
कोलकाता के रेड रोड पर पीएम मोदी ने फूंका योग का शंखनाद, उमड़ा जनसैलाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व किया। इस भव्य आयोजन में हजारों लोगों ने एक साथ सामूहिक योग किया। इसके साथ ही कोलकाता के कई अन्य हिस्सों में भी समकालिक (सिंक्रोनाइज्ड) योग कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया।
खबर का निचोड़:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व किया। इस भव्य आयोजन में हजारों लोगों ने एक साथ सामूहिक योग किया। इसके साथ ही कोलकाता के कई अन्य हिस्सों में भी समकालिक (सिंक्रोनाइज्ड) योग कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया।
रेड रोड पर उमड़ा उत्साह का समंदर
21 जून की सुबह कोलकाता का ऐतिहासिक रेड रोड एक अलग ही रंग में रंगा नजर आया। मौका था 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मोर्चा संभालते हुए देश और दुनिया को सेहत और मानसिक शांति का संदेश दिया। सुबह की पहली किरण के साथ ही रेड रोड पर हजारों की संख्या में योग साधक जुट चुके थे। प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने इस आयोजन में एक नई ऊर्जा फूंक दी। जैसे ही सामूहिक योग सत्र की शुरुआत हुई, पूरा माहौल अनुशासन, ध्यान और सकारात्मकता से भर गया।
कोलकाता बना योगमय: हर कोने में बिखरी आभा
यह भव्य आयोजन केवल रेड रोड तक ही सीमित नहीं रहा। कोलकाता के प्रशासनिक और सांस्कृतिक तालमेल की एक अनूठी मिसाल तब देखने को मिली, जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ, एक ही समय पर योग सत्र आयोजित किए गए। इन समकालिक (सिंक्रोनाइज्ड) कार्यक्रमों की वजह से पूरा कोलकाता शहर योग के रंग में सराबोर दिखाई दिया। बच्चे, बुजुर्ग, युवा और समाज के हर वर्ग के लोगों ने इस महा-उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और यह साबित किया कि व्यस्त जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है।
वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक विजय
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की यात्रा वास्तव में वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते सांस्कृतिक प्रभाव की कहानी है। साल 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने आधिकारिक तौर पर 21 जून को इस खास दिन के रूप में घोषित किया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस प्रस्ताव को भारी जनसमर्थन मिला था, जिसके बाद 21 जून 2015 को दुनिया ने पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया। तब से लेकर आज तक, हर साल यह वैश्विक आंदोलन और अधिक मजबूत होता जा रहा है।
सेहत और एकता का सार्वभौमिक संदेश
कोलकाता का यह आयोजन केवल शारीरिक कसरत का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह मानसिक शांति, वैश्विक एकता और समभाव का एक बड़ा प्रतीक बनकर उभरा। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए इस आयोजन ने एक बार फिर रेखांकित किया कि प्राचीन भारतीय संस्कृति की यह धरोहर आज की तनावभरी आधुनिक दुनिया में कितनी प्रासंगिक है। रेड रोड पर एक सुर में होते प्राणायाम और आसनों ने न केवल कोलकाता, बल्कि पूरे विश्व को निरोग रहने का एक शक्तिशाली संदेश दिया है।

सरकारी नौकरी का बड़ा मौका: DSSSB में 1979 पदों पर बम्पर भर्ती
दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (DSSSB) ने विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस अभियान के तहत कुल 1979 खाली पदों को भरा जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार 16 जून 2026 से लेकर 15 जुलाई 2026 तक बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (DSSSB) ने विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस अभियान के तहत कुल 1979 खाली पदों को भरा जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार 16 जून 2026 से लेकर 15 जुलाई 2026 तक बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
युवाओं के लिए दिल्ली में करियर बनाने का सुनहरा अवसर
दिल्ली में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक शानदार खबर है। दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (DSSSB) ने विज्ञापन संख्या 03/2026 के तहत एक बड़ा भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया है। इस बार बोर्ड ने एक या दो नहीं, बल्कि कुल 1979 पदों पर नियुक्तियों के लिए आवेदन मांगे हैं। जो उम्मीदवार देश की राजधानी में एक प्रतिष्ठित सरकारी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं, उनके लिए यह अपनी काबिलियत साबित करने का बेहतरीन मौका है।
