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भारत ने अफगानिस्तान को रौंदा: सीरीज में क्लीन स्वीप के साथ बने कई कीर्तिमान

भारत ने अफगानिस्तान को रौंदा: सीरीज में क्लीन स्वीप के साथ बने कई कीर्तिमान

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📅 20 Jun2026

भारत ने तीसरे वनडे में अफगानिस्तान को 9 विकेट से करारी शिकस्त देकर सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। प्रसिद्ध कृष्णा की घातक हैट्रिक और रोहित शर्मा की ऐतिहासिक पारी ने चेपॉक में नया इतिहास लिखा। पहले ही ओवर में 23 रन बटोरकर टीम इंडिया ने आक्रामक इरादे स्पष्ट कर दिए थे।

भारत ने अफगानिस्तान को रौंदा: सीरीज में क्लीन स्वीप के साथ बने कई कीर्तिमान
खबर का निचोड़
भारत ने तीसरे वनडे में अफगानिस्तान को 9 विकेट से करारी शिकस्त देकर सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। प्रसिद्ध कृष्णा की घातक हैट्रिक और रोहित शर्मा की ऐतिहासिक पारी ने चेपॉक में नया इतिहास लिखा। पहले ही ओवर में 23 रन बटोरकर टीम इंडिया ने आक्रामक इरादे स्पष्ट कर दिए थे।
चेपॉक में दिखा भारतीय बल्लेबाजों का रौद्र रूप
चेन्नई का एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम यानी चेपॉक का मैदान उस समय गवाह बना जब भारतीय बल्लेबाजों ने अफगानिस्तान के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। भारत ने पहले ओवर से ही जो आक्रामक रुख अपनाया, उसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी। मैच के पहले ही ओवर में 23 रन जड़कर भारतीय टीम ने वनडे क्रिकेट में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। यह शुरुआत दर्शाती है कि टीम इंडिया अपनी रणनीति में कितना बड़ा बदलाव ला चुकी है।
प्रसिद्ध कृष्णा का जलवा: हैट्रिक से हिलाया मैदान
गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा का जादू सिर चढ़कर बोला। उन्होंने अपनी सटीक लाइन-लेंथ और गति से अफगानी बल्लेबाजों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। कृष्णा ने लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट लेकर हैट्रिक पूरी की, जो इस मैच का सबसे यादगार पल बन गया। उन्होंने न केवल विकेट झटके, बल्कि चेपॉक के मैदान पर किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का नया कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया है। उनकी यह घातक स्पेल अफगानिस्तान की कमर तोड़ने के लिए काफी थी।
रोहित शर्मा: रिकॉर्ड्स के बादशाह
कप्तान रोहित शर्मा ने एक बार फिर साबित किया कि क्यों उन्हें 'हिटमैन' कहा जाता है। उन्होंने न केवल बल्लेबाजी में अपना लोहा मनवाया, बल्कि फील्डिंग में भी अद्भुत फुर्ती दिखाई। रोहित ने इस मैच में तीनों कैच लपककर अफगानिस्तान को दबाव में बनाए रखा। इसके अलावा, बल्लेबाजी में उन्होंने एक और माइलस्टोन हासिल किया। वनडे फॉर्मेट में 1100 चौके जड़ने वाले वह चौथे भारतीय बन गए हैं। इसके साथ ही, अर्धशतक लगाने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय खिलाड़ी का तमगा भी अब रोहित के नाम दर्ज हो गया है।
सीरीज में दबदबा
अफगानिस्तान के खिलाफ यह जीत केवल एक और जीत नहीं, बल्कि टीम इंडिया के दबदबे का प्रमाण है। 9 विकेट से मिली यह जीत भारत के हर विभाग में किए गए बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। सीरीज में 3-0 से मिली यह सफलता आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। चेपॉक के मैदान पर हुए इस रोमांचक मुकाबले ने न केवल क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को और भी उज्ज्वल कर दिया है।
चेपॉक में यशस्वी जायसवाल का धमाका: सबसे तेज दो शतक जड़कर तोड़ा दिग्गजों का रिकॉर्ड

चेपॉक में यशस्वी जायसवाल का धमाका: सबसे तेज दो शतक जड़कर तोड़ा दिग्गजों का रिकॉर्ड

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📅 20 Jun2026

यशस्वी जायसवाल ने अफगानिस्तान के खिलाफ चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में अपनी शानदार बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। नाबाद 110 रनों की पारी खेलकर जायसवाल ने महज 6 पारियों में वनडे करियर के दो शतक पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने शिखर धवन, विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर एक नया इतिहास रच दिया है।

