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बिहार में युवाओं के लिए बड़ा अवसर, हर महीने ₹6000 स्टाइपेंड

बिहार में युवाओं के लिए बड़ा अवसर, हर महीने ₹6000 स्टाइपेंड

Delight News
📅 07 Sep2026

बिहार सरकार की 'मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना' 18 से 28 वर्ष के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास का सुनहरा अवसर लेकर आई है। इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न संस्थानों में इंटर्नशिप और कार्यस्थल अनुभव मिलेगा। आवेदकों को उनकी योग्यता के आधार पर ₹4,000 से ₹6,000 तक प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा।

बिहार में युवाओं के लिए बड़ा अवसर, हर महीने ₹6000 स्टाइपेंड
खबर का निचोड़
बिहार सरकार की 'मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना' 18 से 28 वर्ष के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास का सुनहरा अवसर लेकर आई है। इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न संस्थानों में इंटर्नशिप और कार्यस्थल अनुभव मिलेगा। आवेदकों को उनकी योग्यता के आधार पर ₹4,000 से ₹6,000 तक प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना: युवाओं के सपनों को नई उड़ान
बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं को स्वावलंबी बनाने और उनके कौशल को निखारने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। 'मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना' के जरिए राज्य के युवाओं को न केवल व्यावहारिक कार्य अनुभव प्रदान किया जाएगा, बल्कि उनके वित्तीय सहयोग के लिए हर महीने स्टाइपेंड की व्यवस्था भी की गई है। यह योजना उन युवाओं के लिए वरदान साबित होगी जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यावहारिक कार्यशैली सीखने की तलाश में हैं।
योजना की पात्रता और आयु सीमा
इस योजना का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवारों की आयु 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह आयु वर्ग राज्य के उस बड़े युवा वर्ग को कवर करता है जो उच्च शिक्षा पूरी कर चुका है या करियर के शुरुआती दौर में है। पात्र उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और सुलभ बनाया गया है ताकि दूर-दराज़ के क्षेत्रों के युवा भी बिना किसी परेशानी के इसका लाभ ले सकें।
योग्यता के अनुसार मिलेगा स्टाइपेंड
योजना की सबसे खास बात युवाओं को मिलने वाला आर्थिक प्रोत्साहन है। सरकार चयनित उम्मीदवारों को हर महीने ₹4,000 से लेकर ₹6,000 तक का स्टाइपेंड देगी। स्टाइपेंड की यह राशि उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता और उनके द्वारा चुने गए इंटर्नशिप के क्षेत्र के अनुसार तय की जाएगी। इससे युवाओं को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे पूरी एकाग्रता के साथ अपना काम सीख सकेंगे।
कार्यस्थल अनुभव और कौशल विकास पर जोर
अक्सर देखा जाता है कि डिग्री होने के बावजूद सही कार्यस्थल अनुभव (Workplace Experience) न होने के कारण युवाओं को रोजगार मिलने में कठिनाई आती है। मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना इसी कमी को पूरा करती है। इसके तहत विभिन्न सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में युवाओं को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान उन्हें वास्तविक कामकाजी माहौल को समझने और आधुनिक तकनीकों को सीखने का सीधा अवसर मिलेगा।
डिजिटल आवेदन और चयन प्रक्रिया
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार योजना के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पोर्टल पर आवेदन से जुड़ी सभी शर्तें, आवश्यक दस्तावेजों की सूची और उपलब्ध इंटर्नशिप सीटों का विवरण उपलब्ध है। फॉर्म भरने के बाद आवेदनों की जांच की जाएगी और योग्य अभ्यर्थियों को उनकी पसंद और दक्षता के अनुसार उपयुक्त संस्थानों में तैनात किया जाएगा।
स्मृति ईरानी की कॉल, उदय शंकर का हाथ: हार के बाद ऐसे मिला काम

स्मृति ईरानी की कॉल, उदय शंकर का हाथ: हार के बाद ऐसे मिला काम

Delight News
📅 07 Sep2026

2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने काम की तलाश में टीवी इंडस्ट्री का रुख किया। एक समय जिनकी वजह से उनका शो छूटा था, उन्हीं जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने स्मृति ईरानी को दोबारा काम दिया।

