
iPhone Duo: अमेरिका से ₹1.1 लाख महंगा भारत में क्यों?
भारत में एप्पल के पहले फोल्डेबल फोन 'iPhone Duo' की कीमत अमेरिका के मुकाबले 1.1 लाख रुपये अधिक है। इस बड़े अंतर की मुख्य वजह भारतीय बाजार में लगने वाला 18% जीएसटी, तैयार यूनिट्स पर लगने वाली भारी कस्टम ड्यूटी और करेंसी एक्सचेंज रेट्स हैं। भारत में असेंबल न होने के कारण यह फोन प्रीमियम टैक्स ब्रैकेट में आता है।
भारत में एप्पल के पहले फोल्डेबल फोन 'iPhone Duo' की कीमत अमेरिका के मुकाबले 1.1 लाख रुपये अधिक है। इस बड़े अंतर की मुख्य वजह भारतीय बाजार में लगने वाला 18% जीएसटी, तैयार यूनिट्स पर लगने वाली भारी कस्टम ड्यूटी और करेंसी एक्सचेंज रेट्स हैं। भारत में असेंबल न होने के कारण यह फोन प्रीमियम टैक्स ब्रैकेट में आता है।
भारत बनाम अमेरिका: कीमतों का बड़ा गणित
टेक जगत में बहुप्रतीक्षित एप्पल के पहले फोल्डेबल 'iPhone Duo' ने भारत में एंट्री लेते ही अपनी कीमत को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका और भारतीय बाजार की कीमतों की तुलना करें तो भारत में ग्राहकों को इस फोन के लिए लगभग 1.1 लाख रुपये अतिरिक्त ढीले करने पड़ रहे हैं। इतना बड़ा अंतर देखकर आम ग्राहकों से लेकर टेक एक्सपर्ट्स तक हैरान हैं, लेकिन इस भारी भरकम कीमत के पीछे भारत का जटिल टैक्स ढांचा और आयात नीतियां मुख्य वजह हैं।
अमेरिका की बेस प्राइस और टैक्स का पेच
अमेरिका में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट की लॉन्च प्राइस हमेशा 'एक्सक्लूसिव ऑफ टैक्स' (बिना टैक्स जुड़ी) घोषित की जाती है। अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में सेल्स टैक्स की दरें भिन्न होती हैं, जो 0 से 10 प्रतिशत के बीच रहती हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत में घोषित की जाने वाली एमआरपी (MRP) में 18% का भारी-भरकम जीएसटी (GST) पहले से ही जुड़ा होता है। जब अमेरिकी डॉलर को भारतीय रुपये में बदला जाता है और उस पर 18% का टैक्स जोड़ा जाता है, तो कीमत में एक बड़ा उछाल आ जाता है।
इंपोर्ट ड्यूटी और लोकल असेंबली का असर
कीमत के इस बड़े फासले की सबसे बड़ी वजह 'इंपोर्ट ड्यूटी' यानी सीमा शुल्क है। एप्पल फिलहाल iPhone Duo को भारत में असेंबल करने के बजाय पूरी तरह से बनी हुई (CBU - Completely Built Unit) यूनिट्स के रूप में देश में आयात कर रहा है। जब कोई कंपनी विदेश में बना तैयार स्मार्टफोन भारत लाती है, तो उस पर भारी बेसिक कस्टम ड्यूटी और अन्य सेस लगाए जाते हैं। मेक इन इंडिया पहल के तहत भारत में असेंबल होने वाले आईफोन मॉडल इन शुल्कों से बच जाते हैं, लेकिन पहले फोल्डेबल आईफोन के साथ ऐसा नहीं है।
लॉजिस्टिक्स और करेंसी फ्लक्चुएशन
टैक्स और कस्टम ड्यूटी के अलावा, अंतरराष्ट्रीय फ्रेट (लॉजिस्टिक्स), इंश्योरेंस और करेंसी एक्सचेंज रेट में होने वाले उतार-चढ़ाव का रिस्क भी कंपनियां बेस प्राइस में जोड़ती हैं। एप्पल भारत में अपने आधिकारिक रिटेलर्स, वारंटी सपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के खर्चों को भी इसी कुल कीमत में एडजस्ट करता है। यही कारण है कि भारतीय खरीदारों को नई फोल्डेबल तकनीक का अनुभव लेने के लिए जेब से काफी ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है।

क्रूड का झटका: अनिल सिंघवी ने दिए 4 शेयर्स में SELL के संकेत
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार में घबराहट पैदा कर दी है। बाजार विशेषज्ञ अनिल सिंघवी ने बिकवाली के मजबूत संकेत देते हुए अशोक लीलैंड, हिंदुस्तान जिंक, एलएंडटी फाइनेंस और आदित्य बिड़ला कैपिटल के फ्यूचर्स में SELL की सख्त सलाह दी है।
खबर का निचोड़
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार में घबराहट पैदा कर दी है। बाजार विशेषज्ञ अनिल सिंघवी ने बिकवाली के मजबूत संकेत देते हुए अशोक लीलैंड, हिंदुस्तान जिंक, एलएंडटी फाइनेंस और आदित्य बिड़ला कैपिटल के फ्यूचर्स में SELL की सख्त सलाह दी है।
क्रूड ऑयल का दबाव और गिरता बाज़ार
कच्चे तेल (Crude Oil) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई अचानक तेजी ने भारतीय शेयर बाजार के पूरे मूड को बिगाड़ दिया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और बॉन्ड यील्ड में उछाल के कारण दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिल रहा है। महंगाई दर में दोबारा बढ़ोतरी के डर ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे दलाल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक दबाव में आ चुके हैं।
