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वंदे मातरम पर घमासान: कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का विवादित बयान

वंदे मातरम पर घमासान: कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का विवादित बयान

Delight News
📅 17 Aug2026

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 के संसद से पास होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि गोली मार दी जाए तब भी वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे।

वंदे मातरम पर घमासान: कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का विवादित बयान
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 के संसद से पास होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि गोली मार दी जाए तब भी वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे।
बयान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
संसद से पारित हुए नए संशोधनों और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर चल रही बहसों के बीच केरल से आने वाले कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन की यह टिप्पणी सामने आई है। उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। राजमोहन उन्नीथन ने अपने संबोधन में राष्ट्रगीत को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए विवादित टिप्पणी की, जिसने मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है।
बिल पास होने के बाद गरमाया माहौल
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 को मंजूरी मिली। इस विधेयक का उद्देश्य देश के राष्ट्रीय प्रतीकों, गान और संविधान के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना और उनके अपमान पर सख्त कार्रवाई करना है। ऐसे समय में एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का बयान देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।
नेताओं और दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं
सांसद उन्नीथन के इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। आलोचकों का कहना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए, जबकि समर्थकों का तर्क अपने-अपने तरीके से दिया जा रहा है। इस बयान ने एक बार फिर देश में राष्ट्रवाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों की अनिवार्यता पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल इस पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
क्या है प्रधानमंत्री मोदी का नया सियासी हथियार 'दिमागी नक्सल'?

क्या है प्रधानमंत्री मोदी का नया सियासी हथियार 'दिमागी नक्सल'?

Delight News
📅 17 Aug2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से 'दिमागी नक्सल' का जिक्र कर देश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। सशस्त्र हिंसा का दौर भले ही सिमट रहा हो, लेकिन वैचारिक रूप से सक्रिय इस नए खतरे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

क्या है प्रधानमंत्री मोदी का नया सियासी हथियार 'दिमागी नक्सल'?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से 'दिमागी नक्सल' का जिक्र कर देश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। सशस्त्र हिंसा का दौर भले ही सिमट रहा हो, लेकिन वैचारिक रूप से सक्रिय इस नए खतरे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री का बड़ा हमला
इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर बौद्धिक हलकों तक हलचल मचा दी है। उन्होंने देश को आगाह करते हुए कहा कि हथियारों के दम पर चलने वाला नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और लगभग समाप्त हो चुका है।
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक नए और सूक्ष्म खतरे की ओर इशारा किया, जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सल' का नाम दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह विचारधारा भले ही प्रत्यक्ष हिंसा के रास्ते पर न हो, लेकिन यह समाज में अराजकता फैलाने और देश की जड़ों को खोखला करने के हरसंभव मौके तलाश रही है।
'दिमागी नक्सल' को पहचान कर अलग-थलग करने की जरूरत
पीएम मोदी ने अपने भाषण में स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस वैचारिक और मानसिक आतंकवाद के पैरोकारों को पहचानना और समाज से उन्हें आइसोलेट करना अब वक्त की सबसे बड़ी मांग बन गया है। सरकार का मानना है कि यह वर्ग शहरी इलाकों में बैठकर, संस्थाओं को प्रभावित कर और विघटनकारी नैरेटिव गढ़कर देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक छिपा हुआ संकट पैदा कर रहा है।
इस बयान के आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। जहां एक तरफ सत्ता पक्ष इसे वैचारिक राष्ट्रवाद और आंतरिक सुरक्षा की दिशा में एक बेहद जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों और आलोचकों ने इस पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
विपक्षी दलों और आलोचकों के तीखे सवाल
विपक्ष का आरोप है कि 'दिमागी नक्सल' जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल करके सरकार असहमति की हर आवाज और वैचारिक विरोध का गला घोंटना चाहती है। आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के व्यापक और बिना स्पष्ट परिभाषा वाले शब्दों के दायरे में सरकार अपने हर आलोचक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी को खड़ा कर सकती है जो नीतियों पर सवाल उठाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक एक बड़ा वैचारिक संघर्ष बनने वाला है। एक तरफ जहां सरकार इसे आंतरिक सुरक्षा का नया मोर्चा मान रही है, वहीं विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक और बड़ा प्रहार बता रहा है।
राजस्थान में जूनियर इंजीनियर के 874 पदों पर बंपर भर्ती

