
राहुल गांधी के हाथ से अनशन तोड़ना चाहते थे सोनम वांगचुक, नहीं मिला जवाब
लद्दाख के प्रमुख एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने खुलासा किया है कि वह अपना अनशन कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाथों खत्म करना चाहते थे। 'इंडिया टुडे' को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनकी सहयोगी गीतांजलि इसके लिए प्रयासरत थीं, लेकिन राहुल गांधी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला।
खबर का निचोड़
लद्दाख के प्रमुख एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने खुलासा किया है कि वह अपना अनशन कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाथों खत्म करना चाहते थे। 'इंडिया टुडे' को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनकी सहयोगी गीतांजलि इसके लिए प्रयासरत थीं, लेकिन राहुल गांधी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला।
अनशन और राहुल गांधी से आस
लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर मुखर रहने वाले प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका आंदोलन नहीं, बल्कि उनका एक बड़ा राजनीतिक और व्यक्तिगत खुलासा है। सोनम वांगचुक ने बताया है कि वह अपना अनशन देश के मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी के हाथों जल पीकर समाप्त करना चाहते थे।
वांगचुक का मानना था कि विपक्ष के एक प्रमुख चेहरे की मौजूदगी से लद्दाख के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलती। इसके लिए उनकी टीम ने बाकायदा प्रयास भी किए, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
'नहीं मिला कोई सकारात्मक जवाब'
'इंडिया टुडे' से बातचीत करते हुए सोनम वांगचुक ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "मेरी सहयोगी गीतांजलि मेरी ही इच्छा पर काम कर रही थीं। वह लगातार कोशिश में जुटी थीं कि राहुल गांधी आएँ और मेरे हाथ में पानी का गिलास थमाकर अनशन खत्म कराएँ।"
हालांकि, वांगचुक के अनुसार कांग्रेस की तरफ से इस प्रस्ताव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल गांधी या उनके कार्यालय की ओर से इस संबंध में कोई भी सकारात्मक जवाब नहीं मिला। पूरी कोशिशों के बावजूद विपक्षी नेता की ओर से मिली इस खामोशी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
लद्दाख की आवाज़ और राजनीतिक उपेक्षा
सोनम वांगचुक पिछले काफी समय से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। उनका अनशन इसी संघर्ष का एक अहम हिस्सा था। राहुल गांधी से संपर्क साधने की कोशिश के पीछे मकसद यही था कि लद्दाख की संवेदनशील स्थिति पर देश का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
विपक्ष अमूमन ऐसे जनांदोलनों के साथ खड़ा दिखने का प्रयास करता है, लेकिन वांगचुक के इस दावे के बाद कांग्रेस की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर भी चर्चा छिड़ गई है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में हलचल
इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक तरफ जहाँ सोनम वांगचुक के समर्थक इस बात से आहत हैं कि देश के एक प्रमुख एक्टिविस्ट की बात को अनदेखा किया गया, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी की इस मुद्दे पर चुप्पी को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने मायने निकाल रहे हैं।
बिना किसी जवाब के खत्म हुए इस प्रयास ने लद्दाख के आंदोलन और राष्ट्रीय राजनीति के बीच के फासले को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

श्रेया कालरा बनीं 'लॉकअप 2' की विजेता, ट्रॉफी के साथ जीती 1 करोड़ की राशि
लॉकअप: सत्य सजा' के दूसरे सीजन को अपना नया विजेता मिल गया है। शानदार खेल और बेहतरीन रणनीति के दम पर श्रेया कालरा ने इस शो की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। ट्रॉफी के साथ ही उन्होंने 1 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नकद पुरस्कार भी जीता। दर्शकों ने उनके इस सफर को काफी सराहा है।
'लॉकअप: सत्य सजा' के दूसरे सीजन को अपना नया विजेता मिल गया है। शानदार खेल और बेहतरीन रणनीति के दम पर श्रेया कालरा ने इस शो की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। ट्रॉफी के साथ ही उन्होंने 1 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नकद पुरस्कार भी जीता। दर्शकों ने उनके इस सफर को काफी सराहा है।
