
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर की फजीहत, पार्क में 'जंतर-मंतर सीजन 2' की बैठक के दौरान लोगों ने खदेड़ा
दिल्ली की एक रिहायशी सोसाइटी के पार्क में 'जंतर-मंतर सीजन 2' की रणनीति बना रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने उन्हें पार्क से बाहर खदेड़ते हुए साफ कहा कि यहां कोई राजनीतिक नौटंकी नहीं चलेगी।
खबर का निचोड़
दिल्ली की एक रिहायशी सोसाइटी के पार्क में 'जंतर-मंतर सीजन 2' की रणनीति बना रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने उन्हें पार्क से बाहर खदेड़ते हुए साफ कहा कि यहां कोई राजनीतिक नौटंकी नहीं चलेगी।
दिल्ली की सोसाइटी में राजनीतिक बैठक बनी फजीहत का कारण
राजधानी दिल्ली के राजनीतिक हलकों में अपनी अलग कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को हाल ही में एक अप्रत्याशित परिस्थिति का सामना करना पड़ा। बुधवार को दीपके अपने समर्थकों के साथ दिल्ली की एक रिहायशी सोसाइटी के पार्क में पहुंचे थे। उनका उद्देश्य आगामी राजनीतिक अभियान 'जंतर-मंतर सीजन 2' की रूपरेखा तैयार करना और रणनीति बनाना था। लेकिन पार्क में मौजूद आम नागरिकों को उनकी यह गतिविधि रास नहीं आई।
आम नागरिकों का फूटा गुस्सा, कहा- यह पार्क है, कोई धरना स्थल नहीं
पार्क में शांतिपूर्ण माहौल की उम्मीद लेकर आए स्थानीय लोग दीपके और उनकी टीम की मौजूदगी से बेहद नाराज हो गए। देखते ही देखते मौके पर भारी बहस शुरू हो गई। रिहायशी इलाके के निवासियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक पार्क बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने की जगह हैं, किसी राजनीतिक ड्रामेबाजी या रणनीतिक बैठकों का केंद्र नहीं। लोगों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने अभिजीत दीपके और उनकी टीम को तुरंत पार्क खाली करने की चेतावनी दे दी।
'जंतर-मंतर सीजन 2' की योजना पर फिरा पानी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्थानीय निवासियों ने सख्त रवैया अपनाते हुए अभिजीत दीपके से कहा, "यह जंतर-मंतर नहीं है, यहां आपकी नौटंकी बिल्कुल नहीं चलेगी।" लोगों के उग्र विरोध और तीखे तेवरों को देखते हुए दीपके और उनके समर्थकों को बिना किसी बहस के उल्टे पांव वहां से जाना पड़ा। जिस 'जंतर-मंतर सीजन 2' की शुरुआत वे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में करने की सोच रहे थे, उसका पहला कदम ही विवादों में घिर गया।
रिहायशी इलाकों में राजनीतिक गतिविधियों पर बढ़ता जन-आक्रोश
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आम जनता अब अपने रिहायशी क्षेत्रों में किसी भी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप या नौटंकी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि सार्वजनिक स्थानों पर जनसमर्थन जुटाने की उनकी कोशिश को खुद जनता ने ही सिरे से खारिज कर दिया। फिलहाल इस पूरे वाकये का वीडियो और चर्चाएं सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।

कंगना का नसीरुद्दीन शाह पर वार: 'पाकिस्तान प्रेम' पर उठाए सवाल
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को 'लोमड़ी' कहने के अपने बयान को सही ठहराया है। कंगना का कहना है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना गलत है। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों पर हमेशा 'पाकिस्तान प्रेम' में डूबे रहने का गंभीर आरोप भी लगाया।
खबर का निचोड़
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को 'लोमड़ी' कहने के अपने बयान को सही ठहराया है। कंगना का कहना है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना गलत है। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों पर हमेशा 'पाकिस्तान प्रेम' में डूबे रहने का गंभीर आरोप भी लगाया।
बयान पर बवाल: कंगना ने क्यों कहा 'लोमड़ी'?
बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री कंगना रनौत अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को लेकर दिए गए अपने पुराने बयान पर सफाई दी और उसे पूरी तरह जायज ठहराया। कंगना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के लिए 'लोमड़ी' शब्द का इस्तेमाल क्यों किया था। कंगना के मुताबिक, किसी भी देश के प्रधानमंत्री के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करना स्वीकार्य नहीं है और नसीरुद्दीन शाह का रवैया बेहद आपत्तिजनक था।
'पाकिस्तान प्रेम' पर साधा निशाना
कंगना रनौत ने केवल नसीरुद्दीन शाह पर हमला नहीं बोला, बल्कि उन्होंने हिंदी फिल्म उद्योग के एक वर्ग की मानसिकता पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि बॉलीवुड की फिल्मों में और कलाकारों की बातों में 'पाकिस्तान प्रेम' कब खत्म होगा? कंगना ने कहा कि जब भी देखो, कुछ लोग पाकिस्तान के प्रति अपनी सहानुभूति और प्यार जताने में ही लगे रहते हैं। उनका यह बयान फिल्म जगत में देश भक्ति और पड़ोसी देश के साथ संबंधों को लेकर छिड़ी बहस को एक बार फिर गरमा गया है।
बयानों की पुरानी जंग
यह पहला मौका नहीं है जब कंगना रनौत और नसीरुद्दीन शाह के बीच इस तरह की जुबानी जंग देखने को मिली है। इससे पहले भी दोनों कलाकार कई सामाजिक, राजनीतिक और बॉलीवुड से जुड़े मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं। नसीरुद्दीन शाह जहां अक्सर देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठाते रहे हैं, वहीं कंगना रनौत केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के समर्थन में खुलकर बोलती नजर आती हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
कंगना का यह ताजा बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जहां एक तरफ कंगना के प्रशंसक राष्ट्रवाद के मुद्दे पर उनके स्टैंड की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नसीरुद्दीन शाह के समर्थक कंगना के शब्दों के चयन पर सवाल उठा रहे हैं। कंगना का यह बयान आने वाले दिनों में फिल्म इंडस्ट्री के भीतर और बाहर राजनीतिक गलियारों में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

ISRO Recruitment 2026: असिस्टेंट और क्लर्क के पदों पर आवेदन शुरू
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने असिस्टेंट, जूनियर पर्सनल असिस्टेंट, अपर डिवीजन क्लर्क और स्टेनोग्राफर के विभिन्न पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 16 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अंतरिक्ष विभाग में सरकारी नौकरी पाने के लिए यह एक बेहतरीन अवसर है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने असिस्टेंट, जूनियर पर्सनल असिस्टेंट, अपर डिवीजन क्लर्क और स्टेनोग्राफर के विभिन्न पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 16 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अंतरिक्ष विभाग में सरकारी नौकरी पाने के लिए यह एक बेहतरीन अवसर है।
अंतरिक्ष संस्थान में करियर का सुनहरा मौका
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने देश के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए करियर का एक और स्वर्णिम द्वार खोल दिया है। देश की इस अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसी के केंद्रीय भर्ती बोर्ड ने विभिन्न प्रशासनिक और सहायक पदों पर बंपर भर्तियों का ऐलान किया है। इस भर्ती अभियान के तहत असिस्टेंट, जूनियर पर्सनल असिस्टेंट, अपर डिवीजन क्लर्क और स्टेनोग्राफर के पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। यदि आप देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी और वैज्ञानिक संस्थान का हिस्सा बनकर अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन अवसर है।
ऑनलाइन आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां
इस भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन विंडो 27 जुलाई 2026 को खोली गई थी। आवेदन करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। चूंकि अब आवेदन की आखिरी तारीख बेहद करीब आ चुकी है, इसलिए उम्मीदवारों के पास बहुत कम समय बचा है। अंतिम समय में सर्वर या तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए इच्छुक और योग्य युवाओं को तुरंत आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन फॉर्म सफलतापपूर्वक जमा कर देना चाहिए।
पात्रता, शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा
विभिन्न पदों के लिए विभाग द्वारा अलग-अलग शैक्षणिक और तकनीकी योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। आमतौर पर इन प्रशासनिक पदों के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, उम्मीदवारों को कंप्यूटर संचालन और टाइपिंग में भी पारंगत होना आवश्यक है। आयु सीमा के संबंध में स्पष्ट और विस्तृत जानकारी आधिकारिक विज्ञापन में उपलब्ध कराई गई है, जिसमें आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमानुसार आयु में छूट का विशेष प्रावधान भी दिया गया है। आवेदन करने से पहले सभी शर्तों को भली-भांति जांच लेना बेहद जरूरी है।
चयन प्रक्रिया और आकर्षक वेतनमान
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की इन रिक्तियों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष होती है। इसमें उम्मीदवारों के लिए लिखित परीक्षा और उसके बाद कौशल यानी स्किल टेस्ट आयोजित किया जाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता और तकनीकी दक्षता का मूल्यांकन किया जाता है। अंतिम रूप से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को निर्धारित मानदंडों के आधार पर एक आकर्षक वेतनमान और अन्य सरकारी भत्ते प्रदान किए जाते हैं, जिससे यह नौकरी युवाओं के लिए बेहद आकर्षक बन जाती है।

अवैध निर्माण और कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का चाबुक
सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों में अवैध निर्माण और वाणिज्यिक गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली, पटना और लखनऊ समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं, जिससे संपत्ति मालिकों में हड़कंप मच गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों में अवैध निर्माण और वाणिज्यिक गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली, पटना और लखनऊ समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं, जिससे संपत्ति मालिकों में हड़कंप मच गया है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और एक्शन
देशभर के रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही वाणिज्यिक गतिविधियों और बेतहाशा अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट ने अब तक का सबसे सख्त तेवर अपना लिया है। अदालत के इस तीखे रुख के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह हरकत में आ गया है।
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर पटना, लखनऊ, गुरुग्राम और जम्मू तक युद्ध स्तर पर तोड़फोड़ और सीलिंग अभियानों की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है। शीर्ष अदालत की इस ऐतिहासिक सख्ती ने उन तमाम लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है, जिन्होंने आवासीय क्षेत्रों को कमर्शियल हब में तब्दील कर रखा है या फिर नियमों को ताक पर रखकर अवैध इमारतें खड़ी कर दी हैं। कानून का शिकंजा अब कसता जा रहा है।
शहरों में युद्ध स्तर पर सीलिंग और तोड़फोड़
वर्तमान स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्थानीय प्रशासन और विकास प्राधिकरणों ने अवैध निर्माणों और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने के लिए कमर कस ली है। दिल्ली के कई संकरे और रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति चल रही दुकानों व दफ्तरों पर पहले ही ताले लगने शुरू हो चुके हैं।
वहीं, पटना और लखनऊ के प्रशासनिक गलियारों में भी नगर निगमों ने गैर-कानूनी ढंग से चल रहे व्यावसायिक संस्थानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हरियाणा का गुरुग्राम हो या फिर जम्मू, दोनों ही स्थानों पर नगर निगमों के अतिक्रमण विरोधी अभियान तेज गति से चल रहे हैं, जहां रोजाना औचक निरीक्षण और भारी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।
संपत्ति मालिकों में बढ़ा खौफ और संकट
सर्वोच्च न्यायालय के इस कड़े निर्देश के बाद आम नागरिकों, दुकानदारों और संपत्ति मालिकों के बीच भारी चिंता का माहौल बन गया है। जिन लोगों ने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई लगाकर रिहायशी क्षेत्रों में संपत्तियां खरीदी थीं या वहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की थीं, वे अब भारी वित्तीय नुकसान की आशंका से गहरे सदमे में हैं।
कई इलाकों में तो लोग खुद ही अपने हाथों से अवैध निर्माणों को हटाते नजर आ रहे हैं ताकि प्रशासन के भारी जुर्माने, जब्ती और बुलडोजर की कार्रवाई से बचा जा सके। प्रशासनिक तंत्र की इस आक्रामक कार्रवाई से अनधिकृत निर्माणकर्ताओं के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

100 मुद्दे हैं, क्या सभी पर एक ही दिन चर्चा करें
झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि हर मुद्दे को एक ही समय पर नहीं उठाया जा सकता। खरगे के इस बयान ने राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक नई बहस छेड़ दी है।
संक्षेप
झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि हर मुद्दे को एक ही समय पर नहीं उठाया जा सकता। खरगे के इस बयान ने राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक नई बहस छेड़ दी है।
छात्रों के प्रदर्शन पर खरगे का रुख
झारखंड में युवाओं का गुस्सा और छात्रों पर हुआ पुलिस लाठीचार्ज इस समय राज्य की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। जब इस संवेदनशील विषय पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उनका रुख बेहद व्यावहारिक लेकिन आक्रामक रहा। खरगे ने सवाल का जवाब सीधे तरीके से न देकर एक कड़ा तर्क सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश और राज्यों में सैकड़ों मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन हर विषय पर एक ही दिन में चर्चा होना संभव नहीं है।
एक साथ सैकड़ों मुद्दों पर चर्चा संभव नहीं
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए खरगे ने स्पष्ट लहजे में कहा, "अगर सैकड़ों मुद्दे हों तो क्या सभी पर एक साथ चर्चा की जाती है? क्या हम हर मुद्दे को उसी दिन उठाते हैं?" उनके इस बयान का सीधा संदेश यह था कि विपक्ष या सरकार अपने राजनीतिक और प्रशासनिक एजेंडे को प्राथमिकताओं के आधार पर तय करती है। किसी एक घटना को लेकर पूरी कार्यप्रणाली या अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
झारखंड में लाठीचार्ज से बढ़ा राजनीतिक पारा
गौरतलब है कि झारखंड में विभिन्न मांगों और प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितताओं को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इस घटना के बाद से ही राज्य की गठबंधन सरकार, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है, विपक्ष के निशाने पर है। छात्रों के प्रति पुलिस की इस बर्बरता पर सत्ता पक्ष से सख्त रुख की उम्मीद की जा रही थी। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान कई राजनीतिक मायने निकाल रहा है।
प्राथमिकताओं की राजनीति और राष्ट्रीय बहस
खरगे का यह तर्क केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाने की कोशिश है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनहित के संवेदनशील मुद्दों और युवाओं के आक्रोश से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। छात्रों पर हुए बल प्रयोग को 'एक अलग मुद्दा' बताकर अलग थलग करने की रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले दिनों में खरगे के इस बयान को लेकर झारखंड विधानसभा से लेकर संसद तक तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
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