
Old Monk विवाद: 5% रम के बावजूद सालों से 'प्योर' कहकर कैसे बिकती रही बोतल?
FSSAI ने महाराष्ट्र में प्रसिद्ध शराब ब्रांड Old Monk की बिक्री पर रोक लगा दी है। जांच में सामने आया कि बोतल पर '7 साल पुरानी ब्लेंडेड' रम लिखा होने के बावजूद इसमें केवल 5% रम और 95% एक्स्ट्रा-न्यूट्रल स्पिरिट मौजूद है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी चेतावनी लेबल का फॉन्ट छोटा होने पर कंपनी को फटकार लगाई है।
खबर का निचोड़
FSSAI ने महाराष्ट्र में प्रसिद्ध शराब ब्रांड Old Monk की बिक्री पर रोक लगा दी है। जांच में सामने आया कि बोतल पर '7 साल पुरानी ब्लेंडेड' रम लिखा होने के बावजूद इसमें केवल 5% रम और 95% एक्स्ट्रा-न्यूट्रल स्पिरिट मौजूद है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी चेतावनी लेबल का फॉन्ट छोटा होने पर कंपनी को फटकार लगाई है।
5% रम और 95% स्पिरिट: क्या है Old Monk के स्वाद का सच?
देशभर में दशकों से रम प्रेमियों की पहली पसंद रही Old Monk इन दिनों एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद में घिर गई है। भारत के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने महाराष्ट्र में Old Monk की बिक्री पर रोक लगा दी है। इस फैसले के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने इस पॉपुलर ब्रांड के शौकीनों को चौंका दिया है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, Old Monk की जिस बोतल को लोग सालों से '7 साल पुरानी ब्लेंडेड' डार्क रम समझकर पी रहे थे, उसमें असली रम की मात्रा 5% से भी कम पाई गई है। बोतल में मौजूद बाकी 95% हिस्सा एक्स्ट्रा-न्यूट्रल स्पिरिट (ENA) का है। एक्स्ट्रा-न्यूट्रल स्पिरिट एक प्रकार की तीखी, गंधरहित और बिना किसी खास स्वाद वाली अल्कोहल होती है, जिसका इस्तेमाल शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए बेस के रूप में किया जाता है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और डिस्क्लेमर का विवाद
FSSAI के इस कदम के बाद मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां भी कंपनी को कोई राहत नहीं मिली। सुनवाई के दौरान अदालत ने कंपनी की नीयत और उसकी पैकेजिग स्टाइल पर कड़े सवाल उठाए। अदालत का कहना था कि बोतल के पीछे जो डिस्क्लेमर या मिश्रण की जानकारी दी गई है, उसका अक्षर (Font size) इतना छोटा है कि आम ग्राहक उसे आसानी से पढ़ ही नहीं सकता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की धुंधली और बेहद सूक्ष्म जानकारी से उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है। बोतल के मुख्य हिस्से पर बड़े अक्षरों में '7 साल पुरानी रम' लिखना और वास्तविक कंपोजिशन को कोने में सूक्ष्म अक्षरों में छिपाना सीधे तौर पर पारदर्शी व्यापार मानकों का उल्लंघन है।
ब्रांड की साख पर बड़ा सवाल और FSSAI का रुख
Old Monk बनाने वाली कंपनी मोहन मीकिन (Mohan Meakin) ने अदालत में तर्क दिया कि उन्होंने बोतल पर घटकों की जानकारी दी है और शराब उद्योग में यह एक प्रचलित तरीका है। हालांकि, FSSAI अपने रुख पर कायम है। नियामक संस्था का स्पष्ट मानना है कि यदि किसी उत्पाद में 95% हिस्सा स्पिरिट का है, तो उसे 'प्योर' या केवल '7 साल पुरानी ब्लेंडेड रम' के नाम से बेचना सही नहीं है।
फिलहाल महाराष्ट्र में इसके वितरण और बिक्री पर ब्रेक लग चुका है। शराब उद्योग के जानकारों का मानना है कि इस विवाद का असर केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश भर में शराब की पैकेजिंग, लेबलिंग और कंपनियों की पारदर्शिता से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल सकता है।

बैंक से गायब हुआ गोल्ड लोन का सोना तो कितना मिलेगा मुआवजा?
