
13 में ब्लैंक चेक, 18 में मांधना ने खरीदा घर
भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मांधना ने अपने बचपन के एक अनोखे सपने का खुलासा किया है। 13 साल की उम्र में माता-पिता के लिए घर खरीदने का सपना देखते हुए उन्होंने एक ब्लैंक चेक लिखा था। मेनिफेस्टेशन और कड़ी मेहनत के बल पर महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना यह सपना पूरा कर दिखाया।
खबर का निचोड़
भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मांधना ने अपने बचपन के एक अनोखे सपने का खुलासा किया है। 13 साल की उम्र में माता-पिता के लिए घर खरीदने का सपना देखते हुए उन्होंने एक ब्लैंक चेक लिखा था। मेनिफेस्टेशन और कड़ी मेहनत के बल पर महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना यह सपना पूरा कर दिखाया।
13 साल का वो ब्लैंक चेक
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज बल्लेबाज स्मृति मांधना ने अपने शुरुआती जीवन के एक प्रेरणादायक अध्याय को साझा किया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के शीर्ष स्तर पर अपनी जगह बनाने से काफी पहले, स्मृति के मन में एक स्पष्ट और बड़ा लक्ष्य तय हो चुका था। वह अपने माता-पिता को उनके सपनों का घर देना चाहती थीं।
महज 13 साल की उम्र में, जब अधिकतर बच्चे भविष्य की उलझनों से दूर होते हैं, स्मृति ने अपने जीवन का यह सबसे बड़ा सपना देखा था। इस सपने को हासिल करने के लिए उन्होंने न केवल मन में इच्छा रखी, बल्कि एक खास रूटीन की शुरुआत भी की।
मां का संघर्ष बनी सबसे बड़ी प्रेरणा
स्मृति मांधना के अनुसार, 13 साल की उम्र में उन्होंने एक मेनिफेस्टेशन रूटीन के तहत बाकायदा एक ब्लैंक चेक लिखकर रखा था। यह ब्लैंक चेक उनके लिए एक प्रतीकात्मक संकल्प था, जो उन्हें हर दिन उनके मुख्य लक्ष्य की याद दिलाता रहता था।
स्मृति ने अपनी मां को परिवार के पालन-पोषण और उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए दिन-रात संघर्ष करते देखा था। मां की वही अथक मेहनत स्मृति के लिए सबसे बड़ा संबल और प्रेरणा बनी। उनका एकमात्र मकसद यही था कि वह अपने परिवार की स्थिति बदलेंगी और मां के संघर्षों को एक नया मुकाम देंगी।
18 की उम्र में पूरा हुआ सपना
इसी अटूट संकल्प और क्रिकेट के मैदान पर बहाए गए पसीने का नतीजा बहुत जल्द दुनिया के सामने आया। स्मृति मांधना की मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपनी खेल प्रतिभा के बल पर भारतीय टीम में अपनी पहचान बनाई।
नतीजतन, जिस उम्र में युवा अपने भविष्य के रास्ते तलाश रहे होते हैं, उस महज 18 साल की उम्र में स्मृति ने अपना वादा पूरा कर दिखाया। उन्होंने अपने माता-पिता के लिए एक नया घर खरीद लिया। 13 साल की उम्र में लिखा गया वह ब्लैंक चेक 18 की उम्र में सच साबित हुआ।
मैदान पर मेहनत से हासिल की मंजिल
स्मृति मांधना का यह सफर दिखाता है कि कैसे एक 13 साल की बच्ची ने अपनी सोच, अनुशासन और क्रिकेट स्किल के दम पर इतनी छोटी उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने अपने मेनिफेस्टेशन रूटीन को सिर्फ विचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे मैदान पर अपने कड़े अभ्यास से जोड़ा।
आज स्मृति मांधना महिला क्रिकेट विश्व में एक बड़ा नाम बन चुकी हैं। उनकी यह कहानी 13 साल की उम्र से शुरू होकर 18 साल में घर खरीदने और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने का प्रमाण है।

ब्रिक्स डिनर के शाकाहारी मेन्यू पर राहुल गांधी का तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज में परोसे गए विशुद्ध शाकाहारी खाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसा है। राहुल ने एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं, जिसके बाद खान-पान और कूटनीति पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज में परोसे गए विशुद्ध शाकाहारी खाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसा है। राहुल ने एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं, जिसके बाद खान-पान और कूटनीति पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
ब्रिक्स डिनर पर राहुल गांधी की टिप्पणी
