
28 जून 2026: UPSC और SSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स विश्लेषण
आज के प्रमुख समसामयिक घटनाक्रम निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित हैं:
1. **PCPNDT अधिनियम:** लैंगिक समानता हेतु कानूनी ढांचा।
2. **AIR SUVIDHA 2.0:** अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजिटल सुविधा।
3. **बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व:** संरक्षण और पारिस्थितिकी।
4. **CBSE का भाषा फॉर्मूला:** शैक्षिक नीति में लचीलापन।
5. **भारत में घटती प्रजनन दर:** जनसांख्यिकीय चुनौतियां।
संक्षिप्त सारांश
आज के प्रमुख समसामयिक घटनाक्रम निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित हैं:
1. PCPNDT अधिनियम: लैंगिक समानता हेतु कानूनी ढांचा।
2. AIR SUVIDHA 2.0: अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजिटल सुविधा।
3. बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व: संरक्षण और पारिस्थितिकी।
4. CBSE का भाषा फॉर्मूला: शैक्षिक नीति में लचीलापन।
5. भारत में घटती प्रजनन दर: जनसांख्यिकीय चुनौतियां।
विस्तृत विश्लेषण
1. Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) Act
यह अधिनियम लिंग चयनात्मक गर्भपात को रोकने के लिए चर्चा में है, जो घटते लिंगानुपात (Sex Ratio) के कारण भारत में एक गंभीर मुद्दा है।
पृष्ठभूमि: वर्ष 1994 में लागू यह कानून भ्रूण के लिंग निर्धारण के लिए अल्ट्रासाउंड और अन्य तकनीकों के उपयोग को प्रतिबंधित करता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
यह अधिनियम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का आधार है।
इसके तहत डॉक्टरों और क्लीनिकों का अनिवार्य पंजीकरण आवश्यक है।
उल्लंघन करने पर कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
परीक्षा दृष्टिकोण: UPSC के लिए यह 'महिला सशक्तिकरण' और 'सामाजिक न्याय' के अंतर्गत 'महिलाओं के विरुद्ध अपराध और सुरक्षा' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
2. AIR SUVIDHA 2.0 पोर्टल
यह पोर्टल अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए स्व-घोषणा प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने हेतु खबरों में है।
पृष्ठभूमि: नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा शुरू की गई यह एक डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को आगमन से पहले स्वास्थ्य विवरण और यात्रा इतिहास को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा देना है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
2.0 संस्करण में डेटा प्रोसेसिंग की गति और बायोमेट्रिक एकीकरण को बढ़ाया गया है।
यह महामारी प्रबंधन और सीमा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
परीक्षा दृष्टिकोण: यह ई-गवर्नेंस और तकनीकी सुशासन का सटीक उदाहरण है, जो UPSC के GS-III के प्रौद्योगिकी अनुभाग के लिए प्रासंगिक है।
3. बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व
हाल ही में इन रिजर्वों में बाघों की संख्या में वृद्धि और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर ये चर्चा में हैं।
पृष्ठभूमि: ये कर्नाटक के नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा हैं। ये क्षेत्र 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत महत्वपूर्ण संरक्षण स्थल हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
नागरहोल को 'राजीव गांधी नेशनल पार्क' के रूप में भी जाना जाता है।
इन रिजर्वों में सागौन (Teak) और शीशम (Rosewood) के घने उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
ये क्षेत्र एशियाई हाथियों और बंगाल टाइगर के लिए वैश्विक हॉटस्पॉट हैं।
परीक्षा दृष्टिकोण: पर्यावरण और जैव विविधता (GS-III) के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यानों की भौगोलिक स्थिति और संरक्षण स्थिति पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
4. CBSE का तीन-भाषा फार्मूला में ढील
शिक्षा मंत्रालय की नीति के अनुरूप CBSE का यह निर्णय छात्रों पर शैक्षणिक बोझ को कम करने के लिए है।
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप, CBSE ने भाषा सीखने के दबाव को कम करने हेतु लचीलापन पेश किया है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
इसका उद्देश्य भाषाई विविधता को बढ़ावा देना है, न कि किसी एक भाषा के प्रति बाध्यता।
यह छात्रों को उनकी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं से जोड़ने का एक प्रयास है।
परीक्षा दृष्टिकोण: शैक्षिक सुधार और समावेशी शिक्षा से संबंधित नीतिगत प्रश्नों के लिए यह एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है।
5. भारत में घटती प्रजनन दर और चिंताएं
हालिया जनसांख्यिकीय डेटा में भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) के प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से नीचे जाने पर चर्चा जोरों पर है।
पृष्ठभूमि: आर्थिक सर्वेक्षण और विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) के एक नए चरण में है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
TFR में कमी का कारण शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और शहरीकरण है।
