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आपदा में मुनाफाखोरी: नेपाली एयरलाइंस ने बढ़ाए किराए, सांसद भड़की

आपदा में मुनाफाखोरी: नेपाली एयरलाइंस ने बढ़ाए किराए, सांसद भड़की

Delight News
📅 27 Aug2026

नेपाल में भीषण बाढ़ और आपदा के बीच घरेलू एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में बेताबी से बढ़ोतरी करने का मामला सामने आया है। बुद्धा एयर, येती और श्री एयरलाइंस पर संकट के समय लूट का आरोप लगा है। इस संवेदनहीनता पर नेपाली सांसद खुशबू ओली ने कड़ी नाराजगी जताई है।

आपदा में मुनाफाखोरी: नेपाली एयरलाइंस ने बढ़ाए किराए, सांसद भड़की
खबर का निचोड़
नेपाल में भीषण बाढ़ और आपदा के बीच घरेलू एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में बेताबी से बढ़ोतरी करने का मामला सामने आया है। बुद्धा एयर, येती और श्री एयरलाइंस पर संकट के समय लूट का आरोप लगा है। इस संवेदनहीनता पर नेपाली सांसद खुशबू ओली ने कड़ी नाराजगी जताई है।
आपदा और अंधेरगर्दी का खेल
नेपाल इन दिनों कुदरत के कहर से जूझ रहा है। देश के कई हिस्से भीषण बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में हैं। ऐसे समय में जब आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है और लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं, देश की प्रमुख घरेलू एयरलाइंस ने अपनी तिजोरियां भरने का नापाक जरिया ढूंढ लिया है। संकट की इस घड़ी में इंसानियत की मदद करने के बजाय विमानन कंपनियों ने हवाई किराए में भारी उछाल कर दिया है, जिससे आम जनता पर दोहरी मार पड़ रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए सबूत
संकट के समय हुई इस मनमानी के सबूत अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहे हैं। बुद्धा एयर, येती एयरलाइंस और श्री एयरलाइंस के बढ़े हुए किरायों के स्क्रीनशॉट ऑनलाइन तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वायरल तस्वीरों और आंकड़ों ने एयरलाइंस कंपनियों की पोल खोलकर रख दी है। जहाँ एक तरफ सरकार और राहत एजेंसियां लोगों को बचाने में जुटी हैं, वहीं ये कंपनियां आपदा को अपने लिए एक शानदार बिजनेस डील बनाने में व्यस्त हैं।
सांसद खुशबू ओली का तीखा हमला
घरेलू एयरलाइंस की इस संवेदनहीन मुनाफाखोरी से नेपाली संसद में भी उबाल आ गया है। नेपाली सांसद खुशबू ओली ने इस पूरी घटना पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एयरलाइंस कंपनियों की खिंचाई करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि संकट के समय नागरिकों की मदद करने के बजाय किराया बढ़ाना एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि राष्ट्रीय आपदा कभी भी मुनाफा कमाने का कोई अवसर नहीं हो सकती है।
प्रशासनिक कार्रवाई की उठ रही मांग
सांसद के तीखे तेवरों के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक और नियामक कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है। जनता और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि आपातकाल के दौरान इस तरह की मनमानी करने वाली एयरलाइंस के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। लाइसेंस रद्द करने से लेकर भारी जुर्माने तक की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी आपदा के वक्त इंसानी मजबूरियों का सौदा करने की हिम्मत न जुटा सके।
आठवें वेतन आयोग पर बड़ी मांगें: पेंशन और फिटमेंट फैक्टर पर टिकी नजरें

आठवें वेतन आयोग पर बड़ी मांगें: पेंशन और फिटमेंट फैक्टर पर टिकी नजरें

Delight News
📅 27 Aug2026

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें पेंशन बहाली के नियमों में बदलाव से लेकर फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी तक के मुद्दे शामिल हैं। इन बदलावों से करोड़ों कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है।

