
रेजेनेरेटिव एग्रीकल्चर: भारतीय कृषि में दीर्घकालिक स्थिरता का नया मार्ग
गिरती मृदा स्वास्थ्य, जल संकट और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारतीय कृषि नीति में रेजेनेरेटिव एग्रीकल्चर यानी पुनर्योजी कृषि को प्राथमिकता मिल रही है। यह पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय कर मृदा की उर्वरता को बहाल करने और कृषि उत्पादकता को टिकाऊ बनाने पर केंद्रित है।
सारांश: गिरती मृदा स्वास्थ्य, जल संकट और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारतीय कृषि नीति में रेजेनेरेटिव एग्रीकल्चर यानी पुनर्योजी कृषि को प्राथमिकता मिल रही है। यह पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय कर मृदा की उर्वरता को बहाल करने और कृषि उत्पादकता को टिकाऊ बनाने पर केंद्रित है।
परिचय एवं अवधारणा
रेजेनेरेटिव एग्रीकल्चर कृषि की एक ऐसी प्रणाली है जो भूमि की प्राकृतिक क्षमता को पुनर्जीवित करने पर जोर देती है। इसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग को कम किया जाता है। इसके तहत मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने, जैव विविधता को संरक्षित करने और जल धारण क्षमता में सुधार लाने के उपाय किए जाते हैं। यह अवधारणा पारंपरिक कृषि पद्धतियों और पारिस्थितिक संतुलन के बीच की खाई को पाटती है।
मुख्य विशेषताएँ एवं तकनीकें
इस प्रणाली में न्यूनतम जुताई (No-till farming) को अपनाया जाता है ताकि मिट्टी की संरचना सुरक्षित रहे। खेतों को वर्ष भर ढंके रखने के लिए फसल चक्र (Crop rotation) और आवरण फसलों (Cover crops) का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसमें जैविक खाद, फसल अवशेषों के प्रबंधन और पशुधन को एकीकृत करके मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को सक्रिय किया जाता है, जिससे रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम होती है।
आवश्यकता एवं प्रासंगिकता
भारत में लगातार रासायनिक खेती के कारण भूमि की उर्वरता घट रही है और भूजल स्तर नीचे जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसूनी अनिश्चितता भी बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में, रेजेनेरेटिव एग्रीकल्चर मृदा स्वास्थ्य को सुधारने, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और किसानों की लागत को घटाकर उनकी आय बढ़ाने में प्रभावी सिद्ध हो रही है। यह राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु-अनुकूल कृषि के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
चुनौतियाँ एवं भावी दृष्टिकोण
किसानों को पारंपरिक खेती से इस नई प्रणाली की ओर मोड़ने में जागरूकता की कमी और शुरुआती दौर में उत्पादन घटने का जोखिम मुख्य बाधाएँ हैं। इसके अलावा, कार्बन फाइनेंसिंग और प्रमाणन प्रक्रिया का जटिल होना भी किसानों को हतोत्साहित करता है। हालांकि, सरकारी स्तर पर प्राकृतिक और पुनर्योजी खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाएं इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं।

पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण: भारत की सौर ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में रणनीतिक कदम
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा 2030 तक 30 गीगावॉट पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण क्षमता स्थापित करने की योजना बनाई गई है। यह पहल आयात पर निर्भरता को कम करने, घरेलू सौर मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति प्रदान करने के लिए है।
पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण: भारत की सौर ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में रणनीतिक कदम
सारांश (Summary):
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा 2030 तक 30 गीगावॉट पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण क्षमता स्थापित करने की योजना बनाई गई है। यह पहल आयात पर निर्भरता को कम करने, घरेलू सौर मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति प्रदान करने के लिए है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
पॉलीसिलिकॉन का रणनीतिक महत्व
पॉलीसिलिकॉन फोटोवोल्टिक (PV) सोलर सेल और वेफर्स के निर्माण के लिए प्राथमिक कच्चा माल है। वर्तमान में वैश्विक पॉलीसिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला का एक बड़ा हिस्सा चीन के नियंत्रण में है, जिससे भारतीय सौर उद्योग कच्चे माल की कीमतों के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक बाधाओं के प्रति संवेदनशील हो जाता है। इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है।
विनिर्माण क्षमता और लक्ष्य