'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) का लाभ उठाने के लिए यह चिंताजनक भी है क्योंकि भविष्य में कार्यबल की कमी हो सकती है।
यह 'एजिंग सोसाइटी' (वृद्ध होती जनसंख्या) की ओर एक संकेत है।
परीक्षा दृष्टिकोण: जनसंख्या और संबंधित मुद्दों (GS-I) के तहत यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है जो अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित करता है।

पब या बीच पर तलाश जारी': दिल्ली में लगे राहुल गांधी के 'गुमशुदा' पोस्टर, सियासी पारा गर्म
संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली में एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कथित विदेश दौरे को लेकर दिल्ली की सड़कों पर उनके 'गुमशुदा' होने के पोस्टर चस्पा किए गए हैं। इन पोस्टरों में उन पर तीखे तंज कसे गए हैं, जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।
संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली में एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कथित विदेश दौरे को लेकर दिल्ली की सड़कों पर उनके 'गुमशुदा' होने के पोस्टर चस्पा किए गए हैं। इन पोस्टरों में उन पर तीखे तंज कसे गए हैं, जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।
संसद सत्र से पहले सियासी पोस्टरवार
राजधानी दिल्ली की दीवारें एक बार फिर राजनीतिक अखाड़ा बन चुकी हैं। देश के सबसे महत्वपूर्ण विधायी सत्र, यानी मॉनसून सत्र के शुरू होने में अब कुछ ही समय बचा है, लेकिन इस वक्त चर्चा का केंद्र संसद की नीतियां नहीं, बल्कि सड़कों पर लगे कुछ विवादित पोस्टर हैं। ये पोस्टर कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी को निशाना बनाकर लगाए गए हैं, जिनमें उन्हें 'गुमशुदा' घोषित किया गया है।
'पब में या बीच पर...' पोस्टरों की तीखी भाषा
दिल्ली के प्रमुख इलाकों में रातों-रात लगाए गए इन पोस्टरों की भाषा बेहद आक्रामक और तंज से भरी है। पोस्टर के मुख्य हिस्से में लिखा गया है, "वह अक्सर विदेश में पाए जाते हैं। वह किसी पब में हो सकते हैं। वह बीच पर भी दिख सकते हैं। तलाश जारी है।" यह सीधे तौर पर राहुल गांधी की निजी और राजनीतिक जीवनशैली पर हमला है। इन पोस्टरों के जरिए यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जब देश में गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का सत्र शुरू होने जा रहा है, तब मुख्य विपक्षी दल के प्रमुख चेहरे गायब हैं।
भाजपा के निशाने पर राहुल का 'विदेश दौरा'
इस पोस्टरवार के पीछे की टाइमिंग को देखें तो यह सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हालिया बयानों से मेल खाती है। पिछले कुछ दिनों से भाजपा लगातार राहुल गांधी के फिर से विदेश दौरे पर जाने की खबरों को लेकर हमलावर रही है। सत्तापक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी संसद सत्रों और देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों के दौरान अक्सर विदेश यात्राओं पर निकल जाते हैं। भाजपा इसे जनता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया करार दे रही है, और दिल्ली में लगे ये पोस्टर इसी नैरेटिव को और हवा दे रहे हैं।
विपक्ष की रणनीति और बढ़ता तनाव
दूसरी तरफ, इस तरह के पोस्टरों के सामने आने के बाद कांग्रेस खेमे में भी नाराजगी साफ देखी जा रही है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह साफ नहीं हो पाया है कि ये पोस्टर किसने लगवाए हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्ष को कमजोर करने और ध्यान भटकाने की चाल के रूप में देखा जा रहा है। मॉनसून सत्र में विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में था, लेकिन सत्र शुरू होने से ठीक पहले इस पोस्टर विवाद ने पूरी बहस का रुख एक अलग दिशा में मोड़ दिया है। दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन अब इन पोस्टरों को हटाने और इन्हें लगाने वालों की पहचान करने की कोशिश में जुट गया है।

डॉन 3' विवाद पर भड़के सुनील शेट्टी: रणवीर सिंह का किया जोरदार समर्थन
अभिनेता सुनील शेट्टी ने 'डॉन 3' को लेकर रणवीर सिंह के खिलाफ चल रहे विवाद और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। शेट्टी ने बॉलीवुड की 'बैन संस्कृति' पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस अभिनेता ने इंडस्ट्री को ₹3,500 करोड़ का बिजनेस दिया है, उसे निशाना बनाना पूरी तरह से गलत है।
अभिनेता सुनील शेट्टी ने 'डॉन 3' को लेकर रणवीर सिंह के खिलाफ चल रहे विवाद और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। शेट्टी ने बॉलीवुड की 'बैन संस्कृति' पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस अभिनेता ने इंडस्ट्री को ₹3,500 करोड़ का बिजनेस दिया है, उसे निशाना बनाना पूरी तरह से गलत है।
बॉलीवुड में 'बैन कल्चर' पर बड़ा वार
बॉलीवुड में अक्सर किसी न किसी बात को लेकर कलाकारों को ट्रोल करने या उन्हें फिल्मों से हटाने की मांग उठने लगती है। इस बार निशाना बने हैं अभिनेता रणवीर सिंह, जिन्हें फरहान अख्तर की आगामी फिल्म 'डॉन 3' में मुख्य भूमिका के लिए चुना गया है। इस फैसले के बाद से ही सोशल मीडिया पर एक वर्ग उनके विरोध में उतर आया है। अब इस पूरे विवाद पर वरिष्ठ अभिनेता सुनील शेट्टी ने खुलकर अपनी बात रखी है और रणवीर सिंह का खुलकर बचाव किया है।
"आप कौन होते हैं किसी को बैन करने वाले?"
