
मोहम्मद शमी की टीम इंडिया में वापसी पर भरत अरुण का बड़ा बयान
भारत के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय टीम में वापसी की पुरजोर वकालत की है। अरुण का मानना है कि शमी जैसे मैच जिताऊ गेंदबाज के लिए टीम इंडिया के दरवाजे कभी बंद नहीं होने चाहिए। अगर खिलाड़ी में प्रदर्शन करने की क्षमता है, तो उम्र उसके आड़े नहीं आनी चाहिए।
खबर का निचोड़
भारत के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय टीम में वापसी की पुरजोर वकालत की है। अरुण का मानना है कि शमी जैसे मैच जिताऊ गेंदबाज के लिए टीम इंडिया के दरवाजे कभी बंद नहीं होने चाहिए। अगर खिलाड़ी में प्रदर्शन करने की क्षमता है, तो उम्र उसके आड़े नहीं आनी चाहिए।
शमी की वापसी पर भरत अरुण का बड़ा रुख
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है। चयनकर्ताओं के रवैये और टीम प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शमी जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज को नजरअंदाज करना भारतीय क्रिकेट के हित में नहीं होगा।
भरत अरुण ने कहा कि मोहम्मद शमी की क्षमता और उनका अनुभव भारतीय टीम के लिए हमेशा एक बड़ा एसेट रहा है। ऐसे में केवल उम्र या हालिया बदलावों के आधार पर उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगाना या उनके लिए दरवाजे बंद करना पूरी तरह से अनुचित है।
उम्र नहीं, फॉर्म और फिटनेस होनी चाहिए पैमाना
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज गेंदबाजी के मापदंडों को रेखांकित करते हुए पूर्व गेंदबाजी कोच ने कहा कि खेल में सबसे महत्वपूर्ण कारक प्रदर्शन होता है। जब कोई खिलाड़ी मैदान पर गेंद से प्रभाव छोड़ रहा हो और टीम की जीत में अहम योगदान दे रहा हो, तो उसकी जन्मतिथि मायने नहीं रखनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शमी के पास अभी भी बहुत क्रिकेट बाकी है। उनकी स्विंग, गति और दबाव के क्षणों में विकेट निकालने की कला आज भी भारतीय क्रिकेट के किसी भी युवा गेंदबाज के बराबर या उससे बेहतर है। शमी ने अतीत में बार-बार साबित किया है कि वे परिस्थितियों के अनुसार ढलने में सक्षम हैं।
भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के लिए अनुभव क्यों जरूरी
भारतीय टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां नए और युवा तेज गेंदबाजों को लगातार मौके दिए जा रहे हैं। हालांकि, भरत अरुण का मानना है कि केवल युवाओं के भरोसे लंबा सफर तय नहीं किया जा सकता। किसी भी मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के संतुलन के लिए अनुभवी गेंदबाजों की मौजूदगी बेहद आवश्यक होती है।
शमी जैसे गेंदबाज ना केवल गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभालते हैं, बल्कि मैदान पर युवा गेंदबाजों का मार्गदर्शन भी करते हैं। बड़े दौरों और महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में शमी का अनुभव टीम के काम आ सकता है।
चयनकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश
भरत अरुण के इस बयान को चयनकर्ताओं और भारतीय टीम प्रबंधन के लिए एक सीधे संदेश के रूप में देखा जा रहा है। खेल प्रेमियों और क्रिकेट विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि शमी की क्षमता का सही उपयोग टीम इंडिया के तेज गेंदबाजी विभाग को और अधिक घातक बना सकता है। आगामी विदेशी दौरों और बड़ी सीरीज को देखते हुए शमी की टीम में मौजूदगी भारत की संभावनाओं को काफी मजबूती प्रदान करेगी।

कंगना पर कुणाल कामरा का तीखा तंज, कहा- कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया
बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया है। स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस पर तीखा तंज कसते हुए कंगना को "कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया" कह दिया। कामरा के इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
