
सीबीएसई का त्रि-भाषा सूत्र: शैक्षणिक लचीलापन और विदेश भाषा नीति
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 7, 8 और 9 के छात्र अपनी पसंद की विदेशी भाषा को कक्षा 10 तक जारी रख सकते हैं। यह निर्णय त्रि-भाषा सूत्र के अंतर्गत छात्रों को अपनी भाषाई वरीयताओं को चुनने में लचीलापन प्रदान करता है, जिससे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।
खबर का निचोड़
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 7, 8 और 9 के छात्र अपनी पसंद की विदेशी भाषा को कक्षा 10 तक जारी रख सकते हैं। यह निर्णय त्रि-भाषा सूत्र के अंतर्गत छात्रों को अपनी भाषाई वरीयताओं को चुनने में लचीलापन प्रदान करता है, जिससे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।
विस्तृत विश्लेषण
त्रि-भाषा सूत्र का नीतिगत आधार
भारत में त्रि-भाषा सूत्र का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना और बहुभाषी कौशल को विकसित करना है। इसकी नींव 1964-66 के कोठारी आयोग द्वारा रखी गई थी। यह नीति भारतीय भाषाओं के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए विदेशी भाषाओं के समावेश के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती है। सीबीएसई की वर्तमान व्यवस्था इस नीति के तहत स्कूलों को यह अनुमति देती है कि वे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्णित भाषाओं के साथ-साथ विदेशी भाषाओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल कर सकें।
नवीनतम स्पष्टीकरण का महत्व
शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई द्वारा हालिया स्पष्टीकरण उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो कक्षा 7, 8 और 9 में विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे थे। पूर्व में नीतिगत अस्पष्टता के कारण छात्रों को कक्षा 10 तक इन भाषाओं को जारी रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। अब आधिकारिक निर्देश के अनुसार, यदि कोई छात्र इन कक्षाओं में विदेशी भाषा पढ़ रहा है, तो उसे अपनी शिक्षा पूरी करने तक उस भाषा को चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। यह कदम छात्रों के शैक्षणिक तनाव को कम करने और उनकी रुचि के अनुरूप सीखने की प्रक्रिया को निर्बाध बनाने के लिए उठाया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और भाषाई लचीलापन
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी त्रि-भाषा सूत्र के कार्यान्वयन पर जोर देती है, लेकिन इसमें लचीलेपन की वकालत की गई है। इसके अनुसार, किसी भी राज्य या स्कूल पर किसी विशेष भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिए। विदेशी भाषाओं का अध्ययन छात्रों को वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करने में सहायक है। सीबीएसई का यह निर्णय इसी नीतिगत ढांचे का एक हिस्सा है, जो छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
कोठारी आयोग (1964-66): इस आयोग ने पहली बार त्रि-भाषा सूत्र की सिफारिश की थी।
आठवीं अनुसूची: भारतीय संविधान में वर्तमान में 22 भाषाएं शामिल हैं, जिन्हें संवैधानिक मान्यता प्राप्त है।
सीबीएसई की भूमिका: यह बोर्ड भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, जो संबद्ध स्कूलों में शैक्षणिक नीतियों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करता है।
संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 351 हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश देता है, जबकि त्रि-भाषा सूत्र शैक्षिक प्रशासनिक स्तर पर भाषाई विविधता को बनाए रखने का एक उपकरण है।

ISRO में नौकरी का सुनहरा मौका: 26 पदों पर भर्ती शुरू
ISRO के ISTRAC केंद्र ने टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट और तकनीशियन समेत विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक उम्मीदवार 27 जून से 20 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती प्रक्रिया स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने का एक बेहतरीन अवसर लेकर आई है।
ISRO के ISTRAC केंद्र ने टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट और तकनीशियन समेत विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक उम्मीदवार 27 जून से 20 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती प्रक्रिया स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने का एक बेहतरीन अवसर लेकर आई है।
