
भारत की 'जगुआर' को संजीवनी: ब्रिटेन से आ रहे 9 लड़ाकू विमान
भारतीय वायुसेना अपने इकलौते और सबसे भरोसेमंद 'जगुआर' लड़ाकू विमानों के बेड़े को आसमान में बनाए रखने के लिए ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर विमान खरीद रही है। इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान भरने के लिए नहीं, बल्कि इनके स्पेयर पार्ट्स और कलपुर्जों (Cannibalisation) को निकालकर भारतीय जगुआर बेड़े को दुरुस्त रखने के लिए किया जाएगा। दुनिया में अब सिर्फ भारत ही इस घातक विमान को ऑपरेट करता है।
खबर का निचोड़ (Summary)
भारतीय वायुसेना अपने इकलौते और सबसे भरोसेमंद 'जगुआर' लड़ाकू विमानों के बेड़े को आसमान में बनाए रखने के लिए ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर विमान खरीद रही है। इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान भरने के लिए नहीं, बल्कि इनके स्पेयर पार्ट्स और कलपुर्जों (Cannibalisation) को निकालकर भारतीय जगुआर बेड़े को दुरुस्त रखने के लिए किया जाएगा। दुनिया में अब सिर्फ भारत ही इस घातक विमान को ऑपरेट करता है।
आसमान के 'शमशेर' को मिला ब्रिटिश बूस्टर
भारतीय वायुसेना का एक ऐसा योद्धा जो दशकों से दुश्मनों के छक्के छुड़ाता आ रहा है, उसे अब एक नया जीवनदान मिलने जा रहा है। हम बात कर रहे हैं 'जगुआर' लड़ाकू विमान की, जिसे भारतीय वायुसेना में 'शमशेर' के नाम से भी जाना जाता है। खबर आई है कि भारत ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर लड़ाकू विमान हासिल करने की तैयारी में है। लेकिन ट्विस्ट यह है कि ये विमान भारत की तरफ से सीधे जंग के मैदान में नहीं उतरेंगे, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर भारतीय बेड़े को मजबूती देंगे।
'कैनिबलाइजेशन': विमानों का अनोखा अंगदान
इस पूरी डील के पीछे वायुसेना की एक बेहद स्मार्ट और सोची-समझी रणनीति काम कर रही है, जिसे तकनीकी भाषा में 'कैनिबलाइजेशन' (Cannibalisation) कहा जाता है। चूंकि जगुआर विमानों का प्रोडक्शन सालों पहले बंद हो चुका है, इसलिए बाजार में इनके नए स्पेयर पार्ट्स मिलना लगभग नामुमकिन है। ऐसे में ब्रिटेन से आने वाले इन 9 सेवामुक्त विमानों को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। इनके इंजन, इलेक्ट्रॉनिक्स, विंग्स और अन्य कीमती कलपुर्जों को निकालकर भारतीय वायुसेना के उन जगुआर विमानों में फिट किया जाएगा जो फिलहाल पार्ट्स की कमी से जूझ रहे हैं। यह एक तरह से विमानों का 'अंगदान' है, जो उड़ते हुए विमानों को नई जिंदगी देगा।
दुनिया का इकलौता रखवाला है भारत
सेपेकैट (SEPECAT) जगुआर एक ऐसा जुड़वां इंजन वाला हमलावर विमान है, जिसे 1970 के दशक में ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर तैयार किया था। वक्त बदला और खुद ब्रिटेन-फ्रांस समेत पूरी दुनिया ने इस विमान को रिटायर कर दिया। लेकिन भारतीय वायुसेना ने इसकी बेजोड़ मारक क्षमता के कारण इसे अपने पास बनाए रखा। आज के समय में भारत पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो इस खूंखार और ऐतिहासिक लड़ाकू विमान को आज भी एक्टिवली ऑपरेट कर रहा है। ये विमान परमाणु हमला करने से लेकर दुश्मन की सीमा में घुसकर सटीक बमबारी करने में माहिर हैं।
क्यों जरूरी थी यह डील?
