
प्रधानमंत्री द्वारा रूसी राष्ट्रपति को भेंट किया गया तिरुक्कुरल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हालिया द्विपक्षीय बैठक में रूसी राष्ट्रपति को तमिल ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का अनुवादित संस्करण भेंट किया गया है। संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित यह प्राचीन ग्रंथ नैतिकता, राजनीति और प्रेम के सिद्धांतों पर आधारित है, जो वैश्विक मंच पर भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
प्रधानमंत्री द्वारा रूसी राष्ट्रपति को भेंट किया गया तिरुक्कुरल
सारांश (Summary):
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हालिया द्विपक्षीय बैठक में रूसी राष्ट्रपति को तमिल ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का अनुवादित संस्करण भेंट किया गया है। संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित यह प्राचीन ग्रंथ नैतिकता, राजनीति और प्रेम के सिद्धांतों पर आधारित है, जो वैश्विक मंच पर भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तिरुक्कुरल प्राचीन दक्षिण भारतीय तमिल साहित्य और दर्शन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रामाणिक और प्रभावशाली ग्रंथ है। इसका सृजन महान संत-कवि तिरुवल्लुवर द्वारा लगभग दो सहस्र वर्ष पूर्व (300 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व के मध्य) किया गया था। 'तिरुक्कुरल' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'पवित्र श्लोक' या 'पवित्र युग्म' होता है। यह कृति किसी विशिष्ट संप्रदाय, जाति, वर्ण या नस्ल के बंधनों से परे है और सार्वभौमिक मानवीय नैतिकता का संदेश देती है। हाल ही में इस प्राचीन ग्रंथ के अनुवादित संस्करण का कूटनीतिक उपयोग वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक साख को सुदृढ़ करता है।
ग्रंथ की संरचना और विभाजन
यह ग्रंथ कुल 1,330 संगीतमय द्विपदियों या श्लोकों से सुसज्जित है, जिन्हें 'कुरल' कहा जाता है। प्रत्येक कुरल में सटीक सात शब्दों का विन्यास होता है। इन श्लोकों को कुल 133 अध्यायों में व्यवस्थित किया गया है, जहाँ प्रत्येक अध्याय के अंतर्गत 10 श्लोक निर्धारित हैं। संपूर्ण कृति को तीन मुख्य पुस्तकों या खंडों में विभाजित किया गया है। प्रथम खंड 'धर्म' (अरम) नैतिकता और व्यक्तिगत मूल्यों को संबोधित करता है। द्वितीय खंड 'अर्थ' (पोरुल) समाज की राजनीति, भौतिकवाद और सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था को स्पष्ट करता है। तृतीय खंड 'प्रेम' (इंबम) मानव जीवन में प्रेम के विभिन्न आयामों और अनुभूतियों को रेखांकित करता है।
प्रमुख दार्शनिक विषय और मूल्य
तिरुक्कुरल के केंद्रीय कथ्य में मानव जीवन की वास्तविकताओं और उच्च नैतिक आचरण का प्रकटीकरण मिलता है। तिरुवल्लुवर ने स्पष्ट किया है कि नैतिकता विहीन जीवन मनुष्य को ईर्ष्या, द्वेष, लोभ और अहंकार के पाश में जकड़ लेता है, जिससे सामाजिक पतन होता है। ग्रंथ के शुरुआती अध्याय में ईश्वर को 'शुद्ध बुद्धि', करुणा और ज्ञान के प्रतीक के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रेम के विभिन्न रूपों को अत्यंत शालीनता से प्रस्तुत किया गया है। सिविल सेवा परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह ग्रंथ शासन, नैतिकता और लोक सेवा के मूल सिद्धांतों को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक है।

रूस द्वारा Su-57E हेतु S-71K क्रूज मिसाइल का अनावरण
रूस ने मिस्र के अल अमीन इंटरनेशनल एयरशो के दौरान अपने Su-57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए नई 'एस-71के कोव्योर' एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल का सार्वजनिक अनावरण किया है। यह मिसाइल 300 से 350 किलोमीटर की मारक क्षमता, टर्बोजेट प्रोपल्शन और उन्नत स्टैंड-ऑफ वेपन तकनीक से लैस है।
रूस द्वारा Su-57E हेतु S-71K क्रूज मिसाइल का अनावरण
सारांश (Summary):
रूस ने मिस्र के अल अमीन इंटरनेशनल एयरशो के दौरान अपने Su-57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए नई 'एस-71के कोव्योर' एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल का सार्वजनिक अनावरण किया है। यह मिसाइल 300 से 350 किलोमीटर की मारक क्षमता, टर्बोजेट प्रोपल्शन और उन्नत स्टैंड-ऑफ वेपन तकनीक से लैस है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय और पृष्ठभूमि
