
15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का विश्व रिकॉर्ड: 11 गेंदों में जड़ा सबसे तेज अर्धशतक
भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका 'ए' के खिलाफ ट्राई-सीरीज के फाइनल मुकाबले में इतिहास रच दिया है। वैभव ने महज 11 गेंदों पर विश्व रिकॉर्ड तोड़ अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। उन्होंने 29 गेंदों पर 94 रनों की तूफानी पारी खेलते हुए भारत 'ए' को खिताबी जीत दिलाई। इस धमाकेदार प्रदर्शन को पिछले मैच में हुए विवाद के करारे जवाब के रूप में देखा जा रहा है। वैभव की इस ऐतिहासिक पारी के बाद श्रीलंकाई कप्तान सहित दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनकी मानसिक मजबूती की जमकर तारीफ की है। शानदार खेल के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका 'ए' के खिलाफ ट्राई-सीरीज के फाइनल मुकाबले में इतिहास रच दिया है। वैभव ने महज 11 गेंदों पर विश्व रिकॉर्ड तोड़ अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। उन्होंने 29 गेंदों पर 94 रनों की तूफानी पारी खेलते हुए भारत 'ए' को खिताबी जीत दिलाई। इस धमाकेदार प्रदर्शन को पिछले मैच में हुए विवाद के करारे जवाब के रूप में देखा जा रहा है। वैभव की इस ऐतिहासिक पारी के बाद श्रीलंकाई कप्तान सहित दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनकी मानसिक मजबूती की जमकर तारीफ की है। शानदार खेल के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
फाइनल में तूफान: 11 गेंदों में इतिहास और 94 रनों का तांडव
ट्राई-सीरीज का फाइनल मुकाबला भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक युवा खिलाड़ी के नाम दर्ज हो गया। भारत 'ए' की तरफ से खेलते हुए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने मैदान पर कदम रखते ही श्रीलंकाई गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने महज 11 गेंदों का सामना करते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया, जो क्रिकेट इतिहास में किसी भी स्तर पर लगाया गया सबसे तेज अर्धशतक है।
वैभव यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपनी इस आक्रामक बल्लेबाजी को जारी रखा और सिर्फ 29 गेंदों में 94 रनों की बेहद विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी में चौकों और छक्कों की झड़ी लगी रही, जिसने श्रीलंकाई टीम को मैच से पूरी तरह बाहर कर दिया। वैभव की इस अविश्वसनीय पारी की बदौलत भारत 'ए' ने आसानी से फाइनल मैच जीतकर खिताब पर कब्जा जमाया।
विवाद का बल्ले से दिया करारा जवाब
वैभव सूर्यवंशी की इस ऐतिहासिक पारी के पीछे एक खास पृष्ठभूमि भी रही। दरअसल, सीरीज के पिछले मुकाबले में उनके साथ कुछ विवाद हुआ था, जिसके बाद उनकी तकनीक और स्वभाव पर सवाल उठाए जा रहे थे। फाइनल जैसे बड़े मंच पर वैभव ने किसी जुबानी जंग में पड़ने के बजाय अपने बल्ले से जवाब देना बेहतर समझा। दबाव वाले इस बड़े मैच में उन्होंने जिस निडरता के साथ बल्लेबाजी की, उसे आलोचकों और विरोधी टीम के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
दिग्गजों ने की मानसिक मजबूती की सराहना
इस अभूतपूर्व प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी पर चौतरफा तारीफों की बरसात हो रही है। मैच गंवाने के बाद भी श्रीलंकाई कप्तान ने खेल भावना दिखाते हुए भारतीय युवा बल्लेबाज की खुलकर तारीफ की और उनकी पारी को बेमिसाल बताया।
वहीं, सोशल मीडिया पर अक्सर देश की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने वाले दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी वैभव के मुरीद हो गए। आनंद महिंद्रा ने विशेष रूप से वैभव की मानसिक मजबूती (Mental Toughness) की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में, पिछले मैच के विवाद के दबाव को पीछे छोड़कर इस तरह की साहसी पारी खेलना यह दिखाता है कि इस खिलाड़ी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।
प्लेयर ऑफ द मैच से नवाजे गए वैभव
भारत 'ए' को चैंपियन बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले वैभव सूर्यवंशी को उनके इस हरफनमौला और रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की 'ए' टीम के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन कर वैभव ने साबित कर दिया है कि वे भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े सुपरस्टार बनने की राह पर हैं।

नारों पर भड़के खड़गे: समर्थकों को कहा 'निकम्मा', कार्रवाई की चेतावनी
बेंगलुरु के 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंच पर ही डीके शिवकुमार के समर्थकों पर भड़क गए। समर्थकों द्वारा लगातार की जा रही नारेबाजी से नाराज खड़गे ने उन्हें 'निकम्मे' और 'बेकार' तक कह डाला। उन्होंने पार्टी में अनुशासनहीनता और व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए वीडियो फुटेज देखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की दोटूक चेतावनी दी है। यह घटना एक बार फिर कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी गुटबाजी को सरेआम उजागर करती है।
