
पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच छिड़ा नया शब्दबाण
भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह द्वारा अपनी पहली पत्नी को 'देवी' बताने के बाद उनकी दूसरी पत्नी ज्योति सिंह का दर्द छलक पड़ा है। ज्योति ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि यदि नियति उन्हें फिर किसी कहानी में साथ लाए, तो उनका नाम पवन अपने हिस्से से मिटा दें। दोनों के बीच तनाव अब सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आ चुका है।
भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह द्वारा अपनी पहली पत्नी को 'देवी' बताने के बाद उनकी दूसरी पत्नी ज्योति सिंह का दर्द छलक पड़ा है। ज्योति ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि यदि नियति उन्हें फिर किसी कहानी में साथ लाए, तो उनका नाम पवन अपने हिस्से से मिटा दें। दोनों के बीच तनाव अब सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आ चुका है।
पवन सिंह का बयान और ज्योति का छलकता दर्द
भोजपुरी सिनेमा के 'पावरस्टार' पवन सिंह अक्सर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी दिवंगत पहली पत्नी नीलम सिंह को याद करते हुए उन्हें 'देवी' और अपनी 'दुनिया' करार दिया। पवन सिंह का यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उनकी दूसरी पत्नी ज्योति सिंह का दर्द भी छलक उठा। ज्योति ने बिना किसी का सीधे नाम लिए एक ऐसा पोस्ट साझा किया, जिसने भोजपुरी इंडस्ट्री से लेकर फैंस के बीच खलबली मचा दी है।
'प्रिय पतिदेव... मेरा नाम अपने हिस्से से मिटा देना'
ज्योति सिंह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक बेहद भावुक और तीखा संदेश लिखा। उन्होंने लिखा, "प्रिय पतिदेव... यदि नियति फिर कभी हमें एक ही कहानी में लिखे तो इस बार मेरा नाम अपने हिस्से से मिटा देना... दुआ बनकर रह लूंगी... लेकिन तुम्हारी कहानी नहीं बनना चाहती।" ज्योति का यह पोस्ट इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि दोनों के रिश्तों के बीच की कड़वाहट अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां से वापसी आसान नहीं दिखती। फैंस इस पोस्ट को पवन सिंह के बयान पर ज्योति का सीधा पलटवार मान रहे हैं।
रिश्तों की कड़वाहट और अदालती चक्रव्यूह
पवन सिंह और ज्योति सिंह के रिश्ते पिछले काफी समय से उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं। साल 2018 में दोनों की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद दोनों के बीच अनबन की खबरें आने लगीं। मामला कोर्ट तक पहुंचा और दोनों ने तलाक की अर्जी भी दाखिल की। हालांकि, बीच में कई बार ऐसी तस्वीरें और खबरें सामने आईं जिससे लगा कि इनके बीच सुलह हो रही है, लेकिन ज्योति सिंह का यह ताजा पोस्ट साफ करता है कि अंदरूनी मनमुटाव अभी खत्म नहीं हुआ है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और फैंस की प्रतिक्रियाएं
ज्योति सिंह के इस भावुक पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। पवन सिंह के फैंस जहां उन्हें सपोर्ट करते हुए ज्योति को सब्र रखने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई लोग ज्योति के प्रति हमदर्दी जता रहे हैं। लोगों का कहना है कि किसी भी महिला के लिए अपने पति के मुंह से उसकी पहली पत्नी की इस तरह की तारीफ सुनना आसान नहीं होता। यह नया विवाद भोजपुरी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन चुका है और हर कोई यह देखने में लगा है कि पवन सिंह इस पर क्या रुख अपनाते हैं।

सिंदूर-सलवार छोड़ मर्द की तरह आंदोलन करें: बृजभूषण सिंह का रामदेव पर बड़ा हमला
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने योग गुरु बाबा रामदेव की आंदोलन की चेतावनी पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने रामदेव के स्वदेशी दावों पर तंज कसते हुए कहा कि वे स्वदेशी के नाम पर विदेशी उत्पाद बेचने लगे हैं। बृजभूषण ने रामदेव के पुराने विवाद का जिक्र करते हुए उन्हें सिंदूर और सलवार पहनकर भागने के बजाय मर्द की तरह आंदोलन करने की नसीहत दी।
