
लखनऊ अग्निकांड: सोनू सूद का छलका दर्द, बोले– 'शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया सफर'
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं। इस दिल दहला देने वाले हादसे पर अभिनेता सोनू सूद ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने क्लासरूम को सपनों के पनपने की जगह बताते हुए कहा कि बच्चों को खोने वाले परिवारों का दर्द शब्दों से परे है।
खबर का निचोड़
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं। इस दिल दहला देने वाले हादसे पर अभिनेता सोनू सूद ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने क्लासरूम को सपनों के पनपने की जगह बताते हुए कहा कि बच्चों को खोने वाले परिवारों का दर्द शब्दों से परे है।
सपनों की असमय चिता: जब क्लासरूम बन गया काल
लखनऊ का वह इलाका, जो हर रोज सैकड़ों युवाओं की उम्मीदों और सपनों से गूंजता था, अचानक चीख-पुकार और मातम में डूब गया। एक कोचिंग सेंटर में भड़की भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और वहां पढ़ रहे 15 छात्र-छात्राओं की जान ले ली। यह सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि उन दर्जनों परिवारों की उम्मीदों का खात्मा था, जिन्होंने अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य की चाह में वहां भेजा था। इस त्रासद घटना ने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है।
सोनू सूद का फूटा दर्द: 'वहां सपने पनपने चाहिए, अंत नहीं'
इस भयावह त्रासदी पर हमेशा असहायों की मदद के लिए आगे रहने वाले अभिनेता सोनू सूद का दर्द छलक उठा। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने इस घटना को बेहद दर्दनाक बताया। सोनू सूद ने कहा, "क्लासरूम में सपने पनपने चाहिए, वहां उनका अंत नहीं होना चाहिए।" उनकी इस बात ने हर उस माता-पिता के दिल को छू लिया, जो अपने बच्चों को बड़े अरमानों के साथ पढ़ने भेजते हैं।
भविष्य के अधिकारियों और कलाकारों का सफर खत्म
सोनू सूद ने आगे कहा कि इन नन्ही जिंदगियों में देश का भविष्य छिपा था। इनमें से कोई भविष्य का बड़ा अधिकारी बन सकता था, तो किसी में एक महान कलाकार या देश को नई दिशा देने वाला नेता बनने की क्षमता थी। लेकिन अफसोस, इन बच्चों की जीवन यात्रा शुरू होने से ठीक पहले ही हमेशा के लिए ठहर गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई घरों के इकलौते चिराग इस आग में बुझ गए।
माता-पिता का दर्द बयां करना नामुमकिन
कोचिंग सेंटर के भीतर मची इस तबाही ने जो जख्म दिए हैं, वे कभी नहीं भर सकते। जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को हंसते-खेलते घर से विदा किया था, उन्हें उनके शव मिले। सोनू सूद ने दुख जताते हुए कहा कि जिन परिवारों ने इस हादसे में अपने बच्चों को खोया है, उनके दर्द को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। यह एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई दुनिया की कोई भी ताकत नहीं कर सकती। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर आंख नम है।

सलमान-संजय पर पूछा 'विवादास्पद' सवाल, रिपोर्टर पर भड़के रितेश देशमुख
रियलिटी शो 'लॉकअप सीज़न-2' के लॉन्च इवेंट में उस समय तनाव बढ़ गया जब एक रिपोर्टर ने रितेश देशमुख से उनके करीबी दोस्तों, सलमान खान और संजय दत्त के अतीत को लेकर एक तीखा सवाल पूछ लिया। रिपोर्टर के इस रवैए पर रितेश ने बेहद कड़ा रुख अपनाया और करारा जवाब देते हुए सवाल पर ही पूर्णविराम लगा दिया।
खबर का निचोड़
रियलिटी शो 'लॉकअप सीज़न-2' के लॉन्च इवेंट में उस समय तनाव बढ़ गया जब एक रिपोर्टर ने रितेश देशमुख से उनके करीबी दोस्तों, सलमान खान और संजय दत्त के अतीत को लेकर एक तीखा सवाल पूछ लिया। रिपोर्टर के इस रवैए पर रितेश ने बेहद कड़ा रुख अपनाया और करारा जवाब देते हुए सवाल पर ही पूर्णविराम लगा दिया।
लॉन्च इवेंट में अचानक बदला माहौल