बेंगलुरु के 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंच पर ही डीके शिवकुमार के समर्थकों पर भड़क गए। समर्थकों द्वारा लगातार की जा रही नारेबाजी से नाराज खड़गे ने उन्हें 'निकम्मे' और 'बेकार' तक कह डाला। उन्होंने पार्टी में अनुशासनहीनता और व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए वीडियो फुटेज देखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की दोटूक चेतावनी दी है। यह घटना एक बार फिर कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी गुटबाजी को सरेआम उजागर करती है।
मंच पर हंगामा: जब आपा खो बैठे कांग्रेस अध्यक्ष
बेंगलुरु में आयोजित 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम का माहौल उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपना संबोधन दे रहे थे। इसी दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उत्साही समर्थकों ने पंडाल में 'डीके-डीके' के नारे लगाने शुरू कर दिए। नारों का शोर इतना बढ़ गया कि खड़गे के भाषण में बार-बार बाधा आने लगी।
शुरुआत में स्थिति को संभालने की कोशिश की गई, लेकिन जब समर्थक नहीं माने तो मल्लिकार्जुन खड़गे का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में नारेबाजी कर रहे लोगों को फटकार लगाई। खड़गे ने माइक पर ही साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चिल्ला रहे समर्थकों को 'निकम्मे' और 'बेकार लोग' कहकर शांत बैठने की हिदायत दी।
व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त तेवर
कांग्रेस अध्यक्ष ने मंच से सीधे तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश दिया कि संगठन में किसी भी तरह की व्यक्ति पूजा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताओं के पीछे भागने और उनके नाम के नारे लगाने से पार्टी मजबूत नहीं होती, बल्कि इससे अनुशासन भंग होता है।
खड़गे यहीं नहीं रुके; उन्होंने मंच पर मौजूद अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ऐलान किया कि इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज निकाली जाएगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जिन लोगों ने भी कार्यक्रम में बाधा डाली है और अनुशासनहीनता की है, उनकी पहचान करके उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। खड़गे के इस कड़े रुख के बाद पूरे पंडाल में सन्नाटा पसर गया।
गुटबाजी की पुरानी बीमारी फिर आई सामने
यह कोई पहला मौका नहीं है जब कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान इस तरह सार्वजनिक मंच पर दिखाई दी हो। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के गुटों के बीच की कड़वाहट समय-समय पर सामने आती रही है। बेंगलुरु की इस घटना ने साफ कर दिया है कि शीर्ष स्तर पर भले ही सब कुछ ठीक दिखाने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच की खाई अभी भी बहुत गहरी है। पार्टी अध्यक्ष के सामने ही अपने पसंदीदा नेता की ब्रांडिंग करने की यह होड़ कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन चुकी है।
चौतरफा चुनौतियों से घिरे खड़गे
मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए यह समय राजनीतिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण चल रहा है। एक तरफ जहां उन्हें पार्टी के भीतर इस तरह की अनुशासनहीनता और गुटबाजी से निपटना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वे संसद में भी कड़े विरोध का सामना कर रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दी गई अपनी एक कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर खड़गे कानूनी और संसदीय मुश्किलों में घिरे हुए हैं। इस मामले में उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस भी जारी हो चुका है। ऐसे में गृह राज्य कर्नाटक में अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं का यह बर्ताव उनके लिए दोहरी परेशानी खड़ी करने वाला साबित हो रहा है।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री का 'अनोखा' योग, सोशल मीडिया पर छिड़ा सियासी दंगल
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक योग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मंत्री जी की अजीबोगरीब योग मुद्राओं पर नेटिजन्स मजेदार मीम्स बना रहे हैं, वहीं कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस वीडियो को साझा कर मंत्री की योग्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खबर का निचोड़
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक योग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मंत्री जी की अजीबोगरीब योग मुद्राओं पर नेटिजन्स मजेदार मीम्स बना रहे हैं, वहीं कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस वीडियो को साझा कर मंत्री की योग्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 'विशेष' आसन
