
दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 4 लोग 14 दिन की न्यायिक हिरासत में
दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में अदालत ने उन्हें और पूर्व सीईओ उदित प्रकाश समेत 4 लोगों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर है।
खबर का निचोड़
दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में अदालत ने उन्हें और पूर्व सीईओ उदित प्रकाश समेत 4 लोगों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर है।
जैन की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट से नहीं मिली राहत
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की कानूनी अड़चनें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
पूर्व सीईओ समेत 4 अन्य भी भेजे गए जेल
यह कार्रवाई केवल पूर्व मंत्री तक सीमित नहीं है। इस कथित घोटाले की जांच के दायरे में प्रशासनिक अधिकारी भी पूरी तरह आ चुके हैं। दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) उदित प्रकाश समेत चार अन्य आरोपियों को भी अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय गड़बड़ियां की गईं, जिसमें इन अधिकारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध है।
टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप
पूरा मामला दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के उन्नयन और निर्माण के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान पसंदीदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में साजिशन बदलाव किए गए। इसके एवज में भारी वित्तीय लेन-देन और रिश्वतखोरी की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि भ्रष्टाचार के इस तार में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
एक आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर
मामले में त्वरित सुराग जुटाने और अहम दस्तावेजों की बरामदगी के लिए कोर्ट ने एक अन्य आरोपी को दो दिनों की पुलिस हिरासत में सौंप दिया है। पुलिस रिमांड के दौरान आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी, ताकि घोटाले की पूरी क्रोनोलॉजी और पैसों के लेनदेन का साफ खाका तैयार किया जा सके।
जांच एजेंसियों का शिकंजा और आने वाले दिन
इस सख्त न्यायिक कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों का रुख और कड़ा होने की उम्मीद है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर मामले की फाइलें अब दोबारा खंगाली जा रही हैं। आने वाले 14 दिन इस मामले के तमाम आरोपियों के लिए बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं, क्योंकि पूछताछ और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच का दायरा अन्य विभागों तक भी फैल सकता है।

सोशल मीडिया से कमाई पर टैक्स का पूरा गणित, ऐसे बचें भारी पेनल्टी से
कंटेंट क्रिएशन अब सिर्फ एक शौक नहीं बल्कि लाखों रुपये कमाने वाला फुल-टाइम करियर बन चुका है। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियोज से स्पॉन्सरशिप, एड-रेवेन्यू और एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए कमाई करने वाले क्रिएटर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कमाई के इस नए दौर के साथ इनकम टैक्स और जीएसटी से जुड़े नियम भी पूरी सख्ती से लागू होने लगे हैं। क्रिएटर्स के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि टैक्स विभाग उनकी कमाई को किस नजरिए से देखता है।
कंटेंट क्रिएशन अब सिर्फ एक शौक नहीं बल्कि लाखों रुपये कमाने वाला फुल-टाइम करियर बन चुका है। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियोज से स्पॉन्सरशिप, एड-रेवेन्यू और एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए कमाई करने वाले क्रिएटर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कमाई के इस नए दौर के साथ इनकम टैक्स और जीएसटी से जुड़े नियम भी पूरी सख्ती से लागू होने लगे हैं। क्रिएटर्स के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि टैक्स विभाग उनकी कमाई को किस नजरिए से देखता है।
सोशल मीडिया इनकम पर टैक्स के नियम
इनकम टैक्स विभाग यूट्यूब और इंस्टाग्राम से होने वाली कमाई को साधारण सैलरी या अन्य स्रोतों से हुई आय नहीं मानता। इसे 'व्यवसाय या पेशे से होने वाले लाभ और आय' (Profit and Gains from Business or Profession) की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब है कि क्रिएटर जितनी भी कमाई करता है, उस पर उसकी कुल सालाना आय और लागू होने वाले टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स की गणना की जाती है।
TDS कटौती और व्यावसायिक छूट का फायदा