बाजार के इस अनिश्चित माहौल में निवेशकों को भारी नुकसान से बचाने के लिए मार्केट एक्सपर्ट अनिल सिंघवी ने लाल निशान की ओर संकेत करते हुए सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। उनके अनुसार, इस मौजूदा मंदी के माहौल में आक्रामक खरीदारी करने के बजाय जोखिम से बचना ही समझदारी है।
इन 4 शेयरों के फ्यूचर्स में बिकवाली की सलाह
मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने कमजोर बाजार रुझानों का हवाला देते हुए 4 प्रमुख कंपनियों के फ्यूचर्स में बिकवाली (SELL) करने की सीधी रणनीति दी है:
अशोक लीलैंड (Ashok Leyland)
हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc)
एलएंडटी फाइनेंस (L&T Finance)
आदित्य बिड़ला कैपिटल (Aditya Birla Capital)
इन कंपनियों में बिकवाली की मुख्य वजह सेक्टर-विशिष्ट दबाव और वैश्विक बाजारों से मिल रहे नकारात्मक संकेत हैं। कच्चे तेल में उबाल का सीधा असर ऑटो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की परिचालन लागत पर पड़ता है, जिससे अशोक लीलैंड जैसी गाड़ियों की बिक्री और मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका है। दूसरी तरफ, धातु क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक पर वैश्विक मांग में सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय जिंस कीमतों में अनिश्चितता का सीधा असर देखने को मिल रहा है।
एनबीएफसी और बैंक सेक्टर्स पर मंडराया संकट
बढ़ती महंगाई के कारण ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं पूरी तरह धुंधली होती दिख रही हैं। बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही वृद्धि सीधे तौर पर बैंकिंग और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
लागत बढ़ने से कर्ज महंगा होने का खतरा है, जिसका सीधा असर वित्तीय कंपनियों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर पड़ेगा। यही वजह है कि अनिल सिंघवी ने एलएंडटी फाइनेंस और आदित्य बिड़ला कैपिटल जैसे मजबूत वित्तीय शेयरों पर भी शॉर्ट पोजीशन लेने का सुझाव दिया है।
ऑटो, एनबीएफसी और बैंकिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में फंड मैनेजर और बड़े संस्थागत निवेशक अपनी पोजीशन हल्की कर रहे हैं। जब तक कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते और बॉन्ड मार्केट से राहत की खबरें नहीं आतीं, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और मंदी का रुख बना रहने के आसार हैं।

अमेरिकी संसद में हड़कंप: 3 भारतीय IT कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
अमेरिकी सांसदों ने वाणिज्य विभाग को पत्र लिखकर 3 भारतीय आईटी कंपनियों पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इन कंपनियों पर 'हैकिंग-फॉर-हायर' सिंडिकेट चलाकर सालों तक अमेरिकी नागरिकों, वकीलों और कारोबारियों की जासूसी करने के गंभीर आरोप लगे हैं, हालांकि कंपनियों ने इन्हें खारिज किया है।
खबर का सार
अमेरिकी सांसदों ने वाणिज्य विभाग को पत्र लिखकर 3 भारतीय आईटी कंपनियों पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इन कंपनियों पर 'हैकिंग-फॉर-हायर' सिंडिकेट चलाकर सालों तक अमेरिकी नागरिकों, वकीलों और कारोबारियों की जासूसी करने के गंभीर आरोप लगे हैं, हालांकि कंपनियों ने इन्हें खारिज किया है।
अमेरिकी राजनीति में नया तूफान
वाशिंगटन के पावर कॉरिडोर में एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर हड़कंप मच गया है। अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने देश के वाणिज्य विभाग (Department of Commerce) को एक तीखा पत्र भेजा है। इस पत्र में भारत स्थित तीन आईटी कंपनियों को तुरंत प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने और उन पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस मांग के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉरपोरेट जासूसी के नेटवर्क की पोल खोलकर रख दी है।
क्या है पूरा मामला और आरोप
मामले के केंद्र में तीन कंपनियां—Bell TroX, CyberRoot और Sunkissed Organic Farms हैं। इन पर आरोप है कि ये पिछले 15 सालों से 'हैकिंग-फॉर-हायर' यानी पैसे लेकर साइबर हमला करने वाले सिंडिकेट का संचालन कर रही हैं। अमेरिकी सांसदों के दावों के मुताबिक, इन कंपनियों ने अमेरिकी नागरिकों, शीर्ष वकीलों, बड़े कारोबारियों और संस्थाओं के संवेदनशील डेटा में सेंध लगाई है। यह पूरा खेल कथित तौर पर निजी जानकारी चुराने और कॉरपोरेट लड़ाइयों में अपने मुवक्किलों को फायदा पहुंचाने के लिए खेला जा रहा था।
