
रेलवे में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार मौका
भारतीय रेलवे भर्ती बोर्ड ने सेक्शन कंट्रोलर के पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए रेलवे में करियर बनाने का सुनहरा अवसर सामने आया है।
भारतीय रेलवे भर्ती बोर्ड ने सेक्शन कंट्रोलर के पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए रेलवे में करियर बनाने का सुनहरा अवसर सामने आया है।
रेलवे में सेक्शन कंट्रोलर के पदों पर निकली बंपर भर्तियां
भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद रोमांचक खबर सामने आई है। रेलवे भर्ती बोर्ड यानी आरआरबी ने सेक्शन कंट्रोलर (CEN 03/2026) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। जो उम्मीदवार लंबे समय से रेलवे में एक प्रतिष्ठित और जिम्मेदार पद की तलाश में थे, उनके लिए यह बेहतरीन मौका है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
आवेदन की तिथियां और महत्वपूर्ण समयसीमा
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 15 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। योग्य उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के लिए 14 अगस्त 2026 तक का समय है। अंतिम समय में वेबसाइट पर आने वाले भारी ट्रैफिक और सर्वर की समस्याओं से बचने के लिए यह सलाह दी जाती है कि उम्मीदवार समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। तय की गई समयसीमा के बाद किसी भी स्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
पात्रता और आयु सीमा की जरूरी शर्तें
सेक्शन कंट्रोलर के पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास बोर्ड द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है। इस भर्ती से जुड़ी आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, और अन्य सभी पात्रता मानदंडों की विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ना आवश्यक है। रेलवे के नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी, जिसकी पुष्टि भी आधिकारिक अधिसूचना से की जा सकती है।
चयन प्रक्रिया और आवेदन करने का तरीका
इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और अन्य निर्धारित चरणों के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर संपन्न होगी। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार भारतीय रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन मोड में अपना आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों को अपने पास तैयार रखें ताकि फॉर्म भरते समय किसी प्रकार की असुविधा न हो।

लाल किले से पीएम मोदी का ऐतिहासिक 13वां संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस वर्ष का समारोह लाल किले पर पहली बार 'वंदे मातरम' के गायन के साथ और भी यादगार बन गया। देश के इतिहास में अब केवल जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ही उनसे आगे हैं।
खबर का निचोड़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस वर्ष का समारोह लाल किले पर पहली बार 'वंदे मातरम' के गायन के साथ और भी यादगार बन गया। देश के इतिहास में अब केवल जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ही उनसे आगे हैं।
लाल किले की प्राचीर से रचा गया नया इतिहास
स्वतंत्रता दिवस का यह पावन अवसर देश के लिए एक गौरवशाली क्षण बनकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। यह लगातार 13वां मौका था जब पीएम मोदी ने देश का नेतृत्व करते हुए लाल किले से झंडा फहराया है। पूरा देश इस पल का साक्षी बना और चारों तरफ देशभक्ति का एक नया उत्साह देखने को मिला।
पहली बार गूंजा 'वंदे मातरम' का स्वर
इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह कई मायनों में बेहद खास और अलग रहा। लाल किले के प्राचीर से पहली बार औपचारिक रूप से 'वंदे मातरम' का गायन हुआ। राष्ट्रीय गीत के इन अमर सुरों ने वहां मौजूद हर नागरिक और टीवी स्क्रीन के सामने बैठे करोड़ों भारतीयों के दिलों में देशप्रेम की एक नई ऊर्जा भर दी। इस ऐतिहासिक क्षण ने समारोह की भव्यता और राष्ट्रीय गौरव को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया।
पूर्व प्रधानमंत्रियों के खास क्लब में मोदी
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सबसे ज्यादा बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में प्रधानमंत्री मोदी अब देश के दिग्गज नेताओं की सूची में और ऊपर आ गए हैं। लाल किले पर 13वीं बार तिरंगा फहराकर उन्होंने भारतीय राजनीति के एक बड़े कीर्तिमान को छू लिया है। उनसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड केवल दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के नाम दर्ज है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सर्वाधिक 17 बार और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 16 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया था।
राष्ट्रीय गौरव और निरंतरता का प्रतीक
लाल किले की प्राचीर से दिया गया यह संबोधन न केवल सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है, बल्कि देश के भविष्य का रोडमैप भी तय करता है। लगातार 13 वर्षों तक राष्ट्र को इस ऐतिहासिक स्थान से संबोधित करना राजनीतिक निरंतरता और जन-विश्वास का बड़ा प्रतीक है। 80वें स्वतंत्रता दिवस का यह भव्य आयोजन देश के इतिहास के पन्नों में एक अमर अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