21 जून को दुनिया भर में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बेहद उत्साह के साथ मनाया गया। देश-विदेश से योग करते हुए तमाम राजनेताओं और मशहूर हस्तियों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। इसी कड़ी में बिहार से आया एक वीडियो इंटरनेट पर हर तरफ छा गया है। इस वीडियो में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और सूबे के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक साथ योग करते नजर आ रहे हैं। लेकिन सामान्य प्राणायाम या आसनों के बजाय मंत्री जी कुछ ऐसी अजीबोगरीब मुद्राएं करते दिखे, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुआ, यह देखते ही देखते वायरल हो गया। मंत्री निशांत कुमार के अनूठे योग स्टेप्स को देखकर यूजर्स अपनी हंसी नहीं रोक पाए। एक्स (पहले ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को लेकर मजेदार प्रतिक्रियाओं और मीम्स की बाढ़ आ गई है। कोई इसे 'फ्रीस्टाइल योग' कह रहा है, तो कोई स्वास्थ्य मंत्री को योग के लिए एक अच्छे ट्रेनर की सलाह दे रहा है। जनता के बीच यह वीडियो मनोरंजन और चर्चा का मुख्य केंद्र बन चुका है।
विपक्ष का तीखा हमला और सियासी उबाल
इस वायरल वीडियो ने सिर्फ आम लोगों का ही मनोरंजन नहीं किया, बल्कि बिहार की सियासत में भी उबाल ला दिया है। विपक्ष ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए मंत्री निशांत कुमार की शारीरिक मुद्राओं पर सवाल उठाए और उन्हें उनके पद के लिए 'अयोग्य' तक करार दे दिया। विपक्ष का कहना है कि जो स्वास्थ्य मंत्री खुद सही ढंग से योग नहीं कर पा रहे हैं, वे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को क्या संभालेंगे।
वायरल वीडियो से गरमाई राजनीति
योग दिवस के इस वाकये ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसे एक सहज और सामान्य गतिविधि के रूप में देख रहा है, वहीं विपक्ष इसे सीधे तौर पर सरकार की गंभीरता और मंत्रियों की क्षमता से जोड़कर देख रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या किसी राजनेता के योग करने के तरीके को उसकी प्रशासनिक योग्यता का पैमाना माना जा सकता है या फिर यह सिर्फ एक सामान्य मानवीय चूक है। फिलहाल, यह वीडियो और इस पर हो रही बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है।

समय रैना के शो में एपस्टीन आइलैंड पर जोक, भड़के दर्शक
कॉमेडियन समय रैना के मशहूर रियलिटी शो 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' में प्रतिभागी अविनाश अग्रवाल के एक विवादित जोक पर हंगामा खड़ा हो गया है। अविनाश ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मिमिक्री करते हुए यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के आइलैंड पर टिप्पणी की, जिससे दर्शक बेहद नाराज हैं और इसे सोशल मीडिया पर 'घिनौना' बता रहे हैं।
खबर का निचोड़:
कॉमेडियन समय रैना के मशहूर रियलिटी शो 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' में प्रतिभागी अविनाश अग्रवाल के एक विवादित जोक पर हंगामा खड़ा हो गया है। अविनाश ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मिमिक्री करते हुए यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के आइलैंड पर टिप्पणी की, जिससे दर्शक बेहद नाराज हैं और इसे सोशल मीडिया पर 'घिनौना' बता रहे हैं।
'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' में गहराया विवाद
मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना का टैलेंट हंट शो 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट' अपने अनोखे फॉर्मेट और डार्क ह्यूमर के लिए जाना जाता है। लेकिन इसके दूसरे सीजन के एक हालिया एपिसोड ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। शो में हिस्सा लेने आए प्रतिभागी अविनाश अग्रवाल के एक जोक पर न सिर्फ मंच पर मौजूद जज हैरान रह गए, बल्कि दर्शकों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। डार्क कॉमेडी के नाम पर परोसे गए इस कंटेंट को लेकर अब इंटरनेट पर लोग दो धड़ों में बंट गए हैं।
ट्रंप की मिमिक्री और वो विवादित बयान
शो के दौरान अविनाश अग्रवाल ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नकल (मिमिक्री) करते हुए मंच संभाला। उन्होंने ट्रंप के हाव-भाव और उनके बोलने के तरीके को कॉपी करने की कोशिश की। इसी प्रस्तुति के बीच, अविनाश ने कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के निजी आइलैंड का जिक्र छेड़ दिया। उन्होंने ट्रंप के अंदाज में कहा, "आइलैंड पर आओ... वहां बहुत तेल है।" यह टिप्पणी सीधे तौर पर एपस्टीन के द्वीप पर हुए गंभीर अपराधों और विवादों की तरफ इशारा कर रही थी, जिसे सुनकर शो में मौजूद कुछ लोग जहां हंस पड़े, वहीं एक बड़े वर्ग को यह नागवार गुजरा।
सोशल मीडिया पर फूटा दर्शकों का गुस्सा
जैसे ही इस एपिसोड क्लिप और शो की बातें सोशल मीडिया पर सामने आईं, दर्शकों ने अपनी नाराजगी जाहिर करने में देर नहीं की। कई यूजर्स ने इसे बेहद असंवेदनशील और घटिया दर्जे का मजाक करार दिया है। एक दर्शक ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, "यह बेहद घिनौना है, कुछ चीजों पर मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए।" वहीं एक अन्य यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा, "ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर हंसने वाले बीमार लोग हैं।" लोग इस बात से आहत हैं कि नाबालिगों के यौन शोषण जैसे गंभीर मामले से जुड़े एक गंभीर इतिहास को कॉमेडी के तड़के के साथ परोसा गया।