'हैकिंग-फॉर-हायर' का खतरनाक नेटवर्क
'हैकिंग-फॉर-हायर' एक ऐसा अवैध धंधा है जहां कोई भी व्यक्ति या कंपनी पैसे देकर किसी तीसरे पक्ष की जासूसी करवा सकती है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इन भारतीय कंपनियों ने आधुनिक साइबर हथियारों और फिशिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके वैश्विक स्तर पर एक समानांतर जासूसी नेटवर्क खड़ा कर लिया था। इस तरह के साइबर हमले न केवल व्यक्तिगत गोपनीयता पर हमला करते हैं, बल्कि इससे व्यापारिक गोपनीयता और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सीधा खतरा पैदा होता है।
कंपनियों की प्रतिक्रिया और अमेरिकी संसद का रुख
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि जब तक इन कंपनियों पर वाणिज्य विभाग की 'एंटिटी लिस्ट' (Entity List) के तहत प्रतिबंध नहीं लगाए जाते, तब तक ये वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बनी रहेंगी। हालांकि, जिन तीन कंपनियों पर यह गंभीर आरोप लगा है, उन्होंने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि वे किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि या जासूसी सिंडिकेट में शामिल नहीं हैं।
आगे क्या होगा
यह मामला अब केवल व्यावसायिक जासूसी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कूटनीतिक और तकनीकी सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग अब सांसदों द्वारा दिए गए साक्ष्यों और इस पत्र की जांच कर रहा है। यदि इन आरोपों के आधार पर ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई होती है, तो इन कंपनियों के अमेरिकी बाजार और तकनीक तक पहुंच पूरी तरह से ब्लॉक हो जाएगी।

नीम करोली बाबा की प्रेरणा से बनी 'हनुमान अंश' ने तोड़े कमाई के रिकॉर्ड
नीम करोली बाबा के जीवन दर्शन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। भारत में 163 करोड़ रुपये की नेट कमाई का आंकड़ा पार कर चुकी यह फिल्म अब वैश्विक स्तर पर रिलीज हो चुकी है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए निर्माताओं ने इसके सीक्वल पर भी काम शुरू कर दिया है।
खबर का निचोड़
नीम करोली बाबा के जीवन दर्शन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। भारत में 163 करोड़ रुपये की नेट कमाई का आंकड़ा पार कर चुकी यह फिल्म अब वैश्विक स्तर पर रिलीज हो चुकी है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए निर्माताओं ने इसके सीक्वल पर भी काम शुरू कर दिया है।
बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता
सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ही 'हनुमान अंश' ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर बॉक्स ऑफिस के सभी समीकरणों को बदलते हुए 163 करोड़ रुपये से अधिक की नेट कमाई दर्ज कर ली है। यह फिल्म अब तेजी से 200 करोड़ रुपये के जादुई क्लब की ओर बढ़ रही है। फिल्म की यह ताबड़तोड़ कमाई इस बात का प्रमाण है कि दर्शक आज के समय में आध्यात्मिक और प्रेरणादायक सिनेमा को दिल से अपना रहे हैं।
वैश्विक मंच पर शानदार दस्तक
भारतीय सिनेमाघरों में तहलका मचाने के बाद अब 'हनुमान अंश' ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने कदम रख दिए हैं। आज यानी 11 सितंबर को यह फिल्म यूके, यूएसए, यूएई और कनाडा समेत दुनिया के कई प्रमुख देशों में रिलीज कर दी गई है। वैश्विक वितरण की कमान प्रसिद्ध प्रोडक्शन हाउस होम्बले फिल्म्स के पास है, जिनकी मजबूत पकड़ के कारण फिल्म को विदेशों में भी एक भव्य शुरुआत मिलने की पूरी उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर दर्शकों का यह जुड़ाव भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक कहानियों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
राजनीतिक गलियारों में भी सराहना
फिल्म की लोकप्रियता केवल आम दर्शकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी इसकी खूब प्रशंसा हो रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'हनुमान अंश' की जमकर सराहना की है। उनका यह बयान फिल्म के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को और अधिक मजबूत करता है। इस तरह के समर्थन से फिल्म को और अधिक गति मिल रही है, जिससे सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ लगातार बनी हुई है।