क्रिकेट इतिहास के दो ध्रुव: जब एक ने रचा इतिहास, तो दूसरे का सफर थमा
14 अगस्त का दिन क्रिकेट के इतिहास में बेहद खास है। साल 1990 में इसी दिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ा था, जिसने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। वहीं, महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने 1948 में इसी तारीख को अपने ऐतिहासिक टेस्ट करियर की आखिरी पारी खेली थी।
> संक्षेप:
> 14 अगस्त का दिन क्रिकेट के इतिहास में बेहद खास है। साल 1990 में इसी दिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ा था, जिसने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। वहीं, महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने 1948 में इसी तारीख को अपने ऐतिहासिक टेस्ट करियर की आखिरी पारी खेली थी।
>
क्रिकेट का स्वर्णिम 14 अगस्त
क्रिकेट की दुनिया में कई तारीखें रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज हैं, लेकिन 14 अगस्त का दिन खेल प्रेमियों के लिए एक अलग ही भावुक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह तारीख एक ओर जहां भारतीय क्रिकेट के सबसे चमकीले सितारे के उदय की गवाही देती है, वहीं दूसरी ओर खेल के सबसे महान लीजेंड के विदाई की कहानी भी कहती है। इतिहास के पन्नों में दर्ज इन दो पलों ने खेल जगत की तकदीर और तस्वीर दोनों पर अमिट छाप छोड़ी है।
सचिन का वह ऐतिहासिक पहला शतक
साल 1990 का इंग्लैंड दौरा भारतीय क्रिकेट के लिए संघर्ष भरा था, लेकिन मैनचेस्टर टेस्ट ने इतिहास रच दिया। भारतीय टीम मुश्किल परिस्थिति में थी और मैच बचाने की चुनौती सामने थी। ऐसे में महज 17 साल और 112 दिन की उम्र में क्रीज पर उतरे सचिन तेंदुलकर ने अपने बल्ले से वह कारनामा कर दिखाया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सचिन ने दबाव से भरी परिस्थितियों में नाबाद 119 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली। इस जादुई पारी की बदौलत भारत ने हारी हुई बाजी पलटते हुए टेस्ट मैच को ड्रॉ करा लिया। यह सिर्फ एक शतक नहीं था, बल्कि उस युग की शुरुआत थी जिसने आने वाले दो दशकों तक विश्व क्रिकेट पर राज करना था।
डॉन ब्रैडमैन की आखिरी पारी का अंत
ठीक इसके उलट, ठीक इसी तारीख यानी 14 अगस्त 1948 को ओवल के मैदान पर खेल के सबसे महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन अपने करियर की आखिरी पारी खेलने उतरे। क्रिकेट इतिहास के निर्विवाद सम्राट ब्रैडमैन का टेस्ट औसत 99.94 का था, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है। उनके इस आखिरी मैच को लेकर क्रिकेट जगत में जबरदस्त उत्साह था क्योंकि उनके करियर का औसत 100 तक पहुंचने के लिए केवल चार रनों की दरकार थी। लेकिन क्रिकेट की अनिश्चितता ने यहां एक क्रूर मजाक किया। इंग्लैंड के एरिक हॉलिड्स की गेंद पर ब्रैडमैन बिना खाता खोले यानी शून्य पर बोल्ड हो गए। उस एक डक ने उनके जादुई औसत को 99.94 पर हमेशा के लिए थाम दिया।
दो अलग छोर और अनमोल विरासत
क्रिकेट के पन्नों को पलटें तो 14 अगस्त का यह संयोग बेहद दिलचस्प नजर आता है। एक तरफ जहां एक युवा खिलाड़ी अपने करियर के शिखर की पहली सीढ़ी पर पैर रख रहा था, वहीं दूसरी तरफ खेल का सबसे बड़ा उस्ताद अपने सुनहरे सफर को अलविदा कह रहा था। सचिन के उस पहले शतक ने भारत को एक नया भविष्य दिया, जबकि ब्रैडमैन के शून्य ने दुनिया को यह अहसास कराया कि खेल में हर कहानी का एक अंतिम मुकाम होता है। ये दोनों घटनाएं मिलकर क्रिकेट के उस फलक को पूरा करती हैं जहां हर विदाई एक नई शुरुआत की नींव रखती है।

गांधी नाम पर बवाल: राहुल की टिप्पणी पर भड़के राजनाथ
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और पीएम मोदी को लेकर राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीखा हमला बोला है। राजनाथ सिंह ने राहुल के बयान को ‘निम्नस्तरीय’ और नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के खिलाफ बताया। उन्होंने गांधी सरनेम का जिक्र करते हुए इस बयान पर गहरी आपत्ति जताई है।
खबर का निचोड़
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और पीएम मोदी को लेकर राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीखा हमला बोला है। राजनाथ सिंह ने राहुल के बयान को ‘निम्नस्तरीय’ और नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के खिलाफ बताया। उन्होंने गांधी सरनेम का जिक्र करते हुए इस बयान पर गहरी आपत्ति जताई है।
संसद से सड़क तक जुबानी जंग तेज
देश की राजनीति में बयानों के तीर अक्सर चलते रहते हैं, लेकिन जब बात अंतरराष्ट्रीय नेताओं और संवैधानिक पदों की मर्यादा से जुड़ जाती है, तो पारा चढ़ना लाजमी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता और संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर दिए गए बयान को लेकर राजनाथ सिंह ने गहरी नाराजगी जताई है।
राजनाथ सिंह का तीखा वार