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल जगुआर विमानों के कई स्क्वाड्रन मौजूद हैं। इन विमानों को साल 2030 से 2035 तक एक्टिव रखने का प्लान है, जब तक कि स्वदेशी तेजस मार्क-2 और अन्य आधुनिक विमान इनकी जगह नहीं ले लेते। तब तक के लिए इन विमानों को पूरी तरह फिट रखना बेहद जरूरी है। ब्रिटेन से आ रहे ये 9 पुराने एयरफ्रेम भारत के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। यह डील न सिर्फ भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को बरकरार रखेगी, बल्कि बेहद कम लागत में देश के रक्षा बजट को भी एक बड़ी राहत देगी।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित
माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथों पर पैदल चलने की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों का अधिकार सड़कों पर चलने वाले मोटर चालित वाहनों के विशेषाधिकारों से सर्वोपरि और प्राथमिक होगा।
खबर का निचोड़ (Summary)
माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथों पर पैदल चलने की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों का अधिकार सड़कों पर चलने वाले मोटर चालित वाहनों के विशेषाधिकारों से सर्वोपरि और प्राथमिक होगा।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis)
न्यायिक निर्णय और संवैधानिक व्याख्या
उच्चतम न्यायालय की पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भय और खतरे के सड़कों के किनारे बने फुटपाथों पर चलने का अधिकार है। न्यायालय ने इसे जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न हिस्सा माना है। इस निर्णय के माध्यम से न्यायपालिका ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के केंद्र में आम नागरिक होने चाहिए न कि केवल गाड़ियां। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि देश में सड़कों का निर्माण होता है तो स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों का यह कानूनी कर्तव्य है कि वे उन सड़कों के साथ सुरक्षित फुटपाथों का भी निर्माण और रखरखाव सुनिश्चित करें।
राज्य और प्रशासनिक उत्तरदायित्व
सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला केवल एक सैद्धांतिक व्याख्या नहीं है बल्कि यह कार्यपालिका और नगर निकायों के लिए एक बाध्यकारी निर्देश के रूप में सामने आया है। इस निर्णय के बाद राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी को अपनी शहरी नियोजन नीतियों में व्यापक बदलाव करने होंगे। अब तक नगरीय निकायों द्वारा फुटपाथों के रख-रखाव को एक वैकल्पिक जन कल्याण कार्य के रूप में देखा जाता था लेकिन इस न्यायिक आदेश के बाद यह एक प्रवर्तनीय कर्तव्य बन गया है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई स्थानीय प्रशासन सुरक्षित फुटपाथ प्रदान करने में विफल रहता है तो नागरिक इसके उल्लंघन के विरुद्ध कानूनी उपचार का मार्ग अपना सकते हैं।
सार्वजनिक संस्कृति और नीतिगत सुधार
न्यायालय ने अपने फैसले में इस बात पर भी विशेष बल दिया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ सार्वजनिक संस्कृति और नागरिक व्यवहार में बदलाव लाना भी उतना ही आवश्यक है। वर्तमान में भारतीय शहरों में फुटपाथों पर अतिक्रमण और वाहनों की अवैध पार्किंग एक गंभीर समस्या बनी हुई है जिससे पैदल यात्रियों के जीवन को निरंतर खतरा बना रहता है। इस ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेप से उम्मीद की जा रही है कि यह देश के नीति निर्माताओं को अधिक समावेशी और मानव-केंद्रित शहरी परिवहन नीतियां बनाने के लिए प्रेरित करेगा जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी।

भारत ने रक्षा क्षेत्र में रचा इतिहास: स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत ने आज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के नेतृत्व में अपनी पहली अत्याधुनिक स्वदेशी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण पूरा कर लिया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। यह मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना तेजी से (मैक 5 से अधिक) उड़ान भरने और विभिन्न पैंतरेबाज़ी करने में पूरी तरह सक्षम है। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों के विशेष क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी उन्नत और घातक सैन्य तकनीक उपलब्ध है।
खबर का निचोड़
भारत ने आज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के नेतृत्व में अपनी पहली अत्याधुनिक स्वदेशी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण पूरा कर लिया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। यह मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना तेजी से (मैक 5 से अधिक) उड़ान भरने और विभिन्न पैंतरेबाज़ी करने में पूरी तरह सक्षम है। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों के विशेष क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी उन्नत और घातक सैन्य तकनीक उपलब्ध है।
हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण का विस्तृत विवरण
ऐतिहासिक परीक्षण और मुख्य बिंदु
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह परीक्षण भारतीय सैन्य इतिहास में एक मील का पत्थर है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस हाइपरसोनिक मिसाइल को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के लिए डिज़ाइन किया गया है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपनी अचूक सटीकता और उच्च पैंतरेबाज़ी (maneuverability) का प्रदर्शन करते हुए तय दूरी और सभी मिशन लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया। विभिन्न रडार प्रणालियों, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री स्टेशनों ने इसके प्रक्षेपवक्र (trajectory) की निगरानी की और इसके डेटा की पुष्टि की।
क्या होती है हाइपरसोनिक तकनीक?
