
जीन एडिटिंग तकनीक और उसके आयाम
जीन एडिटिंग एक ऐसी क्रांतिकारी जैव-प्रौद्योगिकी है जो जीवों के डीएनए में सटीक बदलाव करने की अनुमति देती है। क्रिस्पर-कैस9 (CRISPR-Cas9) तकनीक इसमें सबसे प्रमुख है। यह चिकित्सा क्षेत्र में अनुवांशिक रोगों के उपचार में वरदान साबित हो रही है, हालांकि इसके अनियंत्रित प्रयोग से गंभीर नैतिक और जैव-सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी उत्पन्न होती हैं।
सारांश (Summary): जीन एडिटिंग एक ऐसी क्रांतिकारी जैव-प्रौद्योगिकी है जो जीवों के डीएनए में सटीक बदलाव करने की अनुमति देती है। क्रिस्पर-कैस9 (CRISPR-Cas9) तकनीक इसमें सबसे प्रमुख है। यह चिकित्सा क्षेत्र में अनुवांशिक रोगों के उपचार में वरदान साबित हो रही है, हालांकि इसके अनियंत्रित प्रयोग से गंभीर नैतिक और जैव-सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी उत्पन्न होती हैं।
जीन एडिटिंग और क्रिस्पर तकनीक की अवधारणा
जीन एडिटिंग डीएनए अनुक्रमों को जोड़ने, हटाने या बदलने की एक उन्नत वैज्ञानिक विधि है। इसमें कृत्रिम रूप से डिज़ाइन किए गए एंजाइमों का उपयोग किया जाता है जो जीनोम के विशिष्ट स्थलों को लक्षित करते हैं। वर्तमान में क्रिस्पर-कैस9 तकनीक ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता दिलाई है। यह तकनीक एक विशिष्ट गाइड आरएनए (RNA) और कैस9 प्रोटीन के संयोजन पर कार्य करती है, जो सटीक स्थान पर डीएनए को काटकर वांछित आनुवंशिक सुधार करने में सक्षम है।
चिकित्सा और कृषि क्षेत्र में अनुप्रयोग
चिकित्सा विज्ञान में जीन एडिटिंग का उपयोग सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया और वंशानुगत अंधत्व जैसी गंभीर बीमारियों के आनुवांशिक उपचार के लिए किया जा रहा है। इसके माध्यम से कैंसर और एचआईवी जैसी जटिल बीमारियों के खिलाफ इम्यूनोथैरेपी को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में, यह तकनीक जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशील फसलें विकसित करने, कीट प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विनियामक और नैतिक चुनौतियाँ
जीन एडिटिंग के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती 'जर्मलाइन एडिटिंग' से जुड़ी नैतिक दुविधा है, जिससे भावी पीढ़ियों के जीनोम में स्थायी परिवर्तन हो सकते हैं। भ्रूण जीन संपादन के अनियंत्रित उपयोग से "डिज़ाइनर बेबी" जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा मिलने का खतरा है। इसके अतिरिक्त, ऑफ-टारगेट म्यूटेशन यानी गलत डीएनए अनुक्रमों में बदलाव की संभावना और जैव-सुरक्षा के मानकों का कड़ाई से पालन न होना वैश्विक चिंता के मुख्य विषय हैं।
भारत में विनियामक ढांचा और भावी दृष्टिकोण
भारत में जीन एडिटिंग और आनुवांशिक अनुसंधान के नियमन के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के अंतर्गत आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) और राष्ट्रीय दिशा-निर्देश कार्यरत हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी मानव जनित जीन संपादन पर कड़े नैतिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि अनुसंधान की स्वतंत्रता और जैव-नैतिकता के बीच संतुलन स्थापित करके ही इस तकनीक के दूरगामी सकारात्मक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