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी के बयान को बेहद शर्मनाक और निम्नस्तरीय करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के नेता प्रतिपक्ष से इस तरह के सतही बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती। राजनाथ सिंह के मुताबिक, राहुल के इस बयान से न केवल नेता प्रतिपक्ष पद की गरिमा प्रभावित हुई है, बल्कि राजनीतिक बहस के स्तर में भी गिरावट आई है। उन्होंने राजनीतिक मर्यादा की याद दिलाते हुए राहुल गांधी के रवैये पर सवाल खड़े किए।
'गांधी' नाम पर उठाया सवाल
राजनाथ सिंह का सबसे बड़ा हमला राहुल गांधी के नाम से जुड़े 'गांधी' सरनेम को लेकर था। उन्होंने कहा, "मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि जिस व्यक्ति के नाम के आगे 'गांधी' शब्द लगा हो, वह इतना गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक बयान कैसे दे सकता है!" राजनाथ सिंह के इस रुख ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि 'गांधी' नाम का अपना एक ऐतिहासिक और नैतिक महत्व माना जाता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय रिश्तों और मर्यादा का हवाला
विदेश नीति और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के संदर्भ में इस तरह की टिप्पणियों को राजनाथ सिंह ने देश की साख के लिए भी नुकसानदेह बताया। उनका मानना है कि जब किसी मित्र देश के शीर्ष नेता से जुड़ा विषय हो, तो घरेलू राजनीति की खींचतान से परे हटकर परिपक्वता दिखाई जानी चाहिए। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा का संयम और मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है, खासकर उन नेताओं के लिए जो बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे हैं।

मनन मिश्रा विवाद: बार काउंसिल अध्यक्ष और सांसद के इस्तीफे की मांग तेज
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा के एक हालिया आदेश ने कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषक और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके द्वारा उनके इस्तीफे की मांग के बाद यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
खबर का निचोड़
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा के एक हालिया आदेश ने कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषक और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके द्वारा उनके इस्तीफे की मांग के बाद यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
विवाद का केंद्र बने मनन मिश्रा
कानूनी बिरादरी और सार्वजनिक मंचों पर इस समय देश की शीर्ष कानूनी संस्था, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनन मिश्रा के नाम की ही चर्चा है। उनके द्वारा जारी किए गए एक हालिया आदेश ने अचानक ऐसा बवंडर खड़ा कर दिया है कि चारों तरफ से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक, इस फैसले की आलोचना हो रही है। इस विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब प्रमुख विश्लेषक अभिजीत दीपके ने सीधे तौर पर मनन मिश्रा से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग कर दी। इस कदम ने मामले को और अधिक गरमा दिया है।
छात्र राजनीति से संसद भवन तक का सफर
बिहार के गोपालगंज जिले से ताल्लुक रखने वाले मनन मिश्रा भारतीय विधि व्यवस्था में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनकी प्रारंभिक कानूनी शिक्षा पटना लॉ कॉलेज से हुई, जहां से उन्होंने एलएलबी (LLB) की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट में अपनी वकालत की शुरुआत की और अपनी तीक्ष्ण कानूनी समझ के दम पर देश की सर्वोच्च अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट के रूप में स्थापित हुए। कानूनी करियर के साथ-साथ उनका झुकाव राजनीति की तरफ भी रहा। साल 2010 में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में बिहार की बैकुंठपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। वर्तमान में वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) से राज्यसभा सांसद हैं।
अभिजीत दीपके की तीखी प्रतिक्रिया
आदेश के सार्वजनिक होते ही अभिजीत दीपके ने खुलकर अपनी बात रखी और मनन मिश्रा के निर्णय पर सवाल उठाए। दीपके ने तर्क दिया कि कानून और न्याय की गरिमा बनाए रखने वाली संस्था के प्रमुख का यह आदेश निष्पक्षता और न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से मांग की कि मनन मिश्रा को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। इस मांग के सामने आने के बाद कानूनी और राजनीतिक क्षेत्रों में बहस और तेज हो गई है।
आगे क्या होगा?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इतिहास में मनन मिश्रा लगातार कई बार अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। लेकिन इस मौजूदा विवाद ने उनकी प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक निष्पक्षता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां उनके समर्थक इसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी और कानूनी बिरादरी के कुछ वर्ग इस फैसले को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं। फिलहाल यह मामला शांत होता नहीं दिख रहा है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन, निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android Appहमारा आधिकारिक एंड्रॉइड एप्लिकेशन Google Play Store पर लाइव हो चुका है। दिए गए बटन पर क्लिक करके अभी डाउनलोड करें!