चेपॉक में यशस्वी जायसवाल का धमाका: सबसे तेज दो शतक जड़कर तोड़ा दिग्गजों का रिकॉर्ड
सारांश
यशस्वी जायसवाल ने अफगानिस्तान के खिलाफ चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में अपनी शानदार बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। नाबाद 110 रनों की पारी खेलकर जायसवाल ने महज 6 पारियों में वनडे करियर के दो शतक पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने शिखर धवन, विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर एक नया इतिहास रच दिया है।
मैदान पर यशस्वी का जलवा
चेन्नई का चेपॉक स्टेडियम अक्सर स्पिनरों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन यशस्वी जायसवाल ने अफगानिस्तान के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए यहां अपने वनडे करियर का दूसरा शतक जड़ दिया। जायसवाल की यह नाबाद 110 रनों की पारी न केवल आक्रामक थी, बल्कि तकनीकी रूप से भी काफी परिपक्व नजर आई। इस शतक के साथ ही उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बनने की ओर तेजी से अग्रसर हैं।
दिग्गजों को पीछे छोड़ रचा इतिहास
यशस्वी जायसवाल ने इस शतक के साथ एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसे हासिल करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए सपना होता है। उन्होंने वनडे क्रिकेट में अपने शुरुआती दो शतक महज 6 पारियों में पूरे किए हैं। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले यह रिकॉर्ड शिखर धवन के नाम दर्ज था, जिन्होंने 7 पारियों में यह मुकाम हासिल किया था। जायसवाल ने न केवल धवन को पीछे छोड़ा, बल्कि विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को भी कहीं पीछे छोड़ दिया है।
रोहित की खास लिस्ट में एंट्री
अफगानिस्तान के खिलाफ इस दमदार प्रदर्शन ने जायसवाल को रोहित शर्मा की उस खास फेहरिस्त में भी शामिल कर दिया है, जिसमें केवल चुनिंदा आक्रामक बल्लेबाज ही जगह बना पाते हैं। परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना और बड़े मंच पर शतक जड़ना उनकी काबिलियत को दर्शाता है। चेपॉक की पिच पर जिस तरह से उन्होंने अफगानी गेंदबाजों का सामना किया, वह उनकी बढ़ती परिपक्वता का सबूत है।
भविष्य की नई उम्मीद
यशस्वी जायसवाल का यह फॉर्म भारतीय टीम के लिए वर्ल्ड कप और आने वाली बड़ी सीरीज के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत है। शुरुआती पारियों में ही इस तरह की निरंतरता दिखाना आसान नहीं होता, लेकिन जायसवाल ने जिस बेबाकी से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा है, उसने क्रिकेट विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। अपनी तकनीक और आक्रामक तेवरों के दम पर वे भारतीय टीम की बल्लेबाजी लाइनअप को मजबूती दे रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह युवा बल्लेबाज आने वाले मैचों में अपने इस प्रदर्शन को किस स्तर तक ले जाता है।
पैदल चलना अब मौलिक अधिकार: फुटपाथ पर आपका हक सुरक्षित

पैदल चलना अब मौलिक अधिकार: फुटपाथ पर आपका हक सुरक्षित

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📅 20 Jun2026

सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न हिस्सा माना है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह निर्णय शहरी बुनियादी ढांचे की कमी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करता है। अब सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना राज्य का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व बन गया है।