एक हालिया बातचीत के दौरान सुनील शेट्टी ने फिल्म इंडस्ट्री में पनप रही इस नकारात्मक संस्कृति पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने सीधे तौर पर उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो सोशल मीडिया पर किसी को भी ब्लैकलिस्ट करने का फरमान जारी कर देते हैं। शेट्टी ने दोटूक लहजे में सवाल किया, "आप कौन होते हैं किसी को बैन करने वाले?" उनका मानना है कि इस तरह की प्रवृत्तियां न केवल कलाकारों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के माहौल को भी खराब करती हैं।
₹3,500 करोड़ के रेवेन्यू का दिया हवाला
सुनील शेट्टी ने रणवीर सिंह के समर्थन में सिर्फ भावनात्मक बातें नहीं कीं, बल्कि आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने रणवीर को 'बच्चा' संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रतिभावान अभिनेता ने अपने करियर में फिल्म इंडस्ट्री को ₹3,500 करोड़ का शानदार रेवेन्यू कमा कर दिया है। शेट्टी का इशारा रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्मों और बॉक्स ऑफिस पर उनकी मजबूत पकड़ की तरफ था। उन्होंने साफ कहा कि जो कलाकार इंडस्ट्री की अर्थव्यवस्था को इतनी मजबूती देता है, उसे महज कुछ विवादों के कारण बैन करने की बात सोचना भी बेमानी है।
'डॉन 3' और रणवीर के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान जैसे दिग्गजों के बाद 'डॉन' के प्रतिष्ठित किरदार को आगे बढ़ाना रणवीर सिंह के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है। जब से उनके नाम की घोषणा हुई है, तब से उनकी तुलना पुराने सुपरस्टार्स से की जा रही है। सुनील शेट्टी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रणवीर को इंडस्ट्री के भीतर से मजबूत साथ की जरूरत थी। शेट्टी के इस रुख ने यह साफ कर दिया है कि सीनियर एक्टर्स अब नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ खड़े हैं और बिना किसी ठोस वजह के होने वाली ट्रोलिंग को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

टीवी के 'अनुज कपाड़िया' गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का होगा तलाक, 10 साल का रिश्ता टूटा
छोटे पर्दे के मशहूर अभिनेता गौरव खन्ना और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के प्रशंसकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शादी के करीब 10 साल बाद यह स्टार कपल अब हमेशा के लिए एक-दूसरे से अलग होने जा रहा है। आकांक्षा चमोला ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वे पिछले एक साल से अलग रह रहे हैं और अब उन्होंने कानूनी तौर पर तलाक लेने का फैसला कर लिया है।
छोटे पर्दे के मशहूर अभिनेता गौरव खन्ना और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के प्रशंसकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शादी के करीब 10 साल बाद यह स्टार कपल अब हमेशा के लिए एक-दूसरे से अलग होने जा रहा है। आकांक्षा चमोला ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वे पिछले एक साल से अलग रह रहे हैं और अब उन्होंने कानूनी तौर पर तलाक लेने का फैसला कर लिया है।
टूट गया 10 साल पुराना साथ
टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले गौरव खन्ना की निजी जिंदगी से एक बड़ी खबर आ रही है। धारावाहिक 'अनुपमा' में अनुज कपाड़िया के किरदार से घर-घर में मशहूर हुए गौरव खन्ना और उनकी अभिनेत्री पत्नी आकांक्षा चमोला का वैवाहिक रिश्ता खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। साल 2016 में सात फेरे लेने वाले इस कपल ने अपनी शादी के एक दशक पूरे होने से ठीक पहले अलग होने का मन बना लिया है।
पिछले एक साल से रह रहे थे अलग
चकाचौंध भरी इस दुनिया में जहां गौरव और आकांक्षा की जोड़ी को बेहद पसंद किया जाता था, वहीं उनके बीच पिछले काफी समय से कुछ ठीक नहीं चल रहा था। इस बात का खुलासा खुद आकांक्षा चमोला ने रियालिटी शो 'लॉक अप 2' के दौरान किया है। आकांक्षा ने बेहद भावुक और बेबाक होकर अपनी निजी जिंदगी के इस सबसे मुश्किल सच को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि वे दोनों पिछले पूरे एक साल से एक ही छत के नीचे नहीं रह रहे थे और आपसी सहमति से अलग रह रहे थे।
रास्ते अलग, मंजिलें जुदा