बैंक में गिरवी रखा सोना चोरी होने पर ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, गोल्ड सेफ्टी की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है। चोरी या नुकसान की स्थिति में बैंक इंश्योरेंस क्लेम या फिर सोने के बाजार मूल्य के आधार पर ग्राहक को पूरा मुआवजा देने के लिए बाध्य है।
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बैंक में गिरवी रखा सोना चोरी होने पर ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, गोल्ड सेफ्टी की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है। चोरी या नुकसान की स्थिति में बैंक इंश्योरेंस क्लेम या फिर सोने के बाजार मूल्य के आधार पर ग्राहक को पूरा मुआवजा देने के लिए बाध्य है।
बैंकों में सुरक्षित लॉकर और तगड़ी सुरक्षा प्रणाली देखकर ही लोग अपना कीमती सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेते हैं। लेकिन क्या हो जब सुरक्षा का यह दावा टूट जाए और बैंक से ही आपकी ज्वेलरी चोरी हो जाए? ऐसी स्थिति में ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि उनके नुकसान की भरपाई कौन और कैसे करेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, लोन के एवज में रखी गई संपत्ति की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी वित्तीय संस्थान यानी बैंक की होती है। यदि बैंक में चोरी, डकैती या किसी अप्रत्याशित घटना के कारण गिरवी रखा सोना गायब हो जाता है, तो बैंक अपनी इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। ग्राहक के पास मुआवजा पाने का पूरा कानूनी अधिकार होता है।
मुआवजे की रकम का तय होना
मुआवजे का आकलन लोन लेते समय बनी 'वैल्यूएशन रिपोर्ट' और सोने के मौजूदा बाजार भाव के आधार पर किया जाता है। बैंक लोन देते वक्त ज्वेलरी का शुद्धता परीक्षण (Purity Test) और वजन रिकॉर्ड करते हैं। यदि सोना चोरी हो जाता है, तो बैंक या तो ग्राहक को उतनी ही शुद्धता और वजन का सोना वापस करेगा या फिर उसकी वर्तमान मार्केट वैल्यू के हिसाब से नकद भुगतान करेगा।
इसके अलावा, लगभग सभी प्रमुख बैंक और एनबीएफसी (NBFCs) अपने पास रखे सोने का व्यापक बीमा (Insurance) कराते हैं। चोरी होने पर बैंक बीमा कंपनी से क्लेम हासिल करता है और ग्राहक के नुकसान की भरपाई करता है। यदि बकाया लोन राशि मुआवजे की रकम से कम है, तो बैंक अपना लोन चुकता मानकर बचा हुआ पैसा ग्राहक को लौटा देता है।
चोरी के बाद ग्राहक क्या करें
चोरी की खबर मिलते ही ग्राहक को तुरंत सतर्क होना चाहिए। सबसे पहले बैंक से आधिकारिक सूचना और घटना से जुड़े दस्तावेज हासिल करें। अपने पास मौजूद गोल्ड लोन की रसीद, वैल्यूएशन रिपोर्ट और ज्वेलरी के बिल को बेहद सुरक्षित रखें। यदि बैंक मुआवजा देने में देरी करे या आनाकानी करे, तो ग्राहक बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) या उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
अदालतों ने भी कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि ग्राहक का सोना सुरक्षित लौटाना बैंक की वैधानिक जिम्मेदारी है। लापरवाही बरतने पर बैंक को न केवल सोने की पूरी कीमत चुकानी होगी, बल्कि मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना भी देना पड़ सकता है।

बिहार में युवाओं के लिए बड़ा अवसर, हर महीने ₹6000 स्टाइपेंड
बिहार सरकार की 'मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना' 18 से 28 वर्ष के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास का सुनहरा अवसर लेकर आई है। इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न संस्थानों में इंटर्नशिप और कार्यस्थल अनुभव मिलेगा। आवेदकों को उनकी योग्यता के आधार पर ₹4,000 से ₹6,000 तक प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा।
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बिहार सरकार की 'मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना' 18 से 28 वर्ष के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास का सुनहरा अवसर लेकर आई है। इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न संस्थानों में इंटर्नशिप और कार्यस्थल अनुभव मिलेगा। आवेदकों को उनकी योग्यता के आधार पर ₹4,000 से ₹6,000 तक प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना: युवाओं के सपनों को नई उड़ान
बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं को स्वावलंबी बनाने और उनके कौशल को निखारने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। 'मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना' के जरिए राज्य के युवाओं को न केवल व्यावहारिक कार्य अनुभव प्रदान किया जाएगा, बल्कि उनके वित्तीय सहयोग के लिए हर महीने स्टाइपेंड की व्यवस्था भी की गई है। यह योजना उन युवाओं के लिए वरदान साबित होगी जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यावहारिक कार्यशैली सीखने की तलाश में हैं।
योजना की पात्रता और आयु सीमा
इस योजना का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवारों की आयु 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह आयु वर्ग राज्य के उस बड़े युवा वर्ग को कवर करता है जो उच्च शिक्षा पूरी कर चुका है या करियर के शुरुआती दौर में है। पात्र उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और सुलभ बनाया गया है ताकि दूर-दराज़ के क्षेत्रों के युवा भी बिना किसी परेशानी के इसका लाभ ले सकें।
योग्यता के अनुसार मिलेगा स्टाइपेंड
योजना की सबसे खास बात युवाओं को मिलने वाला आर्थिक प्रोत्साहन है। सरकार चयनित उम्मीदवारों को हर महीने ₹4,000 से लेकर ₹6,000 तक का स्टाइपेंड देगी। स्टाइपेंड की यह राशि उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता और उनके द्वारा चुने गए इंटर्नशिप के क्षेत्र के अनुसार तय की जाएगी। इससे युवाओं को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे पूरी एकाग्रता के साथ अपना काम सीख सकेंगे।
कार्यस्थल अनुभव और कौशल विकास पर जोर
अक्सर देखा जाता है कि डिग्री होने के बावजूद सही कार्यस्थल अनुभव (Workplace Experience) न होने के कारण युवाओं को रोजगार मिलने में कठिनाई आती है। मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना इसी कमी को पूरा करती है। इसके तहत विभिन्न सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में युवाओं को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान उन्हें वास्तविक कामकाजी माहौल को समझने और आधुनिक तकनीकों को सीखने का सीधा अवसर मिलेगा।
डिजिटल आवेदन और चयन प्रक्रिया
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार योजना के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पोर्टल पर आवेदन से जुड़ी सभी शर्तें, आवश्यक दस्तावेजों की सूची और उपलब्ध इंटर्नशिप सीटों का विवरण उपलब्ध है। फॉर्म भरने के बाद आवेदनों की जांच की जाएगी और योग्य अभ्यर्थियों को उनकी पसंद और दक्षता के अनुसार उपयुक्त संस्थानों में तैनात किया जाएगा।

स्मृति ईरानी की कॉल, उदय शंकर का हाथ: हार के बाद ऐसे मिला काम
2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने काम की तलाश में टीवी इंडस्ट्री का रुख किया। एक समय जिनकी वजह से उनका शो छूटा था, उन्हीं जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने स्मृति ईरानी को दोबारा काम दिया।
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2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने काम की तलाश में टीवी इंडस्ट्री का रुख किया। एक समय जिनकी वजह से उनका शो छूटा था, उन्हीं जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने स्मृति ईरानी को दोबारा काम दिया।
राजनीति से फिर अभिनय का रुख
साल 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की राजनीतिक पारी में एक बड़ा मोड़ आ गया। अमेठी से हार का सामना करने के बाद उन्होंने राजनीति की चकाचौंध से इतर एक सामान्य नागरिक की तरह अपने करियर के अगले कदम के बारे में सोचना शुरू किया। वर्षों तक सत्ता और राजनीति के केंद्र में रहने के बाद भी स्मृति ईरानी ने बिना किसी झिझक के अपनी पुरानी कर्मभूमि, यानी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का दरवाजा खटखटाया।
एक कॉल, जिसने बदल दी बात