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने योग गुरु बाबा रामदेव की आंदोलन की चेतावनी पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने रामदेव के स्वदेशी दावों पर तंज कसते हुए कहा कि वे स्वदेशी के नाम पर विदेशी उत्पाद बेचने लगे हैं। बृजभूषण ने रामदेव के पुराने विवाद का जिक्र करते हुए उन्हें सिंदूर और सलवार पहनकर भागने के बजाय मर्द की तरह आंदोलन करने की नसीहत दी।
राजनीतिक मैदान में नए बयानबाज़ी का धमाका
भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने बेबाक और हमलावर अंदाज के लिए जाने जाते हैं। योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा हाल ही में दी गई एक आंदोलन की चेतावनी पर पलटवार करते हुए बृजभूषण ने ऐसा बयान दिया है, जिसने देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे रामदेव के संभावित आंदोलन को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के तीखा हमला बोला।
स्वदेशी के नाम पर व्यापार करने का आरोप
बृजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि और योग गुरु के कारोबारी मॉडल पर सवाल उठाते हुए उनके स्वदेशी के दावे को घेरा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि स्वदेशी की बात करते-करते अब विदेशी उत्पाद तक बेचे जा रहे हैं। पूर्व सांसद ने साफ लहजे में कहा कि जनता अब इस तरह की बातों को गंभीरता से नहीं लेती है। उनके मुताबिक, जो व्यक्ति खुद को राष्ट्रवाद और स्वदेशी आंदोलन का चेहरा बताता है, उसका असली ध्यान अब केवल व्यापारिक विस्तार पर केंद्रित होकर रह गया है।
2011 के रामलीला मैदान कांड की याद दिलाई
हमले को और तेज करते हुए बृजभूषण ने साल 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए घटनाक्रम की याद दिलाई। उन्होंने बाबा रामदेव पर चुटकी लेते हुए कहा कि अगर इस बार वे कोई आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं, तो उन्हें पहले से ही यह सलाह दी जानी चाहिए कि वे किसी भी स्थिति में महिलाओं के कपड़े पहनकर मैदान छोड़कर न भागें। बृजभूषण ने स्पष्ट कहा कि इस बार सिंदूर, टिकुली और सलवार पहनकर आंदोलन करने की जरूरत नहीं है, बल्कि अगर हिम्मत है तो मैदान में मर्द की तरह डटकर खड़े रहना चाहिए।
बयानों से गरमाया राजनीतिक माहौल
बृजभूषण सिंह के इस तीखे रुख के बाद बाबा रामदेव और उनके समर्थकों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों हस्तियों के समर्थकों के बीच ज़बानी जंग तेज़ हो गई है। यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

दुबई की पहचान बनी ऐतिहासिक टोयोटा बिल्डिंग होगी ध्वस्त
दुबई की प्रतिष्ठित 15 मंज़िला नासर राशिद लूताह बिल्डिंग, जिसे 'टोयोटा बिल्डिंग' के नाम से जाना जाता है, 2027 में गिरा दी जाएगी। नगर निगम ने जर्जर हालत और मेंटेनेंस की अनुमति न मिलने के कारण यह फैसला लिया। इमारतों में अवैध रूप से बने सब-डिविजन और अत्यधिक भीड़ भी इसके प्रमुख कारण रहे।
दुबई की प्रतिष्ठित 15 मंज़िला नासर राशिद लूताह बिल्डिंग, जिसे 'टोयोटा बिल्डिंग' के नाम से जाना जाता है, 2027 में गिरा दी जाएगी। नगर निगम ने जर्जर हालत और मेंटेनेंस की अनुमति न मिलने के कारण यह फैसला लिया। इमारतों में अवैध रूप से बने सब-डिविजन और अत्यधिक भीड़ भी इसके प्रमुख कारण रहे।
आधी सदी पुराने इतिहास का अंत
दुबई के शेख ज़ायद रोड पर स्थित 15 मंज़िला नासर राशिद लूताह बिल्डिंग सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि शहर के तेज़ी से बदलते दौर की गवाह रही है। 1970 के दशक में बनी इस इमारत को लोग 'टोयोटा बिल्डिंग' के नाम से जानते हैं, क्योंकि इसकी छत पर लगा विशाल टोयोटा का विज्ञापन कई दशकों तक शहर का लैंडमार्क बना रहा। वर्ष 2027 में इस ऐतिहासिक ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा, जिससे दुबई के क्षितिज (स्कॉयलाइन) से एक पुरानी याद हमेशा के लिए गायब हो जाएगी।
मेंटेनेंस से इनकार और जर्जर ढांचा
दुबई म्युनिसिपैलिटी ने इमारत की वर्तमान स्थिति का गहन निरीक्षण करने के बाद इसके मेंटेनेंस वर्क को मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया है। लगातार घटती मजबूती और सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने के कारण प्राधिकरण ने इसे आगे रिपेयर करने के बजाय गिराने का कड़ा फैसला लिया। दशकों पुरानी यह इमारत आधुनिक सुरक्षा मापदंडों के हिसाब से अब रहने योग्य नहीं रह गई थी, जिससे इसमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था।