सरकार की इस नई सब्सिडी योजना का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक देश में 30 गीगावॉट की घरेलू पॉलीसिलिकॉन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। यह नीति देश को केवल सोलर मॉड्यूल असेंबली तक सीमित रखने के बजाय संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (इन्गोट, वेफर, सेल और मॉड्यूल) में एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
सरकारी सहायता और नीतिगत प्रावधान
इस योजना के तहत घरेलू विनिर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन, पूंजीगत सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्रदान किए जाने की संभावना है। उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) और अन्य समर्पित नीतियों के माध्यम से निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित किया जा रहा है, जिससे उच्च तकनीक वाले इस क्षेत्र में देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सके।
संभावित चुनौतियाँ और आगे की राह
पॉलीसिलिकॉन के उत्पादन में अत्यधिक ऊर्जा की खपत होती है और इसके निर्माण की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल व पूंजी-प्रधान होती है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण संबंधी मानक और उच्च प्रारंभिक लागत घरेलू निवेशकों के लिए बड़ी बाधाएँ हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, यह पहल भारत के महत्वाकांक्षी हरित ऊर्जा लक्ष्यों और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

5 सितंबर को दिल्ली में युवाओं का हल्ला बोल, CJP का विरोध मार्च
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने युवाओं से किए वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 5 सितंबर को नई दिल्ली में एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च आयोजित किया जाएगा, जो इंडिया गेट से शुरू होकर पुलिस मुख्यालय तक पहुंचेगा। इसमें देशभर के छात्र-युवा हिस्सा लेंगे।
खबर का निचोड़
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने युवाओं से किए वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 5 सितंबर को नई दिल्ली में एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च आयोजित किया जाएगा, जो इंडिया गेट से शुरू होकर पुलिस मुख्यालय तक पहुंचेगा। इसमें देशभर के छात्र-युवा हिस्सा लेंगे।
वादों की अनदेखी पर भड़का आक्रोश
देश के युवाओं के मुद्दों और उनसे किए गए वादों पर सरकार का रुख सवालों के घेरे में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आरोप है कि युवाओं के साथ किए गए बड़े-बड़े वादे अब तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं के सब्र का बांध अब टूट चुका है, और इसी आक्रोश को अपनी आवाज देने के लिए इस विरोध मार्च की रूपरेखा तैयार की गई है।
इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक गूंजेगी आवाज
रणनीति के मुताबिक, 5 सितंबर को आयोजित होने वाला यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन देश की राजधानी में एक बड़ा जमावड़ा बनने जा रहा है। विरोध मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली स्थित पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। CJP ने स्पष्ट किया है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से अनुशासित और शांतिपूर्ण होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार को युवाओं की मांगों की तरफ ध्यान केंद्रित कराना है।
देशभर से जुटेगा युवाओं का सैलाब
इस प्रदर्शन को केवल एक पार्टी तक सीमित न रखकर जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी है। देश के कोने-कोने से विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा और जागरूक नागरिक इस मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। आयोजकों का दावा है कि युवाओं की यह एकजुटता सरकार को उनके अधिकारों और वादों के प्रति जवाबदेह बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

कंगना रनौत का तीखा हमला: आलोचकों को दिया करारा जवाब
भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने खिलाफ हो रही व्यक्तिगत टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने अशुतोष राणा, सोनू सूद और राखी सावंत का नाम लेते हुए आलोचकों को आड़े हाथों लिया और कहा कि वह असफल लोगों की सलाह नहीं लेंगी। कंगना ने उन्हें खुद जैसा बनने की चुनौती दी।
खबर का निचोड़
भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने खिलाफ हो रही व्यक्तिगत टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने अशुतोष राणा, सोनू सूद और राखी सावंत का नाम लेते हुए आलोचकों को आड़े हाथों लिया और कहा कि वह असफल लोगों की सलाह नहीं लेंगी। कंगना ने उन्हें खुद जैसा बनने की चुनौती दी।