सीक्वल को हरी झंडी और भविष्य की तैयारी
फिल्म को मिल रहे अभूतपूर्व रिस्पॉन्स को देखते हुए मेकर्स ने बड़ा फैसला लिया है। 'हनुमान अंश' की अभूतपूर्व सफलता के बाद इसके सीक्वल पर आधिकारिक रूप से काम शुरू हो चुका है। निर्माताओं का लक्ष्य इस आध्यात्मिक सफर को और आगे ले जाना है ताकि दर्शकों को और अधिक गहन और रोमांचक अनुभव प्रदान किया जा सके। सीक्वल की घोषणा ने फैंस के उत्साह को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

एशिया कप 2026: फाइनल में भारत का दबदबा, पाकिस्तान या श्रीलंका से होगा मुकाबला
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर अपने अजेय सफर को जारी रखते हुए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में ऐतिहासिक प्रवेश कर लिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में बांग्लादेश को 40 रनों से करारी शिकस्त देकर टीम ने रिकॉर्ड 10वीं बार खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की है। इस शानदार जीत के पीछे बल्लेबाजों का आक्रामक प्रदर्शन और गेंदबाजों का अनुशासित खेल मुख्य वजह रहा।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर अपने अजेय सफर को जारी रखते हुए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में ऐतिहासिक प्रवेश कर लिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में बांग्लादेश को 40 रनों से करारी शिकस्त देकर टीम ने रिकॉर्ड 10वीं बार खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की है। इस शानदार जीत के पीछे बल्लेबाजों का आक्रामक प्रदर्शन और गेंदबाजों का अनुशासित खेल मुख्य वजह रहा।
खिताबी जंग की ओर कदम
बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने एक मजबूत स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में उतरी बांग्लादेशी टीम निर्धारित ओवरों में लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई। इस मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार युवा ओपनर शेफाली वर्मा रहीं। शेफाली ने मैदान के चारों और बेहतरीन स्ट्रोक खेलते हुए 64 रनों की शानदार और मैच जिताऊ पारी खेली। उनकी इस आक्रामक पारी के दम पर भारत ने एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया, जिसने विपक्षी टीम पर शुरुआती ओवरों से ही दबाव बना दिया। उनकी इस बेहतरीन पारी के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' के खिताब से नवाजा गया।
टूर्नामेंट में छक्कों की बरसात
पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय बल्लेबाजों का प्रदर्शन विरोधियों के लिए सिरदर्द साबित हुआ है। पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर्स तक, भारतीय बल्लेबाजों ने मैदान के हर कोने को निशाना बनाया है। इस आक्रामक रुख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय बल्लेबाजों ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक कुल 25 छक्के लगाए हैं। यह आंकड़े टीम की बदली हुई रणनीति और खुलकर खेलने के आत्मविश्वास को साफ दर्शाते हैं, जहां हर बल्लेबाज बड़े शॉट खेलने से पीछे नहीं हट रही है।
कप्तानी पारी और अनुभवी खिलाड़ियों का योगदान
सेमीफाइनल में जीत के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम के प्रदर्शन पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने विशेष रूप से शेफाली वर्मा की पारी की सराहना करने के साथ-साथ ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा और विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष के बहुमूल्य योगदान की भी जमकर तारीफ की। मुश्किल समय में इन खिलाड़ियों द्वारा निभाई गई जिम्मेदारियों ने टीम को कई बार संकट से उबारा है। कप्तान का यह विश्वास टीम के भीतर मजबूत तालमेल को दिखाता है।
पाकिस्तान या श्रीलंका से होगी फाइनल भिड़ंत
महिला एशिया कप 2026 का बहुप्रतीक्षित फाइनल मुकाबला आगामी 13 सितंबर को खेला जाएगा। खिताबी मुकाबले में भारत के सामने कौन सी टीम होगी, इसका फैसला पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के बाद होगा। भारतीय टीम जिस तरह के फॉर्म और आक्रामक अंदाज में खेल रही है, उसे देखते हुए फैंस को एक रोमांचक फाइनल मुकाबले की पूरी उम्मीद है।
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