अंतरिक्ष अनुसंधान में करियर बनाने का मौका
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) के लिए नई भर्तियों का ऐलान कर दिया है। जो युवा देश की अंतरिक्ष यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा अवसर है। ISTRAC ने कुल 26 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट और तकनीशियन जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की तकनीकी रीढ़ बनेंगे।
आवेदन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया
इस भर्ती अभियान के तहत आवेदन की प्रक्रिया 27 जून 2026 से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह है कि वे अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है, जिसे ISRO की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है।
विभिन्न पदों का विवरण
ISRO ISTRAC की इस भर्ती में कई श्रेणियों के पद शामिल हैं। इसमें मुख्य रूप से टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट के अलावा तकनीशियन ‘बी’, ड्राफ्ट्समैन ‘बी’ और कुक ‘ए’ के पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। हर पद के लिए शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें अलग-अलग हैं, इसलिए फॉर्म भरते समय अपने संबंधित ट्रेड या विषय का सावधानीपूर्वक चयन करना आवश्यक है।
पात्रता और चयन का आधार
इन पदों के लिए योग्यता के मानक ISRO के सख्त मानकों के अनुरूप रखे गए हैं। तकनीकी पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा या आईटीआई (ITI) सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के तकनीकी कौशल और संबंधित विषय के ज्ञान को मुख्य आधार माना जाएगा। योग्य उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा और कौशल परीक्षा के चरणों से गुजरना होगा, जिसके बाद अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी।
जो उम्मीदवार लंबे समय से ISRO जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में शामिल होने का सपना देख रहे थे, उनके लिए यह साल 2026 की एक बड़ी सौगात है। समय सीमा के भीतर आवेदन करें और अपनी तैयारी को दिशा दें।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर भड़के मुकेश खन्ना, भक्तों को दी बड़ी सलाह
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर 'शक्तिमान' फेम अभिनेता मुकेश खन्ना ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए भक्तों से मंदिर में नकदी चढ़ावा चढ़ाना बंद करने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके।
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अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर 'शक्तिमान' फेम अभिनेता मुकेश खन्ना ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए भक्तों से मंदिर में नकदी चढ़ावा चढ़ाना बंद करने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके।
'शक्तिमान' का फूटा गुस्सा: "भगवान तक नहीं पहुंचता आपका पैसा"
अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी का एक संवेदनशील मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल आम भक्तों को आहत किया है, बल्कि बॉलीवुड और टीवी जगत की जानी-मानी हस्तियों को भी झकझोर कर रख दिया है। दूरदर्शन के मशहूर धारावाहिक 'शक्तिमान' और 'महाभारत' में भीष्म पितामह की कालजयी भूमिका निभाने वाले दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना ने इस कथित घोटाले पर बेहद सख्त रुख अपनाया है।
मुकेश खन्ना अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने देश के करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर सीधे चोट की है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए भक्तों से संवाद करते हुए एक कड़ा संदेश दिया है, जो इस समय हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।
ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी: मुकेश खन्ना का नया फॉर्मूला