आवेदन की तारीखें और समय सीमा
इस भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी गई है। उम्मीदवार 16 जून 2026 से ही अपने फॉर्म भर पा रहे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 तय की गई है। आखिरी समय में वेबसाइट पर होने वाली संभावित तकनीकी दिक्कतों और भारी ट्रैफिक से बचने के लिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण और फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी कर लें।
आयु सीमा और पात्रता के नियम
DSSSB ने अलग-अलग पदों की प्रकृति और जिम्मेदारी के हिसाब से शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा तय की है। इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 से 20 वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं, अलग-अलग पदों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा 27 से 37 वर्ष के बीच रखी गई है। उम्मीदवार की आयु की गणना 15 जुलाई 2026 को आधार मानकर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के आवेदकों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी, जिसका विस्तृत विवरण आधिकारिक नोटिफिकेशन में देखा जा सकता है।
चयन प्रक्रिया और तैयारी की रणनीति
इन 1979 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली लिखित परीक्षा और पद की आवश्यकता के अनुसार स्किल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में सफलता पाने के लिए उम्मीदवारों को अभी से अपनी तैयारी की रूपरेखा तैयार कर लेनी चाहिए। समय पर सिलेबस को समझना, पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास करना और लगातार मॉक टेस्ट देना इस परीक्षा को पास करने की कुंजी साबित हो सकता है। आवेदन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गाइडलाइन को ध्यान से पढ़ने के बाद ही फॉर्म सबमिट करें ताकि भविष्य में किसी भी तरह की त्रुटि से बचा जा सके।

SSC CHSL 2025: टियर-2 आंसर की और फाइनल वैकेंसी जारी, ऐसे भरें प्राथमिकता फॉर्म
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (CHSL) परीक्षा 2025 को लेकर कई बड़े और महत्वपूर्ण अपडेट्स एक साथ जारी कर दिए हैं। आयोग ने टियर-1 परीक्षा के मार्क्स और रिजल्ट जारी करने के साथ ही टियर-2 की आंसर की भी घोषित कर दी है। इसके अलावा, फाइनल वैकेंसी की डिटेल्स और सबसे महत्वपूर्ण 'ऑप्शन कम प्रेफरेंस फॉर्म' का लिंक भी एक्टिव कर दिया गया है। जो भी उम्मीदवार इस परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इन सभी जरूरी अपडेट्स को चेक कर सकते हैं।
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (CHSL) परीक्षा 2025 को लेकर कई बड़े और महत्वपूर्ण अपडेट्स एक साथ जारी कर दिए हैं। आयोग ने टियर-1 परीक्षा के मार्क्स और रिजल्ट जारी करने के साथ ही टियर-2 की आंसर की भी घोषित कर दी है। इसके अलावा, फाइनल वैकेंसी की डिटेल्स और सबसे महत्वपूर्ण 'ऑप्शन कम प्रेफरेंस फॉर्म' का लिंक भी एक्टिव कर दिया गया है। जो भी उम्मीदवार इस परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इन सभी जरूरी अपडेट्स को चेक कर सकते हैं।
नतीजों और आंसर की का इंतजार हुआ खत्म
एसएससी CHSL 2025 परीक्षा में शामिल हुए देश भर के लाखों उम्मीदवारों का इंतजार अब खत्म हो चुका है। आयोग ने एक के बाद एक कई नोटिस जारी कर पूरी चयन प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। टियर-1 परीक्षा के मार्क्स और रिजल्ट के आधिकारिक ऐलान के बाद, अब टियर-2 परीक्षा की आंसर की भी उम्मीदवारों के सामने है। इससे अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन का सटीक आकलन कर सकेंगे और संभावित स्कोर का अंदाजा लगा सकेंगे। इस कदम से पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी देखने को मिल रही है।
फाइनल वैकेंसी की स्थिति हुई साफ
नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं के लिए सबसे राहत की बात यह है कि आयोग ने अंतिम रिक्तियों (Final Vacancy) का पूरा ब्योरा सार्वजनिक कर दिया है। इसके तहत विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों में खाली पड़े पदों की सटीक संख्या स्पष्ट हो गई है। उम्मीदवार अब यह देख सकते हैं कि किस विभाग में, किस कैटेगरी के लिए कितने पद सुरक्षित रखे गए हैं। फाइनल वैकेंसी की यह लिस्ट उम्मीदवारों को उनके मनपसंद विभाग में जगह बनाने की रणनीति तैयार करने में मदद करेगी।
'ऑप्शन कम प्रेफरेंस फॉर्म' क्यों है सबसे जरूरी?