विवादित बयानों पर भड़कीं कंगना रनौत
बॉलीवुड से राजनीति में कदम रखने वाली भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक और सख्त अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने फिल्म उद्योग के कुछ जाने-माने चेहरों और अपने आलोचकों पर सीधा और तीखा हमला बोला है। अपने खिलाफ की जा रही बयानबाजी और व्यक्तिगत हमलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कंगना ने साफ कर दिया है कि वह ऐसी टिप्पणियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
निजी हमलों पर जाहिर किया कड़ा ऐतराज
कंगना रनौत ने बातचीत के दौरान बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि लोग उनके खिलाफ लगातार अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई उन्हें कुत्ता कह रहा है, तो कोई उनके माता-पिता को गालियां दे रहा है। इतना ही नहीं, कुछ लोग उनके चलने और टांग उठाने जैसी बातों पर भी भद्दे कमेंट्स कर रहे हैं। कंगना ने इन आलोचकों को भूखे-नंगे लोग करार देते हुए कहा कि ऐसी अभद्र भाषा और सोच को अब सहना उनके बस से बाहर है।
असफल लोगों से सलाह न लेने का ऐलान
अपने भाषण में कंगना ने आशुतोष राणा, सोनू सूद और राखी सावंत का जिक्र करते हुए यह स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी जिंदगी या करियर में किसी असफल व्यक्ति की नसीहत की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा हासिल नहीं कर पाए, वे आज उन्हें ज्ञान दे रहे हैं। कंगना ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह कभी भी ऐसे लोगों की राय को तवज्जो नहीं देंगी जो खुद अपनी पहचान बनाने में नाकाम रहे हैं।
आलोचना करने वालों को दी खुली चुनौती
कंगना ने अपने आलोचकों को आईना दिखाते हुए कहा कि टिप्पणी करना और गालियां देना बहुत आसान काम है, लेकिन सफलता हासिल करना उतना ही कठिन। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग उन पर उंगलियां उठा रहे हैं, वे पहले कंगना रनौत बनकर दिखाएं। चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकीं और सांसद बनीं कंगना ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने विरोधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना बखूबी जानती हैं।

7 साल बाद भारत में शी जिनपिंग: BRICS सम्मेलन के बहाने नई दिल्ली पहुंच रहा 400 अधिकारियों का विशाल दल
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। वे अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस ऐतिहासिक दौरे पर उनके साथ लगभग 400 उच्च अधिकारियों का भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचेगा, जो 2019 के मुकाबले दोगुना बड़ा है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। वे अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस ऐतिहासिक दौरे पर उनके साथ लगभग 400 उच्च अधिकारियों का भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचेगा, जो 2019 के मुकाबले दोगुना बड़ा है।
7 साल का लंबा इंतजार और बदला कूटनीतिक माहौल
वर्ष 2019 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है। सीमा पर हुए तनाव के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की यह सीधी मुलाकात कूटनीतिक लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 7 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह यात्रा न केवल BRICS मंच के लिए बल्कि द्विपक्षीय संबंधों की नई दिशा तय करने के लिए भी एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।
400 अधिकारियों का काफिला: बड़ा प्रतिनिधित्व, बड़ी रणनीति
साल 2019 के दौरे में जिनपिंग के साथ 200 से भी कम अधिकारी आए थे। इस बार 400 अधिकारियों के विशाल डेलिगेशन की मौजूदगी यह साफ दर्शाती है कि बीजिंग इस दौरे को लेकर बेहद गंभीर है। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन के विदेश मंत्रालय, व्यापार, सुरक्षा और आर्थिक रणनीतियों से जुड़े शीर्ष नीति-निर्माता शामिल होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि अधिकारियों का इतना बड़ा दल व्यापारिक और कूटनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा की तैयारी का संकेत है।
BRICS शिखर सम्मेलन का केंद्र बिंदु बनी नई दिल्ली
वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच नई दिल्ली में आयोजित हो रहा यह BRICS सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दुनिया भर के देशों की नजरों में है। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में शी जिनपिंग की उपस्थिति से एशिया की दो बड़ी महाशक्तियों के बीच आर्थिक सहयोग, सीमा सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर संवाद का नया रास्ता खुल सकता है।
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