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित विशेष रात्रिभोज अब सुर्खियों में आ गया है। इस भव्य कार्यक्रम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, मलेशिया और मिस्र के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में परोसे गए भोजन को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस डिनर मेन्यू को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
राहुल गांधी ने सीधे तौर पर ब्रिक्स के मेन्यू पर सीधा हमला करने की बजाय अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक रहस्यमयी पोस्ट साझा किया। उन्होंने भोजन की तस्वीर साझा करते हुए एक छोटा संदेश लिखा, "रिकॉर्ड के लिए: 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं।" इस एक वाक्य ने कूटनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया के मंचों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
शाकाहारी था ब्रिक्स का विशेष मेन्यू
शनिवार को आयोजित इस गाला डिनर में दुनिया भर से आए राष्ट्राध्यक्षों के लिए विशुद्ध शाकाहारी व्यंजन तैयार किए गए थे। भारत की पारंपरिक व्यंजन शैली को ध्यान में रखते हुए भोजन की थाली सजाई गई थी। राहुल गांधी के इस सोशल मीडिया पोस्ट से स्पष्ट झलक रहा है कि वह इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर परोसे गए पूरी तरह शाकाहारी मेन्यू से प्रभावित नजर नहीं आए।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में खान-पान और सांस्कृतिक पहचान को लेकर अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होती रहती है। भारत में भोजन की विविधता हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण विषय रही है। राहुल द्वारा 80 प्रतिशत आबादी के मांसाहारी होने का आंकड़ा सार्वजनिक रूप से रखना इसी विषय को एक नया राजनीतिक मोड़ देता है।
कूटनीति और खान-पान की राजनीति
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत और उनके लिए तैयार किया जाने वाला भोजन केवल एक औपचारिकता नहीं होता, बल्कि यह मेजबान देश की सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को दर्शाने का जरिया माना जाता है। आयोजन के दौरान भारत की पारंपरिक शाकाहारी भोजन परंपरा को वैश्विक नेताओं के सामने पेश करने की कोशिश की गई थी।
दूसरी तरफ, इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोग दो गुटों में बंट गए हैं। जहां एक तरफ सत्ता पक्ष और उनके समर्थक इसे भारतीय संस्कृति के गौरव से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे देश की वास्तविक खान-पान विविधता और विशाल आबादी के व्यवहार को अनदेखा करने के रूप में पेश कर रहा है।

मिर्ज़ापुर में बीना त्रिपाठी का 'दिमाग' बना बंदूक से बड़ा हथियार
मिर्ज़ापुर के हिंसक साम्राज्य में कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी बिना किसी हथियार या बाहुबल के अपनी जगह बनाती हैं। रसिका दुगल द्वारा अभिनीत यह किरदार अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और सहज समझ के बल पर परिवार के शोषण और हिंसा से जूझते हुए अपना वर्चस्व स्थापित करता है।
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मिर्ज़ापुर के हिंसक साम्राज्य में कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी बिना किसी हथियार या बाहुबल के अपनी जगह बनाती हैं। रसिका दुगल द्वारा अभिनीत यह किरदार अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और सहज समझ के बल पर परिवार के शोषण और हिंसा से जूझते हुए अपना वर्चस्व स्थापित करता है।
बंदूक और बाहुबल के बीच बुद्धि का खेल
मिर्ज़ापुर की हिंसक और खूनी दुनिया में कालीन भैया का राज चलता है, जहाँ हर पुरुष पात्र अपनी ताकत, बंदूक, पैसे और जातिगत दंभ के दम पर अपनी जगह बनाने में लगा है। इस क्रूर साम्राज्य में अपना अस्तित्व बचाए रखना आसान काम नहीं है। लेकिन इस पूरे माहौल में एक किरदार ऐसा है जो पुरुषों की इस हिंसक भीड़ में बिल्कुल अलग राह चुनता है।
बीना त्रिपाठी: बिना सेना और बंदूक की ताकत
कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी, जिसका किरदार अभिनेत्री रसिका दुगल ने निभाया है, के पास न तो कोई बाहुबल है और न ही पुरुषों की कोई हथियारबंद फौज। बीना के हाथ में कोई बंदूक नहीं होती, लेकिन उनके पास एक ऐसा हथियार है जो बंदूक की गोली से भी ज्यादा घातक साबित होता है—उनकी तीक्ष्ण बुद्धि और परिस्थितियों को भांपने की अद्भुत क्षमता।