स्मृति ईरानी की कॉल, उदय शंकर का हाथ: हार के बाद ऐसे मिला काम
खबर का निचोड़
2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने काम की तलाश में टीवी इंडस्ट्री का रुख किया। एक समय जिनकी वजह से उनका शो छूटा था, उन्हीं जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने स्मृति ईरानी को दोबारा काम दिया।
राजनीति से फिर अभिनय का रुख
साल 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की राजनीतिक पारी में एक बड़ा मोड़ आ गया। अमेठी से हार का सामना करने के बाद उन्होंने राजनीति की चकाचौंध से इतर एक सामान्य नागरिक की तरह अपने करियर के अगले कदम के बारे में सोचना शुरू किया। वर्षों तक सत्ता और राजनीति के केंद्र में रहने के बाद भी स्मृति ईरानी ने बिना किसी झिझक के अपनी पुरानी कर्मभूमि, यानी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का दरवाजा खटखटाया।
एक कॉल, जिसने बदल दी बात
हाल ही में दिए एक पॉडकास्ट में स्मृति ईरानी ने अपनी इस संघर्षपूर्ण यात्रा का खुद खुलासा किया। उन्होंने बताया कि चुनाव हारने के बाद उन्होंने टीवी जगत के कई पुराने साथियों को फोन किया। बिना किसी औपचारिकता के उन्होंने सीधे तौर पर कहा, "मैं अब बेरोजगार हूं और मुझे काम चाहिए।" इस एक बयान ने साबित कर दिया कि वह जमीनी हकीकत को स्वीकार करने में कभी पीछे नहीं हटतीं।
पुरानी कड़वाहट से नए अवसर तक
स्मृति ईरानी के इस फोन कॉल का सबसे दिलचस्प दौर तब आया जब उन्होंने जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर से संपर्क किया। एक समय ऐसा था जब उदय शंकर स्टार नेटवर्क के प्रमुख थे और उन्हीं के कार्यकाल में स्मृति ईरानी को मशहूर शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। परिस्थितियां बदलीं और वही उदय शंकर इस बार उनके संकटमोचक बनकर सामने आए। जब स्मृति ने उनसे काम मांगा, तो उदय शंकर ने न केवल उनकी बात गंभीरता से सुनी बल्कि उन्हें तुरंत एक नए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी भी सौंप दी।
कला और अभिनय के प्रति अडिग समर्पण
सत्ता के शीर्ष पर रहने के बाद दोबारा शुरुआत करना आसान नहीं होता, लेकिन स्मृति ईरानी के लिए अभिनय हमेशा से उनके दिल के करीब रहा है। राजनीति के लंबे सफर के बाद भी उनका कला के प्रति समर्पण रत्ती भर कम नहीं हुआ। उदय शंकर द्वारा मिले इस नए मौके के साथ स्मृति ईरानी एक बार फिर कैमरे के सामने अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
सागर में जहरीली शराब का कहर: 14 मौतें और यूपी तक फैले अवैध नेटवर्क के तार

सागर में जहरीली शराब का कहर: 14 मौतें और यूपी तक फैले अवैध नेटवर्क के तार

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📅 07 Sep2026

मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब का सेवन करने से 14 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद से अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे सरकार और आबकारी विभाग कटघरे में आ खड़े हुए हैं।

सागर में जहरीली शराब का कहर: 14 मौतें और यूपी तक फैले अवैध नेटवर्क के तार
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब का सेवन करने से 14 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद से अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे सरकार और आबकारी विभाग कटघरे में आ खड़े हुए हैं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और मुआवजे का ऐलान
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। लापरवाही के आरोप में संबंधित आबकारी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है, हालांकि अपूरणीय क्षति को किसी भी मुआवजे से पूरा नहीं किया जा सकता।
अस्पताल पहुंचे उप मुख्यमंत्री और एयरलिफ्ट की गई जान
हालात की नजाकत को भांपते हुए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने तुरंत सागर का रुख किया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए। एक अत्यंत गंभीर मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भोपाल एयरलिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है।
उत्तर प्रदेश से जुड़े तार और सिंडिकेट पर सवाल
इस जहरीली त्रासदी की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। शुरुआती पड़ताल में इस अवैध शराब के नेटवर्क के तार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य की सीमाओं के पार एक संगठित अवैध शराब सिंडिकेट सक्रिय है, जो बेखौफ होकर जहरीले पेय पदार्थों की तस्करी कर रहा है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और सतर्कता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अवैध शराब के खिलाफ युद्धस्तर पर अभियान
इस खौफनाक हादसे ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार की जड़ों को उजागर कर दिया है। पुलिस और आबकारी विभाग अब नींद से जागे हैं और पूरे क्षेत्र में अवैध शराब के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों की मांग है कि सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरे सिंडिकेट के सरगनाओं को बेनकाब कर उनके खिलाफ सबसे कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी किसी अमानवीय घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
सत्य निकेतन पीजी हादसा: 50 साल पुरानी इमारत ढहने से छह की मौत, एमसीडी पर उठे सवाल

सत्य निकेतन पीजी हादसा: 50 साल पुरानी इमारत ढहने से छह की मौत, एमसीडी पर उठे सवाल

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📅 07 Sep2026

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक अर्ध-शताब्दी पुरानी पीजी इमारत के ढह जाने से छह लोगों की जान चली गई, जबकि बारह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है, जिस पर राजनीति और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