हाल ही में दिए एक पॉडकास्ट में स्मृति ईरानी ने अपनी इस संघर्षपूर्ण यात्रा का खुद खुलासा किया। उन्होंने बताया कि चुनाव हारने के बाद उन्होंने टीवी जगत के कई पुराने साथियों को फोन किया। बिना किसी औपचारिकता के उन्होंने सीधे तौर पर कहा, "मैं अब बेरोजगार हूं और मुझे काम चाहिए।" इस एक बयान ने साबित कर दिया कि वह जमीनी हकीकत को स्वीकार करने में कभी पीछे नहीं हटतीं।
पुरानी कड़वाहट से नए अवसर तक
स्मृति ईरानी के इस फोन कॉल का सबसे दिलचस्प दौर तब आया जब उन्होंने जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर से संपर्क किया। एक समय ऐसा था जब उदय शंकर स्टार नेटवर्क के प्रमुख थे और उन्हीं के कार्यकाल में स्मृति ईरानी को मशहूर शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। परिस्थितियां बदलीं और वही उदय शंकर इस बार उनके संकटमोचक बनकर सामने आए। जब स्मृति ने उनसे काम मांगा, तो उदय शंकर ने न केवल उनकी बात गंभीरता से सुनी बल्कि उन्हें तुरंत एक नए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी भी सौंप दी।
कला और अभिनय के प्रति अडिग समर्पण
सत्ता के शीर्ष पर रहने के बाद दोबारा शुरुआत करना आसान नहीं होता, लेकिन स्मृति ईरानी के लिए अभिनय हमेशा से उनके दिल के करीब रहा है। राजनीति के लंबे सफर के बाद भी उनका कला के प्रति समर्पण रत्ती भर कम नहीं हुआ। उदय शंकर द्वारा मिले इस नए मौके के साथ स्मृति ईरानी एक बार फिर कैमरे के सामने अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सागर में जहरीली शराब का कहर: 14 मौतें और यूपी तक फैले अवैध नेटवर्क के तार
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब का सेवन करने से 14 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद से अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे सरकार और आबकारी विभाग कटघरे में आ खड़े हुए हैं।
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब का सेवन करने से 14 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद से अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे सरकार और आबकारी विभाग कटघरे में आ खड़े हुए हैं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और मुआवजे का ऐलान
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। लापरवाही के आरोप में संबंधित आबकारी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है, हालांकि अपूरणीय क्षति को किसी भी मुआवजे से पूरा नहीं किया जा सकता।
अस्पताल पहुंचे उप मुख्यमंत्री और एयरलिफ्ट की गई जान
हालात की नजाकत को भांपते हुए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने तुरंत सागर का रुख किया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए। एक अत्यंत गंभीर मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भोपाल एयरलिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है।
उत्तर प्रदेश से जुड़े तार और सिंडिकेट पर सवाल
इस जहरीली त्रासदी की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। शुरुआती पड़ताल में इस अवैध शराब के नेटवर्क के तार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य की सीमाओं के पार एक संगठित अवैध शराब सिंडिकेट सक्रिय है, जो बेखौफ होकर जहरीले पेय पदार्थों की तस्करी कर रहा है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और सतर्कता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अवैध शराब के खिलाफ युद्धस्तर पर अभियान
इस खौफनाक हादसे ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार की जड़ों को उजागर कर दिया है। पुलिस और आबकारी विभाग अब नींद से जागे हैं और पूरे क्षेत्र में अवैध शराब के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों की मांग है कि सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरे सिंडिकेट के सरगनाओं को बेनकाब कर उनके खिलाफ सबसे कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी किसी अमानवीय घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
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