शोषण और अपमान से भरा पारिवारिक अतीत
बीना कभी भी उस जीवन का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं जिसमें उन्हें जबरन धकेल दिया गया था। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी के साथ उनकी शादी एक ऐसा फैसला था जिसे उन्होंने कभी दिल से स्वीकार नहीं किया। उम्र का बड़ा फासला, दांपत्य जीवन की कमियां और आसपास फैली खूनी हिंसा से बीना को हमेशा नफरत रही। परिवार के भीतर भी उनके लिए स्थितियां बेहद कठिन थीं। उनके ससुर सत्यानंद त्रिपाठी (कुलभूषण खरबंदा) और घर के लगभग हर पुरुष ने उनका शोषण और उत्पीड़न किया।
मिर्ज़ापुर की जंग में बुद्धिमत्ता का वर्चस्व
पारिवारिक उत्पीड़न और चारों तरफ से खतरों से घिरे होने के बावजूद, बीना ने कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों का जवाब हथियारों से देने के बजाय अपनी सधी हुई चालों से दिया। 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' की कहानी में भी उनका यही दिमाग और रणनीति बनाने का हुनर उन्हें एक मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। रसिका दुगल ने इस किरदार में जिस तरह की गहराई और चतुरता भरी है, उसने बीना त्रिपाठी को इस खूनी गाथा का सबसे अप्रत्याशित और ताकतवर खिलाड़ी बना दिया है।

अपनी ही फिल्में क्यों नहीं देखतीं प्रीति ज़िंटा? खुला राज
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति ज़िंटा ने अपनी फिल्में न देखने की एक अनोखी वजह साझा की है। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जब भी वह खुद को पर्दे पर देखती हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि वह इससे भी बेहतर एक्टिंग कर सकती थीं। वहीं प्रीति जल्द ही अपकमिंग फिल्म 'वाइब' में एक सुपर स्पाई के रोल में पर्दे पर वापसी करेंगी।
खबर का निचोड़:
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति ज़िंटा ने अपनी फिल्में न देखने की एक अनोखी वजह साझा की है। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जब भी वह खुद को पर्दे पर देखती हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि वह इससे भी बेहतर एक्टिंग कर सकती थीं। वहीं प्रीति जल्द ही अपकमिंग फिल्म 'वाइब' में एक सुपर स्पाई के रोल में पर्दे पर वापसी करेंगी।
पर्दे पर खुद को देखने से क्यों कतराती हैं प्रीति?
बॉलीवुड की लोकप्रिय एक्ट्रेस प्रीति ज़िंटा ने अपने लंबे करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं और अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रीति खुद अपनी फिल्में देखना बिल्कुल पसंद नहीं करती हैं? हाल ही में 'हिंदुस्तान टाइम्स' को दिए एक खास इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने इस बात का खुलकर खुलासा किया है और इसके पीछे की एक बेहद व्यक्तिगत वजह शेयर की है।
प्रीति का मानना है कि जब भी वह पर्दे पर अपनी किसी फिल्म या सीन को देखती हैं, तो उनके भीतर का कलाकार कभी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं होता। वह जैसे ही स्क्रीन पर खुद को एक्टिंग करते हुए देखती हैं, उनके दिमाग में तुरंत यह विचार आता है कि उस सीन को और भी बेहतर तरीके से किया जा सकता था। इसी स्व-मूल्यांकन (सेल्फ-क्रिटिक) की भावना के कारण वह अपनी फिल्मों को देखने से दूरी बनाकर रखना पसंद करती हैं।
परफेक्शनिज्म और अभिनय के प्रति एक्ट्रेस की सोच
फिल्म जगत में अक्सर कलाकार अपने ही काम को देखकर अपनी तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन प्रीति ज़िंटा का दृष्टिकोण इससे काफी अलग नजर आता है। स्क्रीन पर खुद की कमियों या बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश तलाशना यह दिखाता है कि वह अपने अभिनय को लेकर कितनी संजीदा और परफेक्शनिस्ट हैं।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साफ किया कि एक कलाकार के रूप में वह हमेशा नया सीखने और अपने काम में सुधार करने की कोशिश करती रहती हैं। यही वजह है कि पुरानी फिल्मों को दोबारा देखने के बजाय वह अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा सही मानती हैं।
एक्शन अवतार में वापसी: 'वाइब' में बनेंगी सुपर स्पाई