हाइपरसोनिक मिसाइलें वे हथियार होती हैं जो ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना तेजी से (यानी मैक 5 या लगभग 6,125 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार से) यात्रा कर सकती हैं। ये मिसाइलें दो प्रकार की होती हैं: हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल। आज जिस मिसाइल का परीक्षण किया गया है, वह अपनी तीव्र गति के साथ-साथ हवा में ही अपना रास्ता बदलने (पैंतरेबाज़ी करने) की अनूठी क्षमता रखती है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, इनका मार्ग पहले से तय नहीं होता, जिससे दुश्मन के मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों और रडार के लिए इन्हें ट्रैक करना और हवा में नष्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।
भारत के लिए इसका रणनीतिक महत्व
इस सफल परीक्षण का भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे उन अत्यंत सीमित देशों की कतार में खड़ा हो गया है जिनके पास हाइपरसोनिक हथियार संचालन की क्षमता है। क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए यह तकनीक भारत के लिए बेहद जरूरी थी। यह मिसाइल भारत की 'न्यूनतम विश्वसनीय निवारक' (Minimum Credible Deterrence) की नीति को मजबूत करती है, जिससे किसी भी संभावित बाहरी खतरे को समय रहते विफल किया जा सके।
'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशीकरण को बढ़ावा
यह परियोजना पूरी तरह से घरेलू स्तर पर डिजाइन, विकसित और निर्मित की गई है। इसमें रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs), निजी उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह सफलता भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण के संकल्प को सिद्ध करती है। उन्नत सामग्री (advanced materials), उच्च तापमान प्रतिरोधी प्रणालियों और जटिल प्रणोदन (propulsion) प्रणालियों के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि देश को भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह सक्षम बनाती है।
संभावित परीक्षा उपयोगी प्रश्न
प्रश्न 1 (प्रारंभिक परीक्षा के लिए):
हाइपरसोनिक मिसाइलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये मिसाइलें ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना (मैक 5) या उससे अधिक की गति से उड़ान भरने में सक्षम होती हैं।
2. पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में इनकी पैंतरेबाज़ी (maneuverability) की क्षमता इन्हें दुश्मन के रडार से बचाने में मदद करती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनों
(घ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों
प्रश्न 2 (मुख्य परीक्षा के लिए):
"हाल ही में भारत द्वारा स्वदेशी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण देश की रक्षा रणनीतिक स्वायत्तता में एक नए युग की शुरुआत है।" इस तकनीक की विशेषताओं को बताते हुए भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभावों की समीक्षा कीजिए।

भरत तिवारी एनकाउंटर: हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे निष्पक्ष जांच
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा फैसला लेते हुए इसकी न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इस पूरे मामले की कमान पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी गई है। सरकार का उद्देश्य घटना के हर पहलू की पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ जांच करना है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
खबर का निचोड़
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा फैसला लेते हुए इसकी न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इस पूरे मामले की कमान पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी गई है। सरकार का उद्देश्य घटना के हर पहलू की पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ जांच करना है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
न्याय की चौखट पर भरत तिवारी एनकाउंटर
बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में इस समय भरत तिवारी एनकाउंटर मामला सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बना हुआ है। इस घटना को लेकर उठ रहे तरह-तरह के सवालों और जनता के बीच उपजे असंतोष को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बेहद कड़ा और पारदर्शी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा कर दी है कि इस पूरे एनकाउंटर की बारीकी से जांच कराई जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जिम्मेदारी किसी आम प्रशासनिक टीम को नहीं, बल्कि कानून के एक बेहद अनुभवी चेहरे को सौंपी गई है।
रिटायर्ड जज के हाथों में कमान
मुख्यमंत्री के फैसले के अनुसार, पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इस पूरे मामले की जांच की कमान संभालेंगे। सरकार का यह कदम साफ तौर पर यह संदेश देता है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी तरह का ढीला रवैया अपनाने के मूड में नहीं है। एक रिटायर्ड जज की देखरेख में होने वाली इस न्यायिक जांच से यह सुनिश्चित होगा कि पुलिसिया कार्रवाई के दौरान असल में क्या हुआ था और क्या नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य आम जनता के बीच कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत करना है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता की कोशिश
