
यूट्यूब को चुनौती देने आया चीन का बिलीबिली, अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी करेंगे कमाई
चीन के लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म बिलीबिली ने वैश्विक बाजार में पैठ बनाने के लिए अपना इंटरनेशनल ऐप री-लॉन्च कर दिया है। गुलाबी ग्लोब आइकन और अंग्रेजी वेबसाइट के साथ आया यह प्लेटफॉर्म यूट्यूब को सीधी टक्कर देगा। सबसे खास बात यह है कि अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी इस पर कंटेंट बनाकर बंपर कमाई कर सकेंगे।
खबर का निचोड़
चीन के लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म बिलीबिली ने वैश्विक बाजार में पैठ बनाने के लिए अपना इंटरनेशनल ऐप री-लॉन्च कर दिया है। गुलाबी ग्लोब आइकन और अंग्रेजी वेबसाइट के साथ आया यह प्लेटफॉर्म यूट्यूब को सीधी टक्कर देगा। सबसे खास बात यह है कि अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी इस पर कंटेंट बनाकर बंपर कमाई कर सकेंगे।
वैश्विक बाजार में बिलीबिली की धमाकेदार एंट्री
वीडियो स्ट्रीमिंग की दुनिया में अब तक एकतरफा राज करने वाले यूट्यूब के सामने एक नई और बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। चीन के सबसे चर्चित वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म बिलीबिली ने ग्लोबल यूजर्स के लिए अपना नया इंटरनेशनल ऐप आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। लंबे समय से चीनी घरेलू बाजार तक सीमित रहने के बाद, कंपनी का यह कदम डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने का संकेत दे रहा है।
नए रूप-रंग और फीचर्स से लैस प्लेटफॉर्म
बिलीबिली का यह ग्लोबल वर्जन चीनी मूल ऐप से काफी अलग नजर आता है। यूजर्स को एक नया अनुभव देने के लिए इसके लोगो में ऊपर बाईं ओर एक खास गुलाबी ग्लोब आइकन जोड़ा गया है। यह आइकन इसे चीनी वर्जन से अलग पहचान देता है। इसके अलावा, भाषा की बाधा को खत्म करने के लिए कंपनी अपनी एक पूरी तरह समर्पित इंग्लिश वेबसाइट भी तैयार कर रही है, जिससे गैर-चीनी भाषी यूजर्स के लिए इसे नेविगेट करना और भी आसान हो जाएगा।
क्रिएटर्स को मिलेगा कमाई का नया जरिया
इस री-लॉन्च का सबसे आकर्षक पहलू बिलीबिली का मोनेटाइजेशन मॉडल है। कंपनी अब दुनिया भर के क्रिएटर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जुड़ने और पैसे कमाने का मौका दे रही है। अब तक यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर रहने वाले क्रिएटर्स के लिए बिलीबिली एक नया और फायदेमंद विकल्प बनकर उभरा है। आकर्षक रेवेन्यू शेयरिंग और विशाल यूजर बेस के दम पर कंपनी दिग्गज क्रिएटर्स को अपनी ओर खींचने की पूरी तैयारी में है।
डिजिटल दुनिया में शुरू हुआ नया मुकाबला
चीन में बिलीबिली का एनिमे, गेमिंग और पॉप-कल्चर कंटेंट में दबदबा रहा है। अब वैश्विक स्तर पर कदम रखकर कंपनी पश्चिमी टेक कंपनियों का एकाधिकार खत्म करना चाहती है। इंटरनेशनल मार्केट में बिलीबिली की यह आक्रामक रणनीति आने वाले समय में यूट्यूब और अन्य वीडियो प्लेटफॉर्म्स के बीच एक नया और दिलचस्प मुकाबला देखने को मजबूर करेगी।

इस बड़े सरकारी बैंक ने घटा दी FD की ब्याज दरें, चेक करें नया इंटरेस्ट रेट
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने ₹3 करोड़ और उससे अधिक की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरों के तहत कुछ चुनिंदा अवधियों पर ब्याज दरें 25 बेसिस पॉइंट तक घटा दी गई हैं।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने ₹3 करोड़ और उससे अधिक की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरों के तहत कुछ चुनिंदा अवधियों पर ब्याज दरें 25 बेसिस पॉइंट तक घटा दी गई हैं।