फैंस के लिए अच्छी खबर यह है कि प्रीति ज़िंटा एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह अपनी अपकमिंग एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'वाइब' में एक बेहद दमदार और अलग किरदार में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में वह 'मैडम एच' नाम की एक जांबाज सुपर स्पाई (Super Spy) की भूमिका निभाती दिखेंगी।
प्रीति के इस नए अवतार को लेकर दर्शकों और उनके प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 'मैडम एच' के रूप में उनका यह एक्शन पैक्ड रोल 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रहा है।

करण जौहर की बड़ी घोषणा: राधा-कृष्ण पर बनाएंगे भक्ति फिल्म
फिल्ममेकर करण जौहर भगवान श्री कृष्ण और राधा पर आधारित एक भक्ति फिल्म प्रोड्यूस करने जा रहे हैं। इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट का निर्देशन सचिन रवि करेंगे। फिलहाल फिल्म का वर्किंग टाइटल 'राधा कृष्ण' रखा गया है और यह अभी डेवलपमेंट स्टेज में है। करण लंबे समय से इस विषय पर फिल्म बनाना चाहते थे।
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फिल्ममेकर करण जौहर भगवान श्री कृष्ण और राधा पर आधारित एक भक्ति फिल्म प्रोड्यूस करने जा रहे हैं। इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट का निर्देशन सचिन रवि करेंगे। फिलहाल फिल्म का वर्किंग टाइटल 'राधा कृष्ण' रखा गया है और यह अभी डेवलपमेंट स्टेज में है। करण लंबे समय से इस विषय पर फिल्म बनाना चाहते थे।
बॉलीवुड निर्देशक और निर्माता करण जौहर एक बार फिर भारतीय सिनेमा में बड़ा धमाका करने की तैयारी में हैं। ग्लैमर और फैमिली ड्रामा फिल्मों के लिए मशहूर करण जौहर इस बार पौराणिक और भक्ति पृष्ठभूमि पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। उनका अगला ड्रीम प्रोजेक्ट भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा के अलौकिक प्रेम और भक्ति पर आधारित होगा।
भक्ति सिनेमा में करण जौहर का बड़ा कदम
फिल्म जगत में लंबे समय से इस बात की चर्चा थी कि करण जौहर धार्मिक या पौराणिक कथाओं से जुड़ी किसी खास कहानी पर काम करना चाहते हैं। अब यह बात पक्की हो चुकी है कि वह भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के पवित्र संबंधों की दिव्यता को बड़े पर्दे पर उतारने जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखी जा रही है।
फिल्म का नाम फिलहाल अस्थाई रूप से 'राधा कृष्ण' तय किया गया है। यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण यानी डेवलपमेंट स्टेज में है, जहां इसकी पटकथा, विजुअल इफेक्ट्स और प्री-प्रोडक्शन की तैयारियों पर काम चल रहा है। धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले इस फिल्म को भव्य पैमाने पर निर्मित करने की योजना बनाई गई है।
सचिन रवि संभालेंगे निर्देशन की कमान
इस फिल्म का निर्देशन साउथ और हिंदी सिनेमा के चर्चित डायरेक्टर सचिन रवि करने वाले हैं। सचिन रवि अपनी बेहतरीन विजुअल स्टोरीटेलिंग और तकनीकी पकड़ के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी दूरदर्शिता और करण जौहर की भव्य निर्माण शैली के मेल से दर्शक एक अनूठे सिनेमाई अनुभव की उम्मीद कर रहे हैं।
सचिन रवि का इस प्रोजेक्ट से जुड़ना इस बात का साफ संकेत है कि फिल्म में आधुनिक तकनीक और वीएफएक्स (VFX) का बेहतरीन इस्तेमाल देखने को मिलेगा। पौराणिक कथा को आज की पीढ़ी के सामने एक नए और आकर्षक अंदाज में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
सालों पुराना सपना होगा साकार
करण जौहर लंबे समय से भगवान श्री कृष्ण और राधा के जीवन से प्रेरित कहानी को रूपहले पर्दे पर दिखाना चाहते थे। यह प्रोजेक्ट उनके दिल के बेहद करीब है और वह इस कहानी की संवेदनशीलता, भक्ति रस और दार्शनिक पहलुओं को बहुत ही सम्मानपूर्वक पर्दे पर उकेरना चाहते हैं।
फिलहाल फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर मेकर्स की तरफ से कोई ऐलान नहीं किया गया है। लेकिन बॉलीवुड के गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि मुख्य किरदारों के लिए इंडस्ट्री के शीर्ष कलाकारों से बातचीत की जा रही है। आने वाले दिनों में इस प्रोजेक्ट की आधिकारिक स्टारकास्ट और शूटिंग शेड्यूल से जुड़ी जानकारियां सामने आएंगी।
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