करोल बाग में ₹2 करोड़ के जेवर चोरी, शीशा तोड़ बैकपैक उड़ा ले गए बदमाश
राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके करोल बाग में एक ज्वेलरी कारोबारी की कार का शीशा तोड़कर बेखौफ बदमाशों ने ₹2 करोड़ से अधिक मूल्य के सोने और हीरे के आभूषणों से भरे तीन बैग चोरी कर लिए। यह घटना तब हुई जब कारोबारी पास के एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच और CCTV फुटेज की पड़ताल में जुटी हुई है।
खबर का निचोड़
राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके करोल बाग में एक ज्वेलरी कारोबारी की कार का शीशा तोड़कर बेखौफ बदमाशों ने ₹2 करोड़ से अधिक मूल्य के सोने और हीरे के आभूषणों से भरे तीन बैग चोरी कर लिए। यह घटना तब हुई जब कारोबारी पास के एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच और CCTV फुटेज की पड़ताल में जुटी हुई है।
दिल्ली के करोल बाग में सनसनीखेज वारदात
राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त और मशहूर व्यापारिक केंद्रों में से एक करोल बाग इलाके में अपराधियों के बुलंद हौसलों का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक ज्वेलरी व्यापारी को निशाना बनाते हुए अज्ञात बदमाशों ने उनकी कार का शीशा तोड़ा और अंदर रखे लगभग 2 करोड़ रुपये के सोने तथा हीरे के आभूषण पार कर दिए। इस वारदात ने इलाके के व्यापारियों में हड़कंप मचा दिया है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेस्टोरेंट के बाहर खड़ी कार को बनाया निशाना
प्राप्त जानकारी के मुताबिक ज्वेलरी कारोबारी कन्हैया लाल अपने काम के सिलसिले में करोल बाग पहुंचे थे। अपनी कार को सड़क किनारे पार्क करने के बाद वे भोजन करने के लिए पास ही स्थित एक रेस्टोरेंट में चले गए। कार के अंदर तीन बैकपैक और एक सूटकेस रखा हुआ था, जिनमें करोड़ों रुपये मूल्य के कीमती आभूषण, एक लैपटॉप और कुछ आवश्यक कागजात मौजूद थे। कारोबारी जब तक रेस्टोरेंट से वापस लौटे, तब तक चोर अपना काम तमाम कर चुके थे।
शीशा तोड़कर ले उड़े सोने-हीरे से भरे बैग
शातिर चोरों ने बेहद सफाई से वारदात को अंजाम दिया। उन्होंने कार का शीशा तोड़कर अंदर रखे गहनों से भरे तीनों बैकपैक गायब कर दिए। जब कन्हैया लाल वापस अपनी गाड़ी के पास पहुंचे, तो शीशा टूटा देखकर उनके होश उड़ गए। गाड़ी के अंदर से गहनों वाले बैग नदारद थे। पीड़ित व्यापारी ने तुरंत घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया।
पुलिस जांच में जुटी, CCTV फुटेज खंगालने की प्रक्रिया जारी
घटना की संवेदनशीलता और चोरी हुए माल की भारी कीमत को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। इलाके में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि अपराधियों की आवाजाही और उनके हुलिए का पता लगाया जा सके। पुलिस आसपास के दुकानदारों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है। शुरुआती पड़ताल से यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि बदमाशों को कारोबारी की गतिविधियों और गाड़ी में मौजूद कीमती सामान की पहले से भनक थी।

राहुल का GenZ दांव: क्या ₹25,000 में खरीदे जा रहे इन्फ्लुएंसर्स?