मुकेश खन्ना ने राम मंदिर में हुए इस कथित घोटाले पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि जो नकदी चढ़ावा लोग श्रद्धा के साथ भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं, वह वास्तव में भगवान तक नहीं पहुंच पा रहा है। बीच में ही कुछ असामाजिक तत्व या भ्रष्ट लोग उस पर अपना हाथ साफ कर रहे हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए अभिनेता ने एक बेहद व्यावहारिक और धारदार फॉर्मूला पेश किया है। उन्होंने मशहूर मुहावरे का जिक्र करते हुए कहा, "जैसे ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी, वैसे ही ना चढ़ेगा चढ़ावा, ना होगा घोटाला।" उनका मानना है कि जब मंदिर के दानपात्र में नकदी पहुंचेगी ही नहीं, तो किसी भी तरह की हेराफेरी या चोरी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
"चढ़ावा बंद कीजिए, भगवान तभी खुश होंगे"
आमतौर पर धार्मिक स्थलों पर दिल खोलकर दान करने को पुण्य का काम माना जाता है, लेकिन मुकेश खन्ना ने इस लीक से हटकर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने भक्तों को एक स्पष्ट सलाह दी है कि वे अब मंदिरों में नकदी और कीमती चीजें चढ़ाना पूरी तरह से बंद कर दें।
उनका कहना है कि ईश्वर को भक्तों के धन या चढ़ावे का लालच नहीं होता। भगवान केवल सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होते हैं। खन्ना ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, "सो चढ़ावा चढ़ाना बंद कीजिए, भगवान खुश होंगे।" उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर आम जनता के बीच एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या वाकई आस्था के केंद्रों पर नकदी का चढ़ावा बंद कर देना चाहिए ताकि पवित्रता बनी रहे।

रील्स के जाल में भारत: वॉट्सऐप हेड बनते ही कुणाल शाह का बयान वायरल
मेटा द्वारा क्रेड (Cred) के फाउंडर कुणाल शाह को वॉट्सऐप का ग्लोबल हेड नियुक्त किए जाने के बाद उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुणाल शाह ने भारतीयों द्वारा शॉर्ट वीडियो और रील्स पर अत्यधिक समय बर्बाद करने और भारी मात्रा में डेटा की खपत पर गहरी चिंता जताई थी।
मेटा द्वारा क्रेड (Cred) के फाउंडर कुणाल शाह को वॉट्सऐप का ग्लोबल हेड नियुक्त किए जाने के बाद उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुणाल शाह ने भारतीयों द्वारा शॉर्ट वीडियो और रील्स पर अत्यधिक समय बर्बाद करने और भारी मात्रा में डेटा की खपत पर गहरी चिंता जताई थी।
नियुक्ति के साथ ही चर्चा में आया पुराना दर्द
टेक जगत में उस वक्त हलचल मच गई जब सोशल मीडिया दिग्गज मेटा ने भारतीय उद्यमी कुणाल शाह को अपने सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, वॉट्सऐप का ग्लोबल हेड बनाने की घोषणा की। इस बड़ी उपलब्धि के तुरंत बाद, इंटरनेट पर कुणाल शाह का एक पुराना बयान सुर्खियां बटोरने लगा है। यह बयान किसी तकनीकी तारीफ को लेकर नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं की डिजिटल आदतों पर एक कड़ा प्रहार था।
वायरल हो रहे वीडियो में कुणाल शाह बेहद बेबाकी से इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि कैसे भारत में शॉर्ट वीडियो और रील्स देखने की लत लोगों का कीमती समय निगल रही है।
35 GB डेटा और रील्स का चक्रव्यूह
कुणाल शाह ने डिजिटल खपत के चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखते हुए कहा था कि भारत में प्रति व्यक्ति प्रतिमाह औसतन 35 GB डेटा का इस्तेमाल होता है। यह आंकड़ा दुनिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले बहुत ज्यादा है।
शाह का मानना है कि इस भारी-भरकम डेटा का एक बड़ा हिस्सा रचनात्मक कार्यों या सीखने में नहीं, बल्कि रील्स और शॉर्ट वीडियो को अंतहीन रूप से स्क्रॉल करने में खर्च हो रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि डेटा का इतना अधिक उपभोग देश की उत्पादकता और युवाओं की मानसिकता के लिए एक गंभीर संकेत है।
नई जिम्मेदारी और पुराना नजरिया
मेटा के तहत ही इंस्टाग्राम और फेसबुक आते हैं, जो भारत में रील्स के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म हैं। ऐसे में मेटा के ही एक अन्य प्रमुख विंग यानी वॉट्सऐप के ग्लोबल हेड के रूप में कुणाल शाह की नियुक्ति ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।
सोशल मीडिया पर लोग अब शाह के इस पुराने नजरिए को उनकी नई भूमिका से जोड़कर देख रहे हैं। नेटिजन्स का कहना है कि जिस कंपनी के प्लेटफॉर्म्स पर लोग सबसे ज्यादा समय बिता रहे हैं, अब उसी के एक बड़े हिस्से की कमान उस व्यक्ति के हाथ में है जो इस लत के खिलाफ खुलकर बोल चुका है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