पैदल चलना अब मौलिक अधिकार: फुटपाथ पर आपका हक सुरक्षित
खबर का सार
सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न हिस्सा माना है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह निर्णय शहरी बुनियादी ढांचे की कमी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करता है। अब सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना राज्य का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व बन गया है।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा: संवैधानिक सुरक्षा कवच
भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में कंक्रीट के जंगल तो बन गए, लेकिन उन जंगलों के बीच चलने वाले इंसान की राह हर दिन कठिन होती जा रही है। आए दिन सड़कों पर पैदल यात्रियों के साथ होने वाली दुर्घटनाएं केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की विफलता का परिणाम हैं। इसी चिंता को संज्ञान में लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए पैदल चलने को जीवन के मौलिक अधिकार के अंतर्गत मान्यता दी है।
अनुच्छेद 21 और चलने की आजादी
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, उसमें 'गरिमा के साथ जीने का अधिकार' भी शामिल है। सुरक्षित फुटपाथों के बिना जीवन का यह अधिकार अधूरा है। जब एक पैदल यात्री को सड़क के जोखिम भरे किनारों पर चलने के लिए मजबूर किया जाता है, तो राज्य उसके जीवन के अधिकार की रक्षा करने में विफल रहता है। अब पैदल चलना मात्र एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संरक्षण प्राप्त अधिकार है।
अव्यवस्था के खिलाफ न्यायिक रुख
देश के अधिकांश महानगरों में फुटपाथ या तो अतिक्रमण का शिकार हैं, या फिर वहां बिजली के खंभे, खोमचे और निर्माण सामग्री का कब्जा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन जमीनी वास्तविकताओं पर प्रहार करते हुए कहा है कि सड़कों पर केवल गाड़ियों का अधिकार नहीं है। बुनियादी ढांचे के नियोजन में पैदल चलने वालों की प्राथमिकताओं को दरकिनार करना अब कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं होगा। स्थानीय निकायों और सरकारी एजेंसियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ बाधा मुक्त, साफ और सुरक्षित हों।
भविष्य की राह और सुरक्षा
यह फैसला केवल एक कानूनी व्याख्या नहीं, बल्कि शहरों के डिजाइन को बदलने का एक आह्वान है। आने वाले समय में, यह अधिकार शहरी विकास परियोजनाओं को प्रभावित करेगा। पैदल पथों का निर्माण और उनका रखरखाव अब किसी औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि अनिवार्य जन सेवा का हिस्सा बन गया है। जब पैदल यात्री सुरक्षित महसूस करेगा, तभी शहर वास्तव में रहने योग्य बनेंगे। यह निर्णय उन लाखों लोगों की जीत है जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर निकलते हैं, क्योंकि अब उनके पास अधिकार का मजबूत आधार है।
भारत की 'जगुआर' को संजीवनी: ब्रिटेन से आ रहे 9 लड़ाकू विमान

भारत की 'जगुआर' को संजीवनी: ब्रिटेन से आ रहे 9 लड़ाकू विमान

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📅 20 Jun2026

भारतीय वायुसेना अपने इकलौते और सबसे भरोसेमंद 'जगुआर' लड़ाकू विमानों के बेड़े को आसमान में बनाए रखने के लिए ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर विमान खरीद रही है। इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान भरने के लिए नहीं, बल्कि इनके स्पेयर पार्ट्स और कलपुर्जों (Cannibalisation) को निकालकर भारतीय जगुआर बेड़े को दुरुस्त रखने के लिए किया जाएगा। दुनिया में अब सिर्फ भारत ही इस घातक विमान को ऑपरेट करता है।

भारत की 'जगुआर' को संजीवनी: ब्रिटेन से आ रहे 9 लड़ाकू विमान
खबर का निचोड़ (Summary)
भारतीय वायुसेना अपने इकलौते और सबसे भरोसेमंद 'जगुआर' लड़ाकू विमानों के बेड़े को आसमान में बनाए रखने के लिए ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर विमान खरीद रही है। इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान भरने के लिए नहीं, बल्कि इनके स्पेयर पार्ट्स और कलपुर्जों (Cannibalisation) को निकालकर भारतीय जगुआर बेड़े को दुरुस्त रखने के लिए किया जाएगा। दुनिया में अब सिर्फ भारत ही इस घातक विमान को ऑपरेट करता है।
आसमान के 'शमशेर' को मिला ब्रिटिश बूस्टर
भारतीय वायुसेना का एक ऐसा योद्धा जो दशकों से दुश्मनों के छक्के छुड़ाता आ रहा है, उसे अब एक नया जीवनदान मिलने जा रहा है। हम बात कर रहे हैं 'जगुआर' लड़ाकू विमान की, जिसे भारतीय वायुसेना में 'शमशेर' के नाम से भी जाना जाता है। खबर आई है कि भारत ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर लड़ाकू विमान हासिल करने की तैयारी में है। लेकिन ट्विस्ट यह है कि ये विमान भारत की तरफ से सीधे जंग के मैदान में नहीं उतरेंगे, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर भारतीय बेड़े को मजबूती देंगे।
'कैनिबलाइजेशन': विमानों का अनोखा अंगदान
इस पूरी डील के पीछे वायुसेना की एक बेहद स्मार्ट और सोची-समझी रणनीति काम कर रही है, जिसे तकनीकी भाषा में 'कैनिबलाइजेशन' (Cannibalisation) कहा जाता है। चूंकि जगुआर विमानों का प्रोडक्शन सालों पहले बंद हो चुका है, इसलिए बाजार में इनके नए स्पेयर पार्ट्स मिलना लगभग नामुमकिन है। ऐसे में ब्रिटेन से आने वाले इन 9 सेवामुक्त विमानों को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। इनके इंजन, इलेक्ट्रॉनिक्स, विंग्स और अन्य कीमती कलपुर्जों को निकालकर भारतीय वायुसेना के उन जगुआर विमानों में फिट किया जाएगा जो फिलहाल पार्ट्स की कमी से जूझ रहे हैं। यह एक तरह से विमानों का 'अंगदान' है, जो उड़ते हुए विमानों को नई जिंदगी देगा।
दुनिया का इकलौता रखवाला है भारत
सेपेकैट (SEPECAT) जगुआर एक ऐसा जुड़वां इंजन वाला हमलावर विमान है, जिसे 1970 के दशक में ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर तैयार किया था। वक्त बदला और खुद ब्रिटेन-फ्रांस समेत पूरी दुनिया ने इस विमान को रिटायर कर दिया। लेकिन भारतीय वायुसेना ने इसकी बेजोड़ मारक क्षमता के कारण इसे अपने पास बनाए रखा। आज के समय में भारत पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो इस खूंखार और ऐतिहासिक लड़ाकू विमान को आज भी एक्टिवली ऑपरेट कर रहा है। ये विमान परमाणु हमला करने से लेकर दुश्मन की सीमा में घुसकर सटीक बमबारी करने में माहिर हैं।
क्यों जरूरी थी यह डील?
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल जगुआर विमानों के कई स्क्वाड्रन मौजूद हैं। इन विमानों को साल 2030 से 2035 तक एक्टिव रखने का प्लान है, जब तक कि स्वदेशी तेजस मार्क-2 और अन्य आधुनिक विमान इनकी जगह नहीं ले लेते। तब तक के लिए इन विमानों को पूरी तरह फिट रखना बेहद जरूरी है। ब्रिटेन से आ रहे ये 9 पुराने एयरफ्रेम भारत के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। यह डील न सिर्फ भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को बरकरार रखेगी, बल्कि बेहद कम लागत में देश के रक्षा बजट को भी एक बड़ी राहत देगी।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित

