
आपका ओल्ड मॉंक रम नहीं, FSSAI ने हाईकोर्ट में कंपनी को धो डाला!
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ओल्ड मॉंक की बिक्री पर रोक के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. अथॉरिटी का तर्क है कि न्यूट्रल स्प्रिट्स में बाहर से फ्लेवर मिलाकर बेचे जाने वाले प्रोडक्ट को रम नहीं कहा जा सकता.
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ओल्ड मॉंक की बिक्री पर रोक के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. अथॉरिटी का तर्क है कि न्यूट्रल स्प्रिट्स में बाहर से फ्लेवर मिलाकर बेचे जाने वाले प्रोडक्ट को रम नहीं कहा जा सकता.
ओल्ड मॉंक की बिक्री पर कानूनी शिकंजा
अगर आप भी ओल्ड मॉंक के दीवाने हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ाने के लिए काफी है. महाराष्ट्र में ओल्ड मॉंक की बिक्री पर FSSAI द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ इन दिनों बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस मामले ने देश भर के शराब प्रेमियों और बाजार में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह ब्रांड दशकों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है.
FSSAI का अदालत में बड़ा और तीखा तर्क
गुरुवार को सुनवाई के दौरान फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अदालत में ऐसा चौंकाने वाला तर्क दिया जिसने सबको हिलाकर रख दिया. FSSAI का सीधा और स्पष्ट कहना है कि न्यूट्रल स्प्रिट्स में बाहर से रम का फ्लेवर मिलाकर बेचे जाने वाले किसी भी प्रोडक्ट को कानूनी तौर पर रम कहा ही नहीं जा सकता है. इस दलील के सामने आने के बाद उत्पादक कंपनियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं.
क्या है असल विवाद और आरोप
यह पूरा कानूनी विवाद महाराष्ट्र में FSSAI द्वारा ओल्ड मॉंक की बिक्री पर अचानक बैन लगाने से शुरू हुआ था. FSSAI का मुख्य आरोप यह है कि इस ड्रिंक में बाहर से आर्टिफिशियल रम फ्लेवर का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा बोतल पर 'फ्लेवर्ड रम' जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर भी नियामक संस्था और निर्माता कंपनी आमने-सामने आ गए हैं, जिससे यह मामला अब अदालत के फैसलों के दायरे में सिमट गया है.

UN में बदला नक्शा: अफ्रीका दिखेगा विशाल, यूरोप और अमेरिका का घटेगा आकार
संयुक्त राष्ट्र महासभा में टोगो द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जिससे मर्केटर वर्ल्ड मैप के स्थान पर अब वास्तविक आकार दर्शाने वाला नक्शा अपनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद विश्व मानचित्र पर अफ्रीका महाद्वीप अब काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका अपने वास्तविक छोटे आकार में नजर आएंगे।
खबर का निचोड़
संयुक्त राष्ट्र महासभा में टोगो द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जिससे मर्केटर वर्ल्ड मैप के स्थान पर अब वास्तविक आकार दर्शाने वाला नक्शा अपनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद विश्व मानचित्र पर अफ्रीका महाद्वीप अब काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका अपने वास्तविक छोटे आकार में नजर आएंगे।
गलतफहमी का ऐतिहासिक अंत
सदियों से हम जिस दुनिया को देखते आ रहे हैं, उसका भूगोल अब बदलने जा रहा है। 1569 में गेरार्डस मर्केटर द्वारा बनाया गया 'मर्केटर प्रोजेक्शन' नक्शा नौवहन (navigation) की आसानी के लिए डिज़ाइन किया गया था। हालांकि, इसमें भूमध्य रेखा से दूर स्थित देशों को उनकी वास्तविक तुलना में काफी बड़ा दिखाया गया था। इसके कारण यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे पश्चिमी देश विशाल नजर आते थे, जबकि अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे महाद्वीपों का आकार काफी छोटा दिखाई देता था। टोगो द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव ने वर्षों पुरानी इसी भौगोलिक विसंगति को दूर कर दिया है।
164 देशों का समर्थन और नया दृष्टिकोण
संयुक्त राष्ट्र महासभा में टोगो के इस संशोधन प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में 164 सदस्य देशों ने इसके समर्थन में मतदान किया। भारी बहुमत से स्वीकृत इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद संयुक्त राष्ट्र और उसकी सहयोगी एजेंसियों द्वारा अब एक नए और अधिक सटीक विश्व मानचित्र का उपयोग किया जाएगा। नया नक्शा 'गॉल-पेटर्स प्रोजेक्शन' या इसी तरह के 'इक्वल-एरिया प्रोजेक्शन' पर आधारित होगा। इसमें सभी महाद्वीपों और देशों को उनके वास्तविक अनुपातिक क्षेत्रफल के अनुसार ही दर्शाया जाएगा।
अफ्रीका की वास्तविक विशालता
इस बदलाव के बाद नक्शे पर जो तस्वीर उभरेगी, वह दुनिया के देखने के नजरिए को पूरी तरह बदल देगी। असलियत यह है कि अफ्रीका महाद्वीप का क्षेत्रफल लगभग 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है, जो पूरे उत्तरी अमेरिका (2.47 करोड़ वर्ग किलोमीटर) और यूरोप (1 करोड़ वर्ग किलोमीटर) के संयुक्त क्षेत्रफल से भी बड़ा है। पुराने मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड को अफ्रीका के लगभग बराबर दिखाया जाता था, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है। नए नक्शे में अफ्रीका का यही वास्तविक और विशाल आकार स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