मनोरंजन जगत में अपनी शालीनता और हाजिरजवाबी के लिए मशहूर अभिनेता रितेश देशमुख का एक अलग ही रूप देखने को मिला है। मौका था बहुचर्चित रियलिटी शो 'लॉकअप सीज़न-2' के ग्रैंड लॉन्च इवेंट का। शो को लेकर हर तरफ भारी उत्साह था और मीडिया के तमाम सवाल-जवाब का सिलसिला चल रहा था। इसी बीच एक रिपोर्टर ने कुछ ऐसा पूछ लिया जिसने वहां मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया।
अतीत के पन्नों को कुरेदने की कोशिश
इवेंट के दौरान एक रिपोर्टर ने रितेश देशमुख से सीधे उनके दोस्तों को लेकर सवाल दाग दिया। रिपोर्टर ने पूछा, "आपके सबसे करीबी दोस्त सलमान खान और संजय दत्त को लॉकअप का काफी अनुभव रहा है, तो क्या आप उन्हें अपने इस शो 'लॉकअप' में मेहमान के तौर पर बुलाएंगे?" यह सवाल बॉलीवुड के इन दो बड़े सितारों के अतीत में रहे कानूनी विवादों और जेल के दिनों की तरफ सीधा इशारा था।
रितेश देशमुख का तीखा और करारा पलटवार
इस तरह के निजी और संवेदनशील सवाल को सुनते ही रितेश देशमुख का पारा चढ़ गया। हालांकि, उन्होंने अपना आपा नहीं खोया बल्कि बेहद कड़े और गंभीर शब्दों में रिपोर्टर को उसकी सीमा याद दिलाई। रितेश ने दो टूक शब्दों में कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैं आपके इस सवाल का जवाब देकर इसकी गरिमा बढ़ाऊंगा... मुझे इसका जवाब बिल्कुल नहीं देना है।" रितेश का यह रुख साफ करता है कि वे दोस्ती के बीच में इस तरह की पत्रकारिता को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं थे।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस घटना का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोग दो गुटों में बंट गए हैं। फैंस का एक बड़ा वर्ग रितेश देशमुख के इस कदम की जमकर तारीफ कर रहा है। लोगों का कहना है कि किसी शो के प्रमोशन के दौरान सितारों के निजी जीवन या उनके दोस्तों के पुराने कानूनी मामलों को घसीटना पूरी तरह से गलत है। वहीं, कुछ लोग इसे रिपोर्टर का काम मान रहे हैं। बहरहाल, रितेश के इस बेबाक अंदाज ने यह साफ कर दिया है कि वे अपने दोस्तों के सम्मान से समझौता कभी नहीं करेंगे।

केतन हत्याकांड: वो 5 ब्लंडर, जिससे सलाखों के पीछे पहुंचे सिया और चेतन
एक खौफनाक साजिश, शातिर दिमाग और कत्ल की पूरी प्लानिंग... लेकिन जुर्म चाहे कितना भी शातिराना हो, अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है। केतन अग्रवाल हत्याकांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ। खुद को बेकसूर साबित करने की कोशिश में जुटे आरोपी सिया और चेतन ने पांच ऐसी बड़ी गलतियां (ब्लंडर्स) कर दीं, जिन्होंने पुलिस के सामने उनकी पूरी साजिश की पोल खोलकर रख दी।
एक खौफनाक साजिश, शातिर दिमाग और कत्ल की पूरी प्लानिंग... लेकिन जुर्म चाहे कितना भी शातिराना हो, अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है। केतन अग्रवाल हत्याकांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ। खुद को बेकसूर साबित करने की कोशिश में जुटे आरोपी सिया और चेतन ने पांच ऐसी बड़ी गलतियां (ब्लंडर्स) कर दीं, जिन्होंने पुलिस के सामने उनकी पूरी साजिश की पोल खोलकर रख दी।
गर्मी में हुडी: पहली बड़ी भूल
कत्ल की वारदात को अंजाम देने के लिए लोहागढ़ किले को चुना गया था। लेकिन वारदात के वक्त चेतन ने एक ऐसी बचकानी गलती की, जो सीधे पुलिस की नजर में आ गई। तपती गर्मी के मौसम में चेतन लोहागढ़ किले के आसपास हुडी पहने हुए देखा गया। इस असामान्य पहनावे ने न सिर्फ वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस के लिए भी यह सबसे बड़ा सुराग बन गया। मौसम के मिजाज से उलट यह हुडी ही उसकी पहचान का जरिया बनी।
लोहागढ़ किले का अजीब री-विजिट
साजिश के तहत केतन को लोहागढ़ किले तक ले जाना सबसे अहम कड़ी थी। इसके लिए सिया ने एक अजीब और संदिग्ध पैटर्न अपनाया। वह महज 15 दिनों के भीतर बार-बार केतन को लोहागढ़ ले जाने की जिद करने लगी। एक ही ऐतिहासिक जगह पर इतनी जल्दी-जल्दी जाने की यह बेचैनी किसी के भी गले नहीं उतर रही थी। सिया की यही हड़बड़ाहट बाद में जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई और उसकी भूमिका संदिग्ध हो गई।
बाली ट्रिप और रहस्यमयी ढंग से गायब पासपोर्ट
