
सेब का पोंछा अब सस्ता: ऐप्पल ने लॉन्च किया नया पॉलिशिंग क्लॉथ
टेक दिग्गज ऐप्पल ने अपने मशहूर पॉलिशिंग क्लॉथ का नया और सस्ता संस्करण भारतीय बाजार में उतार दिया है। 1,780 रुपये की मूल कीमत के मुकाबले अब यह क्लॉथ 1,098 रुपये में उपलब्ध होगा। मुलायम और नॉन-एब्रेसिव मटीरियल से बना यह कपड़ा ऐप्पल डिवाइस की स्क्रीन सुरक्षित साफ करता है।
खबर का निचोड़:
टेक दिग्गज ऐप्पल ने अपने मशहूर पॉलिशिंग क्लॉथ का नया और सस्ता संस्करण भारतीय बाजार में उतार दिया है। 1,780 रुपये की मूल कीमत के मुकाबले अब यह क्लॉथ 1,098 रुपये में उपलब्ध होगा। मुलायम और नॉन-एब्रेसिव मटीरियल से बना यह कपड़ा ऐप्पल डिवाइस की स्क्रीन सुरक्षित साफ करता है।
1,780 रुपये से घटकर 1,098 रुपये हुई कीमत
ऐप्पल ने अपने एक्सेसरीज पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए अपने प्रीमियम पॉलिशिंग क्लॉथ की नई पीढ़ी बाजार में पेश कर दी है। सबसे बड़ा आकर्षण इसकी नई कीमत है। कंपनी ने भारतीय ग्राहकों के लिए इसे ₹1,098 में लॉन्च किया है, जो इसके पिछले संस्करण की ₹1,780 की कीमत के मुकाबले काफी कम है। प्रीमियम सेगमेंट में यह कटौती यूजर्स के लिए एक सुखद सरप्राइज बनकर आई है।
डिवाइस सेफ्टी के साथ स्क्रीन की बेजोड़ सफाई
ऐप्पल का यह पॉलिशिंग क्लॉथ अपने खास मटीरियल के लिए जाना जाता है। यह बेहद सॉफ्ट और नॉन-एब्रेसिव फैब्रिक से तैयार किया गया है, जो किसी भी ऐप्पल डिस्प्ले को बिना खरोंच पहुंचाए सुरक्षित रूप से साफ करता है। आईफोन, आईपैड और मैकबुक के अलावा, यह कपड़ा नैनो-टेक्सचर ग्लास वाले महंगे डिस्प्ले (जैसे प्रो डिस्प्ले एक्सडीआर) की सफाई के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है।
क्या बदला है नए क्लॉथ में?
कीमत में भारी कटौती के बाद ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए वर्जन में कोई तकनीकी या मटीरियल बदलाव हुआ है। हालांकि, ऐप्पल की ओर से इस कपड़े की बुनाई या मटीरियल में किसी बड़े बदलाव का खुलासा नहीं किया गया है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी ने उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता किए बिना इसकी मैन्युफैक्चरिंग या सप्लाई चेन लागत को कम करके यह राहत ग्राहकों तक पहुंचाई है।
प्रीमियम एक्सेसरी सेगमेंट में ऐप्पल की रणनीति
जब ऐप्पल ने पहली बार अपना पॉलिशिंग क्लॉथ लॉन्च किया था, तब इसकी कीमत को लेकर इंटरनेट पर काफी चर्चा और मीम्स देखने को मिले थे। इसके बावजूद, ऐप्पल यूजर्स के बीच इसकी मांग हमेशा बनी रही। अब कीमत को ₹1,098 करके कंपनी ने इसे आम यूजर्स की पहुंच के अधिक करीब ला दिया है। यह कदम ब्रांड के प्रति वफादार ग्राहकों को ओरिजिनल एक्सेसरीज खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
भारतीय बाजार में उपलब्धता
यह नया पॉलिशिंग क्लॉथ अब ऐप्पल के आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर और प्रमुख अधिकृत रीसेलर्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। जो यूजर्स अपने महंगे आईफोन या मैकबुक की स्क्रीन पर सामान्य कपड़ों के इस्तेमाल से बचते हैं, उनके लिए यह नई कीमत एक बेहतरीन मौका लेकर आई है।

नेपाल की आपदा से थमी व्यापार की रफ्तार, भारतीय बाजार पर बढ़ा संकट