आठवें वेतन आयोग पर बड़ी मांगें: पेंशन और फिटमेंट फैक्टर पर टिकी नजरें
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें पेंशन बहाली के नियमों में बदलाव से लेकर फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी तक के मुद्दे शामिल हैं। इन बदलावों से करोड़ों कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है।
पेंशन कम्यूटेशन और बहाली के नियमों में बदलाव की मांग
कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांगों में पेंशन कम्यूटेशन की अवधि को कम करना शामिल है। वर्तमान नियमों के तहत कम्यूटेड पेंशन की बहाली 15 साल में होती है, जिसे घटाकर 11 साल करने का प्रस्ताव दिया गया है। यदि इस मांग पर विचार होता है, तो लाखों पेंशनभोगियों को वित्तीय रूप से बड़ा लाभ मिलेगा और उनकी पेंशन तय समय से पहले पूरी बहाल हो सकेगी।
फिटमेंट फैक्टर और सैलरी हाइक पर टिकी निगाहें
वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम कड़ी होता है। कर्मचारी संगठन इस बार फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 करने की जोरदार मांग कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इसे बढ़ाकर 2.1 भी तय करती है, तो भी केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन में एक बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। इससे महंगाई के दौर में कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पुरानी पेंशन योजना और फैमिली यूनिट के दायरे पर चर्चा
चर्चा के केंद्र में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का मुद्दा भी बना हुआ है, जिसे लेकर कर्मचारी लंबे समय से मुखर हैं। इसके साथ ही फैमिली यूनिट के मौजूदा ढांचे में भी बदलाव की मांग उठ रही है। वर्तमान व्यवस्था में फैमिली यूनिट को 35 यूनिट माना जाता है, जिसे बढ़ाकर 5 यूनिट करने का सुझाव दिया गया है ताकि इसमें माता-पिता को भी शामिल किया जा सके।
हितधारकों से विचार-विमर्श और आगे की प्रक्रिया
आयोग इस समय विभिन्न कर्मचारी संगठनों और हितधारकों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है। सभी पक्षों की दलीलों और वित्तीय पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा। इन प्रस्तावों पर सरकार का रुख क्या रहता है, इस पर देश भर के केंद्रीय कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
UKPSC Veterinary Officer Recruitment 2026: 25 पदों पर भर्ती का शानदार मौका

UKPSC Veterinary Officer Recruitment 2026: 25 पदों पर भर्ती का शानदार मौका

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📅 27 Aug2026

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने पशुचिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सरकारी नौकरी पाने का एक बेहतरीन अवसर है।

UKPSC Veterinary Officer Recruitment 2026: 25 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने पशुचिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सरकारी नौकरी पाने का एक बेहतरीन अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
UKPSC की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 25 पदों पर योग्य युवाओं का चयन किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 25 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है। उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के लिए 14 सितंबर 2026 तक का समय है। समय सीमा समाप्त होने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि अंतिम समय में सर्वर की समस्याओं से बचा जा सके।
आयु सीमा और पात्रता के मानदंड
इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 01 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उत्तराखंड सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। आवेदकों के पास संबंधित क्षेत्र में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी अनिवार्य है।
चयन प्रक्रिया और आवेदन का तरीका
अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा और अन्य निर्धारित चरणों के आधार पर किया जाएगा। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को UKPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा। वहां विज्ञापित पद (विज्ञापन संख्या: A-2/DR(VO)/S-1/2026) के लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। आवेदन पत्र भरते समय सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक विवरण सावधानीपूर्वक दर्ज करें। निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।
लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य: दुर्लभ स्म्यू बत्तख और बंगाल फ्लोरिकन की उपस्थिति

लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य: दुर्लभ स्म्यू बत्तख और बंगाल फ्लोरिकन की उपस्थिति

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📅 27 Aug2026

असम के लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य में 7वीं काजीरंगा जलपक्षी गणना के दौरान पहली बार दुर्लभ प्रवासी स्म्यू बत्तख (मर्गेलस एल्बेलस) दर्ज की गई। इसके साथ ही, यहाँ गंभीर रूप से संकटग्रस्त बंगाल फ्लोरिकन के देखे जाने से इस संरक्षित क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व और जैव विविधता में सकारात्मक सुधार की पुष्टि हुई है।