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बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया है। स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस पर तीखा तंज कसते हुए कंगना को "कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया" कह दिया। कामरा के इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
कामरा का सीधा वार
स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा अपने बेबाक अंदाज और राजनीतिक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वे सरकारी अधिकारियों को सख्त लहजे में फटकार लगाती नजर आ रही थीं। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कुणाल कामरा ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधा हमला बोला। उन्होंने कंगना के प्रशासनिक रवैये और जन प्रतिनिधि के तौर पर उनकी शैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
असफलता से जुनून पर तंज
कंगना के बयान का वीडियो साझा करते हुए कुणाल कामरा ने लिखा कि उन्होंने आज तक किसी भी व्यक्ति को अपनी असफलता को लेकर इतना जुनूनी नहीं देखा। कामरा ने तीखे अंदाज में कहा कि कुछ भी ठोस परिणाम न दे पाने के बावजूद कंगना का यह आत्ममुग्ध रवैया और दृढ़ संकल्प सचमुच हैरान करने वाला है। उनके इस तंज ने इंटरनेट पर तुरंत ध्यान खींचा और लोग इसे कंगना के संसदीय प्रदर्शन से जोड़कर देखने लगे।
शब्दों की सीमा लांघती बयानबाजी
अपने बयान को और तीखा बनाते हुए कामरा ने कंगना के लिए 'कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया' जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में अधिकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार उनकी अपरिपक्वता को दर्शाता है। कामरा के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया। जहां एक तरफ कंगना के आलोचक कामरा के बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कंगना के प्रशंसक कामरा पर एक महिला सांसद का अपमान करने का आरोप लगा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
कंगना रनौत और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है, लेकिन राजनीति में कदम रखने के बाद उनके हर कदम और बयान पर सूक्ष्मता से नजर रखी जा रही है। अधिकारियों पर उनके गुस्से को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब निजी और राजनीतिक खींचतान में बदल चुका है। कुणाल कामरा के इस ट्वीट के बाद एक्स (ट्विटर) पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है, जहां दोनों हस्तियों के समर्थक आमने-सामने आ गए हैं।

हार्दिक पांड्या संग जुड़ा नाम तो भड़कीं अमीषा पटेल, ट्रोलर्स को सिखाया सबक
बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल और भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दोनों के अफेयर की अफवाहें उड़ने लगीं। वीडियो में अमीषा क्रिकेटर के कंधे पर हाथ रखे नजर आ रही थीं। अफवाहों से नाराज अमीषा ने ट्रोलर्स को करारा जवाब देते हुए उनकी सोच पर सवाल उठाए।
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बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल और भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दोनों के अफेयर की अफवाहें उड़ने लगीं। वीडियो में अमीषा क्रिकेटर के कंधे पर हाथ रखे नजर आ रही थीं। अफवाहों से नाराज अमीषा ने ट्रोलर्स को करारा जवाब देते हुए उनकी सोच पर सवाल उठाए।
वायरल वीडियो और उड़ती अफवाहें
सोशल मीडिया का दौर भी बड़ा अजीब है, जहां एक पल की मुलाकात या दो लोगों का साथ दिख जाना ही नई कहानियों को जन्म देने के लिए काफी होता है। हाल ही में ऐसा ही कुछ अभिनेत्री अमीषा पटेल और भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या के साथ हुआ। एक इवेंट के दौरान दोनों का एक छोटा सा वीडियो इंटरनेट पर सामने आया, जिसके बाद यूजर्स ने कयास लगाने शुरू कर दिए।
इस वीडियो में अमीषा पटेल बेहद सहज अंदाज में हार्दिक पांड्या के कंधे पर हाथ रखे नजर आईं। बस फिर क्या था, सोशल मीडिया के 'जासूसों' ने इस नॉर्मल सी बातचीत और दोस्ती को एक नए रिश्ते का नाम देना शुरू कर दिया। देखते ही देखते इंटरनेट पर दोनों के डेटिंग की खबरें तैरने लगीं।