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा ने सिर्फ स्थानीय जनजीवन को ही अस्त-व्यस्त नहीं किया है, बल्कि भारतीय कारोबार की रीढ़ पर भी प्रहार किया है। सड़कें और पुल ध्वस्त होने से दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो गई है। इससे परिवहन लागत बढ़ने, सीमावर्ती बाजारों में किल्लत और अरबों रुपये के हाइड्रोपावर Environment के अटकने से भारतीय कारोबारी बेहद चिंतित हैं।
संक्षिप्त सार:
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा ने सिर्फ स्थानीय जनजीवन को ही अस्त-व्यस्त नहीं किया है, बल्कि भारतीय कारोबार की रीढ़ पर भी प्रहार किया है। सड़कें और पुल ध्वस्त होने से दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो गई है। इससे परिवहन लागत बढ़ने, सीमावर्ती बाजारों में किल्लत और अरबों रुपये के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के अटकने से भारतीय कारोबारी बेहद चिंतित हैं।
व्यापारिक संबंधों पर नेपाल की आपदा का सीधा असर
नेपाल में हुई भारी तबाही का असर अब भारतीय मंडियों और औद्योगिक गलियारों तक साफ महसूस किया जाने लगा है। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ता भी रहा है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऐसे में जब नेपाल के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है, तो उसका सीधा झटका भारतीय अर्थव्यवस्था और सीमावर्ती व्यापारियों को झेलना पड़ता है।
सप्लाई चेन ठप, ट्रांसपोर्ट लागत में भारी उछाल
बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल जाने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग और जोड़ने वाले पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। रक्सौल, जोगबनी और सुनाउली जैसे प्रमुख व्यापारिक बॉर्डर पॉइंट्स पर सैकड़ों मालवाहक ट्रक फंसे हुए हैं। सामान समय पर न पहुँचने के कारण दैनिक उपभोग की वस्तुओं, खाद्यान्न, कपड़ों और दवाइयों की डिलीवरी अटक गई है। माल को लंबे और वैकल्पिक रास्तों से भेजने की मजबूरी के कारण ट्रांसपोर्टेशन लागत काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर व्यापार के मुनाफे पर पड़ रहा है।
सीमावर्ती बाजारों में स्टॉक का संकट और बढ़ी महंगाई
उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती बाजारों में इस तबाही का सबसे तेज असर देखने को मिल रहा है। भारतीय व्यापारी नेपाल के रास्ते होने वाले क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड पर बहुत हद तक निर्भर हैं। सप्लाई रुकने से गोदामों में सामान का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में जरूरी सामानों की भारी किल्लत हो सकती है। इससे न केवल वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों का कैश फ्लो भी पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
हाइड्रोपावर सेक्टर और भारी निवेश पर लटकी तलवार
नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र में भारतीय कंपनियों ने अरबों रुपये का निवेश किया है। इस आपदा में कई निर्माणाधीन और संचालित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। बुनियादी ढांचे के क्षतिग्रस्त होने से बिजली उत्पादन और उसके आयात-निर्यात का गणित पूरी तरह गड़बड़ा गया है। भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक झटका है, क्योंकि प्रोजेक्ट्स में हो रही देरी से लागत लगातार बढ़ रही है।

कंगना रनौत का रामदेव पर तीखा हमला, पूछा- बेडरूम में चमगादड़ थे?
