
झारखंड में बड़ा फैसला: JSSC-CGL समेत सभी परीक्षाएं रद्द
युवाओं के भारी विरोध और आंदोलन के आगे आखिरकार झारखंड सरकार को झुकना पड़ा है। सरकार ने सोमवार देर रात JSSC-CGL समेत एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। हालांकि, इस फैसले ने राज्य सरकार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है।
खबर का निचोड़
युवाओं के भारी विरोध और आंदोलन के आगे आखिरकार झारखंड सरकार को झुकना पड़ा है। सरकार ने सोमवार देर रात JSSC-CGL समेत एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। हालांकि, इस फैसले ने राज्य सरकार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है।
युवाओं का आक्रोश और सरकार का फैसला
झारखंड में पिछले कई दिनों से जारी छात्रों और अभ्यर्थियों के आंदोलन ने राज्य की सियासत में गर्माहट बढ़ा दी थी। परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं की मांग को देखते हुए झारखंड सरकार ने सोमवार रात एक बड़ा कदम उठाया। सरकार ने JSSC-CGL समेत TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी।
इस फैसले को आंदोलनकारी छात्रों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे थे। राज्य भर में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार के पास परीक्षाओं को निरस्त करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।
नई चुनौतियों के चक्रव्यूह में फंसी सरकार
परीक्षाएं रद्द कर युवाओं को शांत करने का दांव सरकार के लिए फिलहाल भले ही राहत भरा दिख रहा हो, लेकिन इसने प्रशासनिक महकमे के सामने परेशानियों का नया पहाड़ खड़ा कर दिया है। हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है, जिससे उनके भीतर अनिश्चितता का माहौल है।
दूसरी ओर, लाखों अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा आयोजित कराना एक बहुत बड़ी लॉजिस्टिक और वित्तीय चुनौती होगी। नई एजेंसी का चयन, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली का निर्माण और समय पर परिणाम जारी करना सरकार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
परीक्षा एजेंसियों पर उठते गंभीर सवाल
TDPL द्वारा संचालित इन परीक्षाओं के रद्द होने से सरकारी तंत्र और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की साख पर गहरा दाग लगा है। लगातार लीक होते पेपर और धांधली के आरोपों ने यह साबित कर दिया है कि राज्य की चयन प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस प्रशासनिक संकट से कैसे निपटती है और अभ्यर्थियों का खोया हुआ भरोसा वापस जीतने के लिए क्या कड़े कदम उठाती है। परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखना और आने वाले समय में एक निष्पक्ष परीक्षा का आयोजन करना ही अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, टेस्ट क्रिकेट में जड़े सबसे तेज 100 छक्के
भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 100 छक्के जड़कर नया विश्व इतिहास रच दिया है। मात्र 89 पारियों में यह कमाल कर उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट और बेन स्टोक्स को पीछे छोड़ दिया है। इस मुकाम तक पहुंचने वाले वह भारत के पहले बल्लेबाज भी बन गए हैं।
खबर का सार
भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 100 छक्के जड़कर नया विश्व इतिहास रच दिया है। मात्र 89 पारियों में यह कमाल कर उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट और बेन स्टोक्स को पीछे छोड़ दिया है। इस मुकाम तक पहुंचने वाले वह भारत के पहले बल्लेबाज भी बन गए हैं।
ऋषभ पंत का ऐतिहासिक कारनामा
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टेस्ट फॉर्मेट में एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जिसकी गूंज लंबे समय तक क्रिकेट जगत में सुनाई देगी। पंत ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 100 छक्के लगाने का महारिकॉर्ड बनाकर दुनिया भर के दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने के लिए पहचाने जाने वाले इस खिलाड़ी ने अपनी विस्फोटक शैली का लोहा एक बार फिर मनवाया है।
तोड़ा दिग्गजों का रिकॉर्ड
ऋषभ पंत ने यह बड़ी उपलब्धि अपने करियर की मात्र 89 पारियों में हासिल की है। इस मुकाम पर पहुंचते ही उन्होंने टेस्ट इतिहास के कई महान खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट और इंग्लैंड के तूफानी ऑलराउंडर बेन स्टोक्स जैसे नाम शामिल हैं, जो अब पंत से इस मामले में पीछे छूट गए हैं। पंत की यह उपलब्धि बताती है कि टेस्ट क्रिकेट में भी उनका खौफ किस स्तर का है।
भारत के पहले बल्लेबाज बने पंत