कुणाल शाह का यह वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर एक बार फिर 'स्क्रीन टाइम' और 'डिजिटल वेलबीइंग' को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ जहां लोग शाह की इस बात से पूरी तरह सहमत नजर आ रहे हैं कि रील्स ने युवाओं की एकाग्रता और समय को बुरी तरह प्रभावित किया है, वहीं दूसरी तरफ लोग इस बात को लेकर भी उत्सुक हैं कि क्या शाह अपनी इस नई और पावरफुल भूमिका में आने के बाद यूज़र्स के डिजिटल अनुभव और उनके समय की कीमत को लेकर किसी तरह के बदलाव की वकालत करेंगे।

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का क्रेज, मिनटों में बिके भारत-आयरलैंड मैच के सारे टिकट
15 वर्षीय युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी के संभावित डेब्यू को लेकर आयरलैंड में जबरदस्त दीवानगी देखने को मिल रही है। बेलफास्ट में भारत और आयरलैंड के बीच होने वाली टी20 सीरीज के टिकट कुछ ही मिनटों में पूरी तरह बिक गए। दर्शकों की इस अप्रत्याशित भीड़ को संभालने के लिए क्रिकेट आयरलैंड को स्टेडियम में अस्थाई स्टैंड्स बनाने पड़े हैं।
खबर का निचोड़ (Summary)
15 वर्षीय युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी के संभावित डेब्यू को लेकर आयरलैंड में जबरदस्त दीवानगी देखने को मिल रही है। बेलफास्ट में भारत और आयरलैंड के बीच होने वाली टी20 सीरीज के टिकट कुछ ही मिनटों में पूरी तरह बिक गए। दर्शकों की इस अप्रत्याशित भीड़ को संभालने के लिए क्रिकेट आयरलैंड को स्टेडियम में अस्थाई स्टैंड्स बनाने पड़े हैं।
मुख्य आर्टिकल
आयरलैंड में छाया वैभव सूर्यवंशी का जादू
क्रिकेट के मैदान पर जब कोई नया सितारा चमकता है, तो उसकी चमक पूरी दुनिया को आकर्षित करती है। इस समय कुछ ऐसा ही नजारा आयरलैंड के बेलफास्ट में देखने को मिल रहा है, जहाँ भारत और आयरलैंड के बीच होने वाली टी20 सीरीज को लेकर फैंस के बीच अभूतपूर्व उत्साह है। इस भारी उत्साह की सबसे बड़ी वजह कोई सीनियर दिग्गज नहीं, बल्कि भारत के 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी हैं। वैभव इस सीरीज के जरिए अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर का आगाज करने की दहलीज पर खड़े हैं और इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए फैंस बेताब नजर आ रहे हैं।
मिनटों में खाली हुई टिकट खिड़की
वैभव सूर्यवंशी के टीम में शामिल होने की खबर जैसे ही आम हुई, वैसे ही टिकटों को लेकर मारामारी शुरू हो गई। बेलफास्ट के स्टोरमोंट क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाले इस मुकाबले के सारे टिकट कुछ ही मिनटों के भीतर बिक गए। आलम यह है कि टिकट विंडो बंद होने के बाद भी क्रिकेट फैंस लगातार टिकटों की मांग कर रहे हैं। स्थानीय प्रबंधन के पास प्रशंसकों के फोन और संदेशों की बाढ़ आ गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस समय बेलफास्ट में सिर्फ और सिर्फ भारतीय युवा खिलाड़ी का ही क्रेज है।
बनाने पड़े अस्थाई स्टैंड्स
क्रिकेट आयरलैंड के चेयरमैन ब्रायन मैकनीस ने इस स्थिति पर बात करते हुए बताया कि टिकटों की मांग उनकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। स्टेडियम की सीमित क्षमता को देखते हुए अब वहां अतिरिक्त फैंस के बैठने के लिए विशेष रूप से अस्थाई स्टैंड्स (Temporary Stands) तैयार किए जा रहे हैं। मैकनीस के मुताबिक, यदि स्टेडियम की क्षमता इससे तीन गुना भी अधिक होती, तब भी टिकटों की मांग को पूरा करना मुश्किल साबित होता। हर कोई इस मुकाबले का हिस्सा बनकर इतिहास बनते देखना चाहता है।
इतिहास रचने के करीब युवा बल्लेबाज
शुक्रवार से शुरू हो रही इस सीरीज में अगर वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लेंगे। बहुत कम उम्र में घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के जरिए अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले वैभव की चर्चा अब आयरलैंड के गली-मोहल्लों से लेकर खेल जगत के गलियारों तक हो रही है। उनकी इसी धमाकेदार छवि के कारण विदेशी धरती पर भी भारतीय क्रिकेट का डंका बज रहा है और स्टेडियम खचाखच भरने को तैयार है।
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