इस पूरे अपडेट में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 'ऑप्शन कम प्रेफरेंस फॉर्म' (Option cum Preference Form) का लाइव होना है। यह फॉर्म सीधे तौर पर उम्मीदवारों के चयन और उन्हें मिलने वाले विभाग को तय करता है। इसके जरिए अभ्यर्थियों को अपनी पसंद के विभागों और पदों को प्राथमिकता के क्रम में चुनना होता है। यदि कोई उम्मीदवार इस फॉर्म को भरने में चूक जाता है या तय समय सीमा के भीतर अपनी प्राथमिकताएं दर्ज नहीं करता है, तो उसे अंतिम चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा। इसलिए, सभी योग्य उम्मीदवारों को बेहद सावधानी से अपनी चॉइस फिलिंग पूरी करनी होगी।
भर्ती प्रक्रिया और आगे की राह
स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की इस कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल परीक्षा के जरिए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC), जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (JSA) और डेटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) जैसे प्रतिष्ठित पदों पर भर्तियां की जा रही हैं। टियर-1 और टियर-2 के पड़ाव पार करने के बाद अब पूरा दारोमदार इस प्रेफरेंस फॉर्म और फाइनल मेरिट लिस्ट पर टिका हुआ है। परीक्षा से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश, चयन प्रक्रिया और आगामी चरणों की पूरी जानकारी के लिए अभ्यर्थी आयोग द्वारा जारी किए गए मूल विज्ञापन और लेटेस्ट नोटिस को ध्यान से पढ़ सकते हैं।

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का विश्व रिकॉर्ड: 11 गेंदों में जड़ा सबसे तेज अर्धशतक
भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका 'ए' के खिलाफ ट्राई-सीरीज के फाइनल मुकाबले में इतिहास रच दिया है। वैभव ने महज 11 गेंदों पर विश्व रिकॉर्ड तोड़ अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। उन्होंने 29 गेंदों पर 94 रनों की तूफानी पारी खेलते हुए भारत 'ए' को खिताबी जीत दिलाई। इस धमाकेदार प्रदर्शन को पिछले मैच में हुए विवाद के करारे जवाब के रूप में देखा जा रहा है। वैभव की इस ऐतिहासिक पारी के बाद श्रीलंकाई कप्तान सहित दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनकी मानसिक मजबूती की जमकर तारीफ की है। शानदार खेल के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका 'ए' के खिलाफ ट्राई-सीरीज के फाइनल मुकाबले में इतिहास रच दिया है। वैभव ने महज 11 गेंदों पर विश्व रिकॉर्ड तोड़ अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। उन्होंने 29 गेंदों पर 94 रनों की तूफानी पारी खेलते हुए भारत 'ए' को खिताबी जीत दिलाई। इस धमाकेदार प्रदर्शन को पिछले मैच में हुए विवाद के करारे जवाब के रूप में देखा जा रहा है। वैभव की इस ऐतिहासिक पारी के बाद श्रीलंकाई कप्तान सहित दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनकी मानसिक मजबूती की जमकर तारीफ की है। शानदार खेल के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
फाइनल में तूफान: 11 गेंदों में इतिहास और 94 रनों का तांडव
ट्राई-सीरीज का फाइनल मुकाबला भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक युवा खिलाड़ी के नाम दर्ज हो गया। भारत 'ए' की तरफ से खेलते हुए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने मैदान पर कदम रखते ही श्रीलंकाई गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने महज 11 गेंदों का सामना करते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया, जो क्रिकेट इतिहास में किसी भी स्तर पर लगाया गया सबसे तेज अर्धशतक है।
वैभव यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपनी इस आक्रामक बल्लेबाजी को जारी रखा और सिर्फ 29 गेंदों में 94 रनों की बेहद विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी में चौकों और छक्कों की झड़ी लगी रही, जिसने श्रीलंकाई टीम को मैच से पूरी तरह बाहर कर दिया। वैभव की इस अविश्वसनीय पारी की बदौलत भारत 'ए' ने आसानी से फाइनल मैच जीतकर खिताब पर कब्जा जमाया।
विवाद का बल्ले से दिया करारा जवाब
वैभव सूर्यवंशी की इस ऐतिहासिक पारी के पीछे एक खास पृष्ठभूमि भी रही। दरअसल, सीरीज के पिछले मुकाबले में उनके साथ कुछ विवाद हुआ था, जिसके बाद उनकी तकनीक और स्वभाव पर सवाल उठाए जा रहे थे। फाइनल जैसे बड़े मंच पर वैभव ने किसी जुबानी जंग में पड़ने के बजाय अपने बल्ले से जवाब देना बेहतर समझा। दबाव वाले इस बड़े मैच में उन्होंने जिस निडरता के साथ बल्लेबाजी की, उसे आलोचकों और विरोधी टीम के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
दिग्गजों ने की मानसिक मजबूती की सराहना
इस अभूतपूर्व प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी पर चौतरफा तारीफों की बरसात हो रही है। मैच गंवाने के बाद भी श्रीलंकाई कप्तान ने खेल भावना दिखाते हुए भारतीय युवा बल्लेबाज की खुलकर तारीफ की और उनकी पारी को बेमिसाल बताया।
वहीं, सोशल मीडिया पर अक्सर देश की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने वाले दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी वैभव के मुरीद हो गए। आनंद महिंद्रा ने विशेष रूप से वैभव की मानसिक मजबूती (Mental Toughness) की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में, पिछले मैच के विवाद के दबाव को पीछे छोड़कर इस तरह की साहसी पारी खेलना यह दिखाता है कि इस खिलाड़ी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।