हत्याकांड से ठीक पहले की एक और घटना ने इस पूरी साजिश की टाइमलाइन को साफ कर दिया। केतन और सिया का बाली जाने का प्लान था। लेकिन इस ट्रिप से ठीक पहले केतन का पासपोर्ट अचानक और रहस्यमयी ढंग से गायब हो गया। इस वजह से वह विदेश नहीं जा सका। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि यह कोई इत्तेफाक नहीं था, बल्कि केतन को देश में ही रोककर उसकी हत्या की साजिश का एक हिस्सा था।
अंतिम संस्कार के बाद बदला बर्ताव
कहते हैं कि अपराधी कत्ल करने के बाद कितना भी सामान्य दिखने का नाटक करे, उसका व्यवहार सच बयां कर देता है। केतन की मौत के बाद जब उसका अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब सिया का बर्ताव पूरी तरह बदल चुका था। उसके हाव-भाव और बयानों में भारी विरोधाभास साफ नजर आ रहा था। कभी दुख का दिखावा तो कभी बातों को घुमाना—सिया की इस बदली हुई बॉडी लैंग्वेज ने परिवार और पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया।
दूसरे के मोबाइल का इस्तेमाल
तकनीक के इस दौर में चेतन ने खुद को चालाक समझते हुए अपने फोन के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति का मोबाइल इस्तेमाल करने का फैसला किया। वह किसी और का मोबाइल लेकर लोहागढ़ किला पहुंचा था, ताकि उसकी खुद की लोकेशन ट्रेस न हो सके। लेकिन डिजिटल फुटप्रिंट्स के इस दौर में पुलिस ने उस अनजान मोबाइल नंबर की लोकेशन और टावर डंप डेटा के जरिए चेतन के लोकेशन पैटर्न को क्रैक कर लिया, जिससे उसका सारा खेल बिगड़ गया।

RSSB CET 10+2 Notification 2026: राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने का बड़ा मौका
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने सीनियर सेकेंडरी (10+2) स्तर के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। योग्य उम्मीदवार 24 जून 2026 से 23 July 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अवसर है।
खबर का निचोड़:
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने सीनियर सेकेंडरी (10+2) स्तर के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। योग्य उम्मीदवार 24 जून 2026 से 23 July 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अवसर है।
युवाओं के लिए सुनहरा अवसर: राजस्थान CET 10+2 का शंखनाद
राजस्थान में सरकारी सेवा में शामिल होने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबर है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने सीनियर सेकेंडरी (10+2) स्तर के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) 2026 की घोषणा कर दी है। इस परीक्षा के जरिए राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में निकलने वाली विभिन्न भर्तियों के लिए उम्मीदवारों की पात्रता तय की जाएगी। जो अभ्यर्थी लंबे समय से इस नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए अब तैयारी में जुटने का सही समय आ गया है।
आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां और समय
बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 जून 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों के पास फॉर्म भरने के लिए लगभग एक महीने का समय होगा। ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 23 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। आखिरी समय में वेबसाइट पर होने वाली संभावित तकनीकी दिक्कतों और भारी ट्रैफिक से बचने के लिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
योग्यता, आयु सीमा और आवेदन प्रक्रिया
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से सीनियर सेकेंडरी यानी 10+2 या इसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, विभिन्न पदों के अनुसार आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यताओं के विस्तृत विवरण को भी बोर्ड ने साझा किया है। उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क, चयन प्रक्रिया, परीक्षा के प्रारूप और आयु सीमा में मिलने वाली छूट से जुड़ी सभी बारीकियों को समझने के लिए आवेदन पोर्टल पर उपलब्ध विस्तृत दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए।
क्यों खास है यह परीक्षा?