यह रिकॉर्ड केवल सबसे तेज छक्कों का ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट इतिहास के लिहाज से भी बेहद खास है। ऋषभ पंत टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले भारत के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले भारत के लिए किसी भी बल्लेबाज ने टेस्ट फॉर्मेट में शतकीय छक्कों का आंकड़ा नहीं छुआ था। श्रीलंका के खिलाफ खेले गए मुकाबले में इस जादुई आंकड़े को छूकर उन्होंने अपने नाम एक और ऐतिहासिक स्वर्ण जड़ लिया है।
मैदान पर आक्रामकता और खेल का नया आयाम
ऋषभ पंत की यह सफलता सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उनकी उस मानसिकता का परिणाम है जो वह मैदान पर हमेशा दिखाते हैं। शुरुआती झटकों से उबरने के बाद टीम को संकट से निकालने और अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली से गेंदबाजों पर दबाव बनाने की उनकी क्षमता बेजोड़ है। लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी यह तूफानी पारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक नया मानदंड स्थापित करती है।

JPSC घोटाला: मास्टरमाइंड अभय तिवारी के पत्नी और भाई गिरफ्तार
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ने कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी की पत्नी सुष्मिता तिवारी और भाई अक्षय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। इन दोनों पर रिश्वत देकर सरकारी परीक्षा पास करने का गंभीर आरोप है।
> खबर का निचोड़:
> झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ने कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी की पत्नी सुष्मिता तिवारी और भाई अक्षय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। इन दोनों पर रिश्वत देकर सरकारी परीक्षा पास करने का गंभीर आरोप है।
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JPSC घोटाले की आंच अपनों तक पहुंची
झारखंड के सबसे चर्चित जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा घोटाले में सीआईडी (CID) ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। इस बहुचर्चित घोटाले के कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के घर की ही दीवारें अब भ्रष्टाचार की पोल खोल रही हैं। सीआईडी ने इस मामले में मास्टरमाइंड की पत्नी सुष्मिता तिवारी और उसके भाई अक्षय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है।
रिश्वत देकर हथियाई गई थी सरकारी नौकरी
जांच एजेंसी के अनुसार, अभय तिवारी के इन दोनों करीबी रिश्तेदारों ने अपनी मेहनत के दम पर नहीं, बल्कि अवैध रूप से रिश्वत के जरिए सरकारी परीक्षाएं पास की थीं। शुरुआती जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि गिरोह के सरगना ने अपने ही परिवार के सदस्यों को सिस्टम में फिट करने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया था। परिवार के भीतर ही इस तरह के फर्जीवाड़े ने यह साबित कर दिया है कि यह जाल कितना गहरा और व्यापक था।
मास्टरमाइंड के खुलासे से खुले कई राज
गिरफ्तारी से पहले सीआईडी की हिरासत में मास्टरमाइंड अभय तिवारी से लंबी पूछताछ की गई थी। सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि अभय ने पूछताछ के दौरान कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने परीक्षा माफियाओं के उस काले तंत्र की परतें उधेड़ दी हैं, जिसके जरिए पेपर लीक, कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेकर सेंधमारी और ओएमआर शीट (OMR Sheet) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी को अंजाम दिया जाता था।
आगे की कार्रवाई पर टकटकी
सीआईडी अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं। अभय तिवारी के खुलासों के आधार पर कई अन्य संदिग्धों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है। झारखंड की बहुचर्चित परीक्षाओं में हुई इस धांधली ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले हर एक शख्स को बेनकाब करना शुरू कर दिया है। एजेंसी की इस त्वरित कार्रवाई से न्याय की उम्मीदें एक बार फिर मजबूत हुई हैं।

GIMS स्टाफ नर्स भर्ती 2026: 100 पदों पर आवेदन शुरू
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (GIMS) ने स्टाफ नर्स के 100 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 7 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (GIMS) ने स्टाफ नर्स के 100 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 7 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
स्टाफ नर्स भर्ती का शानदार मौका
मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर है। गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (GIMS) ने स्टाफ नर्स के 100 पदों पर आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए योग्य उम्मीदवारों को प्रतिष्ठित संस्थान में सेवा देने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग में नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि इस भर्ती से युवाओं को सीधे सरकारी सेवा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 10 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पूरा कर लें। तय समय सीमा के भीतर आवेदन करने वाले उम्मीदवार ही इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के पात्र माने जाएंगे।
पात्रता और चयन प्रक्रिया
भर्ती से जुड़ी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और वेतनमान से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक विज्ञापन देखने की सलाह दी जाती है। GIMS द्वारा तय किए गए मानकों के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और अन्य जरूरी दिशा-निर्देशों की पूरी जानकारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में उपलब्ध है, जिसे आवेदन करने से पहले अच्छी तरह पढ़ लेना आवश्यक है।

सेंसेक्स में 400 अंकों की गिरावट: शेयर बाजार पर लाल निशान का कब्जा
भारतीय शेयर बाजार में आज अचानक बिकवाली के हावी होने से बीते दिनों की बढ़त गायब हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 400 से अधिक अंक टूटकर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बैंकिग, आईटी और मेटल शेयरों में भारी नुकसान के कारण निवेशकों को भारी चपत लगी है।
खबर का निचोड़
भारतीय शेयर बाजार में आज अचानक बिकवाली के हावी होने से बीते दिनों की बढ़त गायब हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 400 से अधिक अंक टूटकर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बैंकिग, आईटी और मेटल शेयरों में भारी नुकसान के कारण निवेशकों को भारी चपत लगी है।
बाजार में मची भगदड़ और लाल निशान का कब्जा
सप्ताह के इस कारोबारी दिन की शुरुआत तो सुस्त रही, लेकिन दिन ढलते-ढलते बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि पूरे बाजार से हरियाली पूरी तरह गायब हो गई। शुरुआती सत्र में संभलकर कारोबार कर रहे प्रमुख सूचकांक दोपहर के बाद अचानक धड़ाम हो गए।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 400 से अधिक अंकों का गोता लगाकर दिन के निचले स्तरों के करीब बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपनी महत्वपूर्ण सपोर्ट रेंज को बरकरार रखने में नाकाम रहा और लाल निशान में समा गया। बाजार में इस चौतरफा गिरावट ने ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इन सेक्टरों में दिखा सबसे बड़ा नुकसान
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार बैंकिग, आईटी और ऑटोमोबाइल्स सेक्टर पर पड़ी। हैवीवेट शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार को संभलने का मौका ही नहीं मिला। आईटी कंपनियों के कमजोर वैश्विक संकेतों ने इस दबाव को और हवा दी, जबकि बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली ने सूचकांकों को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बिकवाली के इस तूफान से बच नहीं सके। हालांकि कुछ चुनिंदा रियल्टी और फार्मा शेयरों में हल्की खरीदारी देखी गई, लेकिन वे पूरे बाजार का मूड बदलने में पूरी तरह असमर्थ रहे। सेंसेक्स के अधिकांश प्रमुख शेयर नुकसान के साथ लाल निशान में कारोबार करते हुए बंद हुए।
गिरावट के पीछे की मुख्य वजहें
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस अचानक आई गिरावट के पीछे वैश्विक और घरेलू दोनों कारण जिम्मेदार हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से जारी लगातार बिकवाली ने भारतीय बाजारों पर दबाव बनाए रखा है। इसके साथ ही, वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों की आशंका और भू-राजनीतिक तनावों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
वैश्विक बाजारों में मंदी के रुख और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी घरेलू बाजार के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर डाला है। निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit Booking) को प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले सत्रों में जब तक वैश्विक मोर्चे पर स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में ऐसा ही उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है।
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