रूस ने हाल ही में मिस्र में आयोजित अल अमीन इंटरनेशनल एयरशो के दौरान अपनी अत्याधुनिक 'एस-71के कोव्योर' (S-71K Kovyor) एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल को पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है। इस हथियार को विशेष रूप से रूस के पांचवीं पीढ़ी के उन्नत Su-57E लड़ाकू विमान के लिए विकसित किया गया है। यह मिसाइल रूस की सामरिक वायु क्षमताओं और वायु-से-सतह मारक तकनीक में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ
यह मिसाइल पारंपरिक बेलनाकार आकार के बजाय एक चपटे, चौड़े और विमान जैसी बनावट वाले प्लानफॉर्म पर आधारित है। इसके डिजाइन में असममित संरचना, ट्रेपेज़ोइडल नोज, चिन-माउंटेड ऑप्टिकल सेंसर, कम ऊंचाई पर स्थापित पंख और उल्टे वी-आकार की पूंछ शामिल हैं। आंतरिक ईंधन टैंक और टर्बोजेट प्रोपल्शन के संयोजन के कारण यह पारंपरिक ग्लाइड बम की तुलना में एक सक्रिय क्रूज उड़ान प्रोफ़ाइल प्रदान करती है, जिससे यह लॉन्च विमान से भिन्न अक्ष से लक्ष्य तक पहुंच सकती है।
सामरिक उपयोग और संचालन क्षमता
एस-71के मिसाइल जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली (INS) पर आधारित है और इसमें किसी जटिल टर्मिनल सीकर का अभाव है। इसे मुख्य रूप से पूर्व-प्रोग्राम किए गए निश्चित लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मिसाइल उड़ान के दौरान लगभग 8,200 मीटर की ऊंचाई पर क्रूज करने में सक्षम है और इसके बाद जमीन के ऊपर 20 से 75 मीटर तथा जल क्षेत्र के ऊपर 5 से 15 मीटर की बेहद कम ऊंचाई पर नीचे उतरती है, जिससे लगातार रडार ट्रैकिंग कठिन हो जाती है। इसमें 250 किलोग्राम का ओएफएबी-250-270 उच्च-विस्फोटक विखंडन वारहेड लगाया गया है।

कजाखस्तान में दो सौ वर्षों बाद प्रजेवाल्स्की घोड़ों का जन्म
कजाखस्तान के केंद्रीय घास के मैदानों में दो प्रजेवाल्स्की घोड़ों के बच्चों का जन्म हुआ है, जो दो शताब्दियों से अधिक समय में इस क्षेत्र में पैदा होने वाले पहले जंगली घोड़े हैं। यह प्रजाति पालतू घोड़े की एकमात्र जीवित जंगली रिश्तेदार है और आईयूसीएन रेड लिस्ट में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में दर्ज है।
कजाखस्तान के केंद्रीय घास के मैदानों में दो प्रजेवाल्स्की घोड़ों के बच्चों का जन्म हुआ है, जो दो शताब्दियों से अधिक समय में इस क्षेत्र में पैदा होने वाले पहले जंगली घोड़े हैं। यह प्रजाति पालतू घोड़े की एकमात्र जीवित जंगली रिश्तेदार है और आईयूसीएन रेड लिस्ट में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में दर्ज है।
परिचय एवं भौगोलिक वितरण
प्रजेवाल्स्की घोड़ा (Equus ferus przewalskii) वर्तमान में घरेलू घोड़े का एकमात्र जीवित जंगली रिश्तेदार माना जाता है। इस प्रजाति का नामकरण प्रसिद्ध रूसी खोजकर्ता निकोलाई प्रजेवाल्स्की के नाम पर किया गया है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह वन्य जीव रूस, कजाखस्तान, मंगोलिया और उत्तरी चीन के विस्तृत स्टेपी घास के मैदानों में बहुतायत में पाया जाता था। हाल ही में कजाखस्तान के केंद्रीय घास के मैदानों में स्थित पुनरुत्पादन केंद्र में दो शावकों का जन्म हुआ है, जो पिछले दो सौ वर्षों से अधिक समय में कजाखस्तान की भूमि पर पैदा होने वाले पहले जंगली घोड़े हैं।
शारीरिक विशेषताएँ एवं पारिस्थितिक भूमिका
इन घोड़ों की शारीरिक संरचना अद्वितीय होती है, जिसमें छोटा गर्दन, बड़ा सिर, छोटी टांगें और एक मजबूत व सुडौल शरीर शामिल है। इनके शरीर पर काले, खड़े बाल (माने) होते हैं और इनका रंग लाल-भूरे से क्रीम रंग का होता है, जिस पर पीठ पर एक स्पष्ट काली धारी पाई जाती है। ये जानवर मुख्य रूप से शाकाहारी (ग्रामिनिवोरस) होते हैं और घास व विभिन्न पौधों का सेवन करते हैं। ये 'हिंद-गट किण्वक' (hind-gut fermenters) होते हैं, यानी इन्हें जीवित रहने और पाचन के लिए भारी मात्रा में पानी और कम गुणवत्ता वाले भोजन की आवश्यकता होती है। पारिस्थितिकी तंत्र में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सूखी वनस्पति को चरकर जंगलों में आग के जोखिम को कम करते हैं, इनके खुरों द्वारा मिट्टी की जुताई से नए पौधों को पनपने का अवसर मिलता है और ये परिदृश्य में बीजों का प्रभावी ढंग से प्रसार करते हैं।