अमीषा का तीखा पलटवार
आमतौर पर सेलेब्रिटीज ऐसी अफवाहों को नजरअंदाज करना पसंद करते हैं, लेकिन इस बार अमीषा पटेल ने शांत रहना सही नहीं समझा। जैसे ही उनके और हार्दिक के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की बातें बनने लगीं, अभिनेत्री का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने किसी भी तरह की हिचकिचाहट के बिना ट्रोल्स की क्लास लगा दी।
अमीषा ने यूजर्स की संकीर्ण मानसिकता पर करारा तंज कसते हुए लिखा, "वाकई मेरा हाथ रखने का तरीका कितना रोमांटिक था... मैं तुम्हें (यूजर) तो नहीं जानती लेकिन निश्चित है तुम्हारी कोई लड़की दोस्त नहीं है।" उनका यह जवाब उन लोगों के मुंह पर तमाचा था जो लड़के और लड़की की सामान्य दोस्ती या सहज व्यवहार में भी सिर्फ अफेयर ढूंढने की कोशिश करते हैं।
सोशल मीडिया का रिएक्शन
अमीषा पटेल के इस करारे जवाब के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। जहां एक तरफ ट्रोलर्स के पास कहने को कुछ नहीं बचा, वहीं दूसरी तरफ अभिनेत्री के फैंस और समझदार यूजर्स ने उनके इस बोल्ड अंदाज की जमकर तारीफ की। लोगों का कहना है कि हर बार किसी महिला और पुरुष को साथ देखकर उनके रिश्ते पर सवाल उठाना पूरी तरह से गलत है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी बॉलीवुड सेलेब को इस तरह की बेवजह की अफवाहों का सामना करना पड़ा हो। हालांकि, अमीषा पटेल ने जिस बेबाकी और धारदार अंदाज में ट्रोलर्स की बोलती बंद की, उसने यह साफ कर दिया कि वह बिना वजह की बयानबाजी और फर्जी खबरों को बिल्कुल बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

बैंकिंग जॉब्स का महाऑफर: SBI में 12,000 नई भर्तियों का ऐलान
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 12,000 नई नियुक्तियां करने जा रहा है। बैंक के अध्यक्ष सीएस शेट्टी ने क्लर्क और अधिकारी कैडर में इन भर्तियों की घोषणा की। नेटवर्क विस्तार योजना के तहत बैंक हर साल 200 से 250 नई शाखाएं भी खोलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 12,000 नई नियुक्तियां करने जा रहा है। बैंक के अध्यक्ष सीएस शेट्टी ने क्लर्क और अधिकारी कैडर में इन भर्तियों की घोषणा की। नेटवर्क विस्तार योजना के तहत बैंक हर साल 200 से 250 नई शाखाएं भी खोलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बैंकिंग सेक्टर में नई नौकरियों की बहार
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद शानदार खबर आई है। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक बड़ा रोजगार प्लान तैयार किया है। बैंक इस वित्तीय वर्ष के दौरान लगभग 12,000 नए कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ने की तैयारी में है।
अधिकारी और क्लर्क कैडर में होंगी नियुक्तियां
SBI के अध्यक्ष सीएस शेट्टी ने बैंक की इस महत्वाकांक्षी भर्ती योजना की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये नई 12,000 नियुक्तियां मुख्य रूप से क्लर्क (Associate) और अधिकारी (Officer) कैडर के लिए की जाएंगी। बैंक का उद्देश्य अपने संचालन को अधिक सुचारू बनाना और ग्राहकों को बेहतर डिजिटल व बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना है। इस घोषणा के बाद से ही बैंकिंग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
शाखाओं के विस्तार से बनेंगे नए अवसर
नई नियुक्तियों का यह फैसला सिर्फ खाली पदों को भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बैंक की आक्रामक विस्तार योजना का एक अहम हिस्सा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपनी भौतिक उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए देशभर में सालाना 200 से 250 नई शाखाएं खोलने की योजना पर काम कर रहा है। नई शाखाएं खुलने से न केवल ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच आसान होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के अनेक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर निर्मित होंगे।