अवैध विभाजन और ओवरक्राउडिंग का मुद्दा
इमारत को खाली कराने और गिराने के पीछे सिर्फ इसकी ढलती उम्र ही वजह नहीं है, बल्कि इसके भीतर की अव्यवस्था भी एक बड़ा कारण बनी। रिपोर्टों के अनुसार, इमारत के अपार्टमेंट्स को गैर-कानूनी तरीके से छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया था। कमरों को अवैध रूप से सब-डिवाइड करने के चलते यहाँ क्षमता से कहीं अधिक भीड़-भाड़ हो गई थी। इस ओवरक्राउडिंग ने इमारत के ड्रेनेज, बिजली और ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव डाला, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बेहद बढ़ गई थी।
बदलते दुबई में पुराने लैंडमार्क का जाना
1970 के दशक में जब यह इमारत बनी थी, तब आसपास का इलाका काफी खाली था और यह दुबई की शुरुआती बहुमंजिला इमारतों में से एक मानी जाती थी। समय के साथ इसके चारों ओर गगनचुंबी आधुनिक इमारतें खड़ी हो गईं, लेकिन इसने अपनी पहचान बनाए रखी। अब सुरक्षा, नगर निगम के नियमों और आधुनिक शहरी नियोजन को प्राथमिकता देते हुए इस लैंडमार्क को अलविदा कहने की तैयारी पूरी हो चुकी है। 2027 तक इसे पूरी तरह से हटा दिया जाएगा।

HDFC बैंक का महा-रिकॉर्ड: GIFT सिटी के जरिए जुटाए $1.75 बिलियन
भारत के सबसे बड़े निजी ऋणदाता HDFC बैंक ने GIFT सिटी शाखा के माध्यम से $1.75 बिलियन (लगभग ₹15,000 करोड़) का विशाल फंड जुटाकर अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग बाजार में इतिहास रच दिया है। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से किसी भी भारतीय बैंक द्वारा विदेशी बाजार से किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा फंडरेज़ है।
खबर का निचोड़
भारत के सबसे बड़े निजी ऋणदाता HDFC बैंक ने GIFT सिटी शाखा के माध्यम से $1.75 बिलियन (लगभग ₹15,000 करोड़) का विशाल फंड जुटाकर अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग बाजार में इतिहास रच दिया है। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से किसी भी भारतीय बैंक द्वारा विदेशी बाजार से किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा फंडरेज़ है।
वैश्विक बाजार पर HDFC बैंक का दबदबा
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने एक बार फिर अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, HDFC बैंक ने अंतरराष्ट्रीय ऋण बाजार में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बैंक ने गुजरात स्थित गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) शाखा के माध्यम से बॉन्ड जारी करके सफलता से $1.75 बिलियन जुटाए हैं।
यह ऐतिहासिक फंडरेज़ भारतीय रुपये में करीब ₹15,000 करोड़ के बराबर है। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2008 की वैश्विक मंदी के बाद से अब तक किसी भी भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा विदेशी बाजार से जुटाया गया यह सबसे बड़ा बॉन्ड इश्यू है। इस उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और HDFC बैंक की साख को और अधिक मजबूत कर दिया है।
GIFT सिटी का बढ़ा अंतरराष्ट्रीय कद
इस विशाल सौदे ने गुजरात की GIFT सिटी को वैश्विक वित्तीय केंद्र (Global Financial Hub) के रूप में मजबूती से स्थापित कर दिया है। GIFT सिटी IFSC के माध्यम से इतने बड़े पैमाने पर बॉन्ड जारी होना यह दर्शाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन के लिए एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने इस बॉन्ड इश्यू में जबरदस्त रुचि दिखाई, जो बैंक की बैलेंस शीट और भारत की विकास गाथा में उनके अटूट विश्वास को दर्शाती है।
लिक्विडिटी और लोन क्षमता को मिलेगी नई रफ्तार
इस भारी-भरकम फंड से HDFC बैंक की बैलेंस शीट को नई तरलता (Liquidity) मिलेगी। बैंक इस पूंजी का उपयोग अपनी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को बढ़ाने, कॉर्पोरेट लोन पोर्टफोलियो को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा ऋण की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए करेगा। विलय के बाद से बैंक अपनी क्रेडिट ग्रोथ को तेज करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, और यह फंड उसके विस्तार योजनाओं में ईंधन का काम करेगा।