संरक्षण स्थिति एवं चुनौतियाँ
प्रजेवाल्स्की घोड़े अत्यधिक कठोर जलवायु परिस्थितियों का सामना करने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं, विशेषकर कजाखस्तान जैसी जगहों पर जहां तापमान माइनस तीस डिग्री सेल्सियस से भी नीचे गिर जाता है। ये दिवाचर और अति मिलनसार (ग्रेगरियस) जीव हैं जो आमतौर पर दस से बीस सदस्यों के छोटे झुंडों में निवास करते हैं। संरक्षण की दृष्टि से, अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में इस प्रजाति को 'संकटग्रस्त' (Endangered) श्रेणी के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है। इस प्रकार के पुनरुत्पादन कार्यक्रम इस विलुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।

UNSC में भारत की भूमिका का चीन-रूस ने किया समर्थन
ब्रिक्स घोषणापत्र में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत और ब्राज़ील की बड़ी भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है। ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के ज़रिए ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया है।
खबर का निचोड़:
ब्रिक्स घोषणापत्र में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत और ब्राज़ील की बड़ी भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है। ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के ज़रिए ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया है।
ब्रिक्स घोषणापत्र में कूटनीतिक कमान और भारत का कद
हाल ही में सामने आए ब्रिक्स घोषणापत्र ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के भीतर भारत और ब्राज़ील की बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं के लिए अपने समर्थन को खुलकर दोहराया है। यह कूटनीतिक घटनाक्रम वैश्विक पटल पर भारत के लगातार बढ़ते प्रभाव और मजबूत होती स्थिति का स्पष्ट प्रमाण है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की दावेदारी अब ग्लोबल मंच पर अधिक मुखर होती जा रही है।
सुरक्षा परिषद जैसी वैश्विक निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था में सुधार आज के समय की सबसे बड़ी मांग बन चुके हैं। ऐसे में दो बड़ी महाशक्तियों द्वारा भारत के पक्ष में आधिकारिक रूप से समर्थन जताना इस बात को साबित करता है कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की सुई अब भारत के पक्ष में घूम रही है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार, यह समर्थन भविष्य में भारत को वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में मुख्य केंद्र में लाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ग्लोबल साउथ की आवाज़ और वैश्विक आर्थिक सुधार
इस सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों ने सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक खुद को सीमित नहीं रखा है। घोषणापत्र में यूएन सुधारों के ज़रिए ग्लोबल साउथ की आवाज़ को अधिक ताकतवर और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। विकासशील और कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों के हितों को सुरक्षित रखना इस मंच की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे यह साफ झलकता है कि ब्रिक्स केवल कुछ चुनिंदा देशों का समूह नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के दक्षिणी गोलार्ध की नुमाइंदगी करने वाला एक सशक्त संगठन बन चुका है।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक आर्थिक शासन को पूरी तरह से मजबूत, पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए ब्रिक्स ने अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया है। बदलते वक्त के साथ आर्थिक मोर्चे पर आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देश आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयां देने के लिए तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की यह मांग वैश्विक अर्थव्यवस्था को संतुलित करने में मील का पत्थर साबित होगी।
एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं पर चिंता