अभिनेत्री कंगना रनौत ने योगगुरु स्वामी रामदेव के 'जवानी' वाले बयान पर करारा पलटवार किया है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कंगना ने रामदेव के व्यवसायिक रुख और निजी टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज़ जताते हुए उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। कंगना का यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।
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अभिनेत्री कंगना रनौत ने योगगुरु स्वामी रामदेव के 'जवानी' वाले बयान पर करारा पलटवार किया है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कंगना ने रामदेव के व्यवसायिक रुख और निजी टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज़ जताते हुए उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। कंगना का यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।
बयानों की जंग में कंगना का तंज
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत अपने बेबाक अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं और इस बार उनके निशाने पर योगगुरु स्वामी रामदेव आ गए हैं। 'डीडी न्यूज़' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कंगना ने रामदेव द्वारा दिए गए पुराने बयानों पर बेहद धारदार टिप्पणी की। कंगना ने रामदेव के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें उन्होंने अभिनेत्री के अतीत या जवानी को लेकर टिप्पणी की थी।
कंगना ने तीखे लहज़े में कहा, "वे मुझसे कहते हैं कि क्या मैंने उनका बचपन और जवानी देखी है? क्या रामदेव मेरे कमरे में चमगादड़ बनकर लटके हुए थे? उन्होंने क्या देखा था?" अभिनेत्री के इस बयान ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है और दोनों हस्तियों के बीच जुबानी जंग को एक नया मोड़ दे दिया है।
योगगुरु से बिज़नेसमैन बनने पर सवाल
कंगना यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने स्वामी रामदेव के योग और आयुर्वेद के सफर से लेकर उनके व्यापक व्यापारिक साम्राज्य पर भी खुलकर बात की। उन्होंने पतंजलि के बढ़ते बिज़नेस मॉडल पर तंज कसते हुए कहा कि जो कभी सिर्फ योग और स्वास्थ्य का संदेश देते थे, वे अब हर तरह के व्यावसायिक उत्पादों में उतर चुके हैं।
अभिनेत्री ने कहा, "आयुर्वेद और योग से आगे बढ़कर अब वे बनियान और अंडरगार्मेंट्स बना रहे हैं। एक तरह से देखा जाए तो वे पूरी तरह से एक बिज़नेसमैन बन चुके हैं।" कंगना का मानना है कि योगगुरु का ध्यान अब योग साधना से हटकर पूरी तरह से मुनाफे वाले व्यापार पर केंद्रित हो गया है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
कंगना रनौत के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। जहाँ कंगना के प्रशंसक उनके इस निडर और स्पष्टवादी रवैये की सराहना कर रहे हैं, वहीं स्वामी रामदेव के समर्थक अभिनेत्री के इस बयान पर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
कंगना के बयानों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे सार्वजनिक मंचों पर किसी भी बड़े चेहरे का सामना करने से पीछे नहीं हटतीं। फ़िलहाल इस पूरे विवाद पर स्वामी रामदेव या पतंजलि संस्थान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने देश के राजनीतिक और मनोरंजन गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल, लगातार 4 दिन ठप रह सकती हैं सेवाएं
संयुक्त मंच 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स' (UFBU) ने 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान किया है। हफ्ते में 5-दिन कार्यदिवस और पेंशन में सुधार जैसी प्रमुख मांगों को लेकर यह कदम उठाया गया है। हड़ताल और छुट्टियों के कारण लगातार चार दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने की आशंका है।
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संयुक्त मंच 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स' (UFBU) ने 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान किया है। हफ्ते में 5-दिन कार्यदिवस और पेंशन में सुधार जैसी प्रमुख मांगों को लेकर यह कदम उठाया गया है। हड़ताल और छुट्टियों के कारण लगातार चार दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने की आशंका है।
सितंबर में बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा संकट
अगर सितंबर महीने में बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम पेंडिंग है, तो उसे तुरंत निपटा लें। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने आगामी 11 सितंबर को पूरे देश में बैंक हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल के कारण आम जनता को कैश निकालने, चेक क्लियरिंग और ब्रांच से जुड़े अन्य कामों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
चार दिन लगातार बंद रह सकते हैं बैंक