जब कोई ब्रांड किसी क्रिएटर को स्पॉन्सरशिप या प्रमोशन के लिए भुगतान करता है, तो ₹30,000 से अधिक की राशि पर 10% की दर से TDS (Tax Deductions at Source) काटा जाता है। अच्छी बात यह है कि टैक्स फाइल करते समय क्रिएटर अपने काम से जुड़े जरूरी खर्चों पर छूट का दावा कर सकते हैं। वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर का खर्च, इंटरनेट बिल, कैमरा और लाइट जैसे इक्विपमेंट का खर्च, और ऑफिस सेटअप की लागत को कुल आय से घटाकर टैक्सेबल इनकम को कम किया जा सकता है।
GST का रजिस्ट्रेशन और सख्त गाइडलाइंस
यदि किसी सोशल मीडिया क्रिएटर का सालाना कुल टर्नओवर ₹20 लाख (कुछ विशेष राज्यों में ₹10 लाख) से अधिक हो जाता है, तो उसे GST नंबर लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अलावा, फॉरेन क्लाइंट्स से मिलने वाले पेमेंट्स और एफिलिएट इनकम पर भी जीएसटी के नियम लागू होते हैं। ब्रांड्स से मिलने वाले महंगे फ्री गिफ्ट्स, जैसे फोन या गाड़ियां, अगर क्रिएटर अपने पास रख लेता है, तो उनकी वैल्यू को भी आय मानकर उस पर टैक्स चुकाना पड़ता है। सही समय पर टैक्स और आईटीआर दाखिल न करने पर टैक्स विभाग की ओर से भारी पेनल्टी और नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।

शेयर बाज़ार में हाहाकार: सेंसेक्स 300+ अंक टूटा, निफ्टी 24100 के नीचे
भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 325 अंक टूटकर 76,909 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 76 अंक गिरकर 24,078 के स्तर पर आ गया। बीते 7 कारोबारी दिनों में निफ्टी 500 अंक और सेंसेक्स 1,600 से अधिक अंक गँवा चुका है।
शेयर बाज़ार में हाहाकार: सेंसेक्स 300+ अंक टूटा, निफ्टी 24100 के नीचे
खबर का निचोड़:
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मुख्य आर्टिकल:
बाज़ार में बिकवाली का हाहाकार
भारतीय शेयर बाज़ार में लाल निशान का दबदबा लगातार गहराता जा रहा है। बिकवाली के भारी दबाव के बीच बाज़ार के दोनों प्रमुख इंडेक्स धड़ाम हो गए। ट्रेडर्स और निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए सेंसेक्स 300 से अधिक अंक टूटकर 77,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं निफ्टी ने भी 24,100 का अहम सपोर्ट लेवल तोड़ दिया है।
7 दिनों में गँवाए 1,600 से ज़्यादा अंक
बाज़ार की यह स्थिति किसी एक दिन का झटका नहीं है, बल्कि पिछले एक हफ्ते से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। बीते 7 कारोबारी दिनों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो इस दौरान केवल एक दिन बाज़ार में हल्की बढ़त देखने को मिली थी। शेष 6 दिनों में बिकवालों ने बाज़ार पर पूरी तरह शिकंजा कसे रखा। इस दौरान सेंसेक्स में 1,600 अंक से ज़्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जबकि निफ्टी लगभग 500 अंक नीचे आ चुका है।
सेंसेक्स और निफ्टी का ताजा हाल
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 325 अंकों की गिरावट के साथ 76,909 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स 76 अंक टूटकर 24,078 के स्तर पर आकर रुका। कारोबार के दौरान ऑटो, आईटी और बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख शेयरों में सबसे ज़्यादा दबाव देखा गया।
निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा
लगातार हो रही इस बिकवाली से शेयर बाज़ार में निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब चुके हैं। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक दबाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार जारी बिकवाली और घरेलू स्तर पर सुस्त संकेतों के चलते बाज़ार में यह अनिश्चितता बनी हुई है। फिलहाल हर रिकवरी पर मुनाफावसूली हावी हो रही है, जिससे बाज़ार निचले स्तरों पर टिकने में नाकाम साबित हो रहा है।

शेयर बाज़ार में हाहाकार: सेंसेक्स 300+ अंक टूटा, निफ्टी 24100 के नीचे
भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 325 अंक टूटकर 76,909 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 76 अंक गिरकर 24,078 के स्तर पर आ गया। बीते 7 कारोबारी दिनों में निफ्टी 500 अंक और सेंसेक्स 1,600 से अधिक अंक गँवा चुका है।
शेयर बाज़ार में हाहाकार: सेंसेक्स 300+ अंक टूटा, निफ्टी 24100 के नीचे
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भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 325 अंक टूटकर 76,909 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 76 अंक गिरकर 24,078 के स्तर पर आ गया। बीते 7 कारोबारी दिनों में निफ्टी 500 अंक और सेंसेक्स 1,600 से अधिक अंक गँवा चुका है।
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बाज़ार में बिकवाली का हाहाकार