वैश्विक व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के रास्ते में आ रही बाधाओं पर भी ब्रिक्स मंच पर खुलकर बात हुई है। ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाले एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ उपायों पर अपनी बेहद गंभीर चिंता जताई है। इस तरह की संरक्षणवादी नीतियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर करती हैं और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डालती हैं।
व्यापारिक नियमों को निष्पक्ष बनाए रखने और संरक्षणवाद के खिलाफ एकजुट होने का यह संदेश वैश्विक व्यापारिक समुदाय के लिए एक बड़ा संकेत है। इन तमाम मुद्दों पर ब्रिक्स का यह साझा रुख आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यस्था की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

शी जिनपिंग के शाही बोइंग-747 विमान के अनसुने राज़
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए खास बोइंग-747 विमान से भारत पहुंचे हैं। चार इंजन वाले इस चौड़े धड़ के विमान में अत्याधुनिक सुरक्षा और मीटिंग रूम जैसी सुविधाएं हैं। साल 2016-2017 में इसे विशेष रूप से राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया था।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए खास बोइंग-747 विमान से भारत पहुंचे हैं। चार इंजन वाले इस चौड़े धड़ के विमान में अत्याधुनिक सुरक्षा और मीटिंग रूम जैसी सुविधाएं हैं। साल 2016-2017 में इसे विशेष रूप से राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया था।
शी जिनपिंग के भारत दौरे ने कूटनीतिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोरी हैं, लेकिन उनके सफर का सबसे बड़ा आकर्षण उनका यह शानदार और अत्याधुनिक विमान रहा है। चीनी राष्ट्रपति जिस बोइंग-747 विमान से ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने भारत आए हैं, वह किसी उड़ते हुए कमांड सेंटर से कम नहीं है। इस विमान की बनावट और इसकी तकनीकी खूबियां इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित और गोपनीय विमानों की श्रेणी में रखती हैं।
विमान की बनावट और ताकत
यह एक चौड़े धड़ वाला विशाल विमान है जिसमें कुल चार शक्तिशाली इंजन फिट किए गए हैं। लंबी दूरी की उड़ानों को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए इस विमान के ढांचे को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस शानदार बोइंग-747 की क्रूज़ स्पीड लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास है। यह तेज गति इसे बेहद कम समय में एक देश से दूसरे देश तक सुरक्षित पहुंचाने में मददगार साबित होती है।
गोपनीय इंटीरियर और वीआईपी सुविधाएं
इस विमान का पूरा आंतरिक हिस्सा यानी इंटीरियर पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो इसकी सुरक्षा का एक अनिवार्य पहलू है। हालांकि, इसके भीतर राष्ट्राध्यक्ष की जरूरतों के अनुसार सभी आवश्यक और उच्चस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं। विमान के अंदर एक प्राइवेट ऑफिस, एक प्रोफेशनल मीटिंग रूम और एक आरामदायक पर्सनल एरिया बनाया गया है। इन सुविधाओं के चलते राष्ट्रपति हवा में भी अपने सरकारी कामकाज और अहम बैठकों को सुचारू रूप से जारी रख सकते हैं।
अत्याधुनिक सेफ कम्युनिकेशन सिस्टम
दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार शी जिनपिंग के इस विमान में सुरक्षा के सर्वोत्कृष्ट इंतजाम किए गए हैं। इस विमान की सबसे बड़ी खूबी इसमें मौजूद सेफ कम्युनिकेशन की व्यवस्था है। इसके माध्यम से राष्ट्रपति दुनिया के किसी भी कोने में बैठे अधिकारियों या राष्ट्राध्यक्षों से सुरक्षित और एनक्रिप्टेड बातचीत कर सकते हैं। हर वक्त संपर्क में रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए इसमें हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
राष्ट्रपति के लिए विशेष बदलाव
इस विमान को रातोंरात तैयार नहीं किया गया था, बल्कि चीन ने साल 2016-2017 के दौरान इसे अपने राष्ट्रपति के आधिकारिक इस्तेमाल के लिए मॉडिफाई करवाया था। एक आम कमर्शियल विमान को आधुनिक जरूरतों और वीआईपी सुरक्षा मानकों के अनुरूप ढालने के लिए इसमें व्यापक तकनीकी बदलाव किए गए थे। आज यह बोइंग-747 विमान चीन की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत का एक जीवंत प्रतीक बन चुका है।
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