भूगोल ही नहीं, भू-राजनीति पर भी असर
यह केवल एक कागजी या कार्टोग्राफिक बदलाव नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी है। जानकारों का मानना है कि मर्केटर प्रोजेक्शन ने अनजाने में ही सही, दशकों तक पश्चिमी देशों की श्रेष्ठता और प्रभुत्व की मानसिकता को बढ़ावा दिया। नक्शे में आकार का बड़ा दिखना शक्ति और प्रभाव का प्रतीक बन गया था। अब जब वैश्विक मंचों पर अफ्रीका और विकासशील देश अपने सही आकार में दिखेंगे, तो इससे वैश्विक दृष्टिकोण में समानता और निष्पक्षता की एक नई शुरुआत होगी।

निशु आजाद हमला: बुलंदशहर से स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में, दक्ष चौधरी पर गहराया शक
वायरल पॉडकास्ट विवाद के बीच निशु आजाद पर हुए हमले के आरोपी एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया गया है। मामले में दक्ष चौधरी को असली मास्टरमाइंड माना जा रहा है। वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में SC/ST और POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी हैं।
खबर का निचोड़
वायरल पॉडकास्ट विवाद के बीच निशु आजाद पर हुए हमले के आरोपी एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया गया है। मामले में दक्ष चौधरी को असली मास्टरमाइंड माना जा रहा है। वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में SC/ST और POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी हैं।
बुलंदशहर से नाटकीय गिरफ्तारी और पॉडकास्ट का सच
निशु आजाद पर हुए हमले के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से चल रहे वायरल पॉडकास्ट विवाद के बीच पुलिस ने एक्शन लेते हुए एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है।
स्वतंत्र भारद्वाज पर संगीन आरोप और पिता को मारने की बात
हिरासत में लिए जाने के बाद निशु आजाद ने कई बड़े और चौंकाने वाले दावे किए हैं। निशु का कहना है कि स्वतंत्र भारद्वाज ने खुद उनके पिता की हत्या करने की बात कबूली थी। निशु ने यह भी आरोप लगाया कि स्वतंत्र केवल एक मोहरा है, जिसे आगे करके साजिश रची जा रही थी। निशु आजाद के इस बयान ने पूरे मामले को एक नए और गंभीर मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
दक्ष चौधरी ही असली मास्टरमाइंड!
जैसे-जैसे पुलिस की तफ्तीश आगे बढ़ रही है, इस हमले के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ते दिख रहे हैं। निशु के दावों और शुरुआती पूछताछ के आधार पर स्वतंत्र भारद्वाज को केवल इस साजिश की एक कड़ी माना जा रहा है। जांच का रुख अब दक्ष चौधरी की तरफ मुड़ चुका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस पूरे हमले और विवाद का असली मास्टरमाइंड दक्ष चौधरी ही है, जिसने पर्दे के पीछे रहकर पूरी पटकथा लिखी।
चिराग पासवान का एक्शन और पुलिस का शिकंजा
मामले में नया मोड़ तब आया जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। चिराग पासवान ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया और राजनीतिक रसूख का फायदा उठाने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री की शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
एफआईआर में जुड़ीं POCSO और SC/ST की गंभीर धाराएं
मामले की संवेदनशीलता और नए सबूतों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने दर्ज एफआईआर का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस ने एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अत्याचार निवारण अधिनियम और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की बेहद कड़ी धाराएं जोड़ दी हैं। इन गंभीर धाराओं के जुड़ने से अब आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज और इस केस से जुड़े अन्य संदिग्धों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए स्वतंत्र से पूछताछ कर रही है और मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए छापेमारी जारी है।

टाटा के इस शेयर ने 7 महीने में दिया 100% से ज्यादा रिटर्न
टाटा ग्रुप की कंपनी तेजस नेटवर्क्स के शेयर ने महज 7 महीनों में निवेशकों की पूंजी दोगुनी से अधिक कर दी है। 27 जनवरी 2026 को ₹294.10 पर कारोबार करने वाला यह शेयर शुक्रवार को उछलकर ₹614.15 पर पहुंच गया। टीसीएस से मिले विशाल ऑर्डर ने कंपनी के शेयरों की रफ्तार को पंख लगा दिए हैं।
टाटा के इस शेयर ने 7 महीने में दिया 100% से ज्यादा रिटर्न
खबर का निचोड़:
टाटा ग्रुप की कंपनी तेजस नेटवर्क्स के शेयर ने महज 7 महीनों में निवेशकों की पूंजी दोगुनी से अधिक कर दी है। 27 जनवरी 2026 को ₹294.10 पर कारोबार करने वाला यह शेयर शुक्रवार को उछलकर ₹614.15 पर पहुंच गया। टीसीएस से मिले विशाल ऑर्डर ने कंपनी के शेयरों की रफ्तार को पंख लगा दिए हैं।