बीजेपी ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में भीड़ और माहौल बनाने के लिए GenZ इन्फ्लुएंसर्स को ₹25,000 दिए जा रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक ऑडियो शेयर कर दावा किया कि कांग्रेस पैसे देकर राहुल की तारीफ वाले वीडियो बनवा रही है।
खबर का निचोड़
बीजेपी ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में भीड़ और माहौल बनाने के लिए GenZ इन्फ्लुएंसर्स को ₹25,000 दिए जा रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक ऑडियो शेयर कर दावा किया कि कांग्रेस पैसे देकर राहुल की तारीफ वाले वीडियो बनवा रही है।
बीजेपी का बड़ा हमला: ऑडियो क्लिप से मचा हड़कंप
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग जारी करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का दावा है कि पुणे में आयोजित राहुल गांधी के कार्यक्रम में GenZ (युवा पीढ़ी) के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को लाने के लिए ₹25,000 की पेशकश की जा रही है। इस खुलासे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
₹25,000 का ऑफर: क्या है कथित कॉल रिकॉर्डिंग में?
बीजेपी प्रवक्ता द्वारा साझा किए गए ऑडियो में एक व्यक्ति किसी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से बातचीत करता सुनाई दे रहा है। बातचीत के दौरान वह व्यक्ति साफ तौर पर कहता है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल होने और उनके पक्ष में माहौल बनाने के लिए ₹25,000 दिए जाएंगे। इसके बदले में इन्फ्लुएंसर्स को ऐसे वीडियो तैयार करने होंगे जो सीधे तौर पर राहुल गांधी को हाईलाइट करें और उनकी छवि को सकारात्मक रूप से जनता के सामने पेश करें। बीजेपी का तर्क है कि यह जनता को गुमराह करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
यूथ कनेक्ट या पेड पीआर? राजनीति का नया ट्रेंड
आज के दौर में राजनीतिक पार्टियां युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का सहारा ले रही हैं। लेकिन बीजेपी के इस आरोप ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सचमुच युवाओं से जुड़ने की कोशिश है या फिर महज़ एक प्रायोजित पीआर स्टंट। प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब जनता का समर्थन नहीं मिलता, तो इस तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अब किराए के इन्फ्लुएंसर्स के दम पर राहुल गांधी की रीब्रांडिंग करने में जुटी है।
आरोपों के बाद गरमाई राजनीति
इस ऑडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां बीजेपी समर्थक इसे कांग्रेस का पोल-खोल मामला बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस खेमे में इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया की संभावना है। राहुल गांधी के पुणे दौरे से ठीक पहले सामने आए इस मामले ने कार्यक्रम के आसपास एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। फिलहाल यह मुद्दा डिजिटल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक छाया हुआ है।

30 सितंबर से पहले बच्चों का आधार करें अपडेट, वर्ना जेब होगी ढीली
30 सितंबर 2026 तक 5 से 17 साल के बच्चों के बायोमेट्रिक आधार डिटेल्स फ्री में अपडेट कराए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया में देरी करने पर अभिभावकों को फीस देनी पड़ सकती है। समय पर यह काम पूरा करने से बच्चों के स्कूल एडमिशन और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहेगा।
30 सितंबर 2026 तक 5 से 17 साल के बच्चों के बायोमेट्रिक आधार डिटेल्स फ्री में अपडेट कराए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया में देरी करने पर अभिभावकों को फीस देनी पड़ सकती है। समय पर यह काम पूरा करने से बच्चों के स्कूल एडमिशन और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहेगा।
फ्री आधार बायोमेट्रिक अपडेट की समय-सीमा तय
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बच्चों के आधार कार्ड से जुड़ा एक बेहद अहम नोटिफिकेशन जारी किया है। 5 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों के आधार कार्ड में बायोमेट्रिक अपडेट करना अनिवार्य कर दिया गया है। फिलहाल यह पूरी सर्विस 30 सितंबर 2026 तक बिल्कुल मुफ्त दी जा रही है। ऐसे में जो अभिभावक तय समय-सीमा से पहले अपने बच्चों की जानकारी अपडेट करा लेंगे, वे बाद में लगने वाले एक्स्ट्रा चार्ज से आसानी से बच सकते हैं।
क्यों जरूरी है बायोमेट्रिक अपडेट
