
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: भारत का नया वैश्विक विमानन केंद्र
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (NMIA) ने 15 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय परिचालन शुरू कर दिया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की अबू धाबी के लिए पहली उड़ान के साथ, यह हवाई अड्डा मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाद दूसरा प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश द्वार बन गया है।
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: भारत का नया वैश्विक विमानन केंद्र
2. सार (Summary):
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (NMIA) ने 15 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय परिचालन शुरू कर दिया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की अबू धाबी के लिए पहली उड़ान के साथ, यह हवाई अड्डा मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाद दूसरा प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश द्वार बन गया है।
3. विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (NMIA) भारत के विमानन अवसंरचना में एक युगांतरकारी विकास है। महाराष्ट्र के नवी मुंबई में स्थित यह ग्रीनफील्ड परियोजना मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (MMR) पर बढ़ते यात्री भार को कम करने के लिए विकसित की गई है। दिसंबर 2025 में घरेलू परिचालन शुरू करने के बाद, केवल 200 दिनों के भीतर अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का संचालन शुरू करना भारत की बढ़ती अवसंरचनात्मक क्षमताओं का प्रमाण है। यह हवाई अड्डा न केवल क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भारत के पश्चिमी तट पर आर्थिक गतिविधियों और व्यापार को भी गति प्रदान करेगा।
परिचालन की शुरुआत और कनेक्टिविटी
15 जुलाई 2026 को एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित अबू धाबी की उड़ान के साथ इस हवाई अड्डे ने वैश्विक मानचित्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में, यह सेवा सप्ताह में तीन बार संचालित हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय परिचालन के साथ ही, इस हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क (Customs) और आव्रजन (Immigration) जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। घरेलू मोर्चे पर भी, हवाई अड्डे ने 46 शहरों को जोड़कर और 2.3 मिलियन से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान करके अपनी उपयोगिता सिद्ध की है।
प्रबंधन और स्वामित्व संरचना
NMIA का संचालन 'अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड' और 'सिडको' (CIDCO - City and Industrial Development Corporation of Maharashtra Limited) के बीच एक संयुक्त उद्यम के माध्यम से किया जा रहा है। अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने इस परियोजना के साथ अपने पोर्टफोलियो में मौजूद सभी हवाई अड्डों को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो सरकारी नियोजन और निजी दक्षता के तालमेल को प्रदर्शित करता है।
अर्थव्यवस्था और कार्गो क्षमता
अंतर्राष्ट्रीय परिचालन का एक महत्वपूर्ण पहलू कार्गो प्रबंधन है। उद्घाटन उड़ान के साथ ही हवाई अड्डे ने अपने पहले वैश्विक खराब होने वाले (perishable) निर्यात शिपमेंट को संभाला, जो क्षेत्र के कृषि और औद्योगिक निर्यात के लिए एक नई जीवनरेखा साबित होगा। प्रतिदिन 150 से अधिक एयर ट्रैफिक मूवमेंट के साथ, यह हवाई अड्डा मुंबई क्षेत्र में रसद (Logistics) और आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु (Facts for Exams)
हवाई अड्डे का प्रकार: NMIA एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना है, जिसका अर्थ है कि इसे पूरी तरह से खाली जगह पर नए सिरे से बनाया गया है।
उद्घाटन: इसने 25 दिसंबर 2025 को घरेलू उड़ानें और 15 जुलाई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू कीं।
प्रथम अंतर्राष्ट्रीय गंतव्य: उद्घाटन उड़ान नवी मुंबई से अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी) के लिए शुरू की गई।
संचालक: इसका प्रबंधन अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड और सिडको (CIDCO) की संयुक्त साझेदारी में हो रहा है।
भौगोलिक महत्व: यह छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के पूरक के रूप में कार्य करता है, जिससे मुंबई के हवाई यातायात पर दबाव कम होगा।
विमानन कंपनी: एयर इंडिया एक्सप्रेस, जो टाटा समूह की एक सहायक कंपनी है, ने पहली अंतर्राष्ट्रीय सेवा का संचालन किया।
आर्थिक प्रभाव: यह सुविधा न केवल यात्रियों के लिए सुगम है, बल्कि कार्गो और निर्यात क्षमता को बढ़ाकर भारतीय व्यापार को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करती है।

E20 पेट्रोल विवाद: नितिन गडकरी ने दी दो टूक, बोले- विकल्प खुला है
