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फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खारिज हुई याचिका

फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खारिज हुई याचिका

Delight News
📅 19 Aug2026

सुप्रीम कोर्ट ने देश में फांसी के जरिए मौत की सजा देने के कानूनी प्रावधान को बरकरार रखा है। अदालत ने घातक इंजेक्शन जैसे कम दर्दनाक विकल्पों की मांग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए इसे संवैधानिक माना। इस बीच, राज्यों की हाईकोर्ट्स में गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई जारी है।

फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खारिज हुई याचिका
खबर का निचोड़:
सुप्रीम कोर्ट ने देश में फांसी के जरिए मौत की सजा देने के कानूनी प्रावधान को बरकरार रखा है। अदालत ने घातक इंजेक्शन जैसे कम दर्दनाक विकल्पों की मांग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए इसे संवैधानिक माना। इस बीच, राज्यों की हाईकोर्ट्स में गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई जारी है।
मृत्युदंड पर सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट
देश में मौत की सजा के लिए फांसी की व्यवस्था जारी रहेगी। शीर्ष अदालत ने फांसी को चुनौती देने वाली और घातक इंजेक्शन या गोली मारने जैसे विकल्पों की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत फांसी देना असंवैधानिक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश भर की अदालतों में मृत्युदंड से जुड़े कई संवेदनशील और जघन्य अपराधों के मामलों पर सुनवाई चल रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सजा का यह तरीका क्रूर या अमानवीय श्रेणी में नहीं आता।
विभिन्न अदालतों में जारी है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही देश भर के उच्च न्यायालयों में फांसी की सजा से जुड़ी याचिकाओं पर फैसले सामने आ रहे हैं। कई मामलों में निचली अदालतों द्वारा दी गई फांसी की सजा को उच्च न्यायालयों ने बरकरार रखा है, तो वहीं कुछ अन्य मामलों में अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों और साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए सजा को आजीवन कारावास में बदला गया है।
न्यायपालिका का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामलों के सिद्धांत का कड़ाई से पालन हो, ताकि केवल सबसे गंभीर अपराधों में ही यह अंतिम सजा दी जाए।
पालघर में मौत की सजा तो छत्तीसगढ़ में राहत
हाल ही में महाराष्ट्र के पालघर में हुए एक जघन्य अपराध के मामले में सेशन कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में अपराध की बर्बरता को देखते हुए अदालत ने कड़ी से कड़ी सजा देना ही न्यायसंगत समझा।
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक ट्रिपल मर्डर केस की सुनवाई के दौरान अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बदल दिया। हाईकोर्ट ने तीनों हत्याओं के आरोपी की फांसी की सजा को रद्द करते हुए उसे बिना किसी छूट के आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया। अदालत ने माना कि मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और सुधार की गुंजाइश को देखते हुए मौत की सजा को उम्रकैद में बदलना उचित होगा।
फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खारिज हुई याचिका

फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खारिज हुई याचिका

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📅 19 Aug2026

सुप्रीम कोर्ट ने देश में फांसी के जरिए मौत की सजा देने के कानूनी प्रावधान को बरकरार रखा है। अदालत ने घातक इंजेक्शन जैसे कम दर्दनाक विकल्पों की मांग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए इसे संवैधानिक माना। इस बीच, राज्यों की हाईकोर्ट्स में गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई जारी है।

फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खारिज हुई याचिका
खबर का निचोड़:
सुप्रीम कोर्ट ने देश में फांसी के जरिए मौत की सजा देने के कानूनी प्रावधान को बरकरार रखा है। अदालत ने घातक इंजेक्शन जैसे कम दर्दनाक विकल्पों की मांग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए इसे संवैधानिक माना। इस बीच, राज्यों की हाईकोर्ट्स में गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई जारी है।
मृत्युदंड पर सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट
देश में मौत की सजा के लिए फांसी की व्यवस्था जारी रहेगी। शीर्ष अदालत ने फांसी को चुनौती देने वाली और घातक इंजेक्शन या गोली मारने जैसे विकल्पों की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत फांसी देना असंवैधानिक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश भर की अदालतों में मृत्युदंड से जुड़े कई संवेदनशील और जघन्य अपराधों के मामलों पर सुनवाई चल रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सजा का यह तरीका क्रूर या अमानवीय श्रेणी में नहीं आता।
विभिन्न अदालतों में जारी है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही देश भर के उच्च न्यायालयों में फांसी की सजा से जुड़ी याचिकाओं पर फैसले सामने आ रहे हैं। कई मामलों में निचली अदालतों द्वारा दी गई फांसी की सजा को उच्च न्यायालयों ने बरकरार रखा है, तो वहीं कुछ अन्य मामलों में अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों और साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए सजा को आजीवन कारावास में बदला गया है।
न्यायपालिका का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामलों के सिद्धांत का कड़ाई से पालन हो, ताकि केवल सबसे गंभीर अपराधों में ही यह अंतिम सजा दी जाए।
पालघर में मौत की सजा तो छत्तीसगढ़ में राहत
हाल ही में महाराष्ट्र के पालघर में हुए एक जघन्य अपराध के मामले में सेशन कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में अपराध की बर्बरता को देखते हुए अदालत ने कड़ी से कड़ी सजा देना ही न्यायसंगत समझा।
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक ट्रिपल मर्डर केस की सुनवाई के दौरान अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बदल दिया। हाईकोर्ट ने तीनों हत्याओं के आरोपी की फांसी की सजा को रद्द करते हुए उसे बिना किसी छूट के आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया। अदालत ने माना कि मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और सुधार की गुंजाइश को देखते हुए मौत की सजा को उम्रकैद में बदलना उचित होगा।
लाइव शो में बेकाबू हुआ गुस्सा, मांजरेकर-कार्तिक के बीच तीखी बहस