राजस्थान में जूनियर इंजीनियर के 874 पदों पर बंपर भर्ती

Delight News
📅 17 Aug2026

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने जूनियर इंजीनियर के 874 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह इंजीनियरिंग क्षेत्र के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का एक शानदार अवसर है।

राजस्थान में जूनियर इंजीनियर के 874 पदों पर बंपर भर्ती
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने जूनियर इंजीनियर के 874 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह इंजीनियरिंग क्षेत्र के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का एक शानदार अवसर है।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया
राजस्थान के युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड यानी RSSB ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए जूनियर इंजीनियर भर्ती 2026 का बिगुल फूंक दिया है। इस भर्ती के जरिए विभिन्न विभागों में कुल 874 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। जो उम्मीदवार लंबे समय से इस भर्ती का इंतजार कर रहे थे, वे अब आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 16 अगस्त 2026 से हो चुकी है और उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक अपने फॉर्म सबमिट कर सकते हैं। समय रहते आवेदन करना समझदारी होगी ताकि अंतिम समय में सर्वर से जुड़ी किसी समस्या का सामना न करना पड़े।
पदों का विवरण और पात्रता मापदंड
इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के तहत कुल 874 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। बोर्ड द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में अलग-अलग विभागों के अनुसार पदों का विस्तृत विवरण दिया गया है। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा से जुड़ी सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए। सामान्य तौर पर इस पद के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग में डिग्री या डिप्लोमा होना अनिवार्य है। आयु सीमा के संबंध में भी नियमानुसार छूट का प्रावधान किया गया है, जिसकी पूरी जानकारी आधिकारिक विज्ञापन में उपलब्ध है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन फॉर्म भरने से पहले नोटिफिकेशन का एक बार गहराई से अध्ययन जरूर करें।
चयन प्रक्रिया और वेतनमान का खाका
राजस्थान में जूनियर इंजीनियर बनने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों को कड़े चयन दौर से गुजरना होगा। चयन प्रक्रिया में मुख्य रूप से लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाएगा, जिसके आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होगी। परीक्षा का सिलेबस और पैटर्न बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है ताकि अभ्यर्थी अपनी तैयारी को सही दिशा दे सकें। चयनित होने वाले युवाओं को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार बेहतरीन वेतनमान और अन्य भत्ते प्रदान किए जाएंगे। तकनीकी क्षेत्र में सरकारी नौकरी पाने की चाह रखने वाले ऊर्जावान युवाओं के लिए यह एक सुनहरा मौका है, जो उनके भविष्य को एक नई मजबूती दे सकता है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष: आधुनिक ड्रोन युद्ध और वायु रक्षा प्रणालियाँ

रूस-यूक्रेन संघर्ष: आधुनिक ड्रोन युद्ध और वायु रक्षा प्रणालियाँ

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📅 17 Aug2026

16 अगस्त 2026 को रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक रात में 822 यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया। यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध में मानवरहित प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की बढ़ती तीव्रता को दर्शाती है, जो वैश्विक सामरिक और रक्षा रणनीतियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

शीर्षक (Title): रूस-यूक्रेन संघर्ष: आधुनिक ड्रोन युद्ध और वायु रक्षा प्रणालियाँ
सारांश (Summary):
16 अगस्त 2026 को रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक रात में 822 यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया। यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध में मानवरहित प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की बढ़ती तीव्रता को दर्शाती है, जो वैश्विक सामरिक और रक्षा रणनीतियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
ड्रोन युद्ध का अभूतपूर्व पैमाना
रूस-यूक्रेन संघर्ष में मानवरहित प्रणालियों का उपयोग अब तक के सबसे बड़े और निर्णायक स्तर पर पहुँच चुका है। 16 अगस्त 2026 को रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा एक ही रात में 822 यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराने या बेअसर करने का आधिकारिक दावा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। पारंपरिक सैन्य हथियारों के स्थान पर अब कम लागत वाले मानवरहित लड़ाकू विमानों का बड़े पैमाने पर सामरिक और रणनीतिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे युद्ध की तीव्रता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की भूमिका
इतनी विशाल संख्या में हो रहे ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों, रडार नेटवर्क्स और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीकों की अनिवार्यता बढ़ गई है। रूसी वायु रक्षा बलों ने इस बड़े पैमाने के हमले को विफल करने में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। साथ ही, यह घटना आधुनिक सैन्य संघर्षों में सिग्नल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है, जहाँ दुश्मन के उपग्रह नेविगेशन सिस्टम और रेडियो संचार को जाम करना युद्ध का रुख मोड़ने में सक्षम है।
सामरिक और रणनीतिक निहितार्थ
यह घटना वैश्विक रक्षा रणनीतिकारों और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है। यह दर्शाती है कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक सीमाओं और पैदल सेना के साथ-साथ हाइब्रिड और ड्रोन युद्ध की तकनीकों पर केंद्रित होंगे। इस प्रकार के बड़े हमलों से यह भी स्पष्ट होता है कि राष्ट्रों को अपनी संप्रभुता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए त्रि-आयामी और बहुस्तरीय सुरक्षा ग्रिड विकसित करने की तीव्र आवश्यकता है।
दिमागी नक्सल पर रार चिदंबरम के बयान पर बीजेपी का पलटवार

