
शादी से पहले आकांक्षा चमोला ने गौरव खन्ना को बताई थी अपनी बायसेक्शुअल होने की बात
ऐक्ट्रेस आकांक्षा चमोला ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने शादी से पहले पति गौरव खन्ना को अपने बायसेक्शुअल होने के बारे में बता दिया था। उनके मुताबिक, गौरव ने इसे सहजता से स्वीकार किया क्योंकि उन्हें यह विचार काफी आकर्षक लगा था। हाल ही में दोनों के तलाक की खबरों ने भी सुर्खियां बटोरी हैं।
खबर का सार
ऐक्ट्रेस आकांक्षा चमोला ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने शादी से पहले पति गौरव खन्ना को अपने बायसेक्शुअल होने के बारे में बता दिया था। उनके मुताबिक, गौरव ने इसे सहजता से स्वीकार किया क्योंकि उन्हें यह विचार काफी आकर्षक लगा था। हाल ही में दोनों के तलाक की खबरों ने भी सुर्खियां बटोरी हैं।
आकांक्षा चमोला और गौरव खन्ना का चौंकाने वाला खुलासा
टेलीविजन इंडस्ट्री के चर्चित कपल आकांक्षा चमोला और गौरव खन्ना इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में आकांक्षा ने एक इंटरव्यू में अपनी पर्सनल जिंदगी से जुड़ा एक बड़ा और निजी राज खोला है। उन्होंने बताया कि अभिनेता गौरव खन्ना के साथ शादी के बंधन में बंधने से पहले ही उन्होंने अपनी सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में पूरी ईमानदारी से बता दिया था। आकांक्षा ने स्वीकार किया कि वह बायसेक्शुअल हैं और इस बात को उन्होंने अपने होने वाले पति से छुपाया नहीं था।
पति गौरव खन्ना की चौंकाने वाली प्रतिक्रिया
अपने इस खुलासे के बारे में आगे बात करते हुए आकांक्षा ने बताया कि जब उन्होंने गौरव को अपनी बायसेक्शुअलिटी के बारे में बताया, तो उनका रिएक्शन बेहद सकारात्मक और सहज था। आकांक्षा के अनुसार, उनके पति ने इस सच को पूरी तरह से स्वीकार किया और इसे लेकर कोई असहजता नहीं दिखाई। बल्कि, गौरव को यह बात काफी 'हॉट' यानी आकर्षक लगी थी। आकांक्षा का यह भी मानना है कि आमतौर पर इस तरह के विषयों को लेकर अधिकांश पुरुषों का दृष्टिकोण खुला और सकारात्मक होता है।
तलाक की खबरों के बीच चर्चा में बयान
आकांक्षा और गौरव की जोड़ी को फैंस द्वारा हमेशा से काफी पसंद किया जाता रहा है। हालांकि, हाल ही में इन दोनों के तलाक लेने की खबरों ने सभी को हैरान कर दिया है। ऐसे समय में आकांक्षा का यह बयान सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में तेजी से वायरल हो रहा है। अपने बेबाक अंदाज और खुलकर अपनी बात रखने के लिए पहचानी जाने वाली आकांक्षा का यह बयान एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग इस जोड़े के अतीत और वर्तमान रिश्तों के समीकरणों पर बात कर रहे हैं।

विश्व कप जिताने के बाद बाहर किए जाने पर सूर्यकुमार यादव का बड़ा खुलासा
भारत को टी20 विश्व कप-2026 का खिताब दिलाने के तुरंत बाद टीम से बाहर किए जाने पर सूर्यकुमार यादव ने पहली बार खुलकर बात की है। उन्होंने चयनकर्ताओं के उस फैसले पर हैरानी जताई, जिसमें उन्हें आगे बढ़ने की बात कहकर बाहर का रास्ता दिखाया गया था। यह हैरान करने वाला वाकया क्रिकेट गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
खबर का निचोड़
भारत को टी20 विश्व कप-2026 का खिताब दिलाने के तुरंत बाद टीम से बाहर किए जाने पर सूर्यकुमार यादव ने पहली बार खुलकर बात की है। उन्होंने चयनकर्ताओं के उस फैसले पर हैरानी जताई, जिसमें उन्हें आगे बढ़ने की बात कहकर बाहर का रास्ता दिखाया गया था। यह हैरान करने वाला वाकया क्रिकेट गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
विश्व कप जीत के तुरंत बाद चौंकाने वाला फैसला
भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज और टी20 फॉर्मेट के माहिर खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव इन दिनों एक चौंकाने वाले खुलासे को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में भारत को अपनी कप्तानी या शानदार प्रदर्शन के दम पर टी20 विश्व कप-2026 का चैंपियन बनाने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी को अचानक टीम से बाहर कर दिया गया। इस घटना ने फैंस और खेल प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। किसी के लिए भी यह यकीन करना मुश्किल था कि जिस खिलाड़ी ने देश को विश्व विजेता बनाया, उसे इतनी जल्दी टीम से किनारा कर दिया जाएगा।