पिछले वर्षों का रिकॉर्ड और बैंक का दृष्टिकोण
बैंकिंग क्षेत्र में SBI हमेशा से सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता रहा है। यदि पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बैंक ने रिकॉर्ड 25,633 कर्मचारियों की भर्ती की थी। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार भले ही आंकड़ा 12,000 का दिख रहा हो, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या बैंक के नए तकनीकी बदलावों और संतुलित मानव संसाधन रणनीति को दर्शाती है। बैंक प्रबंधन का मुख्य ध्यान अब आधुनिक तकनीक के साथ-साथ कुशल कार्यबल को संतुलित करने पर है।

मोबाइल बैन से तमिलनाडु के मंदिरों में घटी श्रद्धालुओं की भीड़
तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी मंदिर में मोबाइल फोन पर लगे प्रतिबंध का सीधा असर श्रद्धालुओं की आवक पर दिखा है। प्रशासन द्वारा पवित्र वातावरण बनाए रखने के लिए लागू किए गए इस नियम के बाद मंदिर आने वाले लोगों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
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तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी मंदिर में मोबाइल फोन पर लगे प्रतिबंध का सीधा असर श्रद्धालुओं की आवक पर दिखा है। प्रशासन द्वारा पवित्र वातावरण बनाए रखने के लिए लागू किए गए इस नियम के बाद मंदिर आने वाले लोगों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
भक्ति पर भारी पड़ी डिजिटल दूरी
डिजिटल दौर में किसी जगह जाकर तस्वीर न ले पाना कई लोगों के लिए उस अनुभव को अधूरा बना देता है। तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर कांचीपुरम स्थित प्रसिद्ध देवराजस्वामी मंदिर में ऐसा ही एक अनूठा बदलाव देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर लगाई गई रोक के बाद से यहाँ श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भारी कमी आई है।
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, जब से परिसर में स्मार्टफोन पूरी तरह बैन किए गए हैं, तब से आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। जो मंदिर पहले हर दिन हजारों लोगों की चहल-पहल से गुंजायमान रहता था, वहाँ अब तुलनात्मक रूप से शांति दिखाई दे रही है।
पवित्रता बनाम आधुनिक युवाओं की पसंद
इस कड़े फैसले के पीछे मंदिर प्रबंधन का तर्क बेहद स्पष्ट है। प्रशासन का मानना है कि मंदिर केवल घूमने या तस्वीरें खिंचवाने की जगह नहीं हैं, बल्कि यह ईश्वर से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का केंद्र हैं। लगातार बजते फोन, सेल्फी लेने की होड़ और सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने की आदत से मंदिर परिसर का आध्यात्मिक माहौल प्रभावित हो रहा था। इसी वजह से पूजा-अर्चना के दौरान पवित्रता और श्रद्धालुओं की एकाग्रता बनाए रखने के लिए मोबाइल बैन का फैसला लिया गया।
दूसरी तरफ, युवाओं और सोशल मीडिया जनरेशन के बीच इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। कई युवा श्रद्धालुओं का मानना है कि स्मार्टफोन आज की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। सुरक्षा, अपनों से संपर्क और अपनी यात्रा की यादों को सहेजने के लिए फोन जरूरी होता है। ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध को कुछ लोग अत्यधिक सख्त नियम मान रहे हैं, जिससे उनकी मंदिर आने की उत्सुकता कम हुई है।
डिजिटल लाइफस्टाइल और आस्था का टकराव
देवराजस्वामी मंदिर का यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि आज की लाइफस्टाइल में तकनीक किस कदर घुल-मिल गई है। एक ओर जहाँ पारंपरिक व्यवस्थाएं धार्मिक स्थलों के मूल स्वरूप को सहेजने का प्रयास कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक पीढ़ी की आदतें इन नियमों से मेल नहीं खा पा रही हैं। फिलहाल, मंदिर प्रशासन अपने फैसले पर कायम है और उसका पूरा ध्यान परिसर के भीतर भक्तिभाव को प्राथमिकता देने पर है।
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