तेजस नेटवर्क्स के शेयर में रिकॉर्ड तेजी
शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच टाटा ग्रुप की कंपनी तेजस नेटवर्क्स (Tejas Networks) ने दलाल स्ट्रीट पर अपनी जबरदस्त रफ्तार से हर किसी को हैरान कर दिया है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयरों में 8 प्रतिशत से भी अधिक की जोरदार तेजी देखने को मिली। इस शानदार उछाल के साथ शेयर एनएसई पर ₹614.15 के स्तर पर जाकर बंद हुआ।
7 महीनों में निवेशकों की संपत्ति दोगुनी
कमाई के मामले में तेजस नेटवर्क्स ने अपने निवेशकों को निराश नहीं किया है। इस शेयर की चाल इतनी तेज रही है कि केवल सात महीनों में ही निवेशकों का पैसा दोगुने से भी अधिक हो चुका है। चालू वर्ष में 27 जनवरी 2026 को इस शेयर की कीमत ₹294.10 थी। वहां से लगातार चढ़ते हुए इस स्टॉक ने ₹600 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है।
टीसीएस से मिला बड़ा ऑर्डर बना तेजी की वजह
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस शेयर में आई हालिया तेजी के पीछे एक बड़ा कारण कंपनी को मिला एक विशाल व्यावसायिक ऑर्डर है। तेजस नेटवर्क्स को हाल ही में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से ₹1,537 करोड़ का एक बड़ा वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है। टीसीएस से मिले इस भारी-भरकम ऑर्डर ने न केवल कंपनी की आय की संभावनाओं को मजबूत किया है, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी कई गुना बढ़ा दिया है।
टाटा ग्रुप का भरोसा और टेलिकॉम सेक्टर में मजबूत पकड़
तेजस नेटवर्क्स मुख्य रूप से टेलिकॉम और नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स डिजाइन करने और बनाने का काम करती है। टाटा ग्रुप का हिस्सा बनने के बाद से ही कंपनी के कामकाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखा गया है। 5जी इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक नेटवर्किंग उपकरणों की बढ़ती मांग के बीच कंपनी का ऑर्डर बुक काफी मजबूत दिख रहा है।
दलाल स्ट्रीट पर बनी रही बढ़त
शुक्रवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत से ही तेजस नेटवर्क्स के स्टॉक में खरीदारी का भारी माहौल बना रहा। जैसे ही दिन का कारोबार आगे बढ़ा, खरीदारों की दिलचस्पी और गहरी होती गई, जिसके चलते शेयर 8 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ दिन के उच्चतम स्तर के करीब बंद होने में कामयाब रहा।

फर्जी IAS बनकर 90 लाख ठगने वाली तृप्ति गिरफ्तार
मध्य प्रदेश में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ 30 वर्षीय तृप्ति राजपूत ने खुद को फर्जी आईएएस अधिकारी बताकर कई लोगों से 90 लाख रुपये से अधिक की ठगी की। विधानसभा परिसर में बनाई गई एक रील ने उसके इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया और उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
मध्य प्रदेश में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ 30 वर्षीय तृप्ति राजपूत ने खुद को फर्जी आईएएस अधिकारी बताकर कई लोगों से 90 लाख रुपये से अधिक की ठगी की। विधानसभा परिसर में बनाई गई एक रील ने उसके इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया और उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
जालसाजी का अनोखा जाल
मध्य प्रदेश में ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। तीस वर्षीय तृप्ति राजपूत ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर प्रशासनिक महकमे से लेकर आम जनता तक को अपने रसूख का झांसा दिया। उसने नौकरी लगवाने और अन्य बड़े कामों के नाम पर अलग-अलग लोगों से करीब 90 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम ठग ली। उसका यह झूठ इस कदर पुख्ता था कि उसके पति ने भी यही सच माना था कि उसने शादी के समय भी खुद को आईएएस अधिकारी ही बताया था।
सोशल मीडिया की चमक पड़ी भारी
दिखावे और रील्स का शौक कई बार बड़े-बड़े अपराधियों को ले डूबता है और इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। तृप्ति ने दो अन्य युवतियों के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर के अंदर एक व्लॉग या रील बनाई थी। इस वीडियो में वह यह कहती हुई नजर आई कि वे विधानसभा आई हैं और कोई कह नहीं सकता कि वे आईएएस नहीं हैं। यह रील सोशल मीडिया पर वायरल हुई और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की नजरों में आ गई, जिसके बाद उसकी पोल खुलने का रास्ता साफ हो गया।
गिरफ्तारी और पुलिस शिकंजा
विधानसभा में बनाई गई उस लापरवाही भरी रील ने आखिरकार तृप्ति के र रचे गए झूठ के महल को ढाह दिया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई और गहन जांच के दौरान उसके फर्जी आईएएस होने का पर्दाफाश हो गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तृप्ति राजपूत को गिरफ्तार कर लिया और उसके द्वारा की गई करोड़ों की ठगी तथा फर्जीवाड़े के अन्य नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
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