चयनकर्ताओं की बातचीत पर सूर्यकुमार की दो टूक
एक इंटरव्यू के दौरान इस विषय पर बात करते हुए सूर्यकुमार यादव ने अपने दिल का दर्द बयां किया। उन्होंने उस पल को याद किया जब उन्हें सिलेक्टर्स का फोन आया था। सूर्यकुमार ने साफ शब्दों में कहा कि वह टीम ऐलान से ठीक दो-तीन दिन पहले तक हैरान थे कि आखिर ऐसा कैसे मुमकिन है। उन्होंने चयनकर्ताओं की उस दलील पर भी सवाल खड़े किए जिसमें 'आगे बढ़ने' (Moving On) की बात कही गई थी। खिलाड़ी का साफ कहना था कि जब टीम ने अभी-अभी देश के लिए विश्व कप जीता हो, तो इस तरह का कदम समझ से परे है।
भविष्य के सफर पर मंडराए सवाल
यह पूरा वाकया भारतीय क्रिकेट के भीतर चल रही चयन समिति की नीतियों और रणनीतियों पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या किसी टूर्नामेंट को जीतने के बाद तुरंत बड़े बदलाव करना टीम के हित में है या यह किसी व्यक्तिगत समीकरण का नतीजा है? सूर्यकुमार यादव जैसे अनुभवी और मैच विनर खिलाड़ी को इस तरह नजरअंदाज किया जाना खेल जगत में बहस का मुद्दा बन गया है। अब फैंस की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चयनकर्ता इस फैसले पर कोई सफाई देते हैं या सूर्यकुमार का यह टी20 सफर यहीं थम जाता है।

सुभाष चंद्रा और रिलायंस आमने-सामने: मीडिया जंग पर घमासान
ज़ी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी की मीडिया कंपनियों पर उनके खिलाफ भ्रामक खबरें प्रसारित करने का गंभीर आरोप लगाया है। जवाब में रिलायंस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी के खिलाफ कभी नहीं किया गया है।
ज़ी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी की मीडिया कंपनियों पर उनके खिलाफ भ्रामक खबरें प्रसारित करने का गंभीर आरोप लगाया है। जवाब में रिलायंस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी के खिलाफ कभी नहीं किया गया है।
मीडिया बाजार में छिड़ा नया घमासान
भारतीय मीडिया जगत में उस वक्त भूचाल आ गया जब दिग्गज व्यवसायी और ज़ी (Zee) के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने उद्योगपति मुकेश अंबानी की मीडिया कंपनियों पर सीधा हमला बोल दिया। चंद्रा का आरोप है कि अंबानी के स्वामित्व वाले मीडिया संस्थान उनके खिलाफ लगातार एक एजेंडे के तहत गलत और भ्रामक खबरें फैला रहे हैं। इस बयान ने कॉर्पोरेट गलियारों में खलबली मचा दी है।
₹22,000 करोड़ के कर्ज पर छिड़ा विवाद
विवाद की मुख्य वजह सुभाष चंद्रा के वित्तीय मामलों से जुड़ी एक रिपोर्ट है। चंद्रा का दावा है कि उनकी कंपनियों को लेकर यह झूठा दावा किया गया कि उनका ₹22,000 करोड़ का भारी-भरकम कर्ज घटकर महज ₹6.5 करोड़ रह गया है। उनका कहना है कि इस तरह की गलत रिपोर्ट्स का मकसद उनकी और उनके ब्रांड की प्रतिष्ठा को बाजार में धूमिल करना है।
रिलायंस का तीखा पलटवार
सु सुभाष चंद्रा के इन तीखे आरोपों के बाद रिलायंस समूह की तरफ से भी तुरंत और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए चंद्रा के सभी दावों का खंडन किया है। रिलायंस की ओर से कहा गया कि उनके मीडिया संस्थानों की साख पेशेवर और स्वतंत्र पत्रकारिता पर आधारित है तथा उनका उपयोग कभी भी किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है।
कॉरपोरेट जगत में चर्चाओं का बाजार गर्म
देश के दो सबसे बड़े मीडिया और व्यावसायिक दिग्गजों के बीच छिड़ी इस तनातनी ने पूरे उद्योग का ध्यान खींच लिया है। एक तरफ जहां सुभाष चंद्रा अपने ऊपर हो रहे हमलों को सुनियोजित साजिश बता रहे हैं, वहीं रिलायंस ने अपनी पारदर्शिता का हवाला दिया है। यह विवाद आने वाले दिनों में भारतीय कॉरपोरेट और मीडिया क्षेत्र में समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

अनाया बांगड़ का बड़ा कदम: क्या महिला क्रिकेट में खुलेगा ट्रांसजेंडर्स का रास्ता?