रोमांचक मुकाबले में मारी बाजी
रियलिटी शो 'लॉकअप: सत्य सजा' का दूसरा सीजन शुरुआत से ही काफी धमाकेदार रहा। शो में हर दिन नए मोड़ और कड़े टास्क देखने को मिले, जिन्होंने दर्शकों को टीवी स्क्रीन से बांधे रखा। इस पूरे सीजन में प्रतियोगियों के बीच तीखी बहस और कड़ा मुकाबला देखने को मिला। लेकिन तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए श्रेया कालरा ने अपने संयम और समझदारी से हर पड़ाव पार किया और अंततः इस सीजन की विनर बनीं।
1 करोड़ रुपये और चमचमाती ट्रॉफी
ग्रैंड फिनाले का मुकाबला बेहद रोमांचक था, जहां हर किसी की नजरें विजेता के नाम पर टिकी थीं। जब श्रेया कालरा के नाम की घोषणा हुई, तो पूरे सेट पर जश्न का माहौल बन गया। उन्हें 'लॉकअप 2' की चमचमाती ट्रॉफी के साथ 1 करोड़ रुपये की बड़ी इनामी राशि सौंपी गई। यह पल श्रेया के करियर का एक बड़ा और यादगार माइलस्टोन साबित हुआ है।
दर्शकों का मिला भरपूर प्यार
'लॉकअप 2' के इस सीजन में श्रेया कालरा का गेम प्लान और उनका बेबाक अंदाज फैंस को खूब पसंद आया। शो के दौरान उन्होंने न सिर्फ अपने टास्क शानदार तरीके से पूरे किए, बल्कि हर मुश्किल स्थिति में खुद को साबित भी किया। उनके इस अंदाज ने उन्हें वोटिंग में भी सबसे आगे रखा, जिसका नतीजा आज उनकी इस शानदार जीत के रूप में सबके सामने है। सोशल मीडिया पर भी फैंस उन्हें इस उपलब्धि के लिए लगातार बधाई दे रहे हैं।

जंतर-मंतर को दहलाने की साजिश नाकाम, ISI के नौ गिरफ्तार
पंजाब पुलिस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया है। आईएसआई समर्थित इस मॉड्यूल के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल हैं। इनके पास से हथियार और पेट्रोल बम बरामद हुए हैं, जो स्वतंत्रता दिवस से पहले देश को दहलाने की फिराक में थे।

विराट का भक्ति मार्ग: मोहम्मद शमी बोले— 'किस बात की आपत्ति?'
विराट कोहली के आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के पास बार-बार जाने पर भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी का बड़ा बयान सामने आया है। शमी ने कोहली का समर्थन करते हुए कहा कि किसी की व्यक्तिगत आस्था और भक्ति मार्ग पर सवाल उठाना गलत है। इस सकारात्मक कदम से किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
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विराट कोहली के आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के पास बार-बार जाने पर भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी का बड़ा बयान सामने आया है। शमी ने कोहली का समर्थन करते हुए कहा कि किसी की व्यक्तिगत आस्था और भक्ति मार्ग पर सवाल उठाना गलत है। इस सकारात्मक कदम से किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
कोहली का भक्ति मार्ग और शमी की खरी-खरी
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली बीते कुछ समय से अपनी बल्लेबाजी के साथ-साथ अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर भी काफी चर्चा में हैं। उन्हें अक्सर वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन करते और उनका आशीर्वाद लेते देखा गया है। जहां सोशल मीडिया पर इस विषय पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं, वहीं अब भारतीय टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने इस पूरे मामले पर अपनी बेबाक राय रखकर आलोचकों को करारा जवाब दिया है।
"यह तो अच्छी बात है, किसी को क्या दिक्कत?"
एक बातचीत के दौरान जब शमी से विराट कोहली के प्रेमानंद महाराज के पास बार-बार जाने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के कोहली का पक्ष लिया। शमी ने बेहद सीधे शब्दों में कहा कि किसी की व्यक्तिगत आस्था पर उंगली उठाने की कोई वजह नहीं बनती।
शमी का मानना है कि ईश्वर की भक्ति में लीन होना या किसी संत के सानिध्य में शांति तलाशना एक सकारात्मक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, "जहां तक महाराज की बात है, मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई आपत्ति होनी चाहिए या किसी को कुछ ऐसा पॉइंट आउट करने की जरूरत है। यह तो बहुत अच्छी बात है, इससे किसी को क्या दिक्कत हो सकती है?"