बच्चों के शारीरिक विकास के साथ उनके फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों (आइरिस) में बदलाव आता है। इसी वजह से 5 साल की उम्र पूरी होने के बाद पहली बार और फिर 15 साल की उम्र के बाद दूसरी बार बायोमेट्रिक डिटेल्स अपडेट करना जरूरी होता है। अगर सही समय पर यह अपडेट नहीं कराया गया, तो आधार कार्ड इनएक्टिव हो सकता है। कार्ड के इनएक्टिव होने से बच्चों की स्कॉलरशिप, सरकारी योजनाओं और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में अचानक रुकावट आ सकती है।
समय रहते पूरा करें यह काम
अभिभावक अपने नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाकर बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट करा सकते हैं। इसके लिए बच्चे को स्वयं केंद्र पर जाना होगा ताकि उसके फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन और फोटो दोबारा ली जा सकें। इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा समय नहीं लगता है। तय डेडलाइन के बाद इस सेवा के लिए तय शुल्क देना पड़ेगा। परेशानी और एक्स्ट्रा खर्च से बचने के लिए 30 सितंबर 2026 से पहले ही निकटतम केंद्र जाकर यह काम पूरा करा लें।

राहुल गांधी का बड़ा दावा: संसद मार्ग पर पेलेट के छर्रे दिखाकर पुलिस को घेरा
संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जोरदार धरना जारी है। राहुल गांधी ने मीडिया के सामने पेलेट गन के छर्रे दिखाकर सनसनी फैला दी। उनका दावा है कि ये छर्रे संसद मार्च के दौरान घायल हुए सीजेपी (CJP) प्रदर्शनकारी के शरीर से निकाले गए हैं।
खबर का निचोड़
संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जोरदार धरना जारी है। राहुल गांधी ने मीडिया के सामने पेलेट गन के छर्रे दिखाकर सनसनी फैला दी। उनका दावा है कि ये छर्रे संसद मार्च के दौरान घायल हुए सीजेपी (CJP) प्रदर्शनकारी के शरीर से निकाले गए हैं।
पुलिस स्टेशन के बाहर सियासी हंगामा
राजधानी दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन का घेराव कर बैठे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। संसद मार्च के दौरान हुए बवाल के बाद स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस बल की भारी तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारियों के तेवर नरम पड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं।
धरने की अगुआई कर रहे राहुल गांधी ने पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान अपनी हथेली पर पेलेट गन के धातु वाले छर्रे रखे और उन्हें सार्वजनिक रूप से दिखाया। इस दृश्य ने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों और समर्थकों के बीच हलचल तेज कर दी।
शरीर से निकले छर्रों का दावा
राहुल गांधी ने सीधा और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये वही छर्रे हैं जो 20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च के दौरान जख्मी हुए एक सीजेपी प्रदर्शनकारी के शरीर से डॉक्टरों ने निकाले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इस तरह के घातक हथियारों का इस्तेमाल करने की इजाजत किसने दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस बर्बरता के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद घटनास्थल पर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
एफआईआर दर्ज होने तक जारी रहेगा धरना
कांग्रेस नेता ने अपनी भावी रणनीति को लेकर पूरी तरह कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यह केवल एक दिन का सांकेतिक विरोध नहीं है, बल्कि न्याय की तार्किक परिणति तक चलने वाला संघर्ष है।
उन्होंने स्पष्ट कहा, "जब तक इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कर ली जाती और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई का ठोस भरोसा नहीं मिलता, हम यहां से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। हमारा धरना अनवरत जारी रहेगा।"
प्रशासन में हड़कंप
संसद मार्ग पर राहुल गांधी के इस सीधे और आक्रामक रुख ने पुलिस प्रशासन और गृह मंत्रालय के गलियारों में खलबली मचा दी है। पुलिस के उच्च अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने और रास्ता खाली कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह के आश्वासन से संतुष्ट होने को तैयार नहीं दिख रहा है।
संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।
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