डार्क कॉमेडी की सीमा पर छिड़ी बहस
समय रैना का यह शो अक्सर अपनी बोल्ड और बेबाक कॉमेडी के लिए चर्चा में रहता है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर कॉमेडी और संवेदनशीलता के बीच की पतली लकीर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां अविनाश अग्रवाल के समर्थक इसे सिर्फ एक 'डार्क जोक' की तरह देखने की वकालत कर रहे हैं, वहीं आलोचकों का मानना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी भी जघन्य अपराध या पीड़ित के दर्द का मज़ाक उड़ाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर इंटरनेट पर चर्चाएं गर्म हैं और शो के मेकर्स की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सिकल सेल रोग उन्मूलन: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में एक मील का पत्थर
भारत के राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस समारोह की अध्यक्षता की। यह आयोजन सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की प्रगति और देश की जनजातीय आबादी को इस आनुवंशिक स्वास्थ्य संकट से मुक्त कराने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो आगामी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
खबर का निचोड़:
भारत के राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस समारोह की अध्यक्षता की। यह आयोजन सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की प्रगति और देश की जनजातीय आबादी को इस आनुवंशिक स्वास्थ्य संकट से मुक्त कराने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो आगामी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विस्तृत विश्लेषण
पृष्ठभूमि और वर्तमान संदर्भ
भारत सरकार ने जनजातीय आबादी में अत्यधिक प्रचलित सिकल सेल रोग (SCD) के उन्मूलन को अपनी सर्वोच्च स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल किया है। अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा और जागरूकता बढ़ाने का एक प्रमुख मंच बना। केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक देश से सिकल सेल एनीमिया को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
सिकल सेल रोग का विज्ञान और प्रभाव
सिकल सेल रोग एक वंशानुगत या आनुवंशिक रक्त विकार है, जो मुख्य रूप से लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) को प्रभावित करता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति में सामान्य गोलाकार और लचीली लाल रक्त कोशिकाएं हंसिया (Sickle) या आधे चांद के आकार में बदल जाती हैं। यह विकृति कोशिकाओं के लचीलेपन को समाप्त कर देती है, जिससे वे रक्त वाहिकाओं में फंस जाती हैं और शरीर के अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। इसके परिणामस्वरूप तीव्र दर्द (क्राइसिस), क्रोनिक एनीमिया और महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर क्षति पहुंचती है।
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन
केंद्रीय बजट में घोषित इस मिशन का औपचारिक शुभारंभ प्रधान मंत्री द्वारा मध्य प्रदेश के शहडोल से किया गया था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के 17 उच्च-प्रचलित राज्यों के 278 जिलों में रहने वाले लगभग 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग करना है। इसके तहत विशेष रूप से 0 से 40 वर्ष की आयु वर्ग की जनजातीय आबादी पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि इस आनुवंशिक बीमारी के संचरण चक्र को समय रहते रोका जा सके।
रणनीतिक हस्तक्षेप और क्रियान्वयन
सरकार इस मिशन को तीन मुख्य स्तंभों—स्वास्थ्य प्रावधान, सामाजिक जागरूकता और अंतर-विभागीय समन्वय—के आधार पर संचालित कर रही है। इसके तहत सिकल सेल जेनेटिक स्टेटस कार्ड (Sickle Cell Genetic Status Card) वितरित किए जा रहे हैं, जो विवाह-पूर्व परामर्श में सहायक होते हैं ताकि भावी पीढ़ियों में इस रोग के प्रसार को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के माध्यम से रोगियों की ट्रैकिंग और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर उपचार व हाइड्रोक्सीयूरिया जैसी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
परीक्षा के लिए प्रशासनिक और सामाजिक महत्व
नीतिगत दृष्टिकोण से, यह मिशन न केवल सतत विकास लक्ष्य-3 (SDG-3: अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह देश के सबसे कमजोर और हाशिए पर मौजूद जनजातीय समुदायों (विशेष रूप से PVTGs) के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार करने का एक प्रभावी प्रयास है। परीक्षा में इस विषय से रोग के जैविक स्वरूप, मिशन के राष्ट्रीय लक्ष्यों और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रश्न पूछे जाने की प्रबल संभावना है।
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