SBI Bulk FD पर ब्याज दरों में कटौती
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों को संशोधित करने का फैसला किया है। इस नए बदलाव का सीधा असर ₹3 करोड़ या उससे अधिक की राशि एक साथ जमा करने वाले बड़े निवेशकों और संस्थागत ग्राहकों पर पड़ेगा। बैंक द्वारा की गई यह कटौती चुनिंदा मैच्योरिटी अवधि वाली फिक्स्ड डिपॉजिट्स पर लागू की गई है, जिससे निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न में कमी आएगी।
जानिए किन अवधियों पर घटा ब्याज
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 180 दिन से लेकर 210 दिन की अवधि वाली बल्क एफडी पर ब्याज दर में 10 बेसिस पॉइंट (0.10%) की कमी की है। वहीं, कुछ अन्य चुनिंदा अवधियों की बल्क डिपॉजिट्स पर दी जाने वाली ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) तक की कटौती दर्ज की गई है।
बल्क एफडी आमतौर पर बड़ी कंपनियों, ट्रस्टों और उच्च निवल मूल्य वाले व्यक्तियों (HNIs) द्वारा चुनी जाती हैं। यही वजह है कि ब्याज दरों में मामूली कटौती भी लाखों रुपये के रिटर्न को प्रभावित करती है।
खुदरा ग्राहकों पर क्या होगा असर
बैंक का यह नया आदेश केवल ₹3 करोड़ और उससे अधिक की बल्क डिपॉजिट्स पर लागू होता है। आम खुदरा निवेशकों (Retail Depositors) के लिए, जो ₹3 करोड़ से कम की एफडी करवाते हैं, ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। खुदरा एफडी की दरें पहले की तरह ही बनी रहेंगी, जिससे आम जमाकर्ताओं को राहत मिली है।
SBI समय-समय पर अपनी तरलता (Liquidity) की स्थिति और बाजार की परिस्थितियों की समीक्षा करने के बाद बल्क डिपॉजिट्स की ब्याज दरों में बदलाव करता रहता है। बैंक के इस कदम के बाद अब अन्य बैंक भी अपनी बल्क एफडी दरों में बदलाव कर सकते हैं।

अब सोलर पैनल लगाना होगा 20% तक महंगा, जानें वजह
सोलर एनर्जी अपनाने की सोच रहे लोगों और डेवलपर्स को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगले 6-8 महीनों में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 20% तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह महंगे घरेलू सोलर सेल का अनिवार्य इस्तेमाल और कॉपर-एल्यूमीनियम की बढ़ती कीमतें हैं।
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सोलर एनर्जी अपनाने की सोच रहे लोगों और डेवलपर्स को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगले 6-8 महीनों में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 20% तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह महंगे घरेलू सोलर सेल का अनिवार्य इस्तेमाल और कॉपर-एल्यूमीनियम की बढ़ती कीमतें हैं।
सोलर प्रोजेक्ट्स पर मंडराया महंगाई का साया
देश में सोलर पावर को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच एक चिंताजनक खबर सामने आई है। आने वाले छह से आठ महीनों में बड़े पैमानों के सोलर प्रोजेक्ट्स स्थापित करना काफी महंगा साबित होने वाला है। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत में 20 प्रतिशत तक का भारी इजाफा देखने को मिल सकता है। जो कंपनियां या डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने जा रहे हैं, उन्हें अब अपने बजट में बड़ा फेरबदल करना होगा।
क्यों बढ़ रही है सोलर पैनलों की लागत?