लाइव शो में बेकाबू हुआ गुस्सा, मांजरेकर-कार्तिक के बीच तीखी बहस

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📅 19 Aug2026

लाइव टीवी प्रसारण के दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर और मुरली कार्तिक के बीच तीखी बहस हो गई। क्रिकेट विश्लेषण के दौरान शुरू हुआ यह विवाद निजी टिप्पणियों तक पहुंच गया। ऑन-एयर हुई इस तीखी नोकझोंक ने खेल प्रेमियों और सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींचा है।

लाइव शो में बेकाबू हुआ गुस्सा, मांजरेकर-कार्तिक के बीच तीखी बहस
लाइव टीवी प्रसारण के दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर और मुरली कार्तिक के बीच तीखी बहस हो गई। क्रिकेट विश्लेषण के दौरान शुरू हुआ यह विवाद निजी टिप्पणियों तक पहुंच गया। ऑन-एयर हुई इस तीखी नोकझोंक ने खेल प्रेमियों और सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींचा है।
ऑन-एयर बढ़ा तनाव
क्रिकेट मैच के दौरान स्टूडियो में खेल के तकनीकी पहलुओं और रणनीतियों पर चर्चा चल रही थी। विश्लेषण के दौरान दोनों विशेषज्ञों के विचार एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे। शुरुआत में यह बहस सामान्य क्रिकेट विश्लेषण जैसी लग रही थी, लेकिन देखते ही देखते दोनों पूर्व खिलाड़ियाें के तेवर कड़े होते चले गए।
निजी बयानों तक पहुंची बात
चर्चा के दौरान जब असहमति बढ़ी, तो बातों का सिलसिला खेल से हटकर व्यक्तिगत बयानों की ओर मुड़ गया। दोनों में से किसी भी विशेषज्ञ ने अपनी बात से पीछे हटने का संकेत नहीं दिया। लाइव प्रसारण होने के कारण इस पूरी घटना को दर्शकों ने सीधे अपने टीवी स्क्रीन पर देखा। स्टूडियो में मौजूद अन्य एंकरों और क्रू मेंबर्स के लिए भी इस स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा
ब्रॉडकास्ट का यह हिस्सा सामने आते ही इंटरनेट पर वायरल होने लगा। क्रिकेट प्रशंसकों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे लाइव ब्रॉडकास्टिंग के दौरान सीमाओं का उल्लंघन मान रहे हैं, तो वहीं कुछ का मानना है कि खेल के प्रति जुनून के कारण अक्सर विशेषज्ञों के बीच ऐसी स्थिति बन जाती है।
झारखंड में बड़ा फैसला: JSSC-CGL समेत सभी परीक्षाएं रद्द

झारखंड में बड़ा फैसला: JSSC-CGL समेत सभी परीक्षाएं रद्द

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📅 19 Aug2026

युवाओं के भारी विरोध और आंदोलन के आगे आखिरकार झारखंड सरकार को झुकना पड़ा है। सरकार ने सोमवार देर रात JSSC-CGL समेत एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। हालांकि, इस फैसले ने राज्य सरकार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है।

झारखंड में बड़ा फैसला: JSSC-CGL समेत सभी परीक्षाएं रद्द
खबर का निचोड़
युवाओं के भारी विरोध और आंदोलन के आगे आखिरकार झारखंड सरकार को झुकना पड़ा है। सरकार ने सोमवार देर रात JSSC-CGL समेत एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। हालांकि, इस फैसले ने राज्य सरकार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है।
युवाओं का आक्रोश और सरकार का फैसला
झारखंड में पिछले कई दिनों से जारी छात्रों और अभ्यर्थियों के आंदोलन ने राज्य की सियासत में गर्माहट बढ़ा दी थी। परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं की मांग को देखते हुए झारखंड सरकार ने सोमवार रात एक बड़ा कदम उठाया। सरकार ने JSSC-CGL समेत TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी।
इस फैसले को आंदोलनकारी छात्रों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे थे। राज्य भर में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार के पास परीक्षाओं को निरस्त करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।
नई चुनौतियों के चक्रव्यूह में फंसी सरकार
परीक्षाएं रद्द कर युवाओं को शांत करने का दांव सरकार के लिए फिलहाल भले ही राहत भरा दिख रहा हो, लेकिन इसने प्रशासनिक महकमे के सामने परेशानियों का नया पहाड़ खड़ा कर दिया है। हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है, जिससे उनके भीतर अनिश्चितता का माहौल है।
दूसरी ओर, लाखों अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा आयोजित कराना एक बहुत बड़ी लॉजिस्टिक और वित्तीय चुनौती होगी। नई एजेंसी का चयन, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली का निर्माण और समय पर परिणाम जारी करना सरकार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
परीक्षा एजेंसियों पर उठते गंभीर सवाल
TDPL द्वारा संचालित इन परीक्षाओं के रद्द होने से सरकारी तंत्र और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की साख पर गहरा दाग लगा है। लगातार लीक होते पेपर और धांधली के आरोपों ने यह साबित कर दिया है कि राज्य की चयन प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस प्रशासनिक संकट से कैसे निपटती है और अभ्यर्थियों का खोया हुआ भरोसा वापस जीतने के लिए क्या कड़े कदम उठाती है। परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखना और आने वाले समय में एक निष्पक्ष परीक्षा का आयोजन करना ही अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, टेस्ट क्रिकेट में जड़े सबसे तेज 100 छक्के

ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, टेस्ट क्रिकेट में जड़े सबसे तेज 100 छक्के

Delight News
📅 18 Aug2026

भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 100 छक्के जड़कर नया विश्व इतिहास रच दिया है। मात्र 89 पारियों में यह कमाल कर उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट और बेन स्टोक्स को पीछे छोड़ दिया है। इस मुकाम तक पहुंचने वाले वह भारत के पहले बल्लेबाज भी बन गए हैं।

ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, टेस्ट क्रिकेट में जड़े सबसे तेज 100 छक्के
खबर का सार
भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 100 छक्के जड़कर नया विश्व इतिहास रच दिया है। मात्र 89 पारियों में यह कमाल कर उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट और बेन स्टोक्स को पीछे छोड़ दिया है। इस मुकाम तक पहुंचने वाले वह भारत के पहले बल्लेबाज भी बन गए हैं।
ऋषभ पंत का ऐतिहासिक कारनामा
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टेस्ट फॉर्मेट में एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जिसकी गूंज लंबे समय तक क्रिकेट जगत में सुनाई देगी। पंत ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 100 छक्के लगाने का महारिकॉर्ड बनाकर दुनिया भर के दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने के लिए पहचाने जाने वाले इस खिलाड़ी ने अपनी विस्फोटक शैली का लोहा एक बार फिर मनवाया है।
तोड़ा दिग्गजों का रिकॉर्ड
ऋषभ पंत ने यह बड़ी उपलब्धि अपने करियर की मात्र 89 पारियों में हासिल की है। इस मुकाम पर पहुंचते ही उन्होंने टेस्ट इतिहास के कई महान खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट और इंग्लैंड के तूफानी ऑलराउंडर बेन स्टोक्स जैसे नाम शामिल हैं, जो अब पंत से इस मामले में पीछे छूट गए हैं। पंत की यह उपलब्धि बताती है कि टेस्ट क्रिकेट में भी उनका खौफ किस स्तर का है।
भारत के पहले बल्लेबाज बने पंत
यह रिकॉर्ड केवल सबसे तेज छक्कों का ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट इतिहास के लिहाज से भी बेहद खास है। ऋषभ पंत टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले भारत के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले भारत के लिए किसी भी बल्लेबाज ने टेस्ट फॉर्मेट में शतकीय छक्कों का आंकड़ा नहीं छुआ था। श्रीलंका के खिलाफ खेले गए मुकाबले में इस जादुई आंकड़े को छूकर उन्होंने अपने नाम एक और ऐतिहासिक स्वर्ण जड़ लिया है।
मैदान पर आक्रामकता और खेल का नया आयाम
ऋषभ पंत की यह सफलता सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उनकी उस मानसिकता का परिणाम है जो वह मैदान पर हमेशा दिखाते हैं। शुरुआती झटकों से उबरने के बाद टीम को संकट से निकालने और अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली से गेंदबाजों पर दबाव बनाने की उनकी क्षमता बेजोड़ है। लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी यह तूफानी पारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक नया मानदंड स्थापित करती है।

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