भारतीय शेयर बाज़ार में लाल निशान का दबदबा लगातार गहराता जा रहा है। बिकवाली के भारी दबाव के बीच बाज़ार के दोनों प्रमुख इंडेक्स धड़ाम हो गए। ट्रेडर्स और निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए सेंसेक्स 300 से अधिक अंक टूटकर 77,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं निफ्टी ने भी 24,100 का अहम सपोर्ट लेवल तोड़ दिया है।
7 दिनों में गँवाए 1,600 से ज़्यादा अंक
बाज़ार की यह स्थिति किसी एक दिन का झटका नहीं है, बल्कि पिछले एक हफ्ते से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। बीते 7 कारोबारी दिनों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो इस दौरान केवल एक दिन बाज़ार में हल्की बढ़त देखने को मिली थी। शेष 6 दिनों में बिकवालों ने बाज़ार पर पूरी तरह शिकंजा कसे रखा। इस दौरान सेंसेक्स में 1,600 अंक से ज़्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जबकि निफ्टी लगभग 500 अंक नीचे आ चुका है।
सेंसेक्स और निफ्टी का ताजा हाल
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 325 अंकों की गिरावट के साथ 76,909 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स 76 अंक टूटकर 24,078 के स्तर पर आकर रुका। कारोबार के दौरान ऑटो, आईटी और बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख शेयरों में सबसे ज़्यादा दबाव देखा गया।
निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा
लगातार हो रही इस बिकवाली से शेयर बाज़ार में निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब चुके हैं। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक दबाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार जारी बिकवाली और घरेलू स्तर पर सुस्त संकेतों के चलते बाज़ार में यह अनिश्चितता बनी हुई है। फिलहाल हर रिकवरी पर मुनाफावसूली हावी हो रही है, जिससे बाज़ार निचले स्तरों पर टिकने में नाकाम साबित हो रहा है।

SBI ग्राहकों के लिए बड़ा अलर्ट: 1 अक्टूबर से कैश निकासी पर नया चार्ज
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉज़िट (BSBD) खाताधारकों के लिए कैश निकासी के नियमों में बदलाव किया है। 1 अक्टूबर से महीने में 4 बार से अधिक कैश निकालने पर हर ट्रांजेक्शन पर ₹15 और GST का अतिरिक्त चार्ज देना होगा।
खबर का निचोड़
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉज़िट (BSBD) खाताधारकों के लिए कैश निकासी के नियमों में बदलाव किया है। 1 अक्टूबर से महीने में 4 बार से अधिक कैश निकालने पर हर ट्रांजेक्शन पर ₹15 और GST का अतिरिक्त चार्ज देना होगा।
क्या है नया नियम और कितना लगेगा चार्ज
भारतीय स्टेट बैंक के करोड़ों खाताधारकों के लिए यह जरूरी खबर है। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने सर्विस चार्ज से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। नए दिशानिर्देशों के तहत BSBD अकाउंट होल्डर्स को अब महीने में केवल 4 बार मुफ्त कैश निकासी की सुविधा मिलेगी।
चार बार की सीमा समाप्त होने के बाद आप जब भी एटीएम या बैंक ब्रांच से पैसा निकालेंगे, तो प्रति ट्रांजेक्शन ₹15 प्लस जीएसटी का शुल्क चुकाना होगा। यह नया नियम 1 अक्टूबर से प्रभावी रूप से लागू होने जा रहा है।
BSBD खातों की खासियत और असर
बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉज़िट खाता मुख्य रूप से समाज के उन वर्गों के लिए डिजाइन किया गया है जो बिना किसी न्यूनतम बैलेंस की शर्त के बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाना चाहते हैं। इस खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने पर कोई जुर्माना नहीं लगता है।
हालांकि, बैंक द्वारा लगाए गए नए सर्विस चार्ज के बाद इन खाताधारकों की वित्तीय आदतों पर सीधा असर पड़ेगा। अब महीने में बार-बार थोड़ी-थोड़ी राशि निकालने वाले ग्राहकों को अपनी निकासी योजनाबद्ध तरीके से करनी होगी, ताकि वे अतिरिक्त शुल्क से बच सकें।
फ्री ट्रांजेक्शन की सीमा में क्या-क्या शामिल
बैंक की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 4 मुफ्त निकासी की इस सीमा में बैंक शाखाओं से की जाने वाली निकासी और एटीएम (चाहे वह SBI का हो या किसी अन्य बैंक का) से निकाला गया कैश, दोनों ही शामिल हैं।
यदि कोई ग्राहक महीने में दो बार ब्रांच से और दो बार एटीएम से पैसे निकालता है, तो उसकी 4 फ्री ट्रांजेक्शन की लिमिट वहीं खत्म हो जाएगी। इसके बाद पांचवीं बार से हर कैश निकासी पर निर्धारित चार्ज अपने आप खाते से कट जाएगा।
क्यों किया गया यह बदलाव
डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देना और शाखाओं में लगने वाली भीड़ को कम करना इस कदम का मुख्य उद्देश्य माना जा रहा है। बैंक का जोर इस बात पर है कि ग्राहक छोटी-छोटी खरीदारी के लिए नकद निकासी करने के बजाय यूपीआई, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल माध्यमों का प्रयोग अधिक से अधिक करें।
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