अक्सर ऐसे हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर मामलों के बाद पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े होने लगते हैं। भरत तिवारी मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा था। विपक्ष और कई सामाजिक संगठन इस मुठभेड़ की सत्यता पर उंगली उठा रहे थे। ऐसे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस विवाद को लंबा खींचने के बजाय सीधे न्यायिक जांच का रास्ता चुना। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल जांच निष्पक्ष होगी, बल्कि हर वह पहलू सामने आ सकेगा जो अब तक परदे के पीछे था।
हर पहलू को खंगालेगी जांच टीम
इस उच्च स्तरीय जांच के तहत घटना के दिन की पूरी क्रोनोलॉजी को समझा जाएगा। पुलिस को मिली गुप्त सूचना, मौके पर की गई घेराबंदी, और जवाबी कार्रवाई में चली गोलियों की फॉरेंसिक रिपोर्ट तक, सब कुछ इस जांच के दायरे में आएगा। सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में टीम गवाहों के बयान दर्ज करेगी और तकनीकी साक्ष्यों का भी आकलन करेगी। बिहार सरकार ने साफ कर दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई तय की जाएगी।

भोजपुर एनकाउंटर: भरत तिवारी मौत मामले में न्यायिक जांच के आदेश
बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले ने तूल पकड़ लिया है। मृतक की मां और बहनों द्वारा पुलिस पर हत्या और जहरीला इंजेक्शन देने के गंभीर आरोपों के बाद, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। जहां पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग बता रही है, वहीं विपक्ष और जदयू नेताओं ने भी इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खबर का निचोड़ (Summary)
बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले ने तूल पकड़ लिया है। मृतक की मां और बहनों द्वारा पुलिस पर हत्या और जहरीला इंजेक्शन देने के गंभीर आरोपों के बाद, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। जहां पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग बता रही है, वहीं विपक्ष और जदयू नेताओं ने भी इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भोजपुर एनकाउंटर पर बवाल, अब हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे जांच
बिहार का भोजपुर जिला इस समय एक हाई-प्रोफाइल पुलिस एनकाउंटर को लेकर सुर्खियों में है। भरत तिवारी नाम के युवक की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। मामले की गंभीरता और परिजनों के भारी आक्रोश को देखते हुए बिहार सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक समिति गठित करने की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि सच जो भी हो, उसे सामने लाया जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
पुलिस की थ्योरी बनाम परिवार के गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और मृतक के परिवार के दावे एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि भरत तिवारी एक अपराधी था और उसने पुलिस टीम को देखते ही उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। पुलिस ने केवल आत्मरक्षा (Self-Defense) में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें भरत को गोली लगी। हालांकि, कहानी में ट्विस्ट तब आया जब भरत की मां और बहनों ने रो-रोकर पुलिसिया कार्रवाई की धज्जियां उड़ा दीं। बहनों का आरोप है कि भरत को पांच गोलियां मारी गईं और उसे तड़पाने के लिए कोई जहरीला इंजेक्शन भी दिया गया था। मां ने इसे सीधे तौर पर 'सुनियोजित हत्या' करार दिया है।
अपनों ने ही घेरा, विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा
यह मामला इसलिए भी ज्यादा पेचीदा हो गया है क्योंकि सरकार को केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगियों के तीखे सवालों का भी सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सहित पूरे विपक्ष ने नीतीश-सम्राट सरकार पर 'फर्जी एनकाउंटर' और कानून-व्यवस्था के नाम पर तानाशाही का आरोप लगाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कई स्थानीय नेताओं ने भी पुलिस की इस जल्दबाजी और कार्रवाई के तौर-तरीकों पर उंगली उठाई है। चौतरफा दबाव के बाद ही सरकार को न्यायिक जांच का फैसला लेना पड़ा।
ट्विस्ट: पिता और भाई पर ही दर्ज हो गई FIR
इस दर्दनाक घटना के बाद तिवारी परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां घर का बेटा दुनिया से चला गया, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मृतक भरत तिवारी के पिता और भाई के खिलाफ ही नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने सरकारी काम में बाधा डाली और अपराधियों को शह देने की कोशिश की। अब देखना यह होगा कि हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की जांच में खाकी की दलीलें सच साबित होती हैं या फिर पीड़ित परिवार के आंसू खाकी को बेनकाब करते हैं।
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