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली यह कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) एक तरह की मुख्य प्रवेश परीक्षा है। सीनियर सेकेंडरी स्तर की कई प्रतिष्ठित सरकारी नौकरियों की मुख्य परीक्षा में बैठने के लिए इस पात्रता परीक्षा को पास करना अनिवार्य होता है। इसमें प्राप्त अंकों के आधार पर ही आगामी भर्तियों की मुख्य परीक्षाओं के लिए शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। यही वजह है कि प्रदेश के लाखों प्रतियोगी छात्र इस परीक्षा को लेकर बेहद गंभीर रहते हैं। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन माध्यम से इस फॉर्म को भरा जा सकता है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026: असाधारण बाल प्रतिभाओं के लिए नामांकन आमंत्रित
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश के सर्वोच्च बाल नागरिक सम्मान 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' (PMRBP) 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 5 से 18 वर्ष के भारतीय बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए छह निर्धारित श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश के सर्वोच्च बाल नागरिक सम्मान 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' (PMRBP) 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 5 से 18 वर्ष के भारतीय बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए छह निर्धारित श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
विस्तृत विश्लेषण
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्वरूप
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार को इसके वर्तमान स्वरूप में वर्ष 2019 में पुनर्गठित किया गया था। इससे पहले इसे 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' और 'राजीव गांधी मानव सेवा पुरस्कार' जैसी विभिन्न श्रेणियों के तहत जाना जाता था। यह पुरस्कार भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जाता है। वर्तमान में इसे भारत में बच्चों के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 'वीर बाल दिवस' (26 दिसंबर) के अवसर पर या उसके आसपास आयोजित होने वाले एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
पुरस्कार की प्रमुख श्रेणियाँ
यह पुरस्कार मुख्य रूप से छह विशिष्ट क्षेत्रों में बच्चों के असाधारण और उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता देता है:
वीरता (Bravery): निस्वार्थ भाव से दूसरों की जान बचाने या अदम्य साहस का प्रदर्शन करने के लिए।
कला और संस्कृति (Art & Culture): संगीत, नृत्य, चित्रकला या अन्य पारंपरिक कलाओं में विशिष्ट प्रतिभा।
पर्यावरण (Environment): पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबिलिटी या जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नवाचार या प्रयास।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science & Technology): वैज्ञानिक अनुसंधान, नवीन खोजों या तकनीकी अनुप्रयोगों में योगदान।
सामाजिक सेवा (Social Service): समाज कल्याण, वंचितों के उत्थान या सामुदायिक विकास के लिए कार्य।
खेल (Sports): राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल कूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतना।
पात्रता और चयन के कड़े मानदंड
पुरस्कार के लिए विचार किए जाने वाले आवेदकों को कुछ अनिवार्य योग्यताओं को पूरा करना होता है:
आयु सीमा: नामांकन की अंतिम तिथि तक बच्चे की आयु 5 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।
नागरिकता व निवास: आवेदक का अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक होना और भारत में ही निवास करना आवश्यक है।
समय सीमा: बच्चे की असाधारण उपलब्धि नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पिछले दो वर्षों के भीतर की होनी चाहिए।
एकल पुरस्कार नियम: किसी भी बच्चे को यह पुरस्कार उसके जीवनकाल में केवल एक ही बार दिया जा सकता है।
मरणोपरांत विचार: सामान्य दिशानिर्देशों के तहत यह पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिया जाता है, लेकिन बेहद असाधारण और अपरिहार्य मामलों में इस पर विचार किया जा सकता है।
पुरस्कार के घटक और प्रोत्साहन
सफल विजेताओं को सरकार द्वारा विभिन्न प्रोत्साहनों से सम्मानित किया जाता है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को माननीय राष्ट्रपति के हस्ताक्षरित एक प्रमाण पत्र, एक पदक और एक विस्तृत साइटेशन बुकलेट (प्रशस्ति पुस्तिका) प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, इन विजेताओं को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में भी भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (Fact Box)
नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार।
पुरस्कार का स्तर: बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
घोषणा/प्रदान करने का दिन: वीर बाल दिवस (26 दिसंबर)।
आयु पात्रता: 5 से 18 वर्ष के बीच।
निर्धारित श्रेणियाँ: कुल 6 श्रेणियाँ (वीरता, कला व संस्कृति, पर्यावरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल)।
पूर्ववर्ती स्वरूप: वर्ष 2019 में इसे एकीकृत कर 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' नाम दिया गया था।
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