
NEET में नेगेटिव स्कोर पर बवाल: अभ्यर्थी ने पूछा- 'कौन कराएगा -40 वाले डॉक्टर से इलाज?'
NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे ने मौजूदा आरक्षण प्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने बेहद कम और माइनस अंकों पर दाखिले पर सवाल उठाते हुए कहा कि डॉक्टर बनने के लिए योग्यता ही मुख्य मापदंड होना चाहिए। हर्ष ने SC/ST वर्ग के लिए मुफ्त स्कूली शिक्षा का विकल्प भी सुझाया है।
खबर का निचोड़
NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे ने मौजूदा आरक्षण प्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने बेहद कम और माइनस अंकों पर दाखिले पर सवाल उठाते हुए कहा कि डॉक्टर बनने के लिए योग्यता ही मुख्य मापदंड होना चाहिए। हर्ष ने SC/ST वर्ग के लिए मुफ्त स्कूली शिक्षा का विकल्प भी सुझाया है।
NEET परीक्षा को लेकर देश भर में जारी बहसों के बीच एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है। परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थी हर्ष दुबे ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को हटाने की मांग करते हुए सीधे तौर पर चिकित्सा प्रणाली और देश के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर बनने की प्रक्रिया में प्रतिभा और अंक ही एकमात्र मापदंड होने चाहिए, न कि किसी प्रकार की छूट।
'-40 अंक वाले से कौन इलाज कराएगा?'
हर्ष दुबे ने कट-ऑफ और न्यूनतम अंकों के मापदंडों पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "अगर माइनस में अंक लाने वाला छात्र आरक्षण के दम पर डॉक्टर बनेगा, तो क्या कोई सामान्य नागरिक उससे अपना इलाज कराना चाहेगा?" हर्ष का मानना है कि मेडिकल जैसी संवेदनशील फील्ड में योग्यता से समझौता करना सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा है।
स्कूली शिक्षा मुफ्त करने का दिया सुझाव
आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव की वकालत करते हुए हर्ष ने सरकार को एक वैकल्पिक सुझाव भी दिया। उनका कहना है कि सरकार को आरक्षण के तहत सीटें और अंक घटाने की छूट देने के बजाय SC/ST वर्ग के छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही मजबूत बनाना चाहिए। इसके लिए उनकी स्कूली शिक्षा पूरी तरह से मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण की जानी चाहिए, ताकि वे प्रतियोगिता में खुद को सक्षम बना सकें।
जनरल और OBC वर्ग की अनदेखी का आरोप
हर्ष ने सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "क्या जनरल और OBC कैटेगरी के अभ्यर्थी छात्र नहीं हैं? उनकी मेहनत और योग्यता का कोई मोल क्यों नहीं समझा जाता?" उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था के कारण प्रतिभाशाली और उच्च अंक पाने वाले छात्र भी मेडिकल सीटों से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनमें भारी निराशा पनप रही है।

सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में ऐतिहासिक समावेशन
उत्तर प्रदेश की बौद्ध स्थली सारनाथ को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया गया है। यह उपलब्धि भारत के बौद्ध सर्किट को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रतिष्ठित करने के साथ ही सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
सारांश
उत्तर प्रदेश की बौद्ध स्थली सारनाथ को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया गया है। यह उपलब्धि भारत के बौद्ध सर्किट को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रतिष्ठित करने के साथ ही सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का प्रमुख केंद्र है। यहीं पर भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के पश्चात अपना प्रथम उपदेश 'धर्मचक्रप्रवर्तन' दिया था। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, यह स्थान मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ और अनेक बौद्ध मठों के अवशेषों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सारनाथ की वास्तुकला और शिलालेख भारतीय कला के प्राचीन वैभव को प्रदर्शित करते हैं।
यूनेस्को सूची का महत्व
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलना किसी स्थल की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। सारनाथ के शामिल होने से उत्तर प्रदेश में विश्व धरोहर स्थलों की संख्या चार हो गई है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण, अनुसंधान और संवर्धन के लिए अतिरिक्त संसाधनों एवं तकनीकी विशेषज्ञता तक पहुंच सुनिश्चित करता है। इससे न केवल ऐतिहासिक संरचनाओं का बेहतर रखरखाव संभव होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग को भी गति मिलेगी।
बौद्ध सर्किट एवं पर्यटन पर प्रभाव
सारनाथ का विश्व धरोहर के रूप में चयन भारत सरकार की 'बौद्ध सर्किट' परियोजना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह कुशीनगर, श्रावस्ती और लुंबिनी जैसे अन्य बौद्ध स्थलों के साथ संपर्क को सुदृढ़ करेगा। इस वैश्विक पहचान से विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने और सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलने की प्रबल संभावना है। साथ ही, यह स्थल अब यूनेस्को के मानकों के अनुरूप वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