लागत में इस उछाल के पीछे दो मुख्य कारण जिम्मेदार हैं। पहला कारण सरकार का वह नया नियम है, जो 1 जून से प्रभावी हो चुका है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में चीन से आयातित सस्ते सोलर सेल्स के बजाय देश में बने महंगे घरेलू सोलर सेल्स का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। भारत में बने सेल्स की कीमतें विदेशी सेल्स की तुलना में अधिक हैं, जिससे सीधे तौर पर प्रोजेक्ट की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ गई है।
दूसरा बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके चलते कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी बुनियादी धातुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। सोलर पैनल और उनके स्ट्रक्चर के निर्माण में इन धातुओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जिससे प्रोजेक्ट्स का ओवरऑल बजट काफी बढ़ गया है।
डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट का असर
정부 के डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) नियम का मकसद देश को सोलर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि, अल्पकालिक रूप से इसका सीधा असर प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है। घरेलू स्तर पर सोलर सेल्स का उत्पादन फिलहाल सीमित है और उनकी लागत आयातित सेल्स से ज्यादा है। जब तक देश के भीतर बड़े पैमाने पर सप्लाई चेन मजबूत नहीं होती और उत्पादन लागत कम नहीं होती, तब तक डेवलपर्स को यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना ही पड़ेगा।
मेटल मार्केट का अतिरिक्त दबाव
सोलर इंडस्ट्री केवल सेल्स पर ही निर्भर नहीं होती, बल्कि इसके ढांचे और वायरिंग के लिए कॉपर तथा एल्यूमीनियम बेहद जरूरी हैं। कमोडिटी मार्केट में इन धातुओं की कीमतों में आई तेजी ने सोलर पावर डेवलपर्स की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इन संयुक्त कारणों से आने वाले दिनों में सोलर एनर्जी सेक्टर में नई परियोजनाओं की रफ्तार और उनकी दरों पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।

मिल्की मिस्ट के शेयर बने रॉकेट, लगातार दूसरे दिन लगा अपर सर्किट
मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयरों में लिस्टिंग के बाद से ही तूफानी तेजी जारी है। 18 अगस्त को 30% की बंपर बढ़त के साथ लिस्ट होने के बाद, 19 अगस्त को भी शेयर में 10% का अपर सर्किट लग गया। IPO को मिले 56 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन ने निवेशकों के मजबूत भरोसे को साफ जाहिर कर दिया है।
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मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयरों में लिस्टिंग के बाद से ही तूफानी तेजी जारी है। 18 अगस्त को 30% की बंपर बढ़त के साथ लिस्ट होने के बाद, 19 अगस्त को भी शेयर में 10% का अपर सर्किट लग गया। IPO को मिले 56 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन ने निवेशकों के मजबूत भरोसे को साफ जाहिर कर दिया है।
बंपर लिस्टिंग के बाद लगातार दूसरे दिन तेजी
डेयरी प्रोडक्ट्स बनाने वाली प्रमुख कंपनी मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड के शेयर भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होते ही छा गए हैं। 18 अगस्त को बाजार में कदम रखते ही कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को जोरदार रिटर्न दिया। ₹140 के इश्यू प्राइस के मुकाबले यह शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लगभग 30% चढ़कर ₹181.50 के स्तर पर बंद हुआ था। लिस्टिंग के पहले ही दिन मिली इस शानदार शुरुआत ने निवेशकों का ध्यान पूरी तरह से अपनी ओर खींच लिया।
तेजी का यह सिलसिला अगले दिन यानी 19 अगस्त को भी बरकरार रहा। कारोबार शुरू होते ही खरीदारों की भारी मांग के चलते शेयर की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया। देखते ही देखते शेयर 10% की बढ़त के साथ अपने अपर सर्किट पर पहुंच गया। लगातार दो दिनों से आ रही इस खरीदारी से यह स्पष्ट है कि दलाल स्ट्रीट पर कंपनी के प्रदर्शन को लेकर काफी उत्साह का माहौल है।
IPO को मिला था निवेशकों का दमदार रिस्पॉन्स
शेयर बाजार में इस धमाकेदार एंट्री की नींव कंपनी के आईपीओ (IPO) के दौरान ही रखी जा चुकी थी। 11 अगस्त से 13 अगस्त के बीच जब यह इश्यू निवेशकों के लिए खुला था, तब इसे मार्केट से बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। प्राइमरी मार्केट में निवेशकों ने मिल्की मिस्ट के बिजनेस मॉडल पर जमकर दांव लगाया, जिसकी वजह से यह इश्यू कुल 56.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
खुदरा निवेशकों से लेकर संस्थागत खरीदारों (QIB) तक, हर कैटेगरी में बोलियों की होड़ देखने को मिली। ₹140 के इश्यू प्राइस पर निवेशकों ने जिस तरह से भरोसा दिखाया, उसी का नतीजा अब सेकेंडरी मार्केट में शेयर की कीमतों में उछाल के रूप में सामने आ रहा है।
डेयरी सेक्टर में मजबूती से जम रहे कदम
मिल्की मिस्ट देश के डेयरी सेक्टर में एक तेजी से उभरता हुआ नाम है। वैल्यू-एडेड डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे पनीर, दही, बटर और चेद्दार चीज़ के सेगमेंट में कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी को काफी मजबूत किया है। मजबूत सप्लाई चेन और आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट्स की बदौलत कंपनी की ब्रांड वैल्यू लगातार बढ़ रही है। आईपीओ के जरिए जुटाए गए फंड से कंपनी अपने कर्ज को कम करने और उत्पादन क्षमता के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यही वजह है कि शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद से ही इसमें लगातार खरीदारी का दबाव बना हुआ है।

इमरजेंसी में कहां से सबसे तेजी से मिलेगा आपका पैसा?