आकांक्षा चमोला ने अपने रिश्ते के इस मोड़ पर आने की वजह को भी साफ किया है। उन्होंने शो में बातचीत के दौरान कहा कि समय के साथ उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि वे एक पार्टनर के तौर पर एक-दूसरे के लिए सही नहीं हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जीवन को लेकर उन दोनों की सोच और प्राथमिकताएं काफी बदल चुकी हैं। दोनों को अपनी जिंदगी से अलग-अलग चीजें चाहिए, जिसके चलते अब साथ रहना मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने आपसी सहमति से इस रिश्ते को गरिमा के साथ खत्म करने और तलाक के रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला किया।
2016 में शुरू हुआ था सफर
गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला ने नवंबर 2016 में एक बेहद शानदार समारोह में शादी रचाई थी। इस शादी में टीवी जगत के कई बड़े सितारे शामिल हुए थे। सोशल मीडिया पर भी अक्सर दोनों की तस्वीरें और वीडियोज को फैंस का भरपूर प्यार मिलता था। लेकिन पर्दे के पीछे चल रहे इस अलगाव की खबर ने अब उनके चाहने वालों को पूरी तरह हैरान कर दिया है। फिलहाल इस पूरे मामले पर गौरव खन्ना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

मंगेतर ने किले से धकेला: केतन अग्रवाल को न्याय दिलाने सड़कों पर उतरा पुणे
पुणे के मशहूर उद्योगपति के बेटे केतन अग्रवाल की हत्या के विरोध में पिंपरी-चिंचवड़ में उनके परिवार और स्थानीय निवासियों ने एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। लोहागढ़ किले से मंगेतर सिया गोयल द्वारा धकेले जाने के कारण जान गंवाने वाले केतन को श्रद्धांजलि देते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
पुणे के मशहूर उद्योगपति के बेटे केतन अग्रवाल की हत्या के विरोध में पिंपरी-चिंचवड़ में उनके परिवार और स्थानीय निवासियों ने एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। लोहागढ़ किले से मंगेतर सिया गोयल द्वारा धकेले जाने के कारण जान गंवाने वाले केतन को श्रद्धांजलि देते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
लोहागढ़ किले का वो खौफनाक सच
पुणे के औद्योगिक जगत में पहचान रखने वाले एक प्रमुख उद्योगपति के बेटे केतन अग्रवाल की मौत की खबर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। जिसे हमसफर मानकर जीवन की नई शुरुआत करने का फैसला लिया था, उसी मंगेतर सिया गोयल पर केतन को बेरहमी से मौत के घाट उतारने का आरोप है। ऐतिहासिक लोहागढ़ किले की ऊंचाइयों से सिया ने केतन को नीचे धकेल दिया, जिससे उनकी जान चली गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही पूरे इलाके में गहरा आक्रोश है।
इंसाफ की लौ: पिंपरी-चिंचवड़ में उमड़ा जनसैलाब
केतन अग्रवाल को न्याय दिलाने और आरोपी सिया गोयल को कड़ी सजा दिए जाने की मांग को लेकर पिंपरी-चिंचवड़ की सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। केतन के न्यायप्रिय परिवार और उनकी सोसाइटी के निवासियों ने मिलकर एक मौन कैंडल मार्च का आयोजन किया। हाथों में मोमबत्तियां और केतन की तस्वीरें थामे लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। इस मार्च में शामिल हर चेहरे पर दुख और व्यवस्था के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी।
गम और गुस्से में डूबा परिवार
मार्च के दौरान माहौल बेहद गमगीन था। सोसाइटी के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर कोई इस मार्च का हिस्सा बना। केतन को याद करते हुए लोगों की आंखें नम थीं। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि समाज में बढ़ते इस तरह के अपराधों के खिलाफ एक सामूहिक लड़ाई है। परिवार ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की जांच तेज गति से की जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषी को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बने।
श्रद्धांजलि के साथ कड़े एक्शन की मांग
कैंडल मार्च के समापन पर सभी ने दो मिनट का मौन रखकर केतन अग्रवाल की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। मोमबत्तियों की रोशनी के बीच एकजुट हुए लोगों ने साफ कर दिया है कि जब तक केतन को पूरी तरह से इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण विरोध अलग-अलग रूपों में जारी रहेगा। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए जांच को आगे बढ़ाया है, लेकिन स्थानीय लोगों का दबाव साफ बता रहा है कि वे किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
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