सत्य निकेतन पीजी हादसा: 50 साल पुरानी इमारत ढहने से छह की मौत, एमसीडी पर उठे सवाल
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दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक अर्ध-शताब्दी पुरानी पीजी इमारत के ढह जाने से छह लोगों की जान चली गई, जबकि बारह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है, जिस पर राजनीति और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
हादसों का मलबे में तब्दील होता सत्य निकेतन
दिल्ली के पॉश और छात्रों के बीच लोकप्रिय माने जाने वाले सत्य निकेतन इलाके में सोमवार को उस वक्त कोहराम मच गया, जब पचास साल पुरानी एक जर्जर पीजी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भयानक हादसे में अब तक छह लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे से बारह जिंदगियों को बचा लिया गया है। चीख-पुकार और धूल के गुबार के बीच स्थानीय लोगों ने राहत कार्यों में अपनी जान की बाजी लगा दी। प्रशासन की सुस्त रफ्तार के खिलाफ लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
लापरवाही पर प्रशासन का एक्शन और सियासत
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए तत्काल मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। हादसे के तुरंत बाद नगर निगम यानी एमसीडी की नींद टूटी है और उसने पास ही स्थित एक अन्य खतरनाक और जर्जर इमारत को खाली कराने का नोटिस चस्पा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है?
सड़कों पर उतरा गुस्सा और विरोध की आग
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद राजधानी का सियासी पारा भी चढ़ गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने एमसीडी मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और निगम कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे पंद्रह छात्रों को हिरासत में ले लिया। छात्रों और स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि दिल्ली के कई इलाकों में अनधिकृत रूप से चल रहे पीजी और हॉस्टल मौत का कुआं बन चुके हैं, जिन पर लगाम कसने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
जापान की संवैधानिक प्रणाली: ऐतिहासिक विकास और वर्तमान स्वरूप

जापान की संवैधानिक प्रणाली: ऐतिहासिक विकास और वर्तमान स्वरूप

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📅 07 Sep2026

द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत 1947 में लागू संविधान ने जापान की राजनैतिक व्यवस्था को सम्राट-केंद्रित तानाशाही से एक आधुनिक संसदीय लोकतंत्र में रूपांतरित किया। यह प्रणाली लोक संप्रभुता, शांतिवाद और मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर आधारित है, जो इसे वैश्विक शासन प्रणालियों में विशिष्ट बनाती है।

जापान की संवैधानिक प्रणाली: ऐतिहासिक विकास और वर्तमान स्वरूप
द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत 1947 में लागू संविधान ने जापान की राजनैतिक व्यवस्था को सम्राट-केंद्रित तानाशाही से एक आधुनिक संसदीय लोकतंत्र में रूपांतरित किया। यह प्रणाली लोक संप्रभुता, शांतिवाद और मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर आधारित है, जो इसे वैश्विक शासन प्रणालियों में विशिष्ट बनाती है।
जापान की संवैधानिक रूपरेखा और मुख्य विशेषताएं
जापान का वर्तमान संविधान 3 मई 1947 को प्रभावी हुआ, जिसे अक्सर 'शांति संविधान' भी कहा जाता है। यह व्यवस्था एक एकात्मक संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली है, जहाँ शासन की सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित है। ब्रिटिश मॉडल के अनुरूप यहाँ संसदीय संप्रभुता के साथ संवैधानिक सर्वोच्चता का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण इस प्रणाली की मूल नींव है।
सम्राट की संवैधानिक स्थिति और भूमिका
वर्ष 1889 के मेइजी संविधान के विपरीत, जिसमें सम्राट को दैवीय अधिकार प्राप्त थे और वह सर्वोच्च सत्ता का केंद्र था, 1947 के संविधान के अनुच्छेद 1 के तहत सम्राट को केवल 'राज्य और जनता की एकता का प्रतीक' घोषित किया गया है। सम्राट के पास अब कोई वास्तविक राजनीतिक या सैन्य शक्ति नहीं बची है। उनके द्वारा किए जाने वाले सभी राजकीय कार्य मंत्रिमंडल की सलाह और अनुमोदन के अधीन होते हैं, जिसमें प्रधानमंत्री की नियुक्ति और संसद द्वारा पारित विधेयकों की घोषणा शामिल है।
नेशनल डाइट और विधायी प्रक्रिया
जापान की संसद को 'डाइट' कहा जाता है, जो एक द्विसदनीय विधायिका है। इसमें निचले सदन को 'प्रतिनिधि सभा' और ऊपरी सदन को 'पार्षद सभा' कहा जाता है। प्रतिनिधि सभा अधिक शक्तिशाली होती है क्योंकि इसके पास बजट पारित करने, संधियों को मंजूरी देने और प्रधानमंत्री का चुनाव करने में निर्णायक अधिकार होता है। दोनों सदनों के सदस्य जनता द्वारा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने जाते हैं।
अनुच्छेद 9 और शांतिवादी सिद्धांत
जापान के संविधान का अनुच्छेद 9 इसकी विदेश नीति और रक्षा ढांचे की सबसे अनूठी विशेषता है। इस अनुच्छेद के तहत जापान ने युद्ध के त्याग, संप्रभु अधिकारों के रूप में युद्ध की धमकी या बल प्रयोग के इस्तेमाल को स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया है। इसके साथ ही देश ने भूमि, समुद्र और वायु सेना के साथ-साथ अन्य युद्धक बलों को बनाए रखने से इनकार किया है, हालांकि आत्मरक्षा के लिए सीमित बलों के गठन की अनुमति बाद में न्यायिक व्याख्याओं के माध्यम से दी गई।

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