अचानक मेडिकल इमरजेंसी या पैसों की जरूरत पड़ने पर सही जगह से पैसा निकालना बेहद जरूरी है। लिक्विड म्यूचुअल फंड्स सबसे तेज और आसान माध्यम हैं। वहीं एनपीएस टियर-2 से 2 दिन और ईपीएफ से 3 से 5 दिन में फंड मिलता है। पीपीएफ से तुरंत पैसा निकालना सबसे मुश्किल है।
खबर का निचोड़
अचानक मेडिकल इमरजेंसी या पैसों की जरूरत पड़ने पर सही जगह से पैसा निकालना बेहद जरूरी है। लिक्विड म्यूचुअल फंड्स सबसे तेज और आसान माध्यम हैं। वहीं एनपीएस टियर-2 से 2 दिन और ईपीएफ से 3 से 5 दिन में फंड मिलता है। पीपीएफ से तुरंत पैसा निकालना सबसे मुश्किल है।
आपातकाल में किस निवेश से मिलेगा तुरंत कैश?
जिंदगी में वित्तीय आपातकाल कभी भी बिना बताए आ सकता है। ऐसे समय में यह मायने नहीं रखता कि आपके पास कुल कितना निवेश है, बल्कि यह महत्वपूर्ण होता है कि कौन सा पैसा आपके बैंक खाते में कितनी जल्दी पहुंच सकता है। लिक्विड म्यूचुअल फंड, ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस टियर-2 जैसे विकल्पों की लिक्विडिटी में काफी अंतर होता है।
लिक्विड म्यूचुअल फंड: सबसे तेज और आसान
आपातकालीन जरूरतों के लिए लिक्विड म्यूचुअल फंड सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसमें रिडेम्पशन की प्रक्रिया बेहद तेज होती है। अधिकांश फंड हाउस इंस्टेंट रिडेम्पशन की सुविधा देते हैं, जिसके तहत सीमित राशि आपके बैंक खाते में तुरंत यानी कुछ ही मिनटों में ट्रांसफर हो जाती है। यदि रकम बड़ी है, तो भी आमतौर पर 1 से 2 कार्य दिवसों (T+1 या T+2) के भीतर पूरा पैसा खाते में आ जाता है।
ईपीएफ: 3 से 5 दिनों का समय
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) मुख्य रूप से रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए होती है, लेकिन इमरजेंसी के दौरान एडवांस निकालने का नियम है। यदि बीमारी, घर की मरम्मत या शादी जैसे कारणों से पैसा निकालना हो, तो ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट में 3 से 5 दिनों का समय लगता है। हालांकि यह प्रक्रिया पहले से काफी आसान और डिजिटल हो चुकी है, फिर भी इसमें तत्काल नकदी मिलना संभव नहीं है।
एनपीएस टियर-2: 2 वर्किंग डेज में निकासी
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के टियर-2 अकाउंट को एक ऐच्छिक निवेश खाते की तरह इस्तेमाल किया जाता है। टियर-1 के मुकाबले टियर-2 में लॉक-इन पीरियड की बाध्यता नहीं होती है। यदि आप एनपीएस टियर-2 से पैसा निकालने के लिए विड्रॉल रिक्वेस्ट डालते हैं, तो सभी जरूरी मंजूरियां पूरी होने के बाद पैसा आपके पंजीकृत बैंक खाते में आने में कम से कम 2 कामकाजी दिनों (T+2) का समय लगता है।
पीपीएफ: सबसे धीमी प्रक्रिया और कड़े नियम
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) को लिक्विडिटी के मामले में सबसे सख्त माना जाता है। पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। खाता खोलने के 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही साल में केवल एक बार आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की अनुमति मिलती है। ऐसे में किसी अचानक आई इमरजेंसी के लिए पीपीएफ पर निर्भर रहना समझदारी नहीं है, क्योंकि इससे तुरंत फंड जुटाना काफी कठिन होता है।
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