सितंबर का यह हफ्ता ग्राहकों की जेब और समय दोनों पर भारी पड़ने वाला है। 11 सितंबर को शुक्रवार के दिन हड़ताल तय की गई है। इसके तुरंत बाद 12 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश है। वहीं 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर बैंकों में छुट्टी रहेगी। इस तरह शुक्रवार से सोमवार तक लगातार चार दिनों तक बैंकों के दरवाजे आम जनता के लिए बंद रह सकते हैं।
क्यों हड़ताल पर जा रहे हैं बैंक कर्मचारी
बैंक कर्मचारियों की यह नाराजगी कई पुरानी और लंबित मांगों को लेकर है। यूनियन का मुख्य जोर हफ्ते में केवल 5 दिन काम (5-Day Banking) की व्यवस्था लागू करने पर है। इसके अलावा, पेंशन से जुड़े नियमों में सुधार, पेंशन अपडेशन और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) में व्याप्त असमानता को दूर करना इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य एजेंडा है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्राहकों पर पड़ेगा सीधा असर
लगातार चार दिनों तक बैंकिंग सेवाएं बाधित रहने से आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापारियों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि ऑनलाइन यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं चालू रहने की संभावना है, लेकिन एटीएम में कैश की किल्लत पैदा हो सकती है। चेक क्लियरिंग का काम पूरी तरह ठप रहेगा, जिससे बड़े व्यावसायिक लेन-देन अटक सकते हैं।
समय रहते पूरा करें जरूरी काम
हड़ताल और छुट्टियों के इस लंबे सिलसिले को देखते हुए वित्तीय सलाह यही है कि सभी जरूरी दस्तावेज, ड्राफ्ट और कैश से जुड़े काम 11 सितंबर से पहले ही पूरे कर लें। अंतिम समय की आपाधापी से बचने के लिए अभी से योजना बनाना ही समझदारी होगी।

आपदा में मुनाफाखोरी: नेपाली एयरलाइंस ने बढ़ाए किराए, सांसद भड़की
नेपाल में भीषण बाढ़ और आपदा के बीच घरेलू एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में बेताबी से बढ़ोतरी करने का मामला सामने आया है। बुद्धा एयर, येती और श्री एयरलाइंस पर संकट के समय लूट का आरोप लगा है। इस संवेदनहीनता पर नेपाली सांसद खुशबू ओली ने कड़ी नाराजगी जताई है।
खबर का निचोड़
नेपाल में भीषण बाढ़ और आपदा के बीच घरेलू एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में बेताबी से बढ़ोतरी करने का मामला सामने आया है। बुद्धा एयर, येती और श्री एयरलाइंस पर संकट के समय लूट का आरोप लगा है। इस संवेदनहीनता पर नेपाली सांसद खुशबू ओली ने कड़ी नाराजगी जताई है।
आपदा और अंधेरगर्दी का खेल
नेपाल इन दिनों कुदरत के कहर से जूझ रहा है। देश के कई हिस्से भीषण बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में हैं। ऐसे समय में जब आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है और लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं, देश की प्रमुख घरेलू एयरलाइंस ने अपनी तिजोरियां भरने का नापाक जरिया ढूंढ लिया है। संकट की इस घड़ी में इंसानियत की मदद करने के बजाय विमानन कंपनियों ने हवाई किराए में भारी उछाल कर दिया है, जिससे आम जनता पर दोहरी मार पड़ रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए सबूत
संकट के समय हुई इस मनमानी के सबूत अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहे हैं। बुद्धा एयर, येती एयरलाइंस और श्री एयरलाइंस के बढ़े हुए किरायों के स्क्रीनशॉट ऑनलाइन तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वायरल तस्वीरों और आंकड़ों ने एयरलाइंस कंपनियों की पोल खोलकर रख दी है। जहाँ एक तरफ सरकार और राहत एजेंसियां लोगों को बचाने में जुटी हैं, वहीं ये कंपनियां आपदा को अपने लिए एक शानदार बिजनेस डील बनाने में व्यस्त हैं।
सांसद खुशबू ओली का तीखा हमला
घरेलू एयरलाइंस की इस संवेदनहीन मुनाफाखोरी से नेपाली संसद में भी उबाल आ गया है। नेपाली सांसद खुशबू ओली ने इस पूरी घटना पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एयरलाइंस कंपनियों की खिंचाई करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि संकट के समय नागरिकों की मदद करने के बजाय किराया बढ़ाना एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि राष्ट्रीय आपदा कभी भी मुनाफा कमाने का कोई अवसर नहीं हो सकती है।
प्रशासनिक कार्रवाई की उठ रही मांग
सांसद के तीखे तेवरों के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक और नियामक कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है। जनता और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि आपातकाल के दौरान इस तरह की मनमानी करने वाली एयरलाइंस के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। लाइसेंस रद्द करने से लेकर भारी जुर्माने तक की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी आपदा के वक्त इंसानी मजबूरियों का सौदा करने की हिम्मत न जुटा सके।
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