चयन प्रक्रिया एवं समिति की भूमिका
यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति प्रतिवर्ष विभिन्न देशों द्वारा प्रस्तावित स्थलों का मूल्यांकन करती है। सारनाथ के नामांकन के लिए पिछले 28 वर्षों से निरंतर प्रयास किए जा रहे थे। बुसान में आयोजित 48वें सत्र में समिति ने इसके उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value), अखंडता और संरक्षण की स्थिति की गहन समीक्षा की, जिसके पश्चात इसे आधिकारिक रूप से सूची में अंकित किया गया।

बिहार में सियासी उबाल: तेज प्रताप यादव 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में
नीट परीक्षा विवाद के खिलाफ बिहार बंद के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। इस मामले में राजद नेता तेज प्रताप यादव को पटना के एक मॉल से गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए बेऊर जेल भेज दिया गया है। उन पर दंगा भड़काने का आरोप है, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
सारांश
नीट परीक्षा विवाद के खिलाफ बिहार बंद के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। इस मामले में राजद नेता तेज प्रताप यादव को पटना के एक मॉल से गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए बेऊर जेल भेज दिया गया है। उन पर दंगा भड़काने का आरोप है, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
गिरफ्तारी और आरोप
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राजद द्वारा बुलाए गए बिहार बंद के दौरान पटना की सड़कों पर भारी बवाल देखने को मिला। इसी सिलसिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजद के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को एक मॉल से गिरफ्तार कर लिया। प्रशासन ने उन पर दंगा फैलाने, कानून-व्यवस्था को चुनौती देने और अपने समर्थकों को हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया है।
कानूनी दांव-पेच
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनके कानूनी सलाहकारों ने मोर्चा संभाल लिया है। उनके वकीलों का दावा है कि पुलिस ने गिरफ्तारी की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। वकीलों का तर्क है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से निराधार है और कानूनी खामियों से भरी हुई है। दूसरी ओर, प्रशासन अपने रुख पर अडिग है और उनके पास मौजूद वीडियो साक्ष्यों व खुफिया रिपोर्टों को अपनी कार्रवाई का मुख्य आधार मान रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर और जेडीयू नेता वीणा मानवी ने इस गिरफ्तारी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। इन नेताओं का मानना है कि नीट विवाद से ध्यान भटकाने और विपक्ष को कमजोर करने के लिए यह एक सोची-समझी चुनावी रणनीति है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में देखते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को निष्पक्षता के दायरे से बाहर बताया है।
स्थिति और धर-पकड़
केवल तेज प्रताप यादव ही नहीं, बल्कि इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान कानून हाथ में लेने के आरोप में कुल 208 अन्य प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि दोबारा किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन की पैनी नजर है और राजधानी में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है। बेऊर जेल के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था को काफी बढ़ा दिया गया है।

AIIMS नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026: आवेदन शुरू, जानें आवेदन प्रक्रिया
देश भर के सरकारी अस्पतालों में सेवा देने का सपना देख रहे नर्सिंग उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने NORCET 11वें चरण के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
देश भर के सरकारी अस्पतालों में सेवा देने का सपना देख रहे नर्सिंग उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने NORCET 11वें चरण के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
भर्ती की महत्वपूर्ण तिथियां
AIIMS द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, नर्सिंग ऑफिसर के पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 13 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवार इस दिन शाम 5:00 बजे तक अपना फॉर्म ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं। समय सीमा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है क्योंकि अंतिम समय में वेबसाइट पर लोड बढ़ने के कारण तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पात्रता और चयन प्रक्रिया