पेट्रोल में 20% एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर छिड़े विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि जिसे यह नहीं चाहिए, वह 100% शुद्ध पेट्रोल खरीद सकता है। उन्होंने इंजन को नुकसान होने की अटकलों को खारिज किया, जबकि रायपुर उपभोक्ता आयोग का एक आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।
खबर का निचोड़:
पेट्रोल में 20% एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर छिड़े विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि जिसे यह नहीं चाहिए, वह 100% शुद्ध पेट्रोल खरीद सकता है। उन्होंने इंजन को नुकसान होने की अटकलों को खारिज किया, जबकि रायपुर उपभोक्ता आयोग का एक आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।
इंजन की सुरक्षा और गडकरी का स्टैंड
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक मचे बवाल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने उन तमाम दावों को बेबुनियाद बताया है जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर की वैज्ञानिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण से इंजन को कोई नुकसान नहीं होता। उन्होंने उन लोगों के लिए भी रास्ता साफ कर दिया है जो इसे लेकर संशय में हैं। मंत्री के अनुसार, यदि कोई E20 पेट्रोल का उपयोग नहीं करना चाहता, तो बाजार में 100% शुद्ध पेट्रोल का विकल्प हमेशा उपलब्ध है, बस उसके लिए उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी होगी।
परिवार पर लगे आरोपों पर पलटवार
विवाद केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहा। गडकरी पर उनके परिवार के एथेनॉल कारोबार में शामिल होने के भी आरोप लगे थे। इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उनका या उनके परिवार का एथेनॉल व्यवसाय से कोई सीधा संबंध नहीं है। इस तरह के दावों को उन्होंने पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और भ्रामक बताया है। नागपुर साइबर पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए उन कंटेंट क्रिएटर्स पर FIR दर्ज की है, जो इंटरनेट पर गलत तथ्य और भ्रामक जानकारी फैलाकर भ्रम पैदा कर रहे थे।
उपभोक्ता आयोग का रुख और तकनीकी पेच
जहां एक ओर सरकार एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है, वहीं रायपुर के उपभोक्ता फोरम का एक हालिया फैसला सुर्खियों में है। आयोग ने मारुति सुजुकी को एक ऐसे ग्राहक को नई कार देने का निर्देश दिया, जिसकी पुरानी कार E20 ईंधन के अनुकूल नहीं थी। यह फैसला इस बहस को और तेज करता है कि पुरानी तकनीक वाली गाड़ियों पर एथेनॉल का क्या असर पड़ता है।
क्या आपकी गाड़ी E20 के लिए तैयार है?
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि 2015 से पहले बनी गाड़ियों के इंजन आधुनिक एथेनॉल मिश्रण को झेलने के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे। विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि यदि आपकी गाड़ी पुरानी है, तो उसमें E20 डलवाने से पहले मैनुअल चेक करें या अधिकृत सर्विस सेंटर से पुष्टि जरूर कर लें। हालांकि, नई गाड़ियां अब E20 के मानकों के अनुरूप ही बनाई जा रही हैं, जिससे एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर भविष्य की चुनौतियां कम होती दिख रही हैं।

दीपिका पादुकोण संग ब्रेकअप पर मुज़म्मिल इब्राहिम ने तोड़ी चुप्पी
मॉडल और एक्टर मुज़म्मिल इब्राहिम का दीपिका पादुकोण से ब्रेकअप को लेकर एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर वायरल हो रहा है। इस वीडियो क्लिप में उन्होंने 'कोई पछतावा नहीं' होने की बात कही थी। अब मुज़म्मिल ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि इस छोटी क्लिप में उनकी पूरी बात का संदर्भ और सम्मान गायब है।
खबर का निचोड़ (Summary)
मॉडल और एक्टर मुज़म्मिल इब्राहिम का दीपिका पादुकोण से ब्रेकअप को लेकर एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर वायरल हो रहा है। इस वीडियो क्लिप में उन्होंने 'कोई पछतावा नहीं' होने की बात कही थी। अब मुज़म्मिल ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि इस छोटी क्लिप में उनकी पूरी बात का संदर्भ और सम्मान गायब है।
सोशल मीडिया पर फिर छाया पुराना बयान
मनोरंजन जगत में सितारों के अतीत से जुड़े किस्से अक्सर सुर्खियों में आ जाते हैं। हाल ही में एक्टर और मशहूर मॉडल मुज़म्मिल इब्राहिम का एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो क्लिप में वह बॉलीवुड सुपरस्टार दीपिका पादुकोण के साथ अपने पुराने रिश्ते और ब्रेकअप पर बात करते नजर आ रहे हैं। क्लिप में मुज़म्मिल को यह कहते सुना जा सकता है कि उन्हें दीपिका से अलग होने का 'कोई पछतावा नहीं' है। इस बयान के सामने आने के बाद इंटरनेट पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया, जिसके बाद खुद मुज़म्मिल को सामने आकर स्थिति साफ करनी पड़ी।
'आधी-अधूरी क्लिप में नहीं दिखता सम्मान'