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📅 20 Jun2026

माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथों पर पैदल चलने की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों का अधिकार सड़कों पर चलने वाले मोटर चालित वाहनों के विशेषाधिकारों से सर्वोपरि और प्राथमिक होगा।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित
खबर का निचोड़ (Summary)
माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथों पर पैदल चलने की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों का अधिकार सड़कों पर चलने वाले मोटर चालित वाहनों के विशेषाधिकारों से सर्वोपरि और प्राथमिक होगा।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis)
न्यायिक निर्णय और संवैधानिक व्याख्या
उच्चतम न्यायालय की पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भय और खतरे के सड़कों के किनारे बने फुटपाथों पर चलने का अधिकार है। न्यायालय ने इसे जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न हिस्सा माना है। इस निर्णय के माध्यम से न्यायपालिका ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के केंद्र में आम नागरिक होने चाहिए न कि केवल गाड़ियां। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि देश में सड़कों का निर्माण होता है तो स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों का यह कानूनी कर्तव्य है कि वे उन सड़कों के साथ सुरक्षित फुटपाथों का भी निर्माण और रखरखाव सुनिश्चित करें।
राज्य और प्रशासनिक उत्तरदायित्व
सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला केवल एक सैद्धांतिक व्याख्या नहीं है बल्कि यह कार्यपालिका और नगर निकायों के लिए एक बाध्यकारी निर्देश के रूप में सामने आया है। इस निर्णय के बाद राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी को अपनी शहरी नियोजन नीतियों में व्यापक बदलाव करने होंगे। अब तक नगरीय निकायों द्वारा फुटपाथों के रख-रखाव को एक वैकल्पिक जन कल्याण कार्य के रूप में देखा जाता था लेकिन इस न्यायिक आदेश के बाद यह एक प्रवर्तनीय कर्तव्य बन गया है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई स्थानीय प्रशासन सुरक्षित फुटपाथ प्रदान करने में विफल रहता है तो नागरिक इसके उल्लंघन के विरुद्ध कानूनी उपचार का मार्ग अपना सकते हैं।
सार्वजनिक संस्कृति और नीतिगत सुधार
न्यायालय ने अपने फैसले में इस बात पर भी विशेष बल दिया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ सार्वजनिक संस्कृति और नागरिक व्यवहार में बदलाव लाना भी उतना ही आवश्यक है। वर्तमान में भारतीय शहरों में फुटपाथों पर अतिक्रमण और वाहनों की अवैध पार्किंग एक गंभीर समस्या बनी हुई है जिससे पैदल यात्रियों के जीवन को निरंतर खतरा बना रहता है। इस ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेप से उम्मीद की जा रही है कि यह देश के नीति निर्माताओं को अधिक समावेशी और मानव-केंद्रित शहरी परिवहन नीतियां बनाने के लिए प्रेरित करेगा जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी।

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