इस भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों का संबंधित क्षेत्र में नर्सिंग योग्यता होना अनिवार्य है। भर्ती प्रक्रिया NORCET (नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट) के माध्यम से पूरी की जाएगी। चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों का शैक्षणिक रिकॉर्ड, आयु सीमा और निर्धारित योग्यता मानदंडों की गहन जांच की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें ताकि वे अपनी पात्रता सुनिश्चित कर सकें।
आवेदन कैसे करें
आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार AIIMS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 'Apply Online' लिंक पर क्लिक करें। वहां अपना पंजीकरण पूरा करने के बाद मांगी गई समस्त जानकारी दर्ज करें और आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। ध्यान रहे कि फॉर्म भरते समय कोई भी त्रुटि न हो, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है। अंतिम रूप से सबमिट करने के बाद आवेदन पत्र का एक प्रिंट आउट अपने पास भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।
पद का विवरण और महत्व
AIIMS द्वारा आयोजित यह कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट नर्सिंग क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह परीक्षा केवल एक भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश के शीर्ष स्वास्थ्य संस्थानों में योगदान देने का एक माध्यम है। चयनित उम्मीदवारों को न केवल बेहतर वेतनमान मिलेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के बीच काम करने का उत्कृष्ट अनुभव भी प्राप्त होगा। भर्ती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी समय-समय पर आधिकारिक पोर्टल पर अपडेट की जा रही है, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार अपनी नजरें आधिकारिक वेबसाइट पर बनाए रखें।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: 'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए'
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कदम को छात्र शक्ति की जीत बताया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। दीपके ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
खबर का निचोड़:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कदम को छात्र शक्ति की जीत बताया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। दीपके ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
सियासी गलियारों में हलचल, छात्र आंदोलन का दिखा असर
देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। लंबे समय से चल रहे विरोध और छात्रों के दबाव के बीच इस फैसले को एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय में जारी खींचतान और छात्रों के लगातार बढ़ते आक्रोश के बीच प्रधान के इस कदम ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता के गलियारों में जहां इसे एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, वहीं विपक्षी और सामाजिक संगठन इसे अपनी मांगों पर सरकार का झुकना करार दे रहे हैं।
अभिजीत दीपके का तीखा तंज: "झुकती है दुनिया..."
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए तंज कसा और कहा, "क्या कहते थे ये - इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते? 'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए'।"
दीपके के इस बयान ने साफ कर दिया कि यह इस्तीफा महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे जनता और छात्रों का बड़ा दबाव रहा है। उनका मानना है कि लगातार उठाए गए आवाज़ और विरोध प्रदर्शनों का ही नतीजा है कि सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।
इस्तीफा सिर्फ पहली जीत, लड़ाई अभी बाकी है
इस्तीफे को शुरुआती सफलता मानते हुए अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि मामला यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि मंत्री पद से त्यागपत्र मिलना महज एक पड़ाव है, असली न्याय अभी बाकी है।
दीपके ने अपनी बात को मजबूती से रखते हुए दो प्रमुख मांगें जनता और प्रशासन के सामने रखीं:
पीड़ित परिवारों को मुआवजा: हाल के घटनाक्रमों और तनाव के कारण जिन मासूम बच्चों ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया, उनके परिवारों को तुरंत उचित आर्थिक सहायता और न्याय मिले।
दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई: प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बर्बरता और असंवैधानिक बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों को चिन्हित कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
आगे क्या?
शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस विभाग की कमान किसे सौंपी जाएगी। साथ ही, क्या सरकार प्रदर्शनकारियों की बाकी दो मांगों पर विचार करेगी? जिस तरह से अभिजीत दीपके और अन्य संगठनों ने अपना रुख कड़ा रखा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। छात्रों का न्याय के लिए यह संघर्ष किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
Delight News
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