वायरल हो रही इस क्लिप पर प्रतिक्रिया देते हुए मुज़म्मिल इब्राहिम ने साफ किया है कि इंटरनेट पर घूम रहा यह वीडियो उनकी पूरी बात को सही तरीके से बयां नहीं करता। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले छोटे-छोटे वीडियो अक्सर संदर्भ से बाहर होते हैं। मुज़म्मिल के मुताबिक, इस चंद सेकेंड की क्लिप में न तो उनकी पूरी बात का सही संदर्भ दिखाई दे रहा है और न ही वह गरिमा और सम्मान, जो वह अपने अतीत के रिश्तों के प्रति रखते हैं। किसी भी बातचीत को काटकर पेश करने से उसका मूल अर्थ बदल जाता है।
अतीत के प्रति हमेशा रहा है सम्मानजनक रवैया
मुज़म्मिल ने बेहद संजीदगी से अपनी बात रखते हुए कहा कि वह अपने जीवन और अतीत से जुड़े लोगों का बेहद आदर करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी वह अपने बीते कल या उससे जुड़े किसी भी व्यक्ति के बारे में बात करते हैं, तो उनके मन में केवल सम्मान की भावना होती है। वायरल क्लिप को जिस तरह पेश किया गया, उससे बातचीत की गहराई और असली लहजा पूरी तरह गायब हो गया। मुज़म्मिल अपने रिश्तों को लेकर हमेशा से बेहद परिपक्व रहे हैं और वह किसी भी पुराने रिश्ते को लेकर अपने मन में कोई कड़वाहट नहीं रखते हैं।
फैंस के बीच चर्चा हुई तेज
दीपिका पादुकोण और मुज़म्मिल इब्राहिम का नाम एक समय पर काफी चर्चा में रहा था। हालांकि, दोनों ने अपनी राहें अलग कर लीं और अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ गए। अब सालों बाद इस पुराने इंटरव्यू के अचानक वायरल होने और उस पर मुज़म्मिल के इस स्पष्टीकरण ने एक बार फिर फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मुज़म्मिल के इस जवाब ने यह साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया की अधूरी जानकारियों पर भरोसा करने के बजाय पूरी सच्चाई और संदर्भ को समझना बेहद जरूरी है।

आमिर खान की तीसरी शादी पर फतवा: 'अल्लाह के सामने हराम'
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की गौरी स्ट्रैट से तीसरी शादी कानूनी और सामाजिक विवादों के बाद अब धार्मिक कटघरे में आ गई है। मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने इस निकाह के खिलाफ फतवा जारी किया है। उन्होंने इसे गैर-इस्लामिक और अल्लाह के सामने बड़ा गुनाह करार दिया है।
खबर का निचोड़
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की गौरी स्ट्रैट से तीसरी शादी कानूनी और सामाजिक विवादों के बाद अब धार्मिक कटघरे में आ गई है। मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने इस निकाह के खिलाफ फतवा जारी किया है। उन्होंने इसे गैर-इस्लामिक और अल्लाह के सामने बड़ा गुनाह करार दिया है।
धार्मिक विवादों के घेरे में आमिर खान
बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्टनिस्ट' आमिर खान एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। गौरी स्ट्रैट के साथ उनकी तीसरी शादी ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, बल्कि अब यह मामला पूरी तरह से धार्मिक रंग ले चुका है। इस निकाह को लेकर मुस्लिम समुदाय और धार्मिक गुरुओं के बीच गहरी नाराजगी देखी जा रही है। जगह-जगह हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद अब देश की प्रमुख धार्मिक संस्था ने भी इस पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
शाही चीफ मुफ्ती का बड़ा फैसला
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने आमिर खान की इस शादी के खिलाफ औपचारिक तौर पर फतवा जारी कर दिया। मुफ्ती इब्राहिम हुसैन ने बेहद कड़े शब्दों में इस निकाह की निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामिक कानूनों और शरीयत के दायरे में इस तरह का कदम स्वीकार्य नहीं है।
'अल्लाह के सामने देना होगा जवाब'
फतवा जारी करते हुए शाही चीफ मुफ्ती ने समाज में बढ़ रहे असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाज में इस शादी को लेकर जो आक्रोश है, वह स्वाभाविक है क्योंकि धार्मिक नियमों की अनदेखी की गई है। मौलाना इब्राहिम हुसैन ने दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसा करने वाला मुस्लिम मर्द पूरी तरह से गुनहगार है और इस्लामिक नियमों के तहत यह कृत्य पूरी तरह 'हराम' की श्रेणी में आता है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ऐसा शख्स सार्वजनिक तौर पर या दिल से अपने इस गुनाह को कबूल नहीं करता है, तो उसे कयामत के दिन अल्लाह के सामने कड़ी जवाबदेही देनी होगी।
समाज और प्रशंसकों के बीच खलबली
इस फतवे के सामने आने के बाद से ही आमिर खान के प्रशंसकों और आम जनता के बीच हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां पारंपरिक विचारों के लोग धार्मिक गुरु के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक समाज में इसे किसी की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल इस फतवे और धार्मिक गुरुओं के कड़े बयानों पर आमिर खान या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस विवाद ने इंटरनेट से लेकर सड़कों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

अनशन स्थल पर फूड रिव्यू: सोशल मीडिया पर क्यों घिरे आयुष सपरा?
