसे महत्वपूर्ण खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
झारखंड के डैम्स पर मंडरा रहा खतरा, एनडीएसए ने मांगी सख्त कार्रवाई

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📅 17 Sep2026

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) ने झारखंड सरकार से श्रेणी-द्वितीय के बांधों की सुरक्षा और मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। यह वैधानिक निकाय देश भर के बांधों की निगरानी, नियमन और उनके रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

झारखंड के डैम्स पर मंडरा रहा खतरा, एनडीएसए ने मांगी सख्त कार्रवाई
खबर का निचोड़:
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) ने झारखंड सरकार से श्रेणी-द्वितीय के बांधों की सुरक्षा और मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। यह वैधानिक निकाय देश भर के बांधों की निगरानी, नियमन और उनके रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
झारखंड में बांधों की सुरक्षा पर बड़ा संकट
देश के बुनियादी ढांचे और आम जनता की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण यानी एनडीएसए ने झारखंड राज्य में बांधों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के श्रेणी-द्वितीय (Category-II) के बांधों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिसके चलते प्राधिकरण ने इनकी व्यापक सुरक्षा जांच और समयबद्ध पुनर्वास के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
क्या है राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण?
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण कोई आम निकाय नहीं है, बल्कि इसे केंद्र सरकार द्वारा 'बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021' के तहत एक शक्तिशाली वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के विशाल और संवेदनशील बांधों का नियमन करना, उन पर पैनी नजर रखना और समय-समय पर उनका निरीक्षण करना है। नई दिल्ली में इसका मुख्यालय स्थित है, जहां से पूरे देश की बांध प्रणालियों पर नियंत्रण रखा जाता है।
नेतृत्व और पांच मजबूत विंग
इस महत्वपूर्ण प्राधिकरण की कमान एक अनुभवी चेयरमैन के हाथों में होती है। उनके कार्यों को सुचारू रूप से चलाने और देश के बांध नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए पांच विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति की गई है। ये सदस्य प्राधिकरण के पांच प्रमुख विंगों की कमान संभालते हैं, जिनमें नीति और अनुसंधान, तकनीकी, नियमन, आपदा और लचीलापन, तथा प्रशासन और वित्त विंग शामिल हैं। यह ढांचा इसे किसी भी आपदा से निपटने में सक्षम बनाता है।
एनडीएसए की कार्यप्रणाली और अधिकार
इस प्राधिकरण की कार्यशैली बेहद स्पष्ट और दूरदर्शी है। यह 'राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति' द्वारा बनाई गई नीतियों को धरातल पर उतारने का काम करता है। इसके अलावा, यह राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (SDSOs) और बांध मालिकों के बीच आने वाले जटिल विवादों को सुलझाने का काम भी करता है। बांधों की मजबूती की जांच और उनके रखरखाव के लिए कड़े नियम बनाना भी इसी के अधिकार क्षेत्र में आता है।
निर्माण एजेंसियों के लिए कड़े मानक
बांधों के डिजाइन, निर्माण और उनमें किसी भी तरह के बदलाव के लिए एनडीएसए देश की विभिन्न एजेंसियों को आधिकारिक मान्यता प्रदान करता है। इसके द्वारा तय किए गए मानकों में संरचनात्मक मजबूती, पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और किसी भी आपदा से निपटने के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल शामिल हैं। देश भर में जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ यह संस्था किसी भी प्राकृतिक आपदा या अनहोनी की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया योजनाओं को भी सुनिश्चित करती है।
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📅 17 Sep2026

केंद्र सरकार ने कर्नाटक के प्रतिष्ठित नागरहोल टाइगर रिजर्व के चारों ओर एक बार फिर पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र यानी ईको-सेंसेटिव जोन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस बार लगभग 573.95 वर्ग किलोमीटर के दायरे को चिन्हित किया गया है, जहां वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई व्यावसायिक और मानसूनी गतिविधियों पर कड़ी लगाम कसी जाएगी।

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केंद्र सरकार ने कर्नाटक के प्रतिष्ठित नागरहोल टाइगर रिजर्व के चारों ओर एक बार फिर पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र यानी ईको-सेंसेटिव जोन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस बार लगभग 573.95 वर्ग किलोमीटर के दायरे को चिन्हित किया गया है, जहां वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई व्यावसायिक और मानसूनी गतिविधियों पर कड़ी लगाम कसी जाएगी। यह कदम इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को इंसानी दखल से बचाने की दिशा में एक बेहद अहम मोड़ साबित होने वाला है।
प्रकृति की गोद में बसा अनूठा अभ्यारण्य
दक्षिण भारत के मैसूर और कोडागु जिलों में फैला यह रिजर्व भौगोलिक दृष्टि से बेहद खास है। यह कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों के त्रि-जंक्शन पर स्थित है, जो इसे पश्चिमी और पूर्वी घाटों का एक बेजोड़ 'पारिस्थितिक संगम' बनाता है। इसका नाम 'नगारहोल' एक स्थानीय धारा के नाम पर पड़ा है, जिसका कन्नड़ में अर्थ 'सांप जैसी नदी' होता है। यह धारा रिजर्व के बीचों-बीच बलखाती हुई आगे बढ़ती है और अंत में काबिनी नदी में जा मिलती है।
विश्व धरोहर का एक चमकता सितारा
यह भव्य वन क्षेत्र विशाल नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। इसके भौगोलिक विस्तार की बात करें तो इसके उत्तर में काबिनी नदी और दक्षिण में मोयार नदी इसका पहरा देती हैं। इसके अलावा, इसकी सीमाएं दक्षिण-पूर्व में बांदीपुर टाइगर रिजर्व और दक्षिण-पश्चिम में केरल के वायनाड वन्यजीव अभ्यारण्य से सटी हुई हैं, जो इसे वन्यजीवों के অবাধ विचरण के लिए एक सुरक्षित गलियारा बनाती हैं।
विविध वनस्पतियों और वन्यजीवों का स्वर्ग
इस रिजर्व की जलवायु और भौगोलिक विविधता इसकी वनस्पतियों में साफ झलकती है। इसके पूर्वी हिस्से में कम बारिश के चलते शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जबकि पश्चिमी छोर की ओर बढ़ते ही वर्षा की अधिकता के कारण यह क्षेत्र उष्णकटिबंधीय नम और अर्ध-सदाबहार जंगलों में बदल जाता है। यहां की वन संपदा में शीशम, भारतीय कीनो, चंदन, लॉरेल और विशाल बांस के झुंड प्रमुखता से शामिल हैं।
वन्यजीवों का प्राकृतिक साम्राज्य
घने जंगलों और पानी की प्रचुरता के कारण यह रिजर्व वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां के शाकाहारी जीवों में गौर, सुस्त भालू, चार सींगों वाला मृग और विशाल हाथियों के झुंड प्रमुख हैं। वहीं, मांसाहारी जीवों की बात करें तो यहां बंगाल टाइगर और ढोले जैसे दुर्दांत शिकारी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं। यही विविधता इस पूरे अंचल को भारतीय वन्यजीव मानचित्र पर सबसे खास बनाती है।

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