खेल और अध्यात्म का अनूठा संतुलन
मैदान पर आक्रामक अंदाज में खेलने वाले विराट कोहली का आध्यात्मिक रूप प्रशंसकों के लिए काफी प्रेरणादायक रहा है। कठिन दौर से उबरने और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए विराट ने अध्यात्म का सहारा लिया है। जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार दबाव का सामना करता है, तो मानसिक संतुलन और सकारात्मकता बेहद मायने रखती है। प्रेमानंद महाराज के प्रवचन और उनके सानिध्य ने विराट को एक नई ऊर्जा दी है, जिसे शमी ने भी पूरी तरह स्वाभाविक और सराहनीय माना है।
आस्था व्यक्तिगत विषय, सवाल उठाना गलत
मोहम्मद शमी के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ी एक-दूसरे की व्यक्तिगत पसंद और आध्यात्मिक प्राथमिकताओं का सम्मान करते हैं। किसी भी व्यक्ति के लिए उसकी धार्मिक या आध्यात्मिक यात्रा पूरी तरह से निजी होती है। जब तक इससे खेल या प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, तब तक किसी को इस पर सवाल खड़े करने का अधिकार नहीं है। शमी के इस रुख की सोशल मीडिया और क्रिकेट प्रेमियों के बीच काफी सराहना हो रही है।

सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा: इस डर से वापस ली धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वापस लेने के पीछे दो मुख्य कारणों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया था। साथ ही, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़े विवाद या हिंसा की आशंका का डर भी सता रहा था।
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पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वापस लेने के पीछे दो मुख्य कारणों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया था। साथ ही, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़े विवाद या हिंसा की आशंका का डर भी सता रहा था।
सरकार का रुख और राष्ट्रीय सुरक्षा का डर
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार उस रहस्य से पर्दा उठा दिया है कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी जिद्द आखिर क्यों छोड़ दी। वांगचुक के इस खुलासे के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि परिस्थितियों की गंभीरता और देश के माहौल को देखते हुए लिया गया था।
वांगचुक के अनुसार, निर्णय बदलने के पीछे दो सबसे महत्वपूर्ण कारक थे—पहला, सरकार की ओर से मिला सकारात्मक संकेत और दूसरा, देश में किसी बड़े अप्रिय घटनाक्रम की आशंका।
मांगों पर लचीलापन और सीजेपी का रुख
सोनम वांगचुक ने बताया कि बातचीत के दौरान सरकार ने आंदोलनकारियों की दो प्रमुख मांगों पर काफी लचीला और सहयोगात्मक रुख अपनाया। हालांकि, सीजेपी (CJP) का पूरा जोर केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर ही टिका हुआ था। वांगचुक का मानना था कि जब सरकार मुख्य मुद्दों और मांगों पर विचार करने के लिए तैयार दिख रही हो, तो केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे की बात पर अड़े रहना आंदोलन के व्यापक हित में नहीं होगा।
संवाद के रास्ते खुले रखने और समाधान की तरफ बढ़ने के लिए उन्होंने अपनी इस मांग को पीछे छोड़ना ही बेहतर समझा।
लेह की घटना और राष्ट्रीय स्तर की चिंता
अपनी जिद्द पीछे छोड़ने की दूसरी और सबसे बड़ी वजह बताते हुए सोनम वांगचुक ने एक गहरे डर का जिक्र किया। 23 जुलाई के आसपास के माहौल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय लोगों के बीच यह चर्चा चरम पर थी कि कुछ बहुत बड़ा और अनहोनी होने वाली है।
उनके दिमाग में पिछले साल लेह में हुई वह घटना ताजा थी, जब सुरक्षाकर्मियों को गोलियां चलानी पड़ी थीं। वांगचुक को इस बात का गहरा खौफ था कि लेह जैसी हिंसक या तनावपूर्ण स्थिति कहीं राष्ट्रीय स्तर पर न दोहराई जाए। किसी भी संभावित हिंसा, जनहानि या देशव्यापी अशांति को रोकने के लिए उन्होंने शांति और समझदारी का रास्ता चुनना सही समझा।
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