शीर्षक (Title): लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य: दुर्लभ स्म्यू बत्तख और बंगाल फ्लोरिकन की उपस्थिति
सारांश (Summary): असम के लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य में 7वीं काजीरंगा जलपक्षी गणना के दौरान पहली बार दुर्लभ प्रवासी स्म्यू बत्तख (मर्गेलस एल्बेलस) दर्ज की गई। इसके साथ ही, यहाँ गंभीर रूप से संकटग्रस्त बंगाल फ्लोरिकन के देखे जाने से इस संरक्षित क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व और जैव विविधता में सकारात्मक सुधार की पुष्टि हुई है।
भौगोलिक स्थिति और अवस्थिति
लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य भारतीय राज्य असम के नागाओं जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील है और काजीरंगा-ओरंग परिदृश्य (Kaziranga-Orang Landscape) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। यह अभ्यारण्य बाढ़ के मैदानों, घास के मैदानों और आद्रभूमि का एक अनूठा मिश्रण है, जो विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों और प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श प्राकृतिक आवास प्रदान करता है।
जैव विविधता और प्रमुख प्रजातियाँ
यह अभ्यारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। हाल ही में यहाँ जलपक्षी गणना के दौरान दुर्लभ प्रवासी पक्षी 'स्म्यू' (Smew) की पहली बार उपस्थिति दर्ज की गई है, जो यूरेशियाई क्षेत्र से प्रवास कर यहाँ पहुँचते हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र वैश्विक रूप से संकटग्रस्त 'बंगाल फ्लोरिकन' (Bengal Florican) का भी आश्रय स्थल है, जो इसकी उच्च पारिस्थितिकीय गुणवत्ता को रेखांकित करता है। यहाँ एक समय में एकइन्हीं घास के मैदानों में गैंडों का भी प्रमुख वास हुआ करता था।
संरक्षण और रणनीतिक महत्व
लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य को पुनर्जीवित करने और इसकी खोई हुई जैव विविधता को वापस लाने के लिए वन विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी के बाढ़ के मैदानों का यह पारिस्थितिकी तंत्र एशियाई हाथियों, जलपक्षियों और कई स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ दुर्लभ प्रजातियों का आगमन इस बात का प्रमाण है कि इस संरक्षित क्षेत्र में संरक्षण रणनीतियाँ सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
ई-श्रम पोर्टल के पाँच वर्ष: असंगठित श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा समावेशन

ई-श्रम पोर्टल के पाँच वर्ष: असंगठित श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा समावेशन

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📅 27 Aug2026

अगस्त 2026 में ई-श्रम पोर्टल ने अपनी स्थापना के पाँच वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह पोर्टल भारत के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने, उन्हें एक विशिष्ट पहचान देने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके तक पहुँचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

शीर्षक: ई-श्रम पोर्टल के पाँच वर्ष: असंगठित श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा समावेशन
सारांश:
अगस्त 2026 में ई-श्रम पोर्टल ने अपनी स्थापना के पाँच वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह पोर्टल भारत के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने, उन्हें एक विशिष्ट पहचान देने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके तक पहुँचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
विस्तृत विश्लेषण:
पोर्टल की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य
श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा विकसित ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत अगस्त 2021 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के करोड़ों असंगठित कामगारों—जैसे निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगारों, कृषि श्रमिकों और प्रवासियों—का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार करना है। इसके माध्यम से सरकार का लक्ष्य असंगठित अर्थव्यवस्था से जुड़े श्रमबल को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाना और आपातकालीन स्थितियों में उन्हें लक्षित वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
प्रमुख विशेषताएँ एवं यूएएन कार्ड
इस पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले प्रत्येक कामगार को एक बारह अंकों का विशिष्ट यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) युक्त ई-श्रम कार्ड जारी किया जाता है। यह कार्ड पोर्टेबल होता है, जिसका अर्थ है कि श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में इसका लाभ उठा सकते हैं। इसके साथ ही, इस प्लेटफ़ॉर्म को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी अन्य प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहलों के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे पंजीकृत श्रमिकों को दुर्घटना बीमा का स्वतः लाभ मिलता है।
सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की दिशा
पाँच वर्षों के सफर में इस पोर्टल ने करोड़ों कामगारों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है। इसके डेटाबेस का उपयोग विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लक्षित लाभार्थियों की पहचान के लिए किया जा रहा है। यह डिजिटल पहल भारत में समावेशी विकास, डेटा-संचालित नीति निर्माण और असंगठित क्षेत्र के सशक्तीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

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