अनाया बांगड़ ने जेंडर अफर्मेशन सर्जरी के बाद महिला क्रिकेट में खेलने की इच्छा जताई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के कड़े मेडिकल मानकों और हार्मोनल जांच को पूरा करने के बाद उनका यह बयान खेल जगत में नई बहस छेड़ गया है।
अनाया बांगड़ ने जेंडर अफर्मेशन सर्जरी के बाद महिला क्रिकेट में खेलने की इच्छा जताई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के कड़े मेडिकल मानकों और हार्मोनल जांच को पूरा करने के बाद उनका यह बयान खेल जगत में नई बहस छेड़ गया है।
मेडिकल कसौटी पर खरी उतरीं अनाया
ट्रांसजेंडर क्रिकेटर अनाया बांगड़ ने 2027 में महिला वर्ग से पेशेवर क्रिकेट खेलने का दावा ठोक दिया है। इस बड़े फैसले के पीछे उनकी लंबी और पारदर्शी मेडिकल प्रक्रिया रही है। अनाया के मुताबिक, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री, सर्जिकल दस्तावेजों और हार्मोनल स्तर की बारीकी से जांच की है।
टेस्टोस्टेरोन स्तर और नियमों की दीवार
खेल प्राधिकरणों के लिए ट्रांसजेंडर एथलीटों का चयन हमेशा से एक संवेदनशील और जटिल मुद्दा रहा है। निष्पक्ष खेल भावना बनाए रखने के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है कि खिलाड़ी का शारीरिक ढांचा और हार्मोनल प्रोफाइल महिला श्रेणी के अनुकूल हो। अनाया ने साझा किया कि उनकी हालिया मेडिकल जांच में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 0.6 नैनोमोल प्रति लीटर पाया गया है, जो जैविक रूप से महिलाओं के सामान्य स्तर के भीतर आता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जेंडर अफर्मेशन सर्जरी के बाद उनके शरीर में टेस्टीज़ मौजूद नहीं हैं।
क्रिकेट जगत में समावेशन की नई बहस
अनाया बांगड़ का यह कदम अंतरराष्ट्रीय खेल अकादमियों के लिए एक मिसाल बन सकता है। पारंपरिक खेल नियमों में जेंडर आइडेंटिटी को लेकर लगातार बदलाव हो रहे हैं। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और अन्य बोर्ड महिला वर्ग में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक और मेडिकल डेटा के आधार पर खिलाड़ियों को मौका देने की गुंजाइश भी बन रही है। यदि अनाया 2027 में मैदान पर उतरती हैं, तो यह महिला क्रिकेट के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस मामले ने खेल के मैदान पर कौशल, विज्ञान और नियमों के बीच के संतुलन पर एक बार फिर से वैश्विक चर्चा शुरू कर दी है।

नेपाल में जलप्रलय: बाढ़ से 616 मौतें, 2500 लापता और 300 भारतीय संकट में
नेपाल में कुदरत का कहर बरपा है। अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 616 तक पहुंच गया है, जबकि 2,500 से अधिक लोग लापता हैं। इस त्रासदी में 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक भी फंसे हुए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
खबर का निचोड़
नेपाल में कुदरत का कहर बरपा है। अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 616 तक पहुंच गया है, जबकि 2,500 से अधिक लोग लापता हैं। इस त्रासदी में 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक भी फंसे हुए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
तबाही का खौफनाक मंजर
हिमालय की गोद में बसे नेपाल से इस वक्त बेहद डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं। प्रकृति के तांडव ने एक झटके में हंसते-खेलते इलाकों को मलबे और पानी के समंदर में बदल दिया है। नेपाल पुलिस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अचानक आई इस बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई गांव पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं और संपर्क मार्ग कट जाने से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
लापता लोगों की तलाश और संकट में भारतीय
इस भीषण आपदा में करीब 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा बल दिन-रात जुटे हैं। इन लापता लोगों में 300 से अधिक भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो या तो यात्रा पर थे या वहां कामकाज के सिलसिले में मौजूद थे। इतने बड़े पैमाने पर लोगों के गायब होने से उनके परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और वे अपनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं।
तिब्बत में खामोशी और चीन का नियंत्रण
सीमा पार तिब्बत से आ रही खबरें भी डराने वाली हैं, लेकिन वहां स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। चीनी प्रशासन के कड़े नियंत्रण और मीडिया पर पाबंदियों के चलते तिब्बत में हुई मौतों का आधिकारिक आंकड़ा बाहर नहीं आ सका है। सूचना के सीमित होने के कारण वहां के हालात पर एक रहस्य का पर्दा पड़ा हुआ है, जिससे राहत एजेंसियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन और युद्धस्तर पर राहत कार्य
नेपाल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना और पुलिस के विशेष दलों को राहत कार्यों में उतार दिया है। बाढ़ के पानी और मलबे के बीच फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौसम की दुश्वारियों के बावजूद बचाव दल सुदूर इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं ताकि घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता मुहैया कराई जा सके और लापता लोगों का सुराग लगाया जा सके।
Delight News
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