लद्दाख की मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के मंच के ठीक सामने एक फूड ब्लॉगर का वीडियो बनाना भारी पड़ गया है। ब्लॉगर आयुष सपरा ने अनशन स्थल पर CJP के प्रदर्शन के दौरान समोसे का रिव्यू किया, जिसके बाद इंटरनेट पर संवेदनशीलता को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई है।
लद्दाख की मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के मंच के ठीक सामने एक फूड ब्लॉगर का वीडियो बनाना भारी पड़ गया है। ब्लॉगर आयुष सपरा ने अनशन स्थल पर CJP के प्रदर्शन के दौरान समोसे का रिव्यू किया, जिसके बाद इंटरनेट पर संवेदनशीलता को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई है।
गंभीर आंदोलन के बीच 'स्वाद' की तलाश
दिल्ली का जंतर-मंतर इन दिनों एक बेहद गंभीर और संवेदनशील आंदोलन का गवाह बना हुआ है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनके साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कई लोग एकजुटता दिखा रहे हैं। इसी माहौल के बीच मशहूर फूड ब्लॉगर आयुष सपरा वहां पहुंचे।
लेकिन, वहां जाने का उनका मकसद आंदोलन को समर्थन देना नहीं, बल्कि अपने फूड व्लॉग के लिए कंटेंट तैयार करना बन गया। उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर मिल रहे समोसे का रिव्यू करना शुरू कर दिया।
"स्वाद ही आ गया" और भड़क गए लोग
वायरल हो रहे वीडियो में आयुष सपरा बड़े चाव से समोसा खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के एक हिस्से में वे कैमरे के सामने कहते हैं, "सोनम जी को दिखा दूं थोड़ा सा... स्वाद ही आ गया।" भूख हड़ताल पर बैठे एक व्यक्ति के ठीक सामने खड़े होकर खाने का स्वाद लेना और उस पर इस तरह की टिप्पणी करना वहां मौजूद लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स को रास नहीं आया।
इस घटना पर मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने तुरंत अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उसने सपरा को टोकते हुए कहा, "एक जिंदा आदमी यहां मुर्दों के लिए आमरण अनशन कर रहा है और आप यहां स्वाद ले रहे हैं।" यह एक वाक्य इस समय सोशल मीडिया पर ब्लॉगर के खिलाफ हो रही आलोचना का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
कंटेंट बनाम संवेदनशीलता: इंटरनेट पर छिड़ी बहस
इस वीडियो के सामने आने के बाद डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि व्यूज और लाइक्स की होड़ में क्रिएटर्स यह भूल जाते हैं कि किस जगह पर कैसा व्यवहार करना चाहिए।
ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर यूजर्स आयुष सपरा को जमकर ट्रोल कर रहे हैं। कई यूजर्स का मानना है कि किसी के संघर्ष और भूख हड़ताल जैसी गंभीर स्थिति का इस तरह से मजाक उड़ाना या उसे हल्के में लेना बेहद शर्मनाक है। वहीं कुछ लोगों ने इसे 'सस्ते पब्लिसिटी स्टंट' का नाम दिया है।
आलोचना करने वालों का तर्क है कि जंतर-मंतर कोई टूरिस्ट स्पॉट या फूड हब नहीं है, बल्कि वह एक ऐसी जगह है जहां लोग अपनी बुनियादी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में वहां जाकर खाने का रिव्यू करना और अनशनकारी का जिक्र करते हुए मजे लेना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।
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