वैश्विक निवेशकों का अटूट भरोसा
अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में यह रिकॉर्ड सफलता इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक मंदी की आहटों के बावजूद निवेशक भारत के बैंकिंग सेक्टर को एक सुरक्षित और आकर्षक विकल्प मानते हैं। कम लागत पर इतनी बड़ी राशि जुटाने से बैंक की मार्जिन पर सकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि को भी गति मिलेगी।

UPI पर ₹2,000 से अधिक लेन-देन पर बदलेंगे नियम, जानिए पूरा अपडेट
डिजिटल भुगतान को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर जल्द ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो सकता है। अच्छी बात यह है कि इस शुल्क का बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों के लिए UPI सेवा पहले की तरह पूरी तरह मुफ़्त रहेगी।
खबर का निचोड़
डिजिटल भुगतान को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर जल्द ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो सकता है। अच्छी बात यह है कि इस शुल्क का बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा और ग्राहकों के लिए UPI सेवा पहले की तरह पूरी तरह मुफ़्त रहेगी।
UPI लेन-देन पर बड़ा अपडेट
देश में डिजिटल पेमेंट की रीढ़ बन चुका UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) एक बार फिर सुर्खियों में है। रोजाना करोड़ों लोग चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक पेमेंट के लिए इसी माध्यम का इस्तेमाल करते हैं। खबर है कि अगले दो हफ्तों के भीतर ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन को लेकर नए नियम लागू हो सकते हैं। वित्त मंत्रालय इस दिशा में जल्द ही एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है। इस कदम का सीधा असर देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है।
क्या है MDR और कैसे करेगा काम
MDR यानी 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' वह शुल्क होता है जो कोई व्यापारी या मर्चेंट डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को चुकाता है। अब तक UPI लेन-देन पर यह शुल्क पूरी तरह से शून्य था, जिससे व्यापारियों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा मिल रही थी। प्रस्तावित नए बदलावों के तहत केवल ₹2,000 से अधिक की राशि वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही यह चार्ज लागू करने की योजना है। छोटी राशि के लेन-देन को इस दायरे से बाहर रखा गया है ताकि छोटे दुकानदारों और विक्रेताओं पर इसका कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।
आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर
डिजिटल ट्रांसफर का इस्तेमाल करने वाले आम नागरिकों के लिए सबसे राहत की बात यह है कि उनकी जेब पर इसका कोई असर नहीं होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस संदर्भ में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ कहा है कि इस प्रस्तावित शुल्क का बोझ ग्राहकों पर किसी भी रूप में नहीं डाला जाएगा। आम उपयोगकर्ताओं के लिए एक खाते से दूसरे खाते में पैसे भेजना, दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करना और अन्य दैनिक लेन-देन पहले की ही तरह पूरी तरह से मुफ़्त रहेंगे।
डिजिटल इकोसिस्टम पर प्रभाव
डिजिटल ट्रांजैक्शन के लगातार बढ़ते दायरे को देखते हुए पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और बैंकों के लिए इस नेटवर्क को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी रखरखाव के खर्च को संतुलित करने के लिए ही इस कदम पर विचार किया जा रहा है। सरकार और रिजर्व बैंक का उद्देश्य एक ऐसा संतुलन बनाना है, जिससे डिजिटल पेमेंट की रफ्तार भी धीमी न पड़े और वित्तीय संस्थानों को भी इस नेटवर्क को बिना किसी रुकावट के चलाने का आर्थिक आधार मिलता रहे। वित्त मंत्रालय की आगामी अधिसूचना से इस पूरी प्रक्रिया की अंतिम रूपरेखा साफ हो जाएगी।
Delight News
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