प्लेयर ऑफ द मैच से नवाजे गए वैभव
भारत 'ए' को चैंपियन बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले वैभव सूर्यवंशी को उनके इस हरफनमौला और रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की 'ए' टीम के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन कर वैभव ने साबित कर दिया है कि वे भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े सुपरस्टार बनने की राह पर हैं।

नारों पर भड़के खड़गे: समर्थकों को कहा 'निकम्मा', कार्रवाई की चेतावनी
बेंगलुरु के 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंच पर ही डीके शिवकुमार के समर्थकों पर भड़क गए। समर्थकों द्वारा लगातार की जा रही नारेबाजी से नाराज खड़गे ने उन्हें 'निकम्मे' और 'बेकार' तक कह डाला। उन्होंने पार्टी में अनुशासनहीनता और व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए वीडियो फुटेज देखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की दोटूक चेतावनी दी है। यह घटना एक बार फिर कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी गुटबाजी को सरेआम उजागर करती है।
बेंगलुरु के 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंच पर ही डीके शिवकुमार के समर्थकों पर भड़क गए। समर्थकों द्वारा लगातार की जा रही नारेबाजी से नाराज खड़गे ने उन्हें 'निकम्मे' और 'बेकार' तक कह डाला। उन्होंने पार्टी में अनुशासनहीनता और व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए वीडियो फुटेज देखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की दोटूक चेतावनी दी है। यह घटना एक बार फिर कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी गुटबाजी को सरेआम उजागर करती है।
मंच पर हंगामा: जब आपा खो बैठे कांग्रेस अध्यक्ष
बेंगलुरु में आयोजित 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम का माहौल उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपना संबोधन दे रहे थे। इसी दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उत्साही समर्थकों ने पंडाल में 'डीके-डीके' के नारे लगाने शुरू कर दिए। नारों का शोर इतना बढ़ गया कि खड़गे के भाषण में बार-बार बाधा आने लगी।
शुरुआत में स्थिति को संभालने की कोशिश की गई, लेकिन जब समर्थक नहीं माने तो मल्लिकार्जुन खड़गे का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में नारेबाजी कर रहे लोगों को फटकार लगाई। खड़गे ने माइक पर ही साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चिल्ला रहे समर्थकों को 'निकम्मे' और 'बेकार लोग' कहकर शांत बैठने की हिदायत दी।
व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त तेवर
कांग्रेस अध्यक्ष ने मंच से सीधे तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश दिया कि संगठन में किसी भी तरह की व्यक्ति पूजा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताओं के पीछे भागने और उनके नाम के नारे लगाने से पार्टी मजबूत नहीं होती, बल्कि इससे अनुशासन भंग होता है।
खड़गे यहीं नहीं रुके; उन्होंने मंच पर मौजूद अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ऐलान किया कि इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज निकाली जाएगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जिन लोगों ने भी कार्यक्रम में बाधा डाली है और अनुशासनहीनता की है, उनकी पहचान करके उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। खड़गे के इस कड़े रुख के बाद पूरे पंडाल में सन्नाटा पसर गया।
गुटबाजी की पुरानी बीमारी फिर आई सामने
यह कोई पहला मौका नहीं है जब कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान इस तरह सार्वजनिक मंच पर दिखाई दी हो। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के गुटों के बीच की कड़वाहट समय-समय पर सामने आती रही है। बेंगलुरु की इस घटना ने साफ कर दिया है कि शीर्ष स्तर पर भले ही सब कुछ ठीक दिखाने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच की खाई अभी भी बहुत गहरी है। पार्टी अध्यक्ष के सामने ही अपने पसंदीदा नेता की ब्रांडिंग करने की यह होड़ कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन चुकी है।
चौतरफा चुनौतियों से घिरे खड़गे
मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए यह समय राजनीतिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण चल रहा है। एक तरफ जहां उन्हें पार्टी के भीतर इस तरह की अनुशासनहीनता और गुटबाजी से निपटना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वे संसद में भी कड़े विरोध का सामना कर रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दी गई अपनी एक कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर खड़गे कानूनी और संसदीय मुश्किलों में घिरे हुए हैं। इस मामले में उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस भी जारी हो चुका है। ऐसे में गृह राज्य कर्नाटक में अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं का यह बर्ताव उनके लिए दोहरी परेशानी खड़ी करने वाला साबित हो रहा है।
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