दिमागी नक्सल पर रार चिदंबरम के बयान पर बीजेपी का पलटवार

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📅 17 Aug2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'दिमागी नक्सल' शब्द के इस्तेमाल के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के इस पर दिए बयान के जवाब में बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि बंदूकों वाला नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है, लेकिन विचारों के जरिए पनप रहा यह 'दिमागी नक्सलवाद' समाज और युवाओं के लिए कहीं अधिक खतरनाक साबित हो रहा है।

दिमागी नक्सल पर रार चिदंबरम के बयान पर बीजेपी का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'दिमागी नक्सल' शब्द के इस्तेमाल के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के इस पर दिए बयान के जवाब में बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि बंदूकों वाला नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है, लेकिन विचारों के जरिए पनप रहा यह 'दिमागी नक्सलवाद' समाज और युवाओं के लिए कहीं अधिक खतरनाक साबित हो रहा है।
शब्द युद्ध और बयानों की सियासत
'दिमागी नक्सल' शब्द के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानों की बाढ़ आ गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस शब्दावली पर तंज कसते हुए प्रतिक्रिया दी, जिसे बीजेपी ने तत्काल लपक लिया और कड़ा पलटवार किया। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष ऐसे संवेदनशील मुद्दों और शब्दावलियों का बचाव करके अपनी विचारधारात्मक सोच को उजागर कर रहा है।
शिक्षा क्षेत्र और एनजीओ पर निशाने का तर्क
इस विवाद को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी सांसद बृजलाल ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कुछ प्रोफेसरों, शिक्षकों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, ये वर्ग 'दिमागी नक्सल' के रूप में काम करते हुए शिक्षण संस्थानों और सामाजिक मंचों के माध्यम से युवाओं के मन में हिंसक और राष्ट्र-विरोधी विचारधारा का बीज बो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बंदूक उठाने वाले उग्रवादियों से निपटना आसान है, लेकिन वैचारिक रूप से जहर घोलने वाले ये तत्व समाज को अंदर से खोखला करते हैं।
सोशल मीडिया पर व्यंग्य और बढ़ती चर्चा
यह बहस केवल बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी तेजी से ट्रेंड करने लगी है। इंटरनेट पर 'दिमागी नक्सल जनता पार्टी' जैसे व्यंग्यात्मक अकाउंट्स और मीम्स की बाढ़ आ गई है, जो इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण से चुटकी ले रहे हैं। आम लोग और विश्लेषक भी इस नए वैचारिक युद्ध पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं, जिससे यह विषय डिजिटल स्पेस में मुख्य चर्चा का केंद्र बन चुका है।
बंदूकों से ज्यादा खतरनाक वैचारिक हमला
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष और क्षेत्रीय नेताओं का एक सुर में मानना है कि जमीनी स्तर पर बंदूक वाले नक्सलवाद को सुरक्षा बलों ने काफी हद तक ध्वस्त कर दिया है। हालांकि, उनका तर्क है कि अब जंग विचारों के स्तर पर लड़ी जा रही है। बीजेपी का स्पष्ट संदेश है कि जब तक इस 'दिमागी नक्सलवाद' का जड़ से सफाया नहीं